वर्षा-बहार (कविता)-मुकुटधर पांडेय — NCERT Solutions
CBSE · Class 7 · Hindi
NCERT Solutions for वर्षा-बहार (कविता)-मुकुटधर पांडेय, CBSE Class 7 Hindi: 43 textbook questions solved step by step.
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मेरी समझ से
(क)(1)इस कविता में वर्षा ऋतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभर कर आता है?Show solution
सही उत्तर: ✿ आनंद और प्रसन्नता
कारण: इस कविता में वर्षा ऋतु के आगमन पर प्रकृति के सभी जीव-जंतु, पक्षी, किसान और पेड़-पौधे आनंदित और प्रसन्न हो जाते हैं। मोर नृत्य करते हैं, मेंढक गीत गाते हैं, किसान खुशी से काम करते हैं — ये सभी दृश्य आनंद और प्रसन्नता के भाव को व्यक्त करते हैं।
(क)(2)"नभ में छटा अनूठी" और "घनघोर छा रही है" पंक्तियों का उपयोग वर्षा ऋतु के किस दृश्य को व्यक्त करने के लिए किया गया है?Show solution
सही उत्तर: ✿ बादलों के घिरने का दृश्य
कारण: 'नभ में छटा अनूठी' से आकाश में बादलों की अनोखी छटा का वर्णन है और 'घनघोर छा रही है' से घने बादलों के चारों ओर छा जाने का दृश्य प्रकट होता है। दोनों पंक्तियाँ मिलकर बादलों के घिरने के दृश्य को चित्रित करती हैं।
(क)(3)कविता में वर्षा को 'अनोखी बहार' कहा गया है क्योंकि—Show solution
सही उत्तर: ✿ वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है।
✿ वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है।
कारण: वर्षा के आने पर प्रकृति के सभी जीव — मोर, पपीहे, मेंढक, किसान, जलचर — सभी प्रसन्न हो जाते हैं। वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है और यह एक अद्भुत प्राकृतिक घटना है, इसीलिए इसे 'अनोखी बहार' कहा गया है।
(क)(4)"सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर" इस पंक्ति का क्या अर्थ है?Show solution
सही उत्तर: ✿ वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।
कारण: वर्षा के बिना न खेत हरे होंगे, न नदियाँ भरेंगी, न जीव-जंतुओं को जल मिलेगा। इसीलिए कवि कहता है कि सारे संसार की शोभा और सुंदरता वर्षा पर ही निर्भर है — वर्षा ही पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।
(ख)हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?Show solution
यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। विद्यार्थी अपने-अपने उत्तरों के कारण बताएँ। उदाहरण के लिए:
- प्रश्न (1) में 'आनंद और प्रसन्नता' इसलिए चुना क्योंकि कविता में मोर नृत्य करते हैं, मेंढक गाते हैं, किसान खुश होते हैं — ये सभी आनंद के प्रतीक हैं।
- प्रश्न (4) में 'वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है' इसलिए चुना क्योंकि वर्षा के बिना जीवन संभव नहीं।
समूह में चर्चा करके अपने-अपने तर्क प्रस्तुत करें।
पंक्तियों पर चर्चा
(क)"फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे!" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।Show solution
इन पंक्तियों का अर्थ:
वर्षा ऋतु के आगमन पर लाखों पपीहे (एक प्रकार का पक्षी) इधर-उधर उड़ते-फिरते हैं और ग्रीष्म ऋतु की भीषण गर्मी से राहत पाते हैं। गर्मी की तपन समाप्त हो जाती है और ठंडी फुहारें उन्हें सुकून देती हैं। साथ ही वनों में सभी मोर वर्षा की खुशी में नृत्य करने लगते हैं। यह दृश्य वर्षा ऋतु के आनंद और उल्लास को दर्शाता है। ग्रीष्म की तपन से मुक्ति पाकर पक्षी भी उत्सव मनाते हैं।
(ख)"चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर!" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।Show solution
इन पंक्तियों का अर्थ:
वर्षा ऋतु में हंस सुंदर कतार बनाकर एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर चलते हैं। उनकी यह पंक्तिबद्ध चाल बहुत सुंदर और अनुशासित लगती है। इसी प्रकार किसान भी अपने खेतों में काम करते हुए मनोहर (मन को लुभाने वाले) गीत गाते हैं। वर्षा के आगमन से किसान का मन प्रसन्न हो जाता है क्योंकि वर्षा उनकी फसल के लिए जीवनदायिनी है। इस प्रकार प्रकृति और मनुष्य दोनों मिलकर वर्षा ऋतु का उत्सव मनाते हैं।
मिलकर करें मिलान
1स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 की उपयुक्त पंक्तियों से मिलान कीजिए।Show solution
सही मिलान इस प्रकार है:
- "पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं" → 2. वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं।
- "चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब" → 6. ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं।
- "तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते" → 1. वर्षा ऋतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं।
- "फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते" → 3. वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं।
- "खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है" → 5. वर्षा में खिले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृति में सुगंध और ताजगी फैला रहे हैं।
- "चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर" → 4. हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं।
सोच-विचार के लिए
(क)कविता में कौन-कौन गीत गा रहे हैं और क्यों?Show solution
कविता में निम्नलिखित गीत गा रहे हैं:
- मालिनें (बागों में काम करने वाली महिलाएँ) — वे बागों में सुंदर गीत गाती हैं क्योंकि वर्षा ऋतु में बाग हरे-भरे हो जाते हैं और वातावरण आनंदमय हो जाता है।
- किसान — वे खेतों में काम करते हुए मनहर (मनोहर) गीत गाते हैं क्योंकि वर्षा उनकी फसल के लिए वरदान है। वर्षा से उनके खेत हरे होंगे और अच्छी फसल होगी, इसलिए वे प्रसन्न होकर गाते हैं।
- मेंढक — वे अपने प्यारे सुगीत (टर्र-टर्र) से सबको लुभाते हैं। वर्षा आने पर मेंढक बहुत प्रसन्न होते हैं और उनकी आवाज़ वर्षा ऋतु की पहचान बन जाती है।
सभी इसलिए गा रहे हैं क्योंकि वर्षा ऋतु सबके लिए सुख, राहत और आनंद लेकर आती है।
(ख)"बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं" और "तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते" — इन दोनों पंक्तियों में वर्षा के दो अलग-अलग दृश्य दर्शाए गए हैं। इनमें क्या अंतर है? क्या कोई संबंध है?Show solution
अंतर:
- पहली पंक्ति — "बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं" — वर्षा के भयावह और शक्तिशाली रूप को दर्शाती है। इसमें आकाश में बिजली की चमक और बादलों की गर्जना का वर्णन है जो थोड़ा भयप्रद लग सकता है।
- दूसरी पंक्ति — "तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते" — वर्षा के सुखद और आनंददायक प्रभाव को दर्शाती है। इसमें तालाबों के जीव-जंतुओं की प्रसन्नता का वर्णन है।
संबंध:
दोनों पंक्तियों में गहरा संबंध है। बिजली चमकना और बादल गरजना वर्षा के आने के संकेत हैं। इन्हीं बादलों से जब वर्षा होती है तो तालाब भर जाते हैं और जलचर जीव प्रसन्न हो जाते हैं। अर्थात् पहली पंक्ति कारण है और दूसरी पंक्ति उसका परिणाम। वर्षा का भयावह रूप ही अंततः जीवन और आनंद का स्रोत बनता है।
(ग)कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
इस कविता में मुख्य रूप से वर्षा ऋतु की सुंदरता, महत्त्व और उससे उत्पन्न आनंद का वर्णन किया गया है।
कवि बताता है कि वर्षा ऋतु के आने पर प्रकृति में चारों ओर खुशी और उल्लास छा जाता है। आकाश में बादल घिर आते हैं, बिजली चमकती है, ठंडी हवाएँ चलती हैं, झरने बहने लगते हैं। मोर नृत्य करते हैं, पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं, मेंढक गाने लगते हैं, हंस कतार बनाकर चलते हैं, किसान गीत गाते हैं और बागों में फूल खिल उठते हैं।
कविता का मुख्य संदेश यह है कि वर्षा केवल पानी नहीं बरसाती, बल्कि वह सारे संसार में जीवन, हरियाली और आनंद भर देती है। 'सारे जगत की शोभा निर्भर है इसके ऊपर' — यही इस कविता का केंद्रीय भाव है।
(घ)"खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है"। इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता को बताना है या इसका कोई अन्य अर्थ भी हो सकता है?Show solution
इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता बताना नहीं है, इसके कई अन्य अर्थ भी हो सकते हैं:
- प्रकृति का पुनर्जीवन: वर्षा ऋतु में गुलाब का खिलना यह दर्शाता है कि वर्षा प्रकृति को नया जीवन देती है। गर्मी में मुरझाए फूल वर्षा में फिर से खिल उठते हैं।
- सुगंध का फैलाव: 'सौरभ उड़ा रहा है' से यह भाव भी निकलता है कि वर्षा ऋतु केवल दृश्य सुंदरता ही नहीं, बल्कि सुगंध भी फैलाती है — अर्थात् वर्षा सभी इंद्रियों को आनंदित करती है।
- जीवन में आशा का प्रतीक: गुलाब का खिलना आशा और प्रसन्नता का प्रतीक है। यह बताता है कि कठिन समय (गर्मी) के बाद सुख (वर्षा) अवश्य आता है।
- वर्षा की उपकारिता: गुलाब वर्षा के जल से ही खिलता है, इसलिए यह पंक्ति वर्षा की उपकारिता को भी दर्शाती है।
(ड)कविता में से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें सकारात्मक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, जैसे— 'गीत गाना', 'नृत्य करना' और 'सुगंध फैलाना'। इन गतिविधियों के आधार पर बताइए कि इस कविता का शीर्षक 'वर्षा-बहार' क्यों रखा गया है?Show solution
सकारात्मक गतिविधियों वाली पंक्तियाँ:
- गीत गाना:
- "बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब"
- "गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर!"
- "मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे"
- नृत्य करना:
- "करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे!"
- सुगंध फैलाना:
- "खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है"
- अन्य सकारात्मक गतिविधियाँ:
- "चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर" (सुंदर कतार में चलना)
- "तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते" (प्रसन्न होना)
शीर्षक 'वर्षा-बहार' क्यों रखा गया:
'बहार' का अर्थ है वसंत ऋतु या खुशी और उल्लास का समय। इस कविता में वर्षा ऋतु को 'बहार' की तरह चित्रित किया गया है क्योंकि इस ऋतु में प्रकृति के सभी जीव — पक्षी, जलचर, किसान, मालिनें — सभी गाते, नृत्य करते और आनंद मनाते हैं। चारों ओर हरियाली, सुगंध और उल्लास छा जाता है। इसीलिए वर्षा ऋतु को 'बहार' कहकर शीर्षक 'वर्षा-बहार' रखा गया है — यह वर्षा का उत्सव है।
अनुमान और कल्पना से
(क)"सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर" — वर्षा के अभाव में मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?Show solution
वर्षा के अभाव में निम्नलिखित प्रभाव पड़ सकते हैं:
मानव जीवन पर प्रभाव:
- खेतों में फसल नहीं होगी, जिससे अनाज की कमी होगी और भुखमरी फैलेगी।
- नदियाँ, तालाब और कुएँ सूख जाएँगे, पीने के पानी का संकट उत्पन्न होगा।
- किसानों की आजीविका नष्ट हो जाएगी।
- गर्मी और सूखे से लोगों का जीवन कठिन हो जाएगा।
- बिजली उत्पादन (जलविद्युत) प्रभावित होगा।
पशु-पक्षियों पर प्रभाव:
- पशुओं को पीने का पानी नहीं मिलेगा।
- चारागाह सूख जाएँगे, पशुओं को चारा नहीं मिलेगा।
- जलचर जीव (मछलियाँ, मेंढक आदि) तालाब सूखने से मर जाएँगे।
- पक्षियों को भोजन और जल की कमी होगी।
- वन और जंगल सूख जाएँगे, जिससे वन्य जीवों का आवास नष्ट होगा।
इस प्रकार वर्षा के बिना पृथ्वी पर जीवन असंभव हो जाएगा।
(ख)"बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं" – बिजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इन घटनाओं का लोगों के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है?Show solution
सकारात्मक प्रभाव:
- बिजली चमकना और बादल गरजना वर्षा के आने के संकेत हैं, जिससे किसान खुश होते हैं।
- वर्षा से पहले की यह घटना वातावरण को ठंडा करती है।
- बिजली गिरने से वायुमंडल में नाइट्रोजन स्थिरीकरण होता है जो मिट्टी को उपजाऊ बनाता है।
- बच्चे और कवि इन दृश्यों का आनंद लेते हैं।
नकारात्मक प्रभाव:
- बिजली गिरने से जान-माल का नुकसान हो सकता है।
- बादलों की गर्जना से छोटे बच्चे और पशु-पक्षी डर जाते हैं।
- बिजली गिरने से पेड़ों में आग लग सकती है।
- बिजली के खंभों और उपकरणों को नुकसान हो सकता है।
- खुले मैदान में काम करने वाले लोगों के लिए खतरा उत्पन्न होता है।
(ग)"करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे" – इस पंक्ति को ध्यान में रखते हुए वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन कीजिए।Show solution
वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन:
जैसे ही वर्षा की पहली बूँदें धरती पर गिरती हैं, वन-उपवन में जीवन जाग उठता है। मोर अपने सुंदर पंख फैलाकर वन में नृत्य करने लगते हैं। उनके रंग-बिरंगे पंख वर्षा की बूँदों में और भी चमकने लगते हैं। पपीहे गर्मी की तपन से मुक्त होकर इधर-उधर उड़ते हैं और अपनी मधुर आवाज़ में बोलने लगते हैं।
तालाबों में मेंढक टर्र-टर्र की आवाज़ से वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं — मानो वे वर्षा का स्वागत गीत गा रहे हों। जलचर जीव तालाबों में उछल-कूद करते हैं। हंस सुंदर कतार बनाकर उड़ते हैं। चिड़ियाँ अपने घोंसलों से बाहर निकलकर भीगती हैं और चहचहाती हैं। गाय-बैल भी वर्षा में भीगकर प्रसन्न होते हैं। इस प्रकार वर्षा का आगमन समस्त जीव-जगत के लिए एक महोत्सव बन जाता है।
आपकी रचनाएँ
(क)कविता में वर्णन है कि मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंढक सुगीत गा रहे हैं। इस दृश्य को अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।Show solution
वर्षा की पहली बूँदें जैसे ही धरती पर पड़ीं, वन में एक अद्भुत दृश्य उपस्थित हो गया। हरे-भरे वृक्षों के बीच मोरों ने अपने सुंदर, रंग-बिरंगे पंख फैला दिए। नीले, हरे और सुनहरे रंगों से सजे उनके पंख वर्षा की बूँदों में चमक रहे थे। वे धीरे-धीरे थिरकने लगे — कभी पंख फैलाते, कभी सिकोड़ते, मानो प्रकृति को अपना नृत्य समर्पित कर रहे हों।
उसी समय तालाब के किनारे से मेंढकों की टर्र-टर्र की आवाज़ें उठने लगीं। एक के बाद एक मेंढक बोलने लगे — मानो कोई संगीत-मंडली बैठकर राग छेड़ रही हो। उनकी यह आवाज़ वर्षा की रिमझिम के साथ मिलकर एक अनोखा संगीत बना रही थी। मोर का नृत्य और मेंढकों का गान — दोनों मिलकर वर्षा ऋतु का अभिनंदन कर रहे थे।
(ख)वर्षा से जुड़ी किसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस कविता से जोड़कर एक कहानी तैयार कीजिए।Show solution
वर्षा देवता और मोर की कहानी
बहुत पुराने समय की बात है। एक वर्ष भीषण सूखा पड़ा। नदियाँ सूख गईं, खेत जल गए, पशु-पक्षी व्याकुल हो गए। तब वन के सभी जीव मिलकर वर्षा देवता इंद्र के पास गए और प्रार्थना की।
इंद्र देव ने कहा — "जो मुझे सबसे सुंदर नृत्य दिखाएगा, उसके लिए मैं वर्षा भेजूँगा।"
सभी जीवों ने प्रयास किया, परंतु मोर का नृत्य सबसे सुंदर था। उसने अपने पंख फैलाकर ऐसा अद्भुत नृत्य किया कि इंद्र देव प्रसन्न हो गए। उन्होंने बादलों को आदेश दिया और मूसलाधार वर्षा हुई।
तभी से कहा जाता है कि जब मोर नृत्य करता है, तो वर्षा अवश्य होती है। कवि मुकुटधर पाण्डेय ने भी इसी भाव को अपनी कविता में लिखा — "करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे!"
(ग)इस कविता से प्रेरणा लेकर एक चित्र बनाइए। उसमें आपने क्या-क्या बनाया है और क्यों?Show solution
(यह एक रचनात्मक गतिविधि है। विद्यार्थी स्वयं चित्र बनाएँ।)
चित्र में बनाई जाने वाली चीज़ें और उनके कारण:
- आकाश में घने काले बादल — क्योंकि कविता में 'नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है' का वर्णन है।
- वर्षा की बूँदें — क्योंकि 'पानी बरस रहा है' का उल्लेख है।
- नृत्य करते मोर — क्योंकि 'करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे' पंक्ति है।
- खिला हुआ गुलाब — क्योंकि 'खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है' का वर्णन है।
- तालाब में मेंढक — क्योंकि 'मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे' का उल्लेख है।
- खेत में गाता किसान — क्योंकि 'गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर' पंक्ति है।
- हंसों की कतार — क्योंकि 'चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर' का वर्णन है।
शब्द से जुड़े शब्द
1'वर्षा' से जुड़े शब्द लिखिए।Show solution
'वर्षा' से जुड़े शब्द:
- वर्षाकाल
- वर्षाजल
- वर्षा ऋतु
- वर्षागम (वर्षा का आगमन)
- वर्षापात
- वर्षाबूँद
- वर्षाकालीन
- वर्षाधारा
अन्य संबंधित शब्द: बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि, मेघ, बादल, झड़ी, रिमझिम, फुहार, सावन, भादो, मानसून, बाढ़, झरना, नदी, तालाब।
कविता की रचना
1इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए।Show solution
इस कविता 'वर्षा-बहार' की प्रमुख विशेषताएँ:
- भाषा की सरलता: कविता की अधिकांश पंक्तियाँ सरल हिंदी में हैं जो सहज रूप से समझ में आती हैं।
- प्रकृति-चित्रण: कविता में वर्षा ऋतु के विभिन्न दृश्यों — बादल, बिजली, झरने, मोर, मेंढक, गुलाब — का सजीव चित्रण किया गया है।
- समास-शब्द: 'वर्षा-बहार' जैसे समास-शब्दों का प्रयोग कविता को विशेष बनाता है।
- लय और तुक: कविता में एक निश्चित लय और तुक है जो इसे गेय बनाती है।
- जीव-जंतुओं का मानवीकरण: मोर, मेंढक, हंस, पपीहे आदि को मानवीय भावनाओं से युक्त दिखाया गया है।
- संदेशात्मकता: 'सारे जगत की शोभा निर्भर है इसके ऊपर' — वर्षा के महत्त्व का संदेश दिया गया है।
- विशेषण का प्रयोग: 'अनूठी छटा', 'सुंदर कतार', 'सुगीत प्यारे' जैसे विशेषणों से कविता सजीव हो उठी है।
- वाक्य संरचना की विविधता: कुछ पंक्तियाँ सरल वाक्य के रूप में हैं तो कुछ में वाक्य संरचना जटिल है।
कविता का सौंदर्य
(क)नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं। दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनकर पंक्तियाँ पूरी कीजिए।Show solution
- "वर्षा-बहार सब के, मन को लुभा रही है"
दिए गए शब्द: बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि
→ सबसे उपयुक्त शब्द: वर्षा (मूल पंक्ति में यही है)
कारण: 'वर्षा' शब्द तत्सम है और 'बहार' के साथ मिलकर 'वर्षा-बहार' एक सुंदर समास बनाता है। यह शब्द कविता की गरिमा के अनुकूल है।
- "नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है"
दिए गए शब्द: आकाश, गगन, अंबर, व्योम
→ सबसे उपयुक्त शब्द: नभ (मूल पंक्ति में यही है)
कारण: 'नभ' एक छोटा, तत्सम शब्द है जो लय में सबसे अच्छा बैठता है।
- "बिजली चमक रही है, ________ गरज रहे हैं"
दिए गए शब्द: मेघ, जलधर, घन, जलद
→ सबसे उपयुक्त शब्द: बादल (या मेघ)
कारण: 'बादल' सरल और प्रचलित शब्द है। 'मेघ' भी उपयुक्त है क्योंकि यह तत्सम है और कविता की भाषा के अनुरूप है।
- "________ बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं"
दिए गए शब्द: जल, नीर, सलिल, तोय
→ सबसे उपयुक्त शब्द: पानी (मूल पंक्ति में यही है)
कारण: 'पानी' सबसे सरल और प्रचलित शब्द है जो लय में भी सही बैठता है।
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How should I revise वर्षा-बहार (कविता)-मुकुटधर पांडेय for Class 7 exams?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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