गिरिधर कविराय की कुंडलिया (कविता)-गिरिधर कविराय — NCERT Solutions
CBSE · Class 7 · Hindi
NCERT Solutions for गिरिधर कविराय की कुंडलिया (कविता)-गिरिधर कविराय, CBSE Class 7 Hindi: 31 textbook questions solved step by step.
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पाठ के प्रश्नोत्तर
मेरी समझ से (क)(1)"बिना बिचारे" काम करने के क्या परिणाम होते हैं?
- दूसरों से प्रशंसा मिलती है।
- मन में शांति बनी रहती है।
- अपना काम बिगड़ जाता है।
- खान-पान सम्मान मिलता है।Show solution
सही उत्तर: अपना काम बिगड़ जाता है। ☒
स्पष्टीकरण: गिरिधर कविराय ने स्पष्ट लिखा है — "काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय।" अर्थात बिना सोचे-समझे काम करने से व्यक्ति का अपना काम बिगड़ जाता है और संसार में उसकी हँसी होती है। प्रशंसा, शांति या सम्मान नहीं मिलता — बल्कि इन सबका अभाव हो जाता है।
मेरी समझ से (क)(2)"चित में चैन" न पा सकने का मुख्य कारण क्या है?
- प्रयास करने पर भी टाला न जा सकने वाला दुख
- बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता
- खान-पान, सम्मान और राग-रंग का अभाव
- दुनिया द्वारा की जाने वाली निंदा और उपहासShow solution
सही उत्तर: बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता ☒
स्पष्टीकरण: कुंडलिया में कवि कहते हैं — "जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै।" बिना विचार किए किए गए कार्य की असफलता मन में खटकती रहती है और व्यक्ति को चैन नहीं मिलता। यही मुख्य कारण है।
मेरी समझ से (क)(3)"बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ" पंक्ति द्वारा कौन-सी सलाह दी गई है?
- भविष्य की सफलता के लिए अतीत की गलतियों से सीखने की
- अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की
- अतीत और भविष्य दोनों घटनाओं को समान रूप से याद रखने की
- अतीत और भविष्य दोनों को भूलकर केवल वर्तमान में जीने कीShow solution
सही उत्तर: अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की ☒
स्पष्टीकरण: इस पंक्ति का सीधा अर्थ है — जो बीत गया उसे भूल जाओ और आगे की सोचो। कवि यहाँ यह नहीं कह रहे कि गलतियों से सीखो, बल्कि वे कह रहे हैं कि बीती बातों में उलझे न रहो, भविष्य की ओर ध्यान दो।
मेरी समझ से (क)(4)"जो बिन आवै सहज में ताही में चित देइ" पंक्ति का क्या अर्थ है?
- हमें कठिनाइयों और चुनौतियों से बचना चाहिए।
- हमें आराम की तलाश करने में मन लगाना चाहिए।
- हमें असंभव और कठिन कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
- हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए।Show solution
सही उत्तर: हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए। ☒
स्पष्टीकरण: "जो बनि आवै सहज में ताही में चित्त देइ" का अर्थ है — जो काम सहज रूप से, स्वाभाविक ढंग से हो सके, उसी में मन लगाओ। कवि का आशय है कि जो कार्य सरलता से संभव हो, उसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए — अर्थात सहज जीवन जीना चाहिए।
मेरी समझ से (ख)हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution
यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है।
विद्यार्थी अपने समूह में बैठकर निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा करें:
- प्रत्येक विद्यार्थी बताए कि उसने कौन-सा उत्तर चुना और क्यों।
- कविता की पंक्तियों को दोबारा पढ़कर अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दें।
- यदि किसी साथी ने अलग उत्तर चुना है तो उसके तर्क को ध्यान से सुनें।
- अंत में मिलकर तय करें कि सबसे उचित उत्तर कौन-सा है।
उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी कविता को गहराई से समझें और अपने विचारों को तर्कपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करना सीखें।
पंक्तियों पर चर्चा (क)"बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।
काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय।।"
इन पंक्तियों का अर्थ अपने विचार लिखिए।Show solution
अर्थ एवं विचार:
इन पंक्तियों में गिरिधर कविराय एक महत्त्वपूर्ण जीवन-सत्य बता रहे हैं।
शब्दार्थ:
- बिचारे = विचार किए
- पाछे = बाद में
- पछिताय = पछताता है
- बिगारे = बिगाड़ लेता है
- जग = संसार
- होत हँसाय = हँसी का पात्र बनता है
भावार्थ: जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई काम कर देता है, वह बाद में पछताता है। ऐसे व्यक्ति का अपना काम तो बिगड़ता ही है, साथ ही संसार में उसकी हँसी भी होती है — लोग उसे मूर्ख समझते हैं।
विचार: यह पंक्ति आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। जब हम जल्दबाजी में परीक्षा में बिना पढ़े उत्तर लिखते हैं, बिना सोचे कोई बात कह देते हैं या बिना जाँचे कोई निर्णय ले लेते हैं — तो बाद में पछताना पड़ता है। इसलिए हर काम सोच-समझकर करना चाहिए।
पंक्तियों पर चर्चा (ख)"बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।
जो बिन आवै सहज में ताही में चित देइ।।"
इन पंक्तियों का अर्थ अपने विचार लिखिए।Show solution
अर्थ एवं विचार:
शब्दार्थ:
- बिसारि दे = भूल जाओ
- सुधि लेइ = ध्यान दो, खबर लो
- बनि आवै = बन पड़े, संभव हो
- सहज = आसानी से, स्वाभाविक रूप से
- चित देइ = मन लगाओ
भावार्थ: जो बीत गया उसे भूल जाओ और आगे की सोचो। जो काम सहज रूप से, आसानी से हो सके — उसी में अपना मन लगाओ।
विचार: यह पंक्ति हमें सिखाती है कि अतीत की असफलताओं या दुखों में उलझे रहने से कुछ हासिल नहीं होता। उदाहरण के लिए — यदि किसी परीक्षा में हम अच्छे अंक नहीं ला पाए, तो उस पर रोते रहने की बजाय अगली परीक्षा की तैयारी में जुट जाना चाहिए। जो काम हमारी क्षमता और परिस्थिति के अनुकूल हो, उसी पर ध्यान देना बुद्धिमानी है।
मिलकर करें मिलानस्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 के अर्थों से मिलान कीजिए।Show solution
सही मिलान इस प्रकार है:
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 | |
|---|---|---|
| 1. जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै। खान पान सन्मान राग रंग मनहि न भावै।। | → | 2. बिना विचार के किए गए कार्य के कारण मन अशांत रहता है। अच्छा खान-पान, सम्मान या जीवन की खुशियाँ भी उस व्यक्ति को सुख नहीं दे पातीं। |
| 2. कह गिरिधर कविराय दुख कछु टरत न टारे। खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे।। | → | 1. जो कार्य बिना विचार किए किया जाता है, वह लंबे समय तक मन में खटकता रहता है और उसकी पीड़ा से छुटकारा पाना मुश्किल होता है। |
| 3. ताही में चित्त देइ बात जोई बनि आवै। दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै।। | → | 4. ऐसे कार्य कीजिए कि किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौका न मिले और मन में किसी प्रकार का दोष या अपराधबोध न हो। |
| 4. कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती। आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती।। | → | 3. अपने मन को इस बात पर विश्वास करना सिखाओ कि भविष्य की खुशी को समझते हुए अतीत के दुखों को भुलाकर आगे बढ़ना चाहिए। |
सोच-विचार के लिए (क)"बिना बिचारे जो करे सो पाछे पछिताय।" — कविता में बिना विचार किए कार्य करने के क्या नुकसान बताए गए हैं?Show solution
दिया गया: कुंडलिया (1) — गिरिधर कविराय
बिना विचार किए कार्य करने के नुकसान:
कविता में निम्नलिखित नुकसान बताए गए हैं:
- काम बिगड़ जाता है — "काम बिगारे आपनो" — बिना सोचे किया गया काम सफल नहीं होता, बल्कि बिगड़ जाता है।
- संसार में हँसी होती है — "जग में होत हँसाय" — ऐसे व्यक्ति को लोग मूर्ख समझकर उसकी हँसी उड़ाते हैं।
- मन में शांति नहीं रहती — "चित्त में चैन न पावै" — मन बेचैन और अशांत रहता है।
- खान-पान, सम्मान और आनंद अच्छे नहीं लगते — "खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै" — जीवन की सारी खुशियाँ फीकी पड़ जाती हैं।
- दुख दूर नहीं होता — "दुख कछु टरत न टारे" — वह दुख किसी भी उपाय से नहीं जाता।
- मन में चुभन बनी रहती है — "खटकत है जिय माहिं" — बिना सोचे किया गया कार्य जीवन भर मन में खटकता रहता है।
सोच-विचार के लिए (ख)"बिना बिचारे जो करे सो पाछे पछिताय।" — कुंडलिया में जो बातें सैकड़ों साल पहले कही गई थीं, क्या वे आपके लिए भी उपयोगी हैं? कैसे? उदाहरण देकर समझाइए।Show solution
हाँ, ये बातें आज भी उतनी ही उपयोगी हैं।
गिरिधर कविराय ने सैकड़ों साल पहले जो नीति-वचन कहे थे, वे आज के जीवन में भी पूरी तरह लागू होते हैं। कुछ उदाहरण:
उदाहरण 1 — परीक्षा में:
यदि कोई विद्यार्थी बिना पढ़े परीक्षा देने चला जाए, तो परिणाम खराब आता है और बाद में पछताना पड़ता है। यदि पहले सोच-समझकर तैयारी की जाए, तो सफलता मिलती है।
उदाहरण 2 — इंटरनेट और सोशल मीडिया पर:
आजकल लोग बिना सोचे-समझे झूठी खबरें आगे भेज देते हैं, जिससे समाज में अफवाह फैलती है और बाद में शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।
उदाहरण 3 — खरीदारी में:
यदि कोई बिना सोचे जल्दबाजी में महँगी चीज खरीद ले और बाद में पता चले कि वह नकली थी, तो पछताना पड़ता है।
निष्कर्ष: इस प्रकार यह कुंडलिया हमें सिखाती है कि हर काम — चाहे वह छोटा हो या बड़ा — सोच-समझकर करना चाहिए। यह सीख सार्वकालिक और सार्वभौमिक है।
सोच-विचार के लिए (ग)"खान पान सन्मान राग रंग मनहि न भावै।।" — इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से देखकर लिखिए। प्रत्येक के लिए एक-एक उदाहरण भी दीजिए।Show solution
रेखांकित शब्द और उनके अर्थ:
| शब्द | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| खान-पान | खाना-पीना, भोजन और पेय पदार्थ | राम को बुखार में अच्छा खान-पान भी अच्छा नहीं लगता था। |
| सन्मान (सम्मान) | आदर, इज्जत, प्रतिष्ठा | अच्छे कार्य करने से समाज में सम्मान मिलता है। |
| राग-रंग | आनंद-उत्सव, मनोरंजन, खुशी के अवसर | त्योहारों पर घर में राग-रंग का माहौल रहता है। |
भावार्थ: जब व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई काम कर देता है और उसका परिणाम बुरा होता है, तो उसे अच्छा खाना-पीना, समाज में सम्मान और जीवन के आनंद — कुछ भी अच्छा नहीं लगता। मन की बेचैनी सब सुखों को फीका कर देती है।
अनुमान और कल्पना से (क)आपने पढ़ा है कि "बिना बिचारे जो करे सो पाछे पछिताय...!" कल्पना कीजिए कि आपके एक मित्र ने बिना सोचे-समझे एक बड़ा निर्णय लिया है। वह निर्णय क्या था और उसका क्या प्रभाव पड़ा? इसके बारे में एक रोचक कहानी बनाइए।Show solution
कहानी: बिना सोचे लिया निर्णय
मेरे मित्र अर्जुन को क्रिकेट का बहुत शौक था। एक दिन उसके मोहल्ले में एक बड़ी क्रिकेट प्रतियोगिता की घोषणा हुई। पुरस्कार था — एक नई साइकिल।
अर्जुन इतना उत्साहित हो गया कि उसने बिना सोचे-समझे अपनी टीम का नाम लिखवा दिया। उसने न तो यह देखा कि उसके साथी खिलाड़ी उपलब्ध हैं या नहीं, न यह जाना कि प्रतियोगिता की तारीख उसकी वार्षिक परीक्षा के दिन ही है।
जब परीक्षा का समय आया, तो अर्जुन दुविधा में पड़ गया। परीक्षा छोड़ी तो साल बर्बाद, और प्रतियोगिता छोड़ी तो टीम का नाम खराब। अंत में उसे परीक्षा देनी पड़ी और टीम बिना कप्तान के मैदान में उतरी — वे हार गए।
बाद में अर्जुन को बहुत पछतावा हुआ। उसके साथी भी उससे नाराज हो गए। उसने उस दिन सीखा — "बिना बिचारे जो करे सो पाछे पछिताय।"
सीख: कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।
अनुमान और कल्पना से (ख)कल्पना कीजिए कि "बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ...!" कविता निम्नलिखित के लिए लिखी गई है — आप, आपका कोई सहपाठी, आपका कोई परिजन, आपके कोई शिक्षक, कोई पक्षी, कोई पशु। इनकी कौन-कौन सी समस्याएँ होंगी? यह कविता उन्हें कैसे प्रेरित करेगी?Show solution
विभिन्न पात्रों की समस्याएँ और कविता की प्रेरणा:
1. आप (विद्यार्थी):
- समस्या: पिछली परीक्षा में कम अंक आए, मन उदास है।
- प्रेरणा: कविता कहती है — उस असफलता को भूलो और अगली परीक्षा की तैयारी में जुट जाओ।
2. सहपाठी:
- समस्या: किसी प्रतियोगिता में हार गया, हतोत्साहित है।
- प्रेरणा: बीती हार को भूलकर अगली प्रतियोगिता की तैयारी करो।
3. परिजन (माता-पिता):
- समस्या: व्यापार में घाटा हुआ, चिंतित हैं।
- प्रेरणा: पुराने नुकसान पर रोने की बजाय नए अवसर खोजो।
4. शिक्षक:
- समस्या: एक बार पढ़ाने का तरीका सफल नहीं रहा।
- प्रेरणा: पुरानी विधि छोड़कर नई और बेहतर विधि अपनाओ।
5. पक्षी:
- समस्या: तूफान में घोंसला उजड़ गया।
- प्रेरणा: उजड़े घोंसले का दुख भूलकर नया घोंसला बनाओ।
6. पशु (जैसे — गाय):
- समस्या: एक जगह चारा नहीं मिला।
- प्रेरणा: उस जगह का मोह छोड़कर नई जगह चारे की तलाश करो।
निष्कर्ष: यह कविता हर प्राणी को यही प्रेरणा देती है कि अतीत के दुखों में उलझे रहने से कुछ नहीं मिलता — आगे बढ़ना ही जीवन का सार है।
अनुमान और कल्पना से (ग)कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे व्यक्ति से मिले हैं, जो हमेशा बीती बातों में खोया रहता है। आप उसे समझाने के लिए क्या-क्या कहेंगे?Show solution
समझाने के लिए मैं निम्नलिखित बातें कहूँगा/कहूँगी:
"मित्र, मैं समझता/समझती हूँ कि तुम्हारे अतीत में कुछ कठिन पल आए होंगे। लेकिन सोचो —
- जो बीत गया, वह लौटता नहीं। उस पर सोचते रहने से न वह समय वापस आएगा, न दुख कम होगा।
- गिरिधर कविराय ने कहा है — 'बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।' यानी बीती बातों को भूलकर आगे की सोचो।
- जब तुम अतीत में खोए रहते हो, तो वर्तमान के अवसर हाथ से निकल जाते हैं। आज जो कर सकते हो, वह कल नहीं होगा।
- उदाहरण देखो — नदी का पानी पीछे नहीं लौटता, वह आगे बहता रहता है। हमें भी नदी की तरह आगे बढ़ते रहना चाहिए।
- अतीत की गलतियों से सीखो, लेकिन उनमें डूबे मत रहो। भविष्य तुम्हारे हाथ में है — उसे सुंदर बनाओ।
याद रखो — 'आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती।' भविष्य में सुख है, अतीत में नहीं।"
शब्द से जुड़े शब्दनीचे दिए गए रिक्त स्थानों में 'चित' या 'मन' से जुड़े शब्द कुंडलियों में से चुनकर लिखिए।Show solution
कुंडलियों में 'चित्त' और 'मन' से जुड़े शब्द:
'चित्त' से जुड़े शब्द/पद:
- चित्त में चैन न पावै — (चित्त में शांति न मिलना)
- ताही में चित्त देइ — (उसी में मन लगाओ)
- चित्त में खता न पावै — (मन में दोष न हो)
'मन' से जुड़े शब्द/पद:
- मनहिं न भावै — (मन को अच्छा न लगना)
- मन परतीती — (मन में विश्वास)
'जिय' (हृदय/मन) से जुड़े शब्द:
- खटकत है जिय माहिं — (मन में चुभता रहता है)
(नोट: पाठ्यपुस्तक में इस गतिविधि के लिए एक चित्र/रेखाचित्र दिया गया है जो OCR में उपलब्ध नहीं है। विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को उस चित्र के रिक्त स्थानों में भरें।)
कविता की रचना (क)पाठ में दी गई दोनों कुंडलियों को ध्यान से देखिए और अपने समूह में मिलकर इनकी विशेषताओं की सूची बनाइए।Show solution
कुंडलियों की विशेषताएँ:
जो विशेषताएँ दोनों कुंडलियों में हैं:
- प्रत्येक कुंडलिया का पहला शब्द ही उसका अंतिम शब्द भी है।
- कुंडलिया 1: "बिना" से शुरू → "बिना बिचारे" पर समाप्त
- कुंडलिया 2: "बीती" से शुरू → "बीती सो बीती" पर समाप्त
- दो-दो पंक्तियों में एक विचार कहा गया है (दोहा + रोला का मेल)।
- कवि ने अपना नाम (गिरिधर कविराय) प्रत्येक कुंडलिया में लिया है।
- पंक्तियों में तुकबंदी (अंत्यानुप्रास) है।
- पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे कोई सीधे हमसे बात कर रहा हो (संवाद शैली)।
- प्रत्येक कुंडलिया में नीति की बात सरल और सीधे शब्दों में कही गई है।
- सभी पंक्तियों को बोलने में लगभग बराबर समय लगता है (मात्राओं की समानता)।
जो विशेषताएँ किसी एक कुंडलिया में हैं:
- कुंडलिया 1 में: "खान पान सन्मान" — एक ही मात्रा (आ) का बार-बार प्रयोग।
- कुंडलिया 2 में: "बीती ताहि बिसारि" — 'ब' वर्ण की आवृत्ति (अनुप्रास)।
- कुंडलिया 2 में: अतीत (बीती) और भविष्य (आगे) — दो विपरीत विचार एक साथ।
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- सोशल मीडिया पर झूठा संदेश या असत्य समाचार पर भरोसा करके उसे सबको भेज दिया।
- जल्दबाजी में बिना हेलमेट के बाइक चलाने पर पुलिस ने चालान काट दिया।
- बिना माता-पिता से पूछे ऑनलाइन गेम पर पैसे खर्च कर दिए।
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15 more solved questions in गिरिधर कविराय की कुंडलिया (कविता)-गिरिधर कविराय
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in गिरिधर कविराय की कुंडलिया (कविता)-गिरिधर कविराय for CBSE Class 7 Hindi?
Are these NCERT Solutions for गिरिधर कविराय की कुंडलिया (कविता)-गिरिधर कविराय free?
How should I revise गिरिधर कविराय की कुंडलिया (कविता)-गिरिधर कविराय for Class 7 exams?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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