भारति, जय, विजयकरे (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') (Part 2) — NCERT Solutions
CBSE · Class 9 · Hindi
NCERT Solutions for भारति, जय, विजयकरे (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') (Part 2), CBSE Class 9 Hindi: 43 textbook questions solved step by step.
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अभ्यास
1“भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से—Show solution
कविता में भारत को कनक-शस्य-कमलधरे कहकर उसकी धन-धान्य संपन्नता, प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्धि का चित्रण किया गया है। पाठ में भी बताया गया है कि इसमें भारत की कृषि-परंपरा, प्रकृति और सांस्कृतिक समृद्धि की प्रशंसा है। इसलिए सही विकल्प (ग) है।
2“कनक-शस्य-कमल धरे” पंक्ति का भावार्थ है—Show solution
कनक का अर्थ सोना और शस्य का अर्थ फसल/अन्न है। इसलिए कनक-शस्य-कमलधरे से भारत की सोने जैसी समृद्धि और अन्न-धान्य से भरी संपन्नता का भाव निकलता है। सही विकल्प (क) है।
3समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं—Show solution
इन पंक्तियों में कवि भारतमाता को विजयश्री प्राप्त करने वाली और धन-धान्य से संपन्न रूप में संबोधित करता है। यही भारत के महत्व का उद्घोष है। इसलिए सही विकल्प (ग) है।
4कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है?Show solution
पाठ में दिया है कि कविता की भाषा संस्कृतनिष्ठ है और उसमें समासयुक्त पद बहुत आए हैं, जैसे कनक-शस्य-कमलधरे, गर्जितोर्मि, शतमुख आदि। इसलिए सही विकल्प (ख) है।
5भारत के वस्त्रों में ‘तरु-तृण-वन-लता’ और गले में ‘गंगा-धारा’ को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं?Show solution
कवि ने तरु-तृण-वन-लता और गंगा-धारा को भारत के वस्त्र और हार के रूप में चित्रित करके प्रकृति और संस्कृति दोनों के संरक्षण-सौंदर्य का संदेश दिया है। इसलिए सही विकल्प (क) है।
6“लंका पदतल शतदल,
गर्जितोर्मि सागर-जल
धोता शुचि चरण युगल!”Show solution
इन पंक्तियों का भाव है कि भारतभूमि के चरणों को समुद्र की लहरें धोती हैं। भारत को मानो एक पवित्र देवी की तरह दिखाया गया है, जिसके चरण कमलों जैसे हैं। ‘लंका पदतल शतदल’ से भारत की व्यापकता और विजय-गौरव का भाव भी आता है।
7“प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!”Show solution
इन पंक्तियों में कवि कहता है कि भारत का प्राण ही ओंकार है और उसकी दिशाएँ उदार हैं। शतमुख-शतरव-मुखरे से देश की अनेक दिशाओं में गूँजती विविध ध्वनियों, विचारों और संस्कृतियों का बोध होता है। भाव यह है कि भारत आध्यात्मिक शक्ति, व्यापकता और विविधता से समृद्ध है।
1कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?Show solution
कविता में कवि की देशप्रेम, आदर, गौरव और आशा की भावना व्यक्त हुई है। वह भारत को विजयश्री प्राप्त करने वाली, समृद्ध, पवित्र और सुंदर भूमि के रूप में देखता है और उसके उत्कर्ष की कामना करता है।
2कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?Show solution
कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य को बहुत चित्रात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कहीं भारत के वस्त्र तरु, तृण, वन और लताओं से बने बताए गए हैं, कहीं उसके गले में गंगा-धारा को हार की तरह दिखाया गया है, कहीं हिमालय को मुकुट कहा गया है। इससे प्रकृति और देश एक-दूसरे से जुड़े हुए लगते हैं।
हाँ, प्रकृति का संरक्षण करना देशप्रेम का काम है, क्योंकि देश की नदियाँ, वन, पर्वत और जैव-विविधता ही उसकी पहचान हैं। यदि हम इन्हें सुरक्षित रखेंगे, तभी देश का पर्यावरण, जीवन और भविष्य सुरक्षित रहेगा।
3“कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?Show solution
कनक-शस्य-कमलधरे! पंक्ति भारतभूमि की कई विशेषताओं की ओर संकेत करती है—
- कनक: समृद्धि, स्वर्णिम वैभव
- शस्य: फसल, अन्न, कृषि-समृद्धि
- कमलधरे: सौंदर्य, पवित्रता और प्राकृतिक शोभा
अर्थात भारत धन-धान्य, कृषि, सौंदर्य और पवित्रता से संपन्न देश है।
4“मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?Show solution
पंक्ति “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” में हिमालय को भारत का मुकुट कहा गया है, क्योंकि हिमालय देश की उत्तरी सीमा पर स्थित होकर उसे गरिमा, सुरक्षा और भव्यता प्रदान करता है। जिस तरह मुकुट सिर की शोभा बढ़ाता है, उसी तरह हिमालय भारत की शोभा और प्रतिष्ठा बढ़ाता है।
12प्रकृति का मानवीकरणShow solution
प्रकृति का मानवीकरण जहाँ प्रकृति को मानव-गुणों/अवस्था के रूप में दिखाया गया हो, वहाँ होता है। कविता की पंक्ति “गर्जितोर्मि सागर-जल” में सागर-जल को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
13आलंकारिक प्रयोगShow solution
यहाँ हिमालय को भारत का मुकुट कहा गया है। यह रूपक अलंकार है, क्योंकि उपमेय और उपमान में अभेद स्थापित कर दिया गया है।
14समस्त पद/सामाजिक पद का प्रयोगShow solution
समस्त पद/सामासिक पद वह शब्द होता है जो दो या अधिक शब्दों के मेल से बनता है। शतदल कविता में ऐसा ही समस्त पद है, जिसका विग्रह कमल (सौ दलों वाला) के अर्थ में होता है।
15संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोगShow solution
कविता में कनक, शस्य, कमल, शुचि, धवल, उदार, ओंकार जैसे संस्कृतनिष्ठ शब्द आए हैं। इसलिए “कनक-शस्य-कमलधरे” जैसी पंक्ति संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग का उदाहरण है।
1स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक/परिचायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान संदर्भ में यदि आपको भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप भारत की किन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?Show solution
वर्तमान संदर्भ में भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करते समय मैं उसके विज्ञान और प्रौद्योगिकी, डिजिटल विकास, अंतरिक्ष उपलब्धियाँ, युवा शक्ति, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, खेल उपलब्धियाँ, और सांस्कृतिक विविधता को शामिल करूँगा। साथ ही भारत की बहुभाषिकता, लोककलाएँ, पारंपरिक ज्ञान, आधुनिक नवाचार और एकता में विविधता को भी दिखाऊँगा।
2“शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करते हैं?Show solution
“शतमुख-शतरव-मुखरे!” का अर्थ है अनेक मुखों/स्वरों से गूँजता हुआ। भारत के विभिन्न पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूपों में मनाए जाते हैं, लेकिन सबका भाव एक ही है—आनंद, समरसता और सांस्कृतिक एकता। इस प्रकार विविधता के भीतर एकता दिखाई देती है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करती है।
3भारत को सुदृढ़ करने में इसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा के महत्व को बताते हुए संक्षिप्त लेख लिखिए।Show solution
भारत को सुदृढ़ बनाने में उसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा का बहुत महत्व है। नदियाँ, वन, पर्वत और उपजाऊ भूमि जीवन और कृषि का आधार हैं। हमारी संस्कृति हमें एकता, सहिष्णुता, परंपरा और सामूहिकता सिखाती है। भारत की ज्ञान-परंपरा ने वेद, विज्ञान, गणित, दर्शन और साहित्य में समृद्ध योगदान दिया है। जब प्रकृति सुरक्षित रहती है, संस्कृति जीवित रहती है और ज्ञान आगे बढ़ता है, तभी राष्ट्र मजबूत और समृद्ध बनता है।
4कविता में गंगा को भारत के स्वच्छ और श्वेत हार एवं हिमालय को मुकुट के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?Show solution
बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने नदियों और हिमालय दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। नदियों का पानी गंदा हो रहा है, उनमें कचरा, रसायन और सीवेज बढ़ रहे हैं, जिससे जलजीवन और मानव-स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ता है। हिमालय में बर्फ तेजी से पिघल रही है, ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं और भूस्खलन तथा अनियमित मौसम की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इससे नदियों के स्रोत, जल-चक्र और पर्यावरणीय संतुलन पर भी संकट आता है।
1मान लीजिए आपको भारत को एक मनुष्य के रूप में कल्पित करते हुए सुसज्जित करने का अवसर मिले तो आप अपने राज्य के किन सांस्कृतिक, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, चिह्नों, पुष्पों आदि का प्रयोग कर उसकी साज-सज्जा करेंगे?Show solution
मैं अपने राज्य की पारंपरिक वेशभूषा, लोक-आभूषण, राज्य-चिह्न, प्रसिद्ध पुष्प, और लोककला का प्रयोग कर भारत-रूपी मानव को सुसज्जित करूँगा। उदाहरण के लिए, राज्य की विशिष्ट साड़ी/धोती, पारंपरिक मुकुट, क्षेत्रीय आभूषण, स्थानीय फूलों की माला, और राज्य की पहचान बताने वाले प्रतीक शामिल करूँगा। इससे भारत की बहुरंगी सांस्कृतिक पहचान झलकेगी।
3नदी की यात्राShow solution
इस प्रश्न में गंगा की यात्रा का वर्णन करना है—उद्गम से गंगासागर तक उसके पर्वतीय, मैदानी, सांस्कृतिक, भाषिक और प्राकृतिक स्वरूपों को यात्रा-वृत्तांत के रूप में लिखना है। इसमें हिमालय से निकलकर, तीर्थों और नगरों से गुजरते हुए, खेतों को सिंचित करती हुई, अनेक संस्कृतियों को जोड़ती हुई गंगा के महत्व का रोचक वर्णन करना चाहिए।
23यदि आपको एक सचेत नागरिक के रूप में भारत से अपनी मातृभाषा में संवाद का अवसर मिले तो आप किन विषयों पर और क्या-क्या संवाद करना चाहेंगे? इन संवादों को अपनी मातृभाषा और हिंदी में लिखिए।Show solution
इस प्रश्न में अपनी मातृभाषा और हिंदी में भारत से संवाद लिखना है। विषयों में समाज, पर्यावरण, संस्कृति, शिक्षा, स्वच्छता, एकता, और युवा-शक्ति जैसे विषय आ सकते हैं। उत्तर को संवाद शैली में, पहले मातृभाषा में और फिर उसका हिंदी रूप लिखकर प्रस्तुत करना चाहिए।
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अभ्यास
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Exercises
“भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलधरे!”
इन पंक्तियों में कवि ने चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए भारतभूमि का मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है। इस कविता की कुछ अन्य विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता में से उन विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए—
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गंगा नदी की अपने उद्गम से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की पूरी यात्रा के बीच में आने वाली प्राकृतिक, सांस्कृतिक, भाषिक आदि विशेषताओं का वर्णन करते हुए एक रोचक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
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उपर्युक्त पंक्ति में भारत की प्रशंसा विविध अर्थों में की गई है। आप भी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता की रचना कीजिए और उसका भावार्थ हिंदी में भी लिखिए।
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उपर्युक्त पंक्ति में ‘कनक-शस्य’ का अर्थ है— कनक के समान शस्य (सोने जैसी फसलें) और कमलधरे का अर्थ है— हे कमल को धारण करने वाली! ये शब्द समास शब्द कहलाते हैं। ‘कनक-शस्य’ और ‘कमलधरा’ समस्त पद/सामासिक पद हैं। कमलधरे संबोधन शब्द हैं।
समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है। समास रचना में प्रायः दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। समास रचना से बने शब्द को ‘समस्त पद’ कहते हैं। यदि समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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