Skip to main content
Chapter 4 of 12
NCERT Solutions

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास)

CBSE · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास) — CBSE Class 9 Hindi.

111 questions36 flashcards5 concepts

Interactive on Super Tutor

Studying राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास)? Get the full interactive chapter.

Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for ncert solutions and more.

1,000+ Class 9 students started this chapter today

37 Questions Solved · 4 Sections

19 worked solutions below. Unlock all 37 free in Super Tutor

प्रश्न से संवाद

1“पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।” यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है?Show solution
सभा में उपस्थित लोग परशुराम के कराल वेष को देखकर भयभीत हो जाते हैं, लेकिन साथ ही वे अपने-अपने पितु समेत नाम लेकर दंडवत प्रणाम भी करते हैं। इसलिए यहाँ उनकी मनःस्थिति में भय और शिष्टाचार दोनों दिखते हैं।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

2“जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा” पंक्ति से राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी विशेषता उद्घाटित होती है?Show solution
जनक ने फिर आकर सिर नवाया और सीता से भी प्रणाम कराया। इससे उनका संवेदनशील स्वभाव प्रकट होता है, क्योंकि वे स्थिति की गंभीरता और औपचारिक मर्यादा दोनों का ध्यान रखते हैं।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

3“अति रिस बोले बचन कठोरा” जनक के प्रति परशुराम के कठोर वचन बोलने का मूल कारण था—Show solution
परशुराम के क्रोधित होने का मूल कारण शिव-धनुष का टूटना था। उन्होंने सभा में टूटा हुआ धनुष देखकर ही कठोर वचन कहे।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

4राम का कथन “होइहि केउ एक दास तुम्हारा” उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?Show solution
राम का कथन—“होइहि केउ एक दास तुम्हारा”—उनकी विनम्रता, मर्यादा और अपने प्रति किसी भी प्रकार के अहंकार-रहित व्यवहार को दिखाता है।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

5“सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।” लक्ष्मण के मुसकराने और उपहास भरे वचनों का क्या कारण था?Show solution
लक्ष्मण के मुसकराने और व्यंग्य करने का कारण यह था कि वे परशुराम के क्रोध और शक्ति को हल्के में ले रहे थे; वे उनके तेज से अनभिज्ञ-से होकर उपहास कर रहे थे।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

1“अरध निमेष कलप सम बीता” पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता में यह किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों?Show solution
“अरध निमेष कलप सम बीता” का भाव यह है कि बहुत थोड़ा समय भी अत्यंत लंबा और कष्टदायक लग रहा था। यह पंक्ति सीता और उनकी माता सुनयना की मनःस्थिति के संदर्भ में कही गई है। परशुराम के क्रोध, सभा के तनाव और राम-लक्ष्मण के उत्तर-प्रत्युत्तर के बीच सीता को हर क्षण एक कल्प के समान भारी लग रहा था, क्योंकि वे उनके भविष्य को लेकर चिंतित थीं और वातावरण में भय तथा अनिश्चितता छाई हुई थी।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

2“सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।” पंक्ति के आधार पर बताइए कि परशुराम द्वारा दी गई इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज-समाज पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? तर्क सहित उत्तर दीजिए।Show solution
परशुराम की चेतावनी से सभा में उपस्थित राजाओं पर गहरा भय छा गया होगा। वे समझ गए होंगे कि परशुराम अत्यंत क्रोधित, तेजस्वी और शस्त्रधारी हैं; यदि वे सभा छोड़कर न गए तो विनाश हो सकता है। इससे यह भी प्रकट होता है कि संकट के समय बहुत-से लोग साहस दिखाने के बजाय डर जाते हैं और परिस्थितियों के अनुसार चुप रहना या बच निकलना ही बेहतर समझते हैं। कुटिल या कमजोर स्वभाव के राजाओं को तो इस मौन में अपनी सुरक्षा दिखाई दी होगी।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

3तुलसीदास ने राम और लक्ष्मण के माध्यम से एक ही परिस्थिति के प्रति दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दिखाई हैं। आपकी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का ‘विनय’ का मार्ग उचित है या लक्ष्मण के ‘तर्क’ का? अपने उत्तर का उचित कारण और तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।Show solution
मेरी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का विनय का मार्ग अधिक उचित है। राम ने शांत, मर्यादित और सम्मानपूर्ण भाषा में बात की; इससे सामने वाले का रोष कम होता है और स्थिति बिगड़ती नहीं। लक्ष्मण का तर्क भी बुद्धिमत्तापूर्ण था, पर वह व्यंग्य और चुनौती के कारण आग में घी जैसा प्रभाव डाल सकता था। इसलिए ऐसी उग्र स्थिति में विनम्रता, संयम और सम्मान ही सबसे प्रभावी उपाय हैं।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

4‘हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु।’ श्री राम के हृदय में न हर्ष था, न विषाद। यह उनके व्यक्तित्व के किन गुणों को दर्शाता है? उनका भावनात्मक संतुलन इस पूरे पाठ में उन्हें अन्य पात्रों से अलग कैसे स्थापित करता है?Show solution
यह पंक्ति श्रीराम के भावनात्मक संतुलन, धैर्य, समत्व, गंभीरता और आत्मसंयम को दर्शाती है। इतनी उथल-पुथल वाली सभा में भी उनके हृदय में न तो हर्ष है, न विषाद; वे परिस्थिति के वश में नहीं होते। यही उन्हें लक्ष्मण के व्यंग्य, परशुराम के क्रोध और सभा के भय से अलग स्थापित करता है। राम शांत रहकर भी प्रभावशाली हैं—उनकी स्थिरता और मर्यादा ही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी शक्ति बनती है।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

1कल्पना कीजिए कि आप जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हैं। परशुराम जी के आगमन से लेकर उनके गमन तक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
मैं जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हूँ। सीता-स्वयंवर के बाद जैसे ही श्रीराम ने शिव-धनुष को तोड़ा, वैसे ही मुनि परशुराम अत्यंत क्रोधित होकर सभा में आए। उनका वेष कराल था और उनके तेज से सब राजाओं के मन काँप उठे। सभी राजाओं ने नाम लेकर दंडवत प्रणाम किया। जनक ने आकर फिर सिर नवाया और सीता से भी प्रणाम करवाया। विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण का परिचय कराया। परशुराम ने टूटे धनुष को देखकर जनक पर कठोर वचन कहे और सभा में भय का वातावरण छा गया। लक्ष्मण ने बीच-बीच में तीखे और व्यंग्यपूर्ण उत्तर दिए, पर राम शांत और विनम्र बने रहे। अंत में राम की विनम्रता और विश्वामित्र के समझाने से परशुराम का क्रोध शांत हुआ और वे सभा से चले गए।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

2“अति डरु उतरु देत नुपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।” जनक द्वारा डर से चुप रहने पर अन्य राजा मन में प्रसन्न क्यों हुए होंगे?
(संकेत— सोचिए, यह मनुष्य के व्यवहार की किस सच्चाई को उजागर करता है?)
Show solution
अन्य राजाओं के मन में प्रसन्नता इसलिए हुई होगी क्योंकि जनक के मौन से उनकी डरपोक या कुटिल प्रवृत्ति का संकेत मिलता है। यह मनुष्य-स्वभाव की एक सच्चाई उजागर करता है कि कई लोग स्वयं साहस नहीं दिखाते, बल्कि दूसरे के मौन या असहाय होने पर भीतर-ही-भीतर खुश हो जाते हैं। दूसरे की कमजोरी उन्हें अपना अवसर लगती है।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

12“अति डर उतर देत नुगु नाही।”

परशुराम के पूछने पर जनक का मौन भयजनित है या विवेकपूर्ण निर्णय? संवाद की स्थिति के आधार पर विश्लेषण कीजिए।
Show solution
इस स्थिति में जनक का मौन केवल भयजनित नहीं है, बल्कि अधिकतर विवेकपूर्ण निर्णय है। परशुराम अत्यंत क्रोधित, तेजस्वी और शस्त्रधारी हैं; ऐसे में जनक का तुरंत उत्तर देना स्थिति को और बिगाड़ सकता था। उन्होंने मौन रहकर सभा की गरिमा बचाई और शायद यह समझा कि अभी उचित समय पर उचित व्यक्ति ही उत्तर दे। इसलिए उनका मौन धैर्य, मर्यादा और परिस्थिति-समझ का संकेत देता है।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

13“रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभारा।
धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसारा।”
Show solution
इन पंक्तियों में लक्ष्मण की व्यंग्यपूर्ण, साहसी और उग्र वाणी झलकती है। वे परशुराम को बालक कहकर यह जताते हैं कि वे उनके क्रोध से नहीं डरते, और शिव के धनुष की तुलना तिपुरारि के धनुष से करते हुए अपने कथन को तर्कपूर्ण और तीखा बनाते हैं।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

14(क) यदि आप इन पंक्तियों को मंच पर बोलते, तो आपके चेहरे पर कौन-सा भाव होता?
(ख) आपने अनुभव किया होगा कि इस कविता में परिस्थितिवश प्रत्येक पात्र एक अलग भाव का प्रतिनिधि बन जाता है। निम्नलिखित पात्रों को आप कौन-कौन से भावों द्वारा प्रदर्शित करेंगे—
• परशुराम
• राजा जनक
• लक्ष्मण
• राम
• सभा में उपस्थित अन्य राजा
Show solution
(क) मंच पर बोलते समय चेहरे पर रोष और उपहास का भाव होता।

(ख)
- परशुरामक्रोध, तेज, अहंकार, रौद्रता
- राजा जनकविनम्रता, संयम, चिंता
- लक्ष्मणउपहास, साहस, व्यंग्य
- रामशांति, धैर्य, विनम्रता
- सभा में उपस्थित अन्य राजाभय, असहायता, बेचैनी

कविता में हर पात्र की स्थिति के अनुसार उसका भाव बदलता है, इसलिए मंचन में इन्हीं भावों को दिखाना उचित होगा।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

1सभा में परशुराम के प्रति राम के व्यवहार से उनकी विनम्रता, मर्यादा, धीर और उदात्त चरित्र के संबंध में पता चलता है जो किसी भी कुशल शासक के लिए आवश्यक है। आपको किन-किन परिस्थितियों में इन विशेषताओं का परिचय देना पड़ता है? चर्चा कीजिए और लिखिए।Show solution
विनम्रता, मर्यादा, धैर्य और उदात्तता का परिचय हमें कई परिस्थितियों में देना पड़ता है—जैसे जब कोई हमारी बात से असहमत हो, जब सामने वाला क्रोधित हो, जब अधिकार होने पर भी हमें संयम रखना हो, या जब किसी संकट में हमें दूसरों को शांत करना हो। विद्यालय, परिवार, सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व के अवसरों पर ये गुण बहुत काम आते हैं। इनसे विवाद कम होते हैं और सम्मान बढ़ता है।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

2कविता में वर्णित प्रसंग सीता-स्वयंवर की सभा का है। प्राचीन भारतीय समाज में वर-चयन के लिए स्वयंवर की प्रथा प्रचलित थी। इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसी किसी एक पौराणिक-ऐतिहासिक आदि घटना/प्रसंग का वर्णन कीजिए जिससे स्वयंवर विधि द्वारा विवाह की जानकारी मिलती है।Show solution
स्वयंवर द्वारा विवाह का एक प्रसिद्ध उदाहरण सीता-स्वयंवर है। जनक ने सीता के लिए शिव-धनुष उठाने की शर्त रखी थी। अनेक राजा आए, पर कोई भी धनुष न तोड़ सका। अंत में श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से धनुष भंग किया और सीता का वरण किया। इससे पता चलता है कि प्राचीन समाज में योग्य वर का चयन स्वयंवर के माध्यम से किया जाता था।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

1परशुराम के क्रोध को देखकर सीता और उनकी माता सुनयना दोनों चिंतित हैं और सीता के लिए एक-एक पल युग के समान भारी और लंबा प्रतीत हो रहा है। उनकी मनःस्थिति का अनुमान लगाते हुए उस क्षण दोनों के बीच चल रहा मौन संवाद लिखिए।Show solution
सीता: माँ, यह समय कितना कठिन है! परशुराम जी का क्रोध देख कर मन काँप रहा है।

सुनयना: बेटी, धैर्य रखो। राम शांत हैं, इसलिए आशा बनी हुई है।

सीता: पर हर क्षण युग जैसा लग रहा है। कहीं कुछ अनिष्ट न हो जाए!

सुनयना: नहीं, पुत्री, मर्यादा और विनय से यह संकट भी टल जाएगा।

सीता: मैं राम की धीरता पर विश्वास करती हूँ, पर सभा का यह तनाव मुझे व्याकुल कर रहा है।

सुनयना: यही प्रार्थना है कि सब मंगल में बदल जाए।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

2सभा में हो रहे संवाद को दूर बैठी सीता, राजा जनक और अन्य लोग भी सुन रहे थे। अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर लिखिए कि उस समय सीता के मन में किस तरह के भाव उत्पन्न हो रहे होंगे? सीता के दृष्टिकोण से पूरी घटना का विश्लेषण कीजिए।Show solution
सीता के मन में उस समय चिंता, गर्व, आशा, भय और शंका—सभी भाव एक साथ उठ रहे होंगे। लक्ष्मण के व्यंग्य पर वे घबरा भी रही होंगी कि कहीं परशुराम अधिक क्रोधित न हो जाएँ, पर राम की शांति देखकर उन्हें गर्व और विश्वास भी हो रहा होगा। वे सोच रही होंगी कि राम का धैर्य ही इस संकट का समाधान है। जनक और अन्य लोगों की बेचैनी देखकर भी उनके मन में दबी हुई आशंका बनी रहती होगी। इस तरह सीता के दृष्टिकोण से यह प्रसंग तनाव, विश्वास और प्रतीक्षा का संगम बन जाता है।

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

3कविता में सभा में उपस्थित राजाओं ने अपनी वीरता, पराक्रम आदि का उल्लेख करते हुए अपना परिचय दिया है। यदि आपको अपना परिचय देना हो तो आप अपना परिचय किस प्रकार देना उचित समझेंगे? अपना परिचय देते हुए कुछ वाक्य लिखिए जिससे आपके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण बातों का पता चलता हो।Show solution
यदि मुझे अपना परिचय देना हो, तो मैं अपने नाम, परिवार, रुचियों, आदर्शों और स्वभाव के बारे में संक्षेप में बताऊँगा/बताऊँगी। उदाहरण के लिए—

“मेरा नाम ___ है। मैं एक परिश्रमी और जिज्ञासु विद्यार्थी/विद्यार्थिनी हूँ। मुझे पढ़ना, सीखना और दूसरों की सहायता करना अच्छा लगता है। मैं अपने जीवन में अनुशासन, ईमानदारी और आत्मविश्वास को महत्त्व देता/देती हूँ। मेरा प्रयास रहता है कि मैं अपने कार्यों से परिवार, विद्यालय और समाज का नाम रोशन कर सकूँ।”

Not sure why a step works? check your working in Super Tutor

20नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए—

- “देखत भृगुपति बेषु कराला।”
- “बोले परसुधरहि अपमाने।”
- “सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतु”

यहाँ परशुराम को विभिन्न नामों से संबोधित किया गया है, जैसे— भृगुपति, परसुधर और भृगुकुलकेतु। आप इस कविता में अनेक विशेषताएँ देख सकते हैं, जैसे— दोहा-चौपाई का क्रम से होना, बिना वक्ता का नाम बताए उनका कथन कह देना, मुहावरों का उपयोग करना आदि। नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और उनके एक-एक उदाहरण दिए गए हैं। एक-एक उदाहरण आप लिखिए।
21यह कविता अवधी भाषा में लिखी गई है जो कि हिंदी भाषा का ही एक स्वरूप है और उत्तर प्रदेश के अनेक स्थानों पर बोली जाती है। कविता में ऐसे बहुत से शब्द आए हैं, जो अवधी भाषा के हैं। ऐसे शब्दों को पहचान कर उनके खड़ी बोली हिंदी रूप लिखिए। साथ ही आपकी भाषा में इनके लिए कौन-से शब्द प्रयुक्त होते हैं, उन्हें भी लिखिए।
22नीचे कोष्ठक में कविता से कुछ शब्द चुनकर दिए गए हैं। उन शब्दों से संबंधित लोकोक्ति और उनका अर्थ लिखकर स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग कीजिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।

मन राम राजा बात सिरु (सिरु)
23अब आप नीचे दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए—

“अति डरु उतरु देत नृपु नाही। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥
सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी॥”
1यह कविता संवाद का सुंदर उदाहरण है। तालिका में दिए गए कथनों को पढ़कर बताइए कि कौन-सा कथन किसका हो सकता है। अपनी समझ से सही (✓) का चिह्न लगाइए—
1रामचरितमानस के इस प्रसंग का मंचन लोकनाट्य, रामलीला और कठपुतली कला में बड़ी जीवंतता से किया जा सकता है। कलात्मक तकनीकों (ध्वनि, भाव, संगीत, वेशभूषा) का उपयोग करते हुए कविता को एक दृश्य नाटक के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
2'कठिन परिस्थितियों में भी सत्य कहने का साहस करना आवश्यक है।' इस विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा अथवा वाद-विवाद गतिविधि के माध्यम से अपने विचार साझा कीजिए।
27पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अब अपने समूह में मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों—

समाचार धनुष मन नाग नगर
28“अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष के तोरा॥”

नीचे ‘धनुष’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।

कमान (हिंदी); धनुः, चापम् (संस्कृत); धनुष (पंजाबी); कमान (क्रॉस) (उर्दू); कमान (कश्मीरी); धनुष, कमानु (सिंधी); धनुष्य (मराठी); धनुष, कामठु (गुजराती); धनुष (कोंकणी); धनु (नेपाली); धनुक (बांग्ला); धनु (असमिया); लिरु (मणिपुरी); धनुष, धनु, कार्मुक (ओड़िया); धनुस्सु, विल्लु (तेलुगू); विलु (तमिल); धनुस्सुं, विल्लुं (मलयालम); विल्लु, धनुष (कन्नड़)

- इनके अतिरिक्त यदि आप धनुष शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
1“अरध निमेष कलप सम बीता” पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता में यह किसके संदर्भ में कहा गया गया है और क्यों?
30यहाँ परशुराम को विभिन्न नामों से संबोधित किया गया है, जैसे— भृगुपति, परसुधर और भृगुकुलकेतु। आप इस कविता में अनेक विशेषताएँ देख सकते हैं, जैसे— दोहा-चौपाई का क्रम से होना, बिना वक्ता का नाम बताए उनका कथन कह देना, मुहावरों का उपयोग करना आदि। नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और उनके एक-एक उदाहरण दिए गए हैं। एक-एक उदाहरण आप लिखिए।
31नीचे दिए गए भावों/मनःस्थिति को दर्शाने वाली पंक्तियों को कविता से चिह्नित कीजिए और बताइए कि यह भाव किस पात्र से संबंधित है और उसकी इस मनःस्थिति का कारण क्या है? आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।
32• “अति डर उतर देत नुगु नाही।”

परशुराम के पूछने पर जनक का मौन भयजनित है या विवेकपूर्ण निर्णय? संवाद की स्थिति के आधार पर विश्लेषण कीजिए।
2सभा में हो रहे संवाद को दूर बैठी सीता, राजा जनक और अन्य लोग भी सुन रहे थे। अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर लिखिए कि उस समय सीता के मन में किस तरह के भाव उत्पन्न हो रहे होंगे? सीता के दृष्टिकोण से पूरी घटना का विश्लेषण कीजिए।
(संकेत- लक्ष्मण के प्रत्युत्तर पर चिंता, गर्व, हँसी, भय, शंका इत्यादि)
34इस चौपाई को हम गद्य-रूप में भी लिख सकते हैं। इसमें राम परशुराम से विनम्रतापूर्वक कहते हैं— हे नाथ! शिव-धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा आपकी क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते? राम की यह बात सुनकर क्रोधित परशुराम कहते हैं।

अब आप नीचे दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए—

विधा से संवाद

1नीचे कविता के संवादों की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं। उन विशेषताओं को दर्शाने वाली पंक्तियों के उदाहरण कविता से ढूँढ़कर लिखिए।

भाषा से संवाद

1नीचे लिखी चौपाई को पढ़िए—

“नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥”

इस चौपाई को हम गद्य-रूप में भी लिख सकते हैं। इसमें राम परशुराम से विनम्रतापूर्वक कहते हैं— हे नाथ! शिव-धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा आपकी क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते? राम की यह बात सुनकर क्रोधित परशुराम कहते हैं।

अब आप नीचे दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए—

“अति डरु उतरु देत नृपु नाही। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥
सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी॥”

अतिविधियाँ

1“अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष के तोरा॥”

नीचे ‘धनुष’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।

18 more solved questions in राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास)

Every remaining exercise is solved step by step in Super Tutor, plus practice quizzes and flashcards for this chapter. Free to start.

Stuck on a step?

Ask Super Tutor AI to explain any solution on this page in a simpler way — free, 24x7.

Ask a Doubt Free

Frequently Asked Questions

What are the important topics in राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास) for CBSE Class 9 Hindi?
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास) covers several key topics that are frequently asked in CBSE Class 9 board exams. Focus on the core concepts listed on this page and practise related questions to build confidence.
How to score full marks in राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास) — CBSE Class 9 Hindi?
Understand the core concepts first, then work through the 111 practice questions available for this chapter. Revise formulas and definitions regularly, and use flashcards for quick recall before the exam.
Where can I get free NCERT Solutions for राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास) Class 9 Hindi?
This page has free step-by-step NCERT Solutions for every exercise question in राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास) (CBSE Class 9 Hindi) — written the way examiners award marks: given, formula, working, answer.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

For serious students

Get the full राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास) chapter — for free.

Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for CBSE Class 9 Hindi.