राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास)
CBSE · Class 9 · Hindi
NCERT Solutions for राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास) — CBSE Class 9 Hindi.
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प्रश्न से संवाद
1“पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।” यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है?Show solution
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2“जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा” पंक्ति से राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी विशेषता उद्घाटित होती है?Show solution
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3“अति रिस बोले बचन कठोरा” जनक के प्रति परशुराम के कठोर वचन बोलने का मूल कारण था—Show solution
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4राम का कथन “होइहि केउ एक दास तुम्हारा” उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?Show solution
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5“सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।” लक्ष्मण के मुसकराने और उपहास भरे वचनों का क्या कारण था?Show solution
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1“अरध निमेष कलप सम बीता” पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता में यह किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों?Show solution
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2“सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।” पंक्ति के आधार पर बताइए कि परशुराम द्वारा दी गई इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज-समाज पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? तर्क सहित उत्तर दीजिए।Show solution
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3तुलसीदास ने राम और लक्ष्मण के माध्यम से एक ही परिस्थिति के प्रति दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दिखाई हैं। आपकी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का ‘विनय’ का मार्ग उचित है या लक्ष्मण के ‘तर्क’ का? अपने उत्तर का उचित कारण और तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।Show solution
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4‘हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु।’ श्री राम के हृदय में न हर्ष था, न विषाद। यह उनके व्यक्तित्व के किन गुणों को दर्शाता है? उनका भावनात्मक संतुलन इस पूरे पाठ में उन्हें अन्य पात्रों से अलग कैसे स्थापित करता है?Show solution
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1कल्पना कीजिए कि आप जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हैं। परशुराम जी के आगमन से लेकर उनके गमन तक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
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2“अति डरु उतरु देत नुपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।” जनक द्वारा डर से चुप रहने पर अन्य राजा मन में प्रसन्न क्यों हुए होंगे?
(संकेत— सोचिए, यह मनुष्य के व्यवहार की किस सच्चाई को उजागर करता है?)Show solution
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12“अति डर उतर देत नुगु नाही।”
परशुराम के पूछने पर जनक का मौन भयजनित है या विवेकपूर्ण निर्णय? संवाद की स्थिति के आधार पर विश्लेषण कीजिए।Show solution
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13“रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभारा।
धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसारा।”Show solution
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14(क) यदि आप इन पंक्तियों को मंच पर बोलते, तो आपके चेहरे पर कौन-सा भाव होता?
(ख) आपने अनुभव किया होगा कि इस कविता में परिस्थितिवश प्रत्येक पात्र एक अलग भाव का प्रतिनिधि बन जाता है। निम्नलिखित पात्रों को आप कौन-कौन से भावों द्वारा प्रदर्शित करेंगे—
• परशुराम
• राजा जनक
• लक्ष्मण
• राम
• सभा में उपस्थित अन्य राजाShow solution
(ख)
- परशुराम — क्रोध, तेज, अहंकार, रौद्रता
- राजा जनक — विनम्रता, संयम, चिंता
- लक्ष्मण — उपहास, साहस, व्यंग्य
- राम — शांति, धैर्य, विनम्रता
- सभा में उपस्थित अन्य राजा — भय, असहायता, बेचैनी
कविता में हर पात्र की स्थिति के अनुसार उसका भाव बदलता है, इसलिए मंचन में इन्हीं भावों को दिखाना उचित होगा।
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1सभा में परशुराम के प्रति राम के व्यवहार से उनकी विनम्रता, मर्यादा, धीर और उदात्त चरित्र के संबंध में पता चलता है जो किसी भी कुशल शासक के लिए आवश्यक है। आपको किन-किन परिस्थितियों में इन विशेषताओं का परिचय देना पड़ता है? चर्चा कीजिए और लिखिए।Show solution
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2कविता में वर्णित प्रसंग सीता-स्वयंवर की सभा का है। प्राचीन भारतीय समाज में वर-चयन के लिए स्वयंवर की प्रथा प्रचलित थी। इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसी किसी एक पौराणिक-ऐतिहासिक आदि घटना/प्रसंग का वर्णन कीजिए जिससे स्वयंवर विधि द्वारा विवाह की जानकारी मिलती है।Show solution
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1परशुराम के क्रोध को देखकर सीता और उनकी माता सुनयना दोनों चिंतित हैं और सीता के लिए एक-एक पल युग के समान भारी और लंबा प्रतीत हो रहा है। उनकी मनःस्थिति का अनुमान लगाते हुए उस क्षण दोनों के बीच चल रहा मौन संवाद लिखिए।Show solution
सुनयना: बेटी, धैर्य रखो। राम शांत हैं, इसलिए आशा बनी हुई है।
सीता: पर हर क्षण युग जैसा लग रहा है। कहीं कुछ अनिष्ट न हो जाए!
सुनयना: नहीं, पुत्री, मर्यादा और विनय से यह संकट भी टल जाएगा।
सीता: मैं राम की धीरता पर विश्वास करती हूँ, पर सभा का यह तनाव मुझे व्याकुल कर रहा है।
सुनयना: यही प्रार्थना है कि सब मंगल में बदल जाए।
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2सभा में हो रहे संवाद को दूर बैठी सीता, राजा जनक और अन्य लोग भी सुन रहे थे। अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर लिखिए कि उस समय सीता के मन में किस तरह के भाव उत्पन्न हो रहे होंगे? सीता के दृष्टिकोण से पूरी घटना का विश्लेषण कीजिए।Show solution
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3कविता में सभा में उपस्थित राजाओं ने अपनी वीरता, पराक्रम आदि का उल्लेख करते हुए अपना परिचय दिया है। यदि आपको अपना परिचय देना हो तो आप अपना परिचय किस प्रकार देना उचित समझेंगे? अपना परिचय देते हुए कुछ वाक्य लिखिए जिससे आपके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण बातों का पता चलता हो।Show solution
“मेरा नाम ___ है। मैं एक परिश्रमी और जिज्ञासु विद्यार्थी/विद्यार्थिनी हूँ। मुझे पढ़ना, सीखना और दूसरों की सहायता करना अच्छा लगता है। मैं अपने जीवन में अनुशासन, ईमानदारी और आत्मविश्वास को महत्त्व देता/देती हूँ। मेरा प्रयास रहता है कि मैं अपने कार्यों से परिवार, विद्यालय और समाज का नाम रोशन कर सकूँ।”
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- “देखत भृगुपति बेषु कराला।”
- “बोले परसुधरहि अपमाने।”
- “सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतु”
यहाँ परशुराम को विभिन्न नामों से संबोधित किया गया है, जैसे— भृगुपति, परसुधर और भृगुकुलकेतु। आप इस कविता में अनेक विशेषताएँ देख सकते हैं, जैसे— दोहा-चौपाई का क्रम से होना, बिना वक्ता का नाम बताए उनका कथन कह देना, मुहावरों का उपयोग करना आदि। नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और उनके एक-एक उदाहरण दिए गए हैं। एक-एक उदाहरण आप लिखिए।
मन राम राजा बात सिरु (सिरु)
“अति डरु उतरु देत नृपु नाही। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥
सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी॥”
समाचार धनुष मन नाग नगर
नीचे ‘धनुष’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
कमान (हिंदी); धनुः, चापम् (संस्कृत); धनुष (पंजाबी); कमान (क्रॉस) (उर्दू); कमान (कश्मीरी); धनुष, कमानु (सिंधी); धनुष्य (मराठी); धनुष, कामठु (गुजराती); धनुष (कोंकणी); धनु (नेपाली); धनुक (बांग्ला); धनु (असमिया); लिरु (मणिपुरी); धनुष, धनु, कार्मुक (ओड़िया); धनुस्सु, विल्लु (तेलुगू); विलु (तमिल); धनुस्सुं, विल्लुं (मलयालम); विल्लु, धनुष (कन्नड़)
- इनके अतिरिक्त यदि आप धनुष शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
परशुराम के पूछने पर जनक का मौन भयजनित है या विवेकपूर्ण निर्णय? संवाद की स्थिति के आधार पर विश्लेषण कीजिए।
(संकेत- लक्ष्मण के प्रत्युत्तर पर चिंता, गर्व, हँसी, भय, शंका इत्यादि)
अब आप नीचे दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए—
विधा से संवाद
भाषा से संवाद
“नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥”
इस चौपाई को हम गद्य-रूप में भी लिख सकते हैं। इसमें राम परशुराम से विनम्रतापूर्वक कहते हैं— हे नाथ! शिव-धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा आपकी क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते? राम की यह बात सुनकर क्रोधित परशुराम कहते हैं।
अब आप नीचे दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए—
“अति डरु उतरु देत नृपु नाही। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥
सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी॥”
अतिविधियाँ
नीचे ‘धनुष’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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