भारति, जय, विजयकरे (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला')
CBSE · Class 9 · Hindi
NCERT Solutions for भारति, जय, विजयकरे (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') — CBSE Class 9 Hindi.
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# अभ्यास
1“भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से—Show solution
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2“कनक-शस्य-कमल धरे” पंक्ति का भावार्थ है—Show solution
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3समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं—Show solution
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4कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है?Show solution
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5भारत के वस्त्रों में ‘तरु-तृण-वन-लता’ और गले में ‘गंगा-धारा’ को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं?Show solution
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6“लंका पदतल शतदल,
गर्जितोर्मि सागर-जल
धोता शुचि चरण युगल!”Show solution
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7“प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!”Show solution
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1कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?Show solution
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2कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?Show solution
हाँ, प्रकृति का संरक्षण करना देशप्रेम का काम है, क्योंकि देश की नदियाँ, वन, पर्वत और जैव-विविधता ही उसकी पहचान हैं। यदि हम इन्हें सुरक्षित रखेंगे, तभी देश का पर्यावरण, जीवन और भविष्य सुरक्षित रहेगा।
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3“कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?Show solution
- कनक: समृद्धि, स्वर्णिम वैभव
- शस्य: फसल, अन्न, कृषि-समृद्धि
- कमलधरे: सौंदर्य, पवित्रता और प्राकृतिक शोभा
अर्थात भारत धन-धान्य, कृषि, सौंदर्य और पवित्रता से संपन्न देश है।
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4“मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?Show solution
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12प्रकृति का मानवीकरणShow solution
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13आलंकारिक प्रयोगShow solution
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14समस्त पद/सामाजिक पद का प्रयोगShow solution
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15संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोगShow solution
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1स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक/परिचायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान संदर्भ में यदि आपको भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप भारत की किन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?Show solution
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2“शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करते हैं?Show solution
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3भारत को सुदृढ़ करने में इसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा के महत्व को बताते हुए संक्षिप्त लेख लिखिए।Show solution
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4कविता में गंगा को भारत के स्वच्छ और श्वेत हार एवं हिमालय को मुकुट के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?Show solution
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1मान लीजिए आपको भारत को एक मनुष्य के रूप में कल्पित करते हुए सुसज्जित करने का अवसर मिले तो आप अपने राज्य के किन सांस्कृतिक, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, चिह्नों, पुष्पों आदि का प्रयोग कर उसकी साज-सज्जा करेंगे?Show solution
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2भारत पर आधारित एक डाक टिकट, पोस्टर या पुस्तक के लिए आवरण पृष्ठ बनाइए और बताइए कि आप उसमें किन-किन प्रतीकों को सम्मिलित करेंगे और क्यों?Show solution
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3नदी की यात्राShow solution
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23यदि आपको एक सचेत नागरिक के रूप में भारत से अपनी मातृभाषा में संवाद का अवसर मिले तो आप किन विषयों पर और क्या-क्या संवाद करना चाहेंगे? इन संवादों को अपनी मातृभाषा और हिंदी में लिखिए।Show solution
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24आप भी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता की रचना कीजिए और उसका भावार्थ हिंदी में भी लिखिए।Show solution
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25समास विग्रह अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।Show solution
- शतदल — शत हैं दल जिसके / सौ दलों वाला
- ज्योतिर्जल — ज्योतिर्मय जल / प्रकाशयुक्त जल
- शतमुख — शत हैं मुख जिसके / सौ मुखों वाला
- सागरजल — सागर का जल
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अभ्यास
Exercises
“भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलधरे!”
इन पंक्तियों में कवि ने चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए भारतभूमि का मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है। इस कविता की कुछ अन्य विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता में से उन विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए—
गंगा नदी की अपने उद्गम से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की पूरी यात्रा के बीच में आने वाली प्राकृतिक, सांस्कृतिक, भाषिक आदि विशेषताओं का वर्णन करते हुए एक रोचक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
उपर्युक्त पंक्ति में भारत की प्रशंसा विविध अर्थों में की गई है। आप भी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता की रचना कीजिए और उसका भावार्थ हिंदी में भी लिखिए।
उपर्युक्त पंक्ति में ‘कनक-शस्य’ का अर्थ है— कनक के समान शस्य (सोने जैसी फसलें) और कमलधरे का अर्थ है— हे कमल को धारण करने वाली! ये शब्द समास शब्द कहलाते हैं। ‘कनक-शस्य’ और ‘कमलधरा’ समस्त पद/सामासिक पद हैं। कमलधरे संबोधन शब्द हैं।
समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है। समास रचना में प्रायः दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। समास रचना से बने शब्द को ‘समस्त पद’ कहते हैं। यदि समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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