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Chapter 9 of 38
NCERT Solutions

यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय') — NCERT Solutions

Nagaland Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'), Nagaland Board Class 12 Hindi: 16 textbook questions.

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One of 5 illustrations for यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय') in Super Tutor — alongside flashcards, concept maps and practice questions.

16 Questions Solved · 3 Sections

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प्रश्न-अभ्यास

1'दीप अकेला' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए यह बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?Show solution

प्रतीकार्थ:
'दीप अकेला' व्यक्ति (लघु मानव) का प्रतीक है। जिस प्रकार एक दीपक अकेला जलकर अँधेरे को दूर करता है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर एक अनूठी ज्योति लिए होता है — अपना अनुभव, अपनी पीड़ा, अपना सौंदर्यबोध।

स्नेह भरा क्यों:
दीप के भीतर स्नेह (तेल) भरा होता है — यह उस प्रेम और ममता का प्रतीक है जो व्यक्ति अपने हृदय में संजोए रहता है। व्यक्ति का जीवन स्नेह और संवेदना से परिपूर्ण होता है।

गर्व भरा क्यों:
दीपक अपनी लौ पर गर्व करता है — वह जानता है कि उसकी अपनी एक विशिष्ट पहचान है। व्यक्ति भी अपनी अस्मिता और अपने अनुभवों पर गर्व करता है।

मदमाता क्यों:
दीपक अपनी जलन में इतना तल्लीन है कि वह मस्त और उन्मत्त-सा प्रतीत होता है। व्यक्ति भी अपनी सृजनशीलता और जीवन-ऊर्जा में मग्न रहता है।

निष्कर्ष: कवि 'अज्ञेय' यह बताना चाहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में पूर्ण, अनूठा और ऊर्जावान है — भले ही वह समाज की विशाल धारा में अकेला हो।

2'यह दीप अकेला है पर इसको भी पंक्ति को दे दो' के आधार पर व्यष्टि का समष्टि में विलय क्यों और कैसे संभव है?Show solution

व्यष्टि और समष्टि का अर्थ:

  • व्यष्टि = व्यक्ति (individual)
  • समष्टि = समाज/समूह (collective)

विलय क्यों आवश्यक है:
कवि का मानना है कि व्यक्ति चाहे कितना भी विशिष्ट, प्रतिभाशाली और अनूठा हो, उसकी सार्थकता तभी है जब वह समाज से जुड़े। अकेला दीपक अपनी लौ से केवल सीमित क्षेत्र को प्रकाशित कर सकता है, किंतु जब वह दीपों की पंक्ति में सम्मिलित हो जाता है तो उसका प्रकाश असीमित हो जाता है।

विलय कैसे संभव है:
व्यक्ति अपने अहंकार, अपनी संकीर्णता और अपने 'मैं' के भाव को त्यागकर समाज की मुख्यधारा में मिल जाता है। जैसे एक दीप पंक्ति में जुड़कर उत्सव का हिस्सा बनता है, वैसे ही व्यक्ति समाज में मिलकर एक बड़े उद्देश्य का अंग बन जाता है।

निष्कर्ष: व्यष्टि का समष्टि में विलय स्वैच्छिक समर्पण से संभव है। इससे न तो व्यक्ति की विशिष्टता नष्ट होती है और न ही उसका अस्तित्व — बल्कि वह और अधिक अर्थपूर्ण हो जाता है।

3'गीत' और 'मोती' की सार्थकता किससे जुड़ी है?Show solution

गीत की सार्थकता:
गीत तभी सार्थक होता है जब वह किसी के कंठ से निकलकर श्रोताओं तक पहुँचे, जब वह समाज की भावनाओं को अभिव्यक्ति दे। अकेले गाया गया गीत जो किसी तक न पहुँचे, अधूरा है। अर्थात् गीत की सार्थकता समाज/श्रोता से जुड़ी है।

मोती की सार्थकता:
मोती तभी सार्थक होता है जब वह किसी माला में पिरोया जाए, किसी के गले का श्रृंगार बने। अकेला पड़ा मोती अपनी चमक के बावजूद निरर्थक है। अर्थात् मोती की सार्थकता माला/समूह से जुड़ी है।

निष्कर्ष: कवि इन दोनों प्रतीकों के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि व्यक्ति की प्रतिभा, उसका सृजन और उसका अस्तित्व तभी सार्थक है जब वह समाज से जुड़े। व्यक्तिगत उत्कर्ष की पूर्णता सामाजिक संदर्भ में ही संभव है।

4'यह अद्वितीय—यह मेरा—यह मैं स्वयं विसर्जित'—पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।Show solution

पंक्ति का आशय:
कवि कहते हैं — यह दीप अद्वितीय है (अपने आप में अनूठा), यह मेरा है (मुझे प्रिय है), फिर भी मैं इसे स्वयं विसर्जित कर रहा हूँ — अर्थात् इसे समाज को समर्पित कर रहा हूँ।

विसर्जन की उपयोगिता:

  1. अहंकार का नाश: जब व्यक्ति अपने 'मैं' को समाज में विसर्जित करता है तो उसका अहंकार समाप्त होता है और वह विनम्र तथा उदार बनता है।
  1. व्यापक उद्देश्य की प्राप्ति: व्यक्तिगत प्रतिभा जब समाज को समर्पित होती है तो वह एक बड़े लक्ष्य की पूर्ति में सहायक बनती है।
  1. अमरत्व की प्राप्ति: जो व्यक्ति समाज में विसर्जित हो जाता है, वह समाज की स्मृति में अमर हो जाता है।
  1. सामूहिक शक्ति: अनेक व्यक्तियों के विसर्जन से समाज शक्तिशाली बनता है — जैसे अनेक दीपों की पंक्ति से महोत्सव का वातावरण बनता है।

निष्कर्ष: व्यष्टि का समष्टि में विसर्जन न केवल समाज के लिए उपयोगी है, बल्कि स्वयं व्यक्ति के लिए भी मुक्तिदायक है।

5'यह मधु है ……… तकता निर्भय'—पंक्तियों के आधार पर बताइए कि 'मधु', 'गोरस' और 'अंकुर' की क्या विशेषता है?Show solution

मधु की विशेषता:
'मधु' (शहद) मधुमक्खी द्वारा अनेक फूलों से संचित किया जाता है। यह मीठा, पोषक और जीवनदायी होता है। यहाँ 'मधु' व्यक्ति के उस संचित अनुभव और ज्ञान का प्रतीक है जो उसने जीवन के विविध क्षणों से अर्जित किया है। यह मधु समाज को मिठास और ऊर्जा प्रदान करता है।

गोरस की विशेषता:
'गोरस' (दूध/दही) पवित्रता, पोषण और जीवन-शक्ति का प्रतीक है। यह जीवन को बनाए रखने वाला तत्त्व है। व्यक्ति के भीतर जो ममता, करुणा और पोषण की भावना है — वही 'गोरस' है। यह समाज को जीवन-शक्ति देता है।

अंकुर की विशेषता:
'अंकुर' नई संभावना, नए जीवन और भविष्य का प्रतीक है। अंकुर निर्भय होकर धरती को चीरकर ऊपर आता है — यह साहस और जिजीविषा का प्रतीक है। व्यक्ति के भीतर जो नई सोच, नई ऊर्जा और नई उम्मीद है — वही 'अंकुर' है।

निष्कर्ष: तीनों — मधु, गोरस और अंकुर — व्यक्ति की उन विशेषताओं के प्रतीक हैं जो उसे समाज के लिए उपयोगी और अनिवार्य बनाती हैं। ये तीनों मिलकर व्यक्ति की समग्र जीवन-शक्ति को व्यक्त करते हैं।

6(क)भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए — 'यह प्रकृत, स्वयंभू ……………… शक्ति को दे दो।'Show solution

प्रसंग: यह पंक्तियाँ 'यह दीप अकेला' कविता से ली गई हैं।

भाव-सौंदर्य:
कवि कहते हैं कि यह दीप 'प्रकृत' (प्रकृति के अनुरूप, स्वाभाविक) और 'स्वयंभू' (स्वयं उत्पन्न) है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति की प्रतिभा और शक्ति किसी बाहरी स्रोत से नहीं, बल्कि उसके अपने भीतर से उत्पन्न होती है।

कवि इस स्वाभाविक और स्वयंजात शक्ति को समाज की सामूहिक शक्ति को समर्पित करने का आग्रह करते हैं। व्यक्ति की यह नैसर्गिक ऊर्जा जब समाज की शक्ति से मिलती है तो दोनों और अधिक सशक्त हो जाते हैं।

काव्य-सौंदर्य:

  • 'प्रकृत' और 'स्वयंभू' शब्दों में व्यक्ति की स्वायत्तता और स्वाभाविकता का भाव है।
  • 'शक्ति को दे दो' में समर्पण का आग्रह है।
  • भाषा संस्कृतनिष्ठ और गंभीर है।
6(ख)भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए — 'यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक ……………… चिर-अखंड अपनापा।'Show solution

प्रसंग: यह पंक्तियाँ 'यह दीप अकेला' कविता से ली गई हैं।

भाव-सौंदर्य:
'सदा-द्रवित' का अर्थ है — सदा पिघलता रहने वाला, सदा संवेदनशील। 'चिर-जागरूक' का अर्थ है — सदा सचेत और सावधान। ये दोनों विशेषताएँ व्यक्ति के उस हृदय की हैं जो दूसरों के दुख-सुख से सदा प्रभावित होता है और समाज के प्रति सदा सचेत रहता है।

'चिर-अखंड अपनापा' — यह वह भाव है जो व्यक्ति को समाज से जोड़ता है। यह अपनापन कभी टूटता नहीं, सदा अखंड रहता है।

कवि कहते हैं कि व्यक्ति की यह संवेदनशीलता, जागरूकता और अपनेपन की भावना ही उसे समाज का अनिवार्य अंग बनाती है।

काव्य-सौंदर्य:

  • 'सदा-द्रवित' और 'चिर-जागरूक' में अनुप्रास की छटा है।
  • 'चिर-अखंड अपनापा' में व्यक्ति और समाज के शाश्वत संबंध की अभिव्यक्ति है।
  • भाव गहन और मार्मिक हैं।
6(ग)भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए — 'जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो।'Show solution

प्रसंग: यह पंक्तियाँ 'यह दीप अकेला' कविता से ली गई हैं।

भाव-सौंदर्य:
कवि यहाँ व्यक्ति के तीन गुणों का उल्लेख करते हैं —

  1. जिज्ञासु — जो सदा जानने की इच्छा रखता है, जो प्रश्न करता है और सत्य की खोज में लगा रहता है।
  2. प्रबुद्ध — जो ज्ञान से जागृत है, जिसने अज्ञान के अंधकार को दूर किया है।
  3. श्रद्धामय — जो श्रद्धा और विश्वास से भरा है, जो जीवन और समाज के प्रति आस्थावान है।

ऐसे व्यक्ति को कवि 'भक्ति को दे दो' कहते हैं — अर्थात् इस जिज्ञासु, प्रबुद्ध और श्रद्धालु व्यक्ति को समाज की भक्ति-भावना (सामूहिक आस्था और समर्पण) से जोड़ दो।

काव्य-सौंदर्य:

  • तीन विशेषणों — जिज्ञासु, प्रबुद्ध, श्रद्धामय — में व्यक्ति के बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास की क्रमिक यात्रा है।
  • 'भक्ति को दे दो' में समर्पण का उदात्त भाव है।
  • भाषा ओजपूर्ण और संस्कृतनिष्ठ है।
7'यह दीप अकेला' एक प्रयोगवादी कविता है। इस कविता के आधार पर 'लघु मानव' के अस्तित्व और महत्व पर प्रकाश डालिए।

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प्रश्न-अभ्यास

1'सागर' और 'बूँद' से कवि का क्या आशय है?

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2'रंग गई क्षणभर, ढलते सूरज की आग से'—पंक्ति के आधार पर बूँद के क्षणभर रंगने की सार्थकता बताइए।

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3'सूने विराट के सम्मुख ……………… दाग से!'— पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।

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4'क्षण के महत्व' को उजागर करते हुए कविता का मूल भाव लिखिए।

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योग्यता-विस्तार

1अज्ञेय की कविताएँ 'नदी के द्वीप' व 'हरी घास पर क्षणभर' पढ़िए और कक्षा की भित्ति पत्रिका पर लगाइए।

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2'मानव और समाज' विषय पर परिचर्चा कीजिए।

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3भारतीय दर्शन में 'सागर' और 'बूँद' का संदर्भ जानिए।

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8 more solved questions in यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय')

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय') for Nagaland Board Class 12 Hindi?
Key topics in यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय') include कवि परिचय और साहित्यिक योगदान, कविता 'यह दीप अकेला' का भावार्थ, कविता 'मैंने देखा, एक बूँद' का भावार्थ, प्रतीक, शिल्प और काव्य-भाषा. Study these first, then practise questions on each for the Nagaland Board Class 12 board exam.
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Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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