तीन बुद्धिमान (लोककथा) — NCERT Solutions
CBSE · Class 7 · Hindi
NCERT Solutions for तीन बुद्धिमान (लोककथा), CBSE Class 7 Hindi: 35 textbook questions solved step by step. Part of the CBSE Class 7 Hindi syllabus.
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पाठ से — मेरी समझ से
1लोककथा में पिता ने अपने बेटों से 'धन संचय करने' को कहा। उनकी इस बात का क्या अर्थ हो सकता है?
- खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करना
- पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना
- ऊँट का व्यापार करना
- गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसनाShow solution
✔ सही उत्तर: पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना
स्पष्टीकरण: पिता ने अपने बेटों को रुपये-पैसे या सोने-चाँदी के स्थान पर पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि संचित करने की सलाह दी। उनका आशय था कि ज्ञान और बुद्धि ही सच्चा धन है जो कभी चुराया नहीं जा सकता और जो हर परिस्थिति में काम आता है। इसलिए 'धन संचय' का अर्थ यहाँ बौद्धिक और दृष्टि-संबंधी क्षमता का विकास करना है।
2तीनों भाइयों ने अपने ज्ञान और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में बहुत-कुछ बता दिया। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
- बुद्धि का प्रयोग करके ऊँट के बारे में सब-कुछ बताया जा सकता है।
- समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।
- किसी व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है।
- ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए।Show solution
✔ सही उत्तर: समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।
स्पष्टीकरण: तीनों भाइयों ने ऊँट को देखे बिना केवल रास्ते में मिले संकेतों — जैसे घास चरने के निशान, खुरों के निशान, ऊँट के बाल आदि — का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करके सही-सही जानकारी दी। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि सूक्ष्म और ध्यानपूर्वक अवलोकन किसी भी समस्या को सुलझाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया?
- भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।
- राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था।
- राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी।
- भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था।Show solution
✔ सही उत्तर: भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया। तथा राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी। (एक से अधिक उत्तर सही हैं।)
स्पष्टीकरण: भाइयों ने राजा के सामने स्पष्ट तर्क प्रस्तुत किए कि उन्होंने किन-किन संकेतों के आधार पर ऊँट के बारे में जानकारी दी। इसके अतिरिक्त राजा ने पेटी की जाँच करके भाइयों की बुद्धिमत्ता की परीक्षा ली और जब भाइयों ने पेटी के बारे में भी सही अनुमान लगाया, तब राजा को उनकी बात पर पूरा विश्वास हो गया।
4लोककथा के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है?
- दोषी को कड़े से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।
- अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।
- राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए।
- ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।Show solution
✔ सही उत्तर: अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।
स्पष्टीकरण: राजा ने भाइयों पर तुरंत दोष नहीं लगाया। उसने पहले उनकी बात सुनी, फिर पेटी के माध्यम से उनकी परीक्षा ली और जब वे सही सिद्ध हुए तब उन्हें निर्दोष माना। इससे यह मूल्य उभरता है कि न्यायपूर्ण निर्णय के लिए उचित जाँच-पड़ताल अनिवार्य है।
खहो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने भिन्न-भिन्न उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने।Show solution
समूह चर्चा के लिए सुझाव:
यह प्रश्न समूह-चर्चा पर आधारित है। विद्यार्थी निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा कर सकते हैं:
- प्रत्येक विद्यार्थी अपने चुने हुए उत्तर का कारण बताए।
- लोककथा के किस अंश ने उन्हें वह उत्तर चुनने के लिए प्रेरित किया, उसे उद्धृत करें।
- यदि किसी ने अलग उत्तर चुना है तो उसके तर्क को ध्यान से सुनें और विचार करें।
- अंत में समूह मिलकर तय करे कि कौन-सा उत्तर सबसे उपयुक्त है और क्यों।
इस प्रकार की चर्चा से आलोचनात्मक सोच और तर्क-शक्ति का विकास होता है।
पंक्तियों पर चर्चा
क"रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।" — इन पंक्तियों का क्या अर्थ है?Show solution
अर्थ एवं विचार:
इन पंक्तियों में पिता अपने बेटों को एक गहरी और महत्वपूर्ण सीख दे रहे हैं। उनका कहना है कि रुपये-पैसे और सोने-चाँदी जैसा भौतिक धन तो खर्च होने पर समाप्त हो जाता है, चोरी हो सकता है या नष्ट हो सकता है। परंतु पैनी दृष्टि (सूक्ष्म अवलोकन की शक्ति) और तीव्र बुद्धि ऐसा धन है जो कभी समाप्त नहीं होता।
'उन्नीस नहीं रहोगे' का अर्थ है — किसी से कम नहीं रहोगे, अर्थात् हर परिस्थिति में आगे रहोगे।
निष्कर्ष: ज्ञान और बुद्धि ही सच्चा और स्थायी धन है। जो व्यक्ति इसे अर्जित कर लेता है, वह जीवन में कभी पीछे नहीं रहता।
ख"हर वस्तु और स्थिति को पूर्णत: समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए।" — इन पंक्तियों का क्या अर्थ है?Show solution
अर्थ एवं विचार:
इन पंक्तियों में पिता अपने बेटों को जिज्ञासु और सतर्क रहने की सीख दे रहे हैं। उनका आशय है कि जीवन में जो भी वस्तु, घटना या परिस्थिति सामने आए, उसे सतही रूप से न देखकर गहराई से समझने का प्रयास करना चाहिए।
'कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए' — इसका अर्थ है कि हमें इतने सजग और सावधान रहना चाहिए कि कोई भी छोटी-से-छोटी बात हमारे ध्यान से न छूटे।
निष्कर्ष: सूक्ष्म अवलोकन और गहरी समझ ही व्यक्ति को बुद्धिमान और सफल बनाती है।
ग"हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।" — इन पंक्तियों का क्या अर्थ है?Show solution
अर्थ एवं विचार:
ये पंक्तियाँ तीनों भाइयों की कही हुई हैं। इनमें वे बता रहे हैं कि उनकी बुद्धिमत्ता और अवलोकन-शक्ति रातोंरात नहीं आई, बल्कि इसके लिए उन्होंने वर्षों तक निरंतर अभ्यास किया।
'परिवेश को पैनी दृष्टि से देखना' — अर्थात् अपने आसपास की प्रत्येक वस्तु, घटना और परिस्थिति को ध्यानपूर्वक देखना और उससे सीखना।
'बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया' — अर्थात् केवल देखना पर्याप्त नहीं, बल्कि जो देखा उस पर गहराई से विचार करना भी आवश्यक है।
निष्कर्ष: कोई भी कौशल या गुण निरंतर अभ्यास और लगन से ही विकसित होता है। परिश्रम और अभ्यास से ही बुद्धि और दृष्टि तीव्र होती है।
मिलकर करें मिलान
1स्तंभ 1 के वाक्यों को स्तंभ 2 के उपयुक्त वाक्यों से सुमेलित कीजिए।Show solution
सुमेलन इस प्रकार है:
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 (मिलान) |
|---|---|
| 1. कुछ समय पश्चात् पिता चल बसे। | → 2. थोड़े समय के बाद पिता का देहांत हो गया। |
| 2. हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे। | → 5. हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा। |
| 3. घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा। | → 1. घोड़े पर सवार व्यक्ति ने तीनों भाइयों को अविश्वास से देखा। |
| 4. बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। | → 4. बचपन से ही हमें आदत हो गई है कि हम हर छोटी-बड़ी वस्तु पर ध्यान अवश्य देते हैं। |
| 5. लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था। | → 3. लोग इतने अचंभित थे कि उनका आश्चर्य व्यक्त करना कठिन था। |
सोच-विचार के लिए
कतीनों भाइयों ने बिना ऊँट को देखे उसके विषय में कैसे बता दिया था?Show solution
उत्तर:
तीनों भाइयों ने रास्ते में मिले विभिन्न संकेतों और निशानों का सूक्ष्म अवलोकन करके ऊँट के बारे में सही-सही जानकारी दी। उनके अवलोकन के प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे:
- पहले भाई ने देखा कि रास्ते के एक ओर की घास चरी हुई थी और दूसरी ओर की नहीं। इससे उसने अनुमान लगाया कि ऊँट एक आँख से काना था — जो ओर घास नहीं चरी थी, उस ओर की आँख से वह देख नहीं सकता था।
- दूसरे भाई ने खुरों के निशान देखे और पाया कि एक पैर के निशान अन्य की तुलना में हल्के थे, जिससे उसने अनुमान लगाया कि ऊँट एक पैर से लंगड़ा था।
- तीसरे भाई ने रास्ते में ऊँट के बाल और अन्य संकेत देखकर अनुमान लगाया कि ऊँट पर एक स्त्री और एक बच्चा सवार था तथा ऊँट पर शहद और घी लदा था।
इस प्रकार बचपन से विकसित की गई पैनी दृष्टि और तार्किक बुद्धि के बल पर उन्होंने बिना ऊँट देखे ही उसके बारे में सटीक जानकारी दी।
खआपके अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व किस बात को दिया गया है— तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता? लोककथा के आधार पर समझाइए।Show solution
उत्तर:
इस लोककथा में अवलोकन और तार्किक सोच दोनों को समान रूप से महत्व दिया गया है, परंतु यदि एक को चुनना हो तो अवलोकन (सूक्ष्म निरीक्षण) को सर्वाधिक महत्व दिया गया है।
लोककथा के आधार पर:
- तीनों भाइयों ने रास्ते में मिले छोटे-छोटे संकेतों — घास के निशान, खुरों के निशान, बालों आदि — को ध्यान से देखा। यही उनकी सफलता का मूल आधार था।
- पिता ने भी उन्हें 'पैनी दृष्टि' विकसित करने की सलाह दी थी।
- राजा की परीक्षा में भी उन्होंने पेटी को देखकर और उसके संकेतों को पढ़कर सही उत्तर दिया।
सत्यवादिता का भी महत्व है क्योंकि भाइयों ने कभी झूठ नहीं बोला, परंतु कथा का मुख्य संदेश अवलोकन और तार्किक सोच पर ही केंद्रित है।
गलोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर संदेह किया लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष माना। राजा की सोच क्यों बदल गई?Show solution
उत्तर:
राजा की सोच निम्नलिखित कारणों से बदल गई:
- तार्किक स्पष्टीकरण: भाइयों ने राजा के सामने स्पष्ट और तर्कसंगत ढंग से बताया कि उन्होंने किन-किन संकेतों के आधार पर ऊँट के बारे में जानकारी दी। उनके तर्क इतने ठोस थे कि राजा उन्हें नकार नहीं सका।
- पेटी की परीक्षा: राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता की जाँच के लिए एक बंद पेटी मँगवाई। भाइयों ने पेटी को देखकर और उसके संकेतों को पढ़कर उसके अंदर की वस्तु के बारे में सही अनुमान लगाया। इससे राजा को उनकी असाधारण अवलोकन-शक्ति का प्रमाण मिल गया।
- निष्पक्ष न्याय की भावना: राजा न्यायप्रिय था। जब उसे प्रमाण मिल गया कि भाइयों ने ऊँट नहीं चुराया बल्कि वे तो केवल अपनी बुद्धि से संकेत पढ़ रहे थे, तो उसने उन्हें निर्दोष मान लिया।
घऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह क्यों किया? आपके विचार से उसे क्या करना चाहिए था जिससे उसे अपना ऊँट मिल जाता?Show solution
उत्तर:
संदेह का कारण:
ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह इसलिए किया क्योंकि:
- भाइयों ने उसके ऊँट के बारे में इतनी सटीक और विस्तृत जानकारी दी जो बिना ऊँट देखे देना असंभव लगती थी।
- स्वाभाविक रूप से उसे लगा कि जो व्यक्ति ऊँट के बारे में इतना जानता है, उसने ही ऊँट चुराया होगा।
- वह भावनात्मक रूप से परेशान था और परेशानी में व्यक्ति बिना सोचे-समझे निर्णय ले लेता है।
उसे क्या करना चाहिए था:
- उसे भाइयों की बात शांति से सुननी चाहिए थी और उनसे पूछना चाहिए था कि उन्होंने ये जानकारी कैसे प्राप्त की।
- भाइयों से ऊँट की दिशा के बारे में पूछकर उस दिशा में खोज करनी चाहिए थी।
- बिना प्रमाण के किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिए था।
- यदि वह शांत रहकर भाइयों की सहायता लेता तो उसे अपना ऊँट जल्दी मिल जाता।
डपिता ने बेटों को 'दूसरे प्रकार का धन' संचित करने की सलाह क्यों दी? इससे पिता के बारे में क्या-क्या पता चलता है?Show solution
उत्तर:
सलाह का कारण:
पिता ने बेटों को 'दूसरे प्रकार का धन' — अर्थात् पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि — संचित करने की सलाह इसलिए दी क्योंकि:
- भौतिक धन नाशवान है — वह खर्च होता है, चोरी होता है या नष्ट हो जाता है।
- ज्ञान और बुद्धि एक बार अर्जित कर लेने पर कभी समाप्त नहीं होती।
- बुद्धिमान व्यक्ति हर परिस्थिति में अपना रास्ता निकाल लेता है।
पिता के बारे में जो पता चलता है:
- पिता दूरदर्शी थे — उन्होंने भविष्य की सोचकर बेटों को सही मार्ग दिखाया।
- पिता अनुभवी और ज्ञानी थे — उन्हें जीवन के व्यावहारिक सत्य का ज्ञान था।
- पिता निःस्वार्थ थे — उन्होंने बेटों की वास्तविक भलाई के बारे में सोचा।
- पिता प्रेमी और जिम्मेदार थे — मृत्यु से पहले उन्होंने बेटों के भविष्य की चिंता की।
चराजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इस परीक्षा से राजा के व्यक्तित्व और निर्णय शैली के बारे में क्या-क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?Show solution
उत्तर:
पेटी वाली परीक्षा से राजा के व्यक्तित्व और निर्णय शैली के बारे में निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं:
- न्यायप्रिय: राजा ने बिना प्रमाण के भाइयों को दोषी नहीं ठहराया। उसने पहले परीक्षा ली, फिर निर्णय दिया।
- बुद्धिमान: राजा ने परीक्षा के लिए एक चतुर तरीका अपनाया — बंद पेटी जिसके अंदर की वस्तु केवल वही जानता था।
- विवेकशील: राजा ने भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि तर्क और प्रमाण के आधार पर निर्णय लिया।
- जिज्ञासु: राजा भाइयों की असाधारण बुद्धिमत्ता से प्रभावित हुआ और उसे परखना चाहता था।
- निष्पक्ष: राजा ने ऊँट के स्वामी के आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना, बल्कि स्वयं जाँच की।
छआप इस लोककथा के भाइयों की किस विशेषता को अपनाना चाहेंगे और क्यों?Show solution
उत्तर:
मैं इस लोककथा के भाइयों की सूक्ष्म अवलोकन की शक्ति को अपनाना चाहूँगा/चाहूँगी।
कारण:
- आज के युग में जानकारी तो बहुत है, परंतु उसे ध्यान से देखने और समझने की क्षमता कम होती जा रही है।
- यदि हम अपने आसपास की वस्तुओं और घटनाओं को ध्यान से देखें तो हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।
- पैनी दृष्टि से न केवल समस्याएँ सुलझाई जा सकती हैं, बल्कि जीवन में सही निर्णय भी लिए जा सकते हैं।
- भाइयों की यह विशेषता उन्हें हर कठिन परिस्थिति में सफल बनाती है।
इसके अतिरिक्त मैं उनकी शांत और तर्कसंगत सोच भी अपनाना चाहूँगा/चाहूँगी क्योंकि कठिन परिस्थिति में भी शांत रहकर सोचना ही सफलता की कुंजी है।
अनुमान और कल्पना से
कयदि राजा ने बिना जाँच के भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता तो इस लोककथा का क्या परिणाम होता?Show solution
उत्तर (समूह चर्चा के आधार पर):
यदि राजा ने बिना जाँच के भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता तो:
- तीनों निर्दोष भाइयों को अन्यायपूर्ण दंड मिलता।
- सच्चाई कभी सामने नहीं आती और असली चोर (यदि कोई था) बच जाता।
- लोककथा का संदेश — 'न्याय के लिए उचित जाँच आवश्यक है' — कभी नहीं मिलता।
- भाइयों की बुद्धिमत्ता और उनके पिता की सीख व्यर्थ हो जाती।
- लोककथा एक दुखद और अन्यायपूर्ण अंत के साथ समाप्त होती, जो पाठकों को निराश करती।
निष्कर्ष: राजा की न्यायप्रियता और जाँच की प्रवृत्ति ने ही इस लोककथा को सुखद और शिक्षाप्रद अंत दिया।
खयदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत किस प्रकार होता? अपने विचार व्यक्त करें।Show solution
उत्तर (समूह चर्चा के आधार पर):
यदि भाइयों ने पेटी (अनार) के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो:
- राजा को उनकी बुद्धिमत्ता पर संदेह बना रहता।
- राजा यह मान सकता था कि भाइयों ने ऊँट के बारे में जानकारी संयोग से या किसी और से सुनकर दी थी।
- भाइयों को दोषी ठहराया जा सकता था।
- लोककथा का संदेश अधूरा रह जाता।
परंतु भाइयों ने सही अनुमान लगाया क्योंकि उन्होंने पेटी के बाहरी संकेतों — जैसे उसकी गंध, आकार, भार आदि — का सूक्ष्म अवलोकन किया। यही उनकी असली शक्ति थी।
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शब्द से जुड़े शब्द
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कारक
1. "हमने तो तुम्हारे ऊँट ___ देखा तक नहीं", भाइयों ___ परेशान होते हुए कहा।
2. "मैं अपने रेवड़ों ___ पहाड़ों ___ लिये जा रहा था", उसने कहा, "और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे ___ साथ एक बड़े-से ऊँट ___ मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।"
3. राजा ___ उसी समय अपने मंत्री ___ बुलाया और उसके कान ___ कुछ फुसफुसाया।
4. यह सुनकर राजा ___ पेटी ___ पास लाने ___ आदेश दिया। सेवकों ___ तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ___ सेवकों ___ पेटी खोलने ___ लिए कहा।
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सूचनापत्र
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पाठ से आगे — आपकी बात
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ध्यान से देखना-सुनना-अनुभव करना — गतिविधियाँ
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आज की पहेली
1. इसकी लंबी पूँछ होती है जो पेड़ों की शाखाओं के चारों ओर लिपटी रहती है।
2. इसका मुख्य आहार कीट और छोटे जीव होते हैं जिन्हें यह चुपके से पकड़ता है।
3. यह प्राणी अपने परिवेश में घुल-मिल जाता है और अपनी रंगत को बदल सकता है।
4. इसके पास तेज आँखें होती हैं जो चारों दिशाओं में देख सकती हैं।
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1. लाल डिब्बा नीले डिब्बे के पास है।
2. हरा डिब्बा पीले डिब्बे के पास नहीं है।
3. पीला डिब्बा लाल डिब्बे के पास नहीं है।
4. हरा डिब्बा लाल डिब्बे के पास है।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in तीन बुद्धिमान (लोककथा) for CBSE Class 7 Hindi?
Are these NCERT Solutions for तीन बुद्धिमान (लोककथा) free?
How should I revise तीन बुद्धिमान (लोककथा) for Class 7 exams?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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