सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') — NCERT Solutions
Nagaland Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'), Nagaland Board Class 12 Hindi: 13 textbook questions solved step by step.
Interactive on Super Tutor
Studying सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला')? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for NCERT solutions and more.
Free trial, no card needed.

One of 6 illustrations for सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') in Super Tutor — alongside flashcards, concept maps and practice questions.
The first 7 solutions are open to read. The other 6 are free with a Super Tutor account.
प्रश्न-अभ्यास — सरोज स्मृति
1सरोज के नव-वधू रूप का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।Show solution
दिया गया संदर्भ: 'सरोज स्मृति' कविता में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ने अपनी पुत्री सरोज के विवाह के अवसर पर उसके नव-वधू रूप का मनोरम चित्रण किया है।
वर्णन:
सरोज विवाह के अवसर पर अत्यंत सुंदर और लावण्यमयी दिखाई दे रही थी। उसके नेत्र नत (झुके हुए) थे, जिनसे एक दिव्य आलोक (प्रकाश) झरता प्रतीत होता था। उसका सौंदर्य निराकार श्रृंगार से परिपूर्ण था — अर्थात् उसका सौंदर्य किसी बाहरी आभूषण या श्रृंगार का मोहताज नहीं था, वह स्वयं में ही सौंदर्य की मूर्ति थी। वह रति-रूप (कामदेव की पत्नी रति के समान सुंदर) लग रही थी। उसके मुख पर लज्जा और मधुर भाव का अद्भुत संगम था। कवि को उसे देखकर अपनी स्वर्गीय पत्नी की याद आ गई, क्योंकि सरोज का सौंदर्य और भाव-भंगिमा अपनी माँ से मिलती-जुलती थी।
निष्कर्ष: सरोज का नव-वधू रूप अत्यंत मनोहारी, लज्जाशील और दिव्य था जो कवि के हृदय को गहराई से स्पर्श कर गया।
2कवि को अपनी स्वर्गीय पत्नी की याद क्यों आई?Show solution
दिया गया संदर्भ: 'सरोज स्मृति' में निराला अपनी पुत्री सरोज के विवाह का वर्णन करते हैं।
कारण:
जब कवि ने अपनी पुत्री सरोज को नव-वधू के रूप में सजी-धजी देखा, तो उसके रूप, लावण्य और भाव-भंगिमा में उन्हें अपनी स्वर्गीय पत्नी की झलक दिखाई दी। सरोज की आँखों की चमक, उसका लज्जायुक्त मुखमंडल और उसका समग्र सौंदर्य उसकी माँ से इतना मिलता-जुलता था कि कवि का मन भूतकाल में खिंच गया।
इसके अतिरिक्त, विवाह जैसे पवित्र और भावनात्मक अवसर पर माँ की अनुपस्थिति कवि को और भी अधिक खलती थी। एक पुत्री के विवाह में माँ की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है — श्रृंगार करना, आशीर्वाद देना, विदाई देना — ये सब कार्य माँ के बिना अधूरे लग रहे थे। इसी कारण कवि को अपनी स्वर्गीय पत्नी की गहरी याद आई और वे भावविह्वल हो उठे।
निष्कर्ष: पुत्री के रूप में माँ की छवि देखना और विवाह के अवसर पर माँ की अनुपस्थिति — ये दोनों कारण कवि को पत्नी की याद दिलाने के लिए पर्याप्त थे।
3'आकाश बदल कर बना मही' में 'आकाश' और 'मही' शब्द किनकी ओर संकेत करते हैं?Show solution
दिया गया संदर्भ: यह पंक्ति 'सरोज स्मृति' कविता से ली गई है।
संकेत:
- 'आकाश' शब्द कवि की स्वर्गीय पत्नी की ओर संकेत करता है। पत्नी का निधन हो चुका था, अतः वह अब इस संसार में नहीं, बल्कि आकाश (स्वर्ग/परलोक) में है।
- 'मही' (पृथ्वी) शब्द पुत्री सरोज की ओर संकेत करता है। सरोज इस धरती पर जीवित है और माँ का ही प्रतिरूप है।
भाव: इस पंक्ति का आशय यह है कि जो माँ (आकाश) थी, वही अब पुत्री (मही/पृथ्वी) के रूप में बदल गई है। अर्थात् सरोज अपनी माँ का ही पृथ्वी पर अवतरित रूप है। माँ का सौंदर्य, गुण और भाव सरोज में जीवित हैं। यह एक अत्यंत भावपूर्ण और काव्यात्मक उपमा है जो माँ और पुत्री की एकात्मकता को व्यक्त करती है।
निष्कर्ष: 'आकाश' = स्वर्गीय माँ (पत्नी), 'मही' = पुत्री सरोज।
4सरोज का विवाह अन्य विवाहों से किस प्रकार भिन्न था?Show solution
दिया गया संदर्भ: 'सरोज स्मृति' में कवि ने सरोज के विवाह का वर्णन किया है।
भिन्नता के कारण:
- माँ की अनुपस्थिति: सरोज की माँ का निधन बचपन में ही हो गया था, इसलिए विवाह के इस पवित्र अवसर पर माँ उपस्थित नहीं थी। सामान्यतः विवाह में माँ की केंद्रीय भूमिका होती है।
- पिता द्वारा श्रृंगार: कवि (पिता) ने स्वयं अपनी पुत्री का श्रृंगार किया, जो सामान्यतः माँ या अन्य महिलाओं का कार्य होता है। यह अत्यंत असामान्य और भावनात्मक दृश्य था।
- पारंपरिक रीति-रिवाजों का अभाव: सरोज का विवाह पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों और धूमधाम से नहीं हुआ। कवि स्वयं निर्धन और संघर्षशील जीवन जी रहे थे, अतः विवाह सादगी से संपन्न हुआ।
- कवि का दोहरी भूमिका निभाना: कवि ने माँ और पिता दोनों की भूमिका एक साथ निभाई — यह किसी भी सामान्य विवाह से सर्वथा भिन्न था।
- भावनात्मक पीड़ा: इस विवाह में उत्सव के साथ-साथ कवि के हृदय में गहरी वेदना और करुणा भी थी।
निष्कर्ष: सरोज का विवाह माँ की अनुपस्थिति, पिता द्वारा श्रृंगार, सादगी और भावनात्मक पीड़ा के कारण अन्य विवाहों से सर्वथा भिन्न था।
5'वह लता वहीं की, जहाँ कली तू खिली' पंक्ति के द्वारा किस प्रसंग को उद्घाटित किया गया है?Show solution
दिया गया संदर्भ: यह पंक्ति 'सरोज स्मृति' कविता से ली गई है।
प्रसंग:
इस पंक्ति के द्वारा कवि ने सरोज और उसकी माँ के संबंध के प्रसंग को उद्घाटित किया है।
- 'लता' से तात्पर्य सरोज की माँ (कवि की स्वर्गीय पत्नी) से है।
- 'कली' से तात्पर्य सरोज से है।
- 'वहीं की' का अर्थ है — उसी स्थान की, उसी मूल की।
भाव: कवि कह रहे हैं कि सरोज वही कली है जो उसी लता (माँ) से खिली है। अर्थात् सरोज अपनी माँ की ही संतान है — उसी के गुण, सौंदर्य और भाव उसमें विद्यमान हैं। जिस प्रकार एक लता से कली खिलती है और उसी लता के गुण उस कली में होते हैं, उसी प्रकार सरोज में उसकी माँ के सभी गुण और सौंदर्य समाहित हैं।
यह पंक्ति माँ-पुत्री के अटूट संबंध और उनकी समानता को रेखांकित करती है। साथ ही इसमें कवि की वह पीड़ा भी छिपी है कि लता (माँ) तो चली गई, परंतु उसकी कली (सरोज) इस धरती पर खिली रही।
निष्कर्ष: यह पंक्ति माँ और पुत्री की एकात्मकता तथा माँ की स्मृति के प्रसंग को उद्घाटित करती है।
6'मुझ भाग्यहीन की तू संबल' निराला की यह पंक्ति क्या 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे कार्यक्रम की माँग करती है।Show solution
दिया गया संदर्भ: यह पंक्ति 'सरोज स्मृति' कविता से ली गई है जिसमें निराला अपनी पुत्री सरोज को अपना एकमात्र सहारा बताते हैं।
विश्लेषण:
हाँ, निराला की यह पंक्ति 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे कार्यक्रम की भावना से पूर्णतः मेल खाती है और उसकी माँग करती है।
कारण:
- बेटी का महत्त्व: इस पंक्ति में कवि ने स्वीकार किया है कि उनकी पुत्री सरोज उनके जीवन का 'संबल' (सहारा) है। यह भाव बताता है कि बेटी परिवार की शक्ति और आधार होती है — वह बोझ नहीं, बल्कि सहारा है।
- बेटी बचाओ: जब एक पिता अपनी बेटी को अपना 'संबल' मानता है, तो यह स्वाभाविक रूप से बेटियों को बचाने की प्रेरणा देता है। जो समाज बेटियों को बोझ समझता है, उसे यह पंक्ति चुनौती देती है।
- बेटी पढ़ाओ: निराला ने सरोज को शिक्षित किया, उसे जीवन के संघर्षों के लिए तैयार किया। यह भाव बेटियों की शिक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- सामाजिक संदेश: यह पंक्ति उस पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देती है जो बेटियों को कमज़ोर या पराया धन मानती है।
निष्कर्ष: 'मुझ भाग्यहीन की तू संबल' — यह पंक्ति न केवल एक पिता की भावना है, बल्कि यह उस सामाजिक चेतना का प्रतीक है जो 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे कार्यक्रमों की नींव है। निराला ने दशकों पहले ही बेटी के महत्त्व को पहचाना था।
7(क)निम्नलिखित पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए — नत नयनों से आलोक उतरShow solution
संदर्भ: यह पंक्ति 'सरोज स्मृति' कविता से ली गई है जिसमें कवि अपनी पुत्री सरोज के नव-वधू रूप का वर्णन कर रहे हैं।
शब्दार्थ:
- नत नयन = झुकी हुई आँखें (लज्जावश)
- आलोक = प्रकाश, दीप्ति
- उतर = उतरना, प्रवाहित होना
अर्थ:
इस पंक्ति का अर्थ है — सरोज की झुकी हुई (लज्जायुक्त) आँखों से एक दिव्य प्रकाश झर रहा था। विवाह के अवसर पर नव-वधू की आँखें लज्जावश नीची थीं, परंतु उन नत नयनों से भी एक अद्भुत आभा और तेज प्रवाहित हो रहा था।
काव्य-सौंदर्य: यह पंक्ति सरोज के सौंदर्य और लज्जाशीलता का एक साथ चित्रण करती है। लज्जा और सौंदर्य का यह संयोजन अत्यंत काव्यात्मक है। झुकी आँखों से प्रकाश का उतरना — यह विरोधाभास जैसा प्रतीत होता है, परंतु यही इस पंक्ति की सुंदरता है।
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
योग्यता-विस्तार
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
6 more solved questions in सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला')
They are free with a Super Tutor account, along with practice quizzes and flashcards for this chapter. Free to start, no card needed.
Frequently Asked Questions
What are the important topics in सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') for Nagaland Board Class 12 Hindi?
Are these NCERT Solutions for सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') free?
How should I revise सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') for the Nagaland Board Class 12 board exam?
Sources & Official References
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला')
Practice Quiz
Test yourself with a quick quiz
Important Questions
Exam-style questions with answers
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Concept Maps
See how topics connect
Study Plan
Step-by-step plan for this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Syllabus
What topics to cover
For serious students
Get the full सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') chapter — start free.
Quizzes, flashcards, an AI doubt solver and a study plan for Nagaland Board Class 12 Hindi. Free to start, no card needed.