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Chapter 2 of 12
NCERT Solutions

पद (रैदास)

CBSE · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for पद (रैदास) — CBSE Class 9 Hindi.

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31 Questions Solved · 10 Sections

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# अभ्यास

1“अब कैसे छूटे राम रट लागी” पंक्ति का भाव है?Show solution
पंक्ति “राम रट लागी” का अर्थ है कि भक्त के मन में राम-नाम का जप लगातार लगा हुआ है। यहाँ रटना नकारात्मक अर्थ में नहीं, बल्कि नाम-स्मरण के अर्थ में है।

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2“प्रभु जी तुम चंदन हम पानी” पंक्ति में आराध्य और भक्त का संबंध किस रूप में व्यक्त हुआ है?Show solution
पंक्ति में चंदन और पानी का उदाहरण देकर बताया गया है कि जैसे पानी चंदन में मिलकर उसकी सुगंध को अपने में समा लेता है, वैसे ही भक्त और आराध्य का संबंध एकाकार और अभिन्न है।

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3“तुम दीपक, हम बाती” से रैदास का क्या भाव है?Show solution
दीपक और बाती का संबंध ऐसा है कि दोनों मिलकर प्रकाश देते हैं। इसी तरह भक्त और आराध्य के मिलन से भक्त का जीवन प्रकाशमान और आलोकित होता है।

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4“जो तुम तोरी राम मैं नहीं तोरी” पंक्ति में रैदास का क्या आशय है?Show solution
पंक्ति में रैदास कहते हैं कि यदि तुम मुझे छोड़ भी दो, तब भी मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगा। इससे भक्त की अटूट निष्ठा और अभेद संबंध व्यक्त होता है।

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5“तीर्थ बरत न करूँ अंदेसा” पंक्ति से आप क्या समझते हैं?Show solution
कवि कहता है कि उसे तीर्थ-व्रत की चिंता नहीं है, क्योंकि उसका एकमात्र भरोसा प्रभु के चरण-कमलों पर है।

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6सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा किस पंक्ति में व्यक्त होती है?Show solution
इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि ईश्वर सर्वव्यापक है; जहाँ-जहाँ वह है, वहीं उसकी पूजा है।

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1“माइ न होती बापु न होता करम न होती काया।
हम नहीं होते, तुम नहीं होते, कवन कहाँ ते आया।
राम कोइ न किसही केरा। जैसे तरवर पंखि-बसेरा।
चंद न होता, सूर न होता, पानी पवनु मिलाया।
सास्त्र न होता बेद न होता, करमु कहाँ ते आया।
खेचरि भूचरि तुलसी माला गुरपरसादी पाया।
नामा प्रणवै परम तत्त कूँ सतगुर मोहि लखाया।”
Show solution
पाठित पद में माइ, बापु, करम संज्ञाएँ हैं। हम, तुम, कवन सर्वनाम हैं।

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2“मोहि लागति तालाबेली।
बछरा बिनु गाइ अकेली।
पानी बिनु ज्यू मीन तलफै।
ऐसे रामनाम बिनु नामा कलपै।
जैसे गाइ का बाछा छूटला।
थन चोखता माखन घूटला।
नामदेउ नारायन पाया।
गुर भेटत ही अलख लखाया।
जैसे विषै हेत परनारी।
ऐसे नामे प्रीति मुरारी।
जैसे ताप ते निरमल घामा।
तैसे रामनाम बिनु बापुरो नामा।”
Show solution
इन पदों में भक्ति की तीव्रता और अनन्यता दिखाई गई है। पहले पद में जीव और ईश्वर के संबंध को माता-पिता, कर्म, देह, सूर्य-चंद्र, शास्त्र-वेद जैसी स्थितियों से ऊपर बताया गया है। भाव यह है कि परम तत्त्व की प्राप्ति केवल गुरु-कृपा से होती है। दूसरे पद में भक्त की प्रेम-व्याकुलता व्यक्त हुई है—जैसे बछड़ा गाय के बिना, मछली पानी के बिना और विषयी व्यक्ति पर-स्त्री के बिना तड़पता है, वैसे ही नामदेव रामनाम के बिना तड़पते हैं। दोनों पदों का मूल भाव है निराकार भक्ति, गुरु-प्रसाद और ईश्वर-नाम में आसक्ति

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9“प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”
उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए। इसमें अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है। जिस रचना में व्यंजन वर्णों की आवृत्ति एक से अधिक बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
“प्रभु जी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।”
उपर्युक्त रेखांकित अंश में उपमा अलंकार है। किसी प्रसिद्ध वस्तु की समानता के आधार पर जब किसी वस्तु या व्यक्ति के रूप, गुण, धर्म का वर्णन किया जाता है तो वहाँ उपमा अलंकार होता है।
“तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसा।”
उपर्युक्त रेखांकित अंश में रूपक अलंकार है। रूपक अलंकार वहाँ होता है जहाँ रूप और गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का आरोप कर अभेद स्थापित किया जाए।
अब आप अपनी पाठ्यपुस्तक में सम्मिलित कविताओं में अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकार वाली अन्य पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।
Show solution
पाठ में अन्य पंक्तियाँ भी अलंकारों से युक्त हैं। जैसे “प्रभु जी तुम चंदन हम पानी” में उपमा/समानता, “जाकी जोति बरे दिन राती” में अतिशयोक्तिपूर्ण विशेषता और “तुम्हरे चरन कमल” में रूपक का सौंदर्य मिलता है।

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10नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझाते हुए भाव स्पष्ट कीजिए।Show solution
“प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।” का अर्थ है कि जैसे चकोर चंद्रमा को एकटक देखता रहता है और उससे अलग नहीं रह सकता, वैसे ही भक्त अपने आराध्य को निरंतर निहारता और उससे जुड़ा रहता है। यहाँ घन और मोर, चंद और चकोर के माध्यम से भक्त-आराध्य के स्वाभाविक, गहरे और प्रेमपूर्ण संबंध को व्यक्त किया गया है। भाव यह है कि भक्त का मन सदैव अपने प्रभु की ओर लगा रहता है।

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### अर्थ और भाव

(क)“प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”Show solution
इस पंक्ति का भाव है कि जैसे बादल और मोर का संबंध स्वाभाविक और गहरा होता है, वैसे ही भक्त का अपने आराध्य से प्रेमपूर्ण संबंध होता है। चकोर की तरह भक्त भी अपने प्रभु को निरंतर निहारता रहता है। इससे अनन्य भक्ति, प्रेम और अटूट लगाव प्रकट होता है।

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(ख)“तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसा।”Show solution
इस पंक्ति का अर्थ है कि कवि को तीर्थ और व्रत करने की कोई चिंता नहीं है, क्योंकि उसका सारा भरोसा केवल प्रभु के चरण-कमलों पर है। भाव यह है कि सच्ची भक्ति बाहरी कर्मकांडों में नहीं, बल्कि अंतर्मन की श्रद्धा और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास में है।

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### मेरी समझ मेरे विचार

1“जो तुम तोरी राम मैं नहिं तोरी” पंक्ति में रैदास की अपने आराध्य में अटूट निष्ठा का भाव है। इससे आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।Show solution
इस पंक्ति से रैदास की अटूट निष्ठा प्रकट होती है। वे कहते हैं कि यदि प्रभु उन्हें छोड़ भी दें, तो भी वे प्रभु को नहीं छोड़ेंगे। इसका अर्थ है कि भक्त का संबंध अपने आराध्य से किसी शर्त, लाभ या भय पर आधारित नहीं होता। वह हर परिस्थिति में प्रभु से जुड़ा रहता है। ऐसी भक्ति में विश्वास, समर्पण और स्थिर प्रेम होता है।

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2रैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर किस साधन को भक्ति का प्रमुख आधार माना है? आपके विचार से भक्ति के क्या आधार हो सकते हैं?Show solution
रैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर प्रभु के चरण-कमलों पर भरोसा और अंतर की सच्ची भक्ति को भक्ति का आधार माना है। मेरे विचार से भक्ति के आधार हो सकते हैं—श्रद्धा, प्रेम, विश्वास, समर्पण, सच्चा आचरण, और मन की शुद्धता। केवल बाहरी कर्मकांड नहीं, बल्कि अंतर्मन की निर्मलता भक्ति का सच्चा आधार है।

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3दोनों पदों में भक्त और आराध्य के संबंध को किन-किन प्रतीकों/उपमाओं से व्यक्त किया गया है? लिखिए।Show solution
दोनों पदों में भक्त-आराध्य संबंध को कई प्रतीकों और उपमाओं से व्यक्त किया गया है। जैसे—चंदन और पानी, घन और मोर, दीपक और बाती, मोती और धागा, चकोर और चंद्रमा। दूसरे पद में चरण-कमल, राम-नाम, और तीर्थ-व्रत के विरोध के माध्यम से भी भक्ति का संबंध व्यक्त हुआ है। इन सब प्रतीकों से भक्त और आराध्य की अभिन्नता, प्रेम और निष्ठा प्रकट होती है।

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### कविता का सौंदर्य

1“प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”

उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए। इसमें अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है। जिस रचना में व्यंजन वर्णों की आवृत्ति एक से अधिक बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
Show solution
पाठ में अनुप्रास, उपमा और रूपक के अन्य उदाहरण मिलते हैं। “प्रभु जी तुम दीपक, हम बाती” और “प्रभु जी तुम मोती, हम धागा” जैसी पंक्तियों में क्रमशः उपमा/समानता और संबंधात्मक सौंदर्य दिखाई देता है।

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2“प्रभु जी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।”

उपर्युक्त रेखांकित अंश में उपमा अलंकार है। किसी प्रसिद्ध वस्तु की समानता के आधार पर जब किसी वस्तु या व्यक्ति के रूप, गुण, धर्म का वर्णन किया जाता है तो वहाँ उपमा अलंकार होता है।
3“तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसा।”

उपर्युक्त रेखांकित अंश में रूपक अलंकार है। रूपक अलंकार वहाँ होता है जहाँ रूप और गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का आरोप कर अभेद स्थापित किया जाए।
4अब आप अपनी पाठ्यपुस्तक में सम्मिलित कविताओं में अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकार वाली अन्य पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।

### कविता की कुछ अन्य विशेषताएँ

1नीचे दी गई सूची को ध्यान से देखिए। इस सूची में रैदास के दोनों पदों से कुछ विशेषताएँ चुनकर दी गई हैं। पदों में से चुनकर इन विशेषताओं को दर्शाती पंक्तियाँ लिखिए। उदाहरण के लिए पहली विशेषता के सामने पंक्ति दी गई है।

### विषयों से संवाद

1तीर्थ और व्रत के स्थान पर रैदास ने आराध्य की भक्ति को प्रधान माना है। भक्तिकाल के कवि रैदास की तरह कबीर भी निराकार आराध्य की भक्ति पर बल देते हैं। तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर बताइए कि इसके क्या कारण हो सकते हैं?
2“सोने मिलत सुहागा”

‘सुहागा’ एक प्राकृतिक खनिज है जिसके प्रयोग से सोने की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और उसकी चमक बढ़ जाती है। ‘सुहागा’ का रासायनिक नाम और उसकी विशेषताएँ अपने विज्ञान के शिक्षक से चर्चा करके लिखिए।
2“सोने मिलत सुहागा”

# भाषा से संवाद

1पठित पदों में से संज्ञा और सर्वनाम के तीन-तीन उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
2रैदास के इन दोनों पदों में बहुत से ऐसे शब्द प्रयुक्त हुए हैं जिनके स्थान पर अन्य शब्दों का प्रयोग होता है। नीचे सूची में दिए गए शब्दों को देखिए। आप या आपके आस-पास के लोग इन शब्दों के लिए किन अन्य शब्दों का प्रयोग करते हैं? लिखिए।

# सूजन

1कक्षा में समूह बनाकर इन दोनों पदों को गाकर/पाठ करके प्रस्तुत कीजिए।
2कल्पना कीजिए कि पद में आई उपमाओं के आधार पर भक्त और आराध्य आपस में बात कर रहे हैं। इस दृश्य को आधार बनाकर संवाद-लेखन कीजिए।
3“जो तुम तोरी राम मैं नहीं तोरी” पंक्ति को आधार बनाकर अटूट मित्रता पर एक लघुकथा तैयार कीजिए।

# झरोखे से

1आपने रैदास के पद पढ़े। अब आप रैदास की तरह ही महाराष्ट्र के संत कवि नामदेव के आगे दिए गए दो पद पढ़िए। निर्गुण संत काव्य परंपरा के संत कवि नामदेव का जन्म 13वीं-14वीं शताब्दी में महाराष्ट्र में हुआ। अन्य संत कवियों की भाँति नामदेव ने भी बाह्य आडंबरों, सामाजिक रूढ़ियों का विरोध कर सामाजिक समरसता, प्रेम एवं निराकार भक्ति से संबंधित पदों की रचना की है।
2अब अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि रैदास तथा नामदेव के पदों में क्या-क्या अंतर है और क्या-क्या समानताएँ हैं?

## खोजबीन

1रैदास के जीवन और पदों के विषय में पुस्तकालय और इंटरनेट से खोजकर पढ़िए। कुछ लिंक नीचे दिए गए हैं।

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Sources & Official References

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