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Chapter 2 of 38
NCERT Solutions

सूरदास की झोंपड़ी

Nagaland Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for सूरदास की झोंपड़ी — Nagaland Board Class 12 Hindi.

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एक रात में सूरदास की झोंपड़ी में आग लगने का दृश्य, जिसमें ग्रामीण लोग आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं और आसमान में लालिमा छाई हुई है।
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प्रश्न-अभ्यास

1'चूल्हा ठंडा किया होता, तो दुश्मनों का कलेजा कैसे ठंडा होता?' नायकराम के इस कथन में निहित भाव को स्पष्ट कीजिए।Show solution
नायकराम के कथन में व्यंग्य और कड़वाहट का भाव है। वह सूरदास के झोंपड़े में आग लगने पर सीधे-सीधे नहीं, बल्कि ताना मारते हुए कहता है कि यदि चूल्हा ठंडा कर दिया होता, तो दुश्मनों का भी कलेजा ठंडा हो जाता। इसका आशय है कि उसे लगता है सूरदास के साथ कुछ लोगों ने शरारत या बदला लेने की भावना से यह काम किया है। नायकराम के शब्दों में ईर्ष्या, विरोध और बदले की भावना छिपी हुई है। वह यह भी जताता है कि जिन लोगों के मन में खोट है, वे इस तरह की विपत्ति से प्रसन्न हो सकते हैं।

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2भैरों ने सूरदास की झोपड़ी क्यों जलाई?Show solution
भैरों ने सूरदास की झोपड़ी इसलिए जलाई क्योंकि वह अपने अपमान और बदनामी का बदला लेना चाहता था। मुहल्ले में सूरदास और सुभागी के संबंधों की चर्चा होने से भैरों को यह विश्वास हो गया था कि सूरदास के कारण उसकी लाज और इज्जत को ठेस पहुँची है। जगधर की बातों और उकसावे से उसका गुस्सा और भड़क गया। वह सूरदास को रुलाना और तड़पाना चाहता था, इसलिए उसने उसकी थैली भी उठा ली और झोपड़ी में आग लगा दी।

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3'यह फूस की राख न थी, उसकी अभिलाषाओं की राख थी।' संदर्भ सहित विवेचन कीजिए।Show solution
यह पंक्ति उस प्रसंग से जुड़ी है जब सूरदास की झोपड़ी जल जाती है और वह अपनी सारी बचत वाली पोटली खोजते-खोजते राख में रो पड़ता है। लेखक कहता है कि यह केवल फूस की राख नहीं थी, बल्कि सूरदास की आशाओं, जीवनभर की कमाई, और भविष्य की योजनाओं की राख थी। उस पोटली में उसके लगभग पाँच सौ रुपये थे, जिनसे वह पितरों का पिंडदान, मिठुआ की सगाई, बहू का घर में आना और कुआँ बनवाना चाहता था। इसीलिए झोपड़ी की राख उसके लिए केवल जल चुके फूस की नहीं, बल्कि उसकी अभिलाषाओं और सपनों की राख थी।

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4जगधर के मन में किस तरह का ईर्ष्या-भाव जगा और क्यों?Show solution
जगधर के मन में ईर्ष्या का भाव इसलिए जगा क्योंकि उसे यह सहन नहीं हुआ कि भैरों के हाथ इतने रुपये लग गए, जबकि उसके अपने जीवन में तंगी थी। वह देखता है कि सूरदास के पास जमा की हुई बड़ी रकम है और भैरों ने उसे लूट लिया है। उसे लगता है कि सूरदास की तकदीर खुल गई, जबकि उसे कभी पड़ा हुआ पैसा भी नहीं मिलता। साथ ही वह स्वयं भी बेईमानी करता था, इसलिए उसे यह बात चुभती थी कि दूसरों के हाथ लाभ लग रहा है। इसी हसद और असंतोष ने उसके मन में ईर्ष्या पैदा की।

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5सूरदास जगधर से अपनी आर्थिक हानि को गुप्त क्यों रखना चाहता था?Show solution
सूरदास अपनी आर्थिक हानि को जगधर से गुप्त रखना चाहता था क्योंकि वह भिखारी होकर भी धन-संचय को अपमानजनक मानता था। वह नहीं चाहता था कि लोग जानें कि उसके पास पाँच सौ रुपये थे और वे जल गए। उसके लिए यह धन उसकी योजनाओं, आशाओं और भविष्य की जरूरतों का आधार था, लेकिन वह इसे दिखाकर लोगों में आश्चर्य नहीं जगाना चाहता था। वह चाहता था कि लोग समझें कि दीनजनों की सहायता भगवान करते हैं, न कि वह स्वयं धन जमा करता है। इसलिए वह अपनी हानि छिपा रहा था।

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6'सूरदास उठ खड़ा हुआ और विजय-गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा।' इस कथन के संदर्भ में सूरदास की मनोदशा का वर्णन कीजिए।
7'तो हम सौ लाख बार बनाएँगे' इस कथन के संदर्भ में सूरदास के चरित्र का विवेचन कीजिए।

योग्यता-विस्तार

1इस पाठ का नाट्य रूपांतर कर उसकी प्रस्तुति कीजिए।
2प्रेमचंद के उपन्यास 'रंगभूमि' का संक्षिप्त संस्करण पढ़िए।

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Frequently Asked Questions

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