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Chapter 9 of 38
NCERT Solutions

यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय')

Nagaland Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय') — Nagaland Board Class 12 Hindi.

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14 Questions Solved · 3 Sections

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यह दीप अकेला

1'दीप अकेला' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए यह बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?Show solution
दीप अकेला’ का प्रतीक एक ऐसे व्यक्ति का है जो स्नेह, गर्व और अद्वितीयता से भरा हुआ है। वह अपनी अलग पहचान रखता है, उसके भीतर शक्ति, संवेदना और आत्मगौरव है। कवि ने उसे स्नेह भरा इसलिए कहा है क्योंकि उसमें प्रेम और अपनापन है; गर्व भरा इसलिए, क्योंकि उसमें आत्मसम्मान और आत्मबोध है; और मदमाता इसलिए, क्योंकि वह अपनी शक्ति और विशेषता के भाव में उत्साहित, प्रफुल्लित और आत्मविश्वासी है। लेकिन कवि चाहता है कि यह अकेलापन पंक्ति में मिल जाए, यानी व्यक्ति अपनी विशेषता बनाए रखते हुए समाज से जुड़ जाए।

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2यह दीप अकेला है 'पर इसको भी पंक्ति को दे दो' के आधार पर व्यष्टि का समष्टि में विलय क्यों और कैसे संभव है?Show solution
कवि के अनुसार व्यष्टि अर्थात व्यक्ति अपने-आप में सब कुछ होते हुए भी यदि समाज से अलग रह जाए तो उसकी शक्ति सीमित रह जाती है। पंक्ति “पर इसको भी पंक्ति को दे दो” का अर्थ है कि व्यक्ति को समाज की पंक्ति में, यानी समूह में शामिल कर देना चाहिए। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि व्यक्ति की विशेषता समाज में मिलकर और अधिक सार्थक बनती है। जैसे दीप पंक्ति में शामिल होकर अधिक प्रकाश देता है, वैसे ही मनुष्य समाज के साथ जुड़कर अपनी क्षमता का व्यापक उपयोग कर सकता है। इस तरह व्यक्तिगत सत्ता का सामाजिक सत्ता में विलय ही व्यष्टि का समष्टि में रूपांतरण है।

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3'गीत' और 'मोती' की सार्थकता किससे जुड़ी है?Show solution
कवि ने ‘गीत’ और ‘मोती’ की सार्थकता को समाज के लिए उपयोगिता और दूसरों तक पहुँचने से जोड़ा है। पंक्ति “यह जन है—गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा?” से भाव है कि किसी व्यक्ति का गीत तब अर्थपूर्ण है जब वह अन्य लोगों तक पहुँचे और उसकी गूँज समाज में सुनाई दे। इसी तरह “पनडुब्बा—ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा?” में मोती तभी सार्थक हैं जब उन्हें कोई खोजकर बाहर लाए और उपयोग में लाए। यानी गीत और मोती की सार्थकता अकेलेपन में नहीं, बल्कि दूसरों के लिए होने में है।

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4'यह अद्वितीय-यह मेरा-यह मैं स्वयं विसर्जित'-पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।Show solution
पंक्ति “यह अद्वितीय—यह मेरा—यह मैं स्वयं विसर्जित—” का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी अद्वितीयता और व्यक्तिगत पहचान बनाए रखते हुए भी स्वयं को समाज में समर्पित कर सकता है। ऐसे विसर्जन से व्यक्ति की शक्ति कम नहीं होती, बल्कि उसका महत्त्व बढ़ता है, क्योंकि वह अपने सीमित अस्तित्व से निकलकर व्यापक समाज के लिए उपयोगी बनता है। व्यष्टि का समष्टि में विसर्जन इसलिए उपयोगी है कि इससे व्यक्ति की शक्ति, ज्ञान, प्रेम और प्रतिभा समाज के हित में लगती है और समाज अधिक मजबूत, समृद्ध तथा अर्थपूर्ण बनता है।

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5'यह मधु है ... तकता निर्भय'-पंक्तियों के आधार पर बताइए कि 'मधु', 'गोरस' और 'अंकुर' की क्या विशेषता है?Show solution
इन पंक्तियों के आधार पर ‘मधु’, ‘गोरस’ और ‘अंकुर’ तीनों की विशेषता यह है कि वे स्वयं उत्पन्न, निर्मल, जीवनदायी और स्वाभाविक हैं।

- मधु: यह काल की मौनता का युग-संचय है, यानी समय के भीतर संचित मधुरता और जीवन का रस।
- गोरस: यह जीवन और कामधेनु का अमृत-पूत पय है, यानी पवित्र, पोषक और अमृत समान दूध।
- अंकुर: यह धरती को फोड़कर निर्भय होकर सूर्य की ओर देखने वाला है, यानी नया जीवन, आशा और विकास का प्रतीक।

अर्थात ये सब प्रकृत, स्वयंभू और शक्ति-संपन्न हैं।

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6भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए—Show solution
(क) “यह प्रकृत, स्वयंभू, ब्रह्म, अयुतः इसको भी शक्ति को दे दो।”
यहाँ मधु, गोरस और अंकुर की स्वाभाविक, स्वतःस्फूर्त और दिव्य सत्ता का भाव है। वे प्रकृति से उत्पन्न, स्वयंभू और पृथक होते हुए भी जीवन-शक्ति से भरे हैं। “शक्ति को दे दो” में यह संकेत है कि इनकी शक्ति किसी बड़े प्रवाह में जुड़नी चाहिए।

(ख) “यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक ... चिर-अखंड अपनापा।”
इन पंक्तियों में उस दीप का संवेदनशील, जागरूक, अनुरक्त और अखंड आत्मीय स्वरूप व्यक्त हुआ है। वह अपमान, निंदा और पीड़ा में भी द्रवित रहता है, फिर भी उसका अपनापा टूटा नहीं है। भाव यह है कि सच्चा व्यक्ति दुखों के बीच भी संवेदना और आत्मीयता बनाए रखता है।

(ग) “जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो।”
यहाँ दीप के जिज्ञासु, प्रबुद्ध और श्रद्धामय स्वरूप का सुंदर चित्रण है। उसमें ज्ञान की तलाश है, समझ है और विश्वासपूर्ण समर्पण भी। “भक्ति को दे दो” का अर्थ है कि ऐसी चेतना को समर्पण, श्रद्धा और उच्च उद्देश्य से जोड़ा जाए।

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7'यह दीप अकेला' एक प्रयोगवादी कविता है। इस कविता के आधार पर 'लघु मानव' के अस्तित्व और महत्त्व पर प्रकाश डालिए।Show solution
यह कविता ‘लघु मानव’ यानी सामान्य, छोटे, साधारण व्यक्ति के अस्तित्व और महत्त्व को प्रतिष्ठित करती है। कवि का मानना है कि हर व्यक्ति अपने-आप में अद्वितीय है, उसके भीतर स्नेह, शक्ति, चेतना, प्रतिभा और आत्मसम्मान है। वह यदि अकेला रह जाए तो उसकी शक्ति सीमित हो सकती है, पर जब वह समाज की पंक्ति में जुड़ता है, तब उसका जीवन सार्थक हो जाता है।

इस कविता में लघु मानव को दीप के रूप में दिखाकर बताया गया है कि वह भले ही छोटा लगे, पर उसके भीतर प्रकाश है। उसका महत्व इसलिए है कि वह अपनी व्यक्तिगत सत्ता को खोए बिना समष्टि का हिस्सा बने। इसी से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र मजबूत होते हैं। इसलिए यह कविता प्रयोगवादी होते हुए भी मानव-गरिमा, सामाजिकता और सामूहिकता का समर्थन करती है।

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मैंने देखा, एक बूँद

1'सागर' और 'बूँद' से कवि का क्या आशय है?
2'रंग गई क्षणभर, ढलते सूरज की आग से'—पंक्ति के आधार पर बूँद के क्षणभर रंगने की सार्थकता बताइए।
3'सूने विराट् के सम्मुख ... दाग से!'—पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
4'क्षण के महत्त्व' को उजागर करते हुए कविता का मूल भाव लिखिए।

योग्यता-विस्तार

1अज्ञेय की कविताएँ 'नदी के द्वीप' व 'हरी घास पर क्षणभर' पढ़िए और कक्षा की भित्ति पत्रिका पर लगाइए।
2'मानव और समाज' विषय पर परिचर्चा कीजिए।
3भारतीय दर्शन में 'सागर' और 'बूँद' का संदर्भ जानिए।

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