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Chapter 3 of 12
NCERT Solutions

क्या लिखूँ? (पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी)

CBSE · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for क्या लिखूँ? (पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी) — CBSE Class 9 Hindi.

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31 Questions Solved · 13 Sections

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मेरे उत्तर मेरे तर्क

1“हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?Show solution
यह उदाहरण यह स्पष्ट करता है कि विषय से अधिक लेखक के मनोभाव महत्त्वपूर्ण हैं। जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी चल सकती है, वैसे ही भावों को प्रकट करने के लिए कोई भी विषय लिया जा सकता है।

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2“उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है... उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?Show solution
मानटेन की पद्धति में लेखक जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया है, उसी को लिखता है। इसलिए यह निर्णय अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाने का आधार बनता है।

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3“तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल... वृद्धों के लिए अतीत सुखद...”
यह तुलना किस पर आधारित है?
Show solution
यह तुलना अभिलाषा और अनुभव पर आधारित है। तरुणों की अभिलाषा भविष्य की ओर होती है और वृद्धों का अनुभव अतीत की ओर।

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4निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?Show solution
अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख यह दिखाने के लिए किया गया है कि एक ही रचना में एक साथ कई विषयों का समावेश कैसे किया जा सकता है।

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5निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?Show solution
पाठ में बताया गया है कि सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। इतिहास में कोई भी ऐसा काल नहीं रहा जब सुधारों की जरूरत न हो।

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मेरी समझ मेरे विचार

1निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?Show solution
ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लिखने के लिए पहले मन में एक विशेष मानसिक स्थिति या प्रेरणा आनी चाहिए; उस समय भाव अपने-आप उमड़ते हैं और विषय की चिंता नहीं रहती। दूसरी ओर, लेखक के अनुसार उसे ऐसा अनुभव नहीं होता, इसलिए उसे लिखने के लिए सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है। उसके लिए विषय पहले से खोजकर, सामग्री जुटाकर और योजना बनाकर लिखना आवश्यक है।

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2लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?Show solution
मेरे विचार से तरुण वर्तमान से इसलिए असंतुष्ट होते हैं क्योंकि वे तुरंत परिवर्तन चाहते हैं, उन्हें वर्तमान की सीमाएँ और रुकावटें परेशान करती हैं, और वे भविष्य को अधिक अच्छा बनाने का सपना देखते हैं। वृद्ध वर्तमान से इसलिए असंतुष्ट होते हैं क्योंकि उन्हें अपने अतीत की अच्छी बातें याद आती हैं, वे वर्तमान में परिवर्तन, शोर-शराबा या मूल्य-परिवर्तन देखकर बेचैन होते हैं, और अनुभव के कारण वर्तमान को अपेक्षाकृत कम संतोषजनक मानते हैं।

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3नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?Show solution
नमिता ने ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ विषय पर और अमिता ने समाज-सुधार पर निबंध लिखवाना चाहा। लेखक को कठिनाई इसलिए हुई कि दोनों विषय परीक्षा में आ चुके थे, दोनों पर पाँच पेज लिखने थे, और उसके पास न पर्याप्त सामग्री थी, न विश्वकोश, न शोध का समय। ऊपर से उसे दोनों विषयों को जोड़कर आदर्श निबंध भी लिखना था।

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4निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?Show solution
निबंधशास्त्र के आचार्यों ने ये युक्तियाँ बताई हैं—

- निबंध छोटा होना चाहिए।
- निबंध के दो प्रधान अंग हैं: सामग्री और शैली
- निबंध लिखने से पहले विचार-समूह एकत्र करना चाहिए।
- लिखने से पहले रूपरेखा बना लेनी चाहिए।
- भाषा में प्रवाह होना चाहिए।
- वाक्य छोटे-छोटे हों, पर एक-दूसरे से जुड़े हों।
- अलंकार, मुहावरे, लोकोक्तियों का समावेश हो सकता है।

मैं निबंध लिखने से पहले विषय को समझता हूँ, मुख्य बिंदु लिख लेता हूँ, थोड़ा सोच-विचार करता हूँ और फिर क्रम से निबंध लिखता हूँ।

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5मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?Show solution
देखना, सुनना और अनुभव करना निबंध लेखन के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि इससे लेखक के पास वास्तविक सामग्री आती है। इससे निबंध में सच्चाई, ताजगी, स्वाभाविकता और जीवंतता आती है। केवल पुस्तकीय ज्ञान से नहीं, बल्कि अपने अनुभवों से लिखने पर निबंध अधिक प्रभावशाली बनता है।

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विधा से संवाद

1दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?Show solution
यह प्रश्न गतिविधि आधारित है। इसके लिए विद्यार्थियों को दिए गए आरेख के आधार पर निबंध लिखना है। यदि कोई दूसरा ढंग बेहतर लगे, तो उसका आरेख बनाकर कारण बताना है। इसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है।

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भाव-विस्तार

1“तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक”

यदि उपर्युक्त वाक्य का भाव-विस्तार किया जाए तो कहा जा सकता है कि— युवा पीढ़ी में किसी समस्या को लेकर आक्रोश की भावना प्रबल होती है। वह किसी भी समस्या के समाधान के लिए बैठकर बातचीत करने के बजाय उस पर त्वरित निर्णय लेना चाहते हैं जबकि वृद्ध पीढ़ी किसी समस्या के समाधान के लिए अनुभव और परंपरागत ढंग पर विश्वास करती है।

पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए—

- “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
- “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
- “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
- “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
Show solution
- “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं...” — जो लोग वास्तविक संघर्षों और कठिनाइयों से दूर रहते हैं, उन्हें संसार की बातें आसान और सुंदर लगती हैं। उन्हें समस्याओं का असली रूप नहीं दिखता, इसलिए वे जीवन को अधिक आकर्षक समझते हैं।

- “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ...” — मनुष्य के इतिहास में हर युग में किसी न किसी प्रकार की बुराइयाँ रही हैं, इसलिए सुधार की आवश्यकता हमेशा बनी रही है। समाज कभी पूर्ण नहीं रहा, इसलिए सुधार भी चलते रहे हैं।

- “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।” — आज के युवा भविष्य की ओर देखते हैं, लेकिन समय के साथ वे स्वयं वृद्ध होंगे और तब उन्हें अपना अतीत अधिक अच्छा लगेगा। हर पीढ़ी अपनी उम्र के अनुसार सोचती है।

- “निबंध छोटा होना चाहिए...” — छोटा निबंध अधिक प्रभावशाली होता है, क्योंकि उसमें विचार सघन रहते हैं और लंबाई के कारण रचना की सुंदरता नष्ट नहीं होती। संक्षिप्तता से निबंध अधिक सजीव और सुगठित बनता है।

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मेरा अनुभव

1इस निबंध में लेखक को दो विषयों ('दूर के ढोल सुहावने होते हैं' और 'समाज-सुधार') पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?Show solution
मुझे कहानी, यात्रा-वृत्तांत और संवाद जैसे विषयों पर लिखना अपेक्षाकृत सरल लगता है, क्योंकि इनमें अनुभव और कल्पना दोनों का सहारा लिया जा सकता है। समाज-सुधार या विचारात्मक विषयों पर लिखना कठिन लगता है, क्योंकि उनमें तर्क, उदाहरण और विषय की गहरी समझ चाहिए। कठिनाई तब और बढ़ती है जब विषय बहुत व्यापक हो या उस पर सामग्री कम हो।

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विषयों से संवाद

1निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।Show solution
- बुद्धदेव ने करुणा, अहिंसा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया।
- महावीर स्वामी ने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम पर बल दिया।
- नागार्जुन ने बौद्ध दर्शन को गहराई दी और समाज में विचारशीलता का प्रचार किया।
- शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और भारतीय चिंतन को संगठित किया।
- कबीर ने आडंबर, जाति-पाँति और बाहरी दिखावे का विरोध किया।
- गुरु नानक ने समानता, सेवा, नाम-स्मरण और भाईचारे का संदेश दिया।

इन सभी ने अपने समय के समाज को नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक सुधार की दिशा दिखाई।

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2निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।Show solution
हमारे आसपास भी कई व्यक्ति और संस्थाएँ काम कर रही हैं। जैसे—

- स्त्री-शिक्षा के लिए विद्यालय चलाने वाली संस्थाएँ और सामाजिक कार्यकर्ता।
- पर्यावरण के लिए वृक्षारोपण करने वाले समूह और स्वच्छता अभियान चलाने वाली संस्थाएँ।
- असमानता के विरुद्ध काम करने वाले संगठन, जो गरीब बच्चों की पढ़ाई, भोजन और सहायता करते हैं।
- दिव्यांगजन के लिए विशेष विद्यालय, पुनर्वास केंद्र और सहायता संस्थाएँ।

इन लोगों और संस्थाओं का कार्य समाज को अधिक समान, शिक्षित और संवेदनशील बनाना है।

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3आपको 'समाज-सुधार' करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।Show solution
यदि मुझे समाज-सुधार का अवसर मिले, तो मैं सबसे पहले शिक्षा, स्वच्छता, स्त्री-समानता, नशामुक्ति, अंधविश्वास-निवारण और पर्यावरण संरक्षण पर काम करना चाहूँगा।

मैं लोगों को जागरूकता अभियान, बातचीत, रैलियों और सामाजिक सेवा के माध्यम से बदलने की कोशिश करूँगा। बच्चों की पढ़ाई, लड़कियों की शिक्षा, पेड़ लगाना, पानी बचाना और भेदभाव दूर करना मेरे मुख्य लक्ष्य होंगे।

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4भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।

सृजन

1'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।

आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी— 'आम के आम गुठलियों के दाम'। अब आप इस लोकोक्ति और 'जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास' विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
2"जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।"

आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी

व्याकरण की बात

1निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
2नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए—
- निबंध लिखना बड़ी ______ (कठिन”) की बात है।
- वर्तमान से दोनों को ______ (“संतोष”) होता है।
- वाक्यों में कुछ ______ (“स्पष्ट”) भी चाहिए, क्योंकि यह ______ (“स्पष्ट”) या ______ (“बोध”) गांभीर्य ला देती है।
3नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।

मधुर सुधार सुंदर गति समाज

उदाहरण— मधुर → मधुरता, मधुरमय, सुमधुर

भाव एक शब्द अनेक

1इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, *विचार-मनन-चिंतन* या *सुहावने-मधुर-मनमोहक*। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।

अतिविधियाँ

1“खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा॥”

पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।
2कक्षा में ‘युवा और वृद्ध— दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर’ पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक *मल्हार* के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।

भाषा संगम

1“निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।”

नीचे ‘निबंध’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।

निबंध (हिंदी); निबंध: (संस्कृत); निबंध (पंजाबी); मजमून (उर्दू); मजमून (कश्मीरी); मजमून, निबंधु (सिन्धी); निबंध (मराठी); निबंध (गुजराती); निबंध (कोंकणी); निबंध (नेपाली); निबंध, प्रबंध (बांग्ला); निबंध-रचना (असमिया); निबंध, वाइड (मणिपुरी); प्रबंध, रचना (ओड़िआ); व्यासमु (तेलुगु); कट्टुरे (तमिल); उपन्यासम् (मलयालम); लेख, प्रबंध (कन्नड़)।

- इनके अतिरिक्त यदि आप ‘निबंध’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

झरोखे से

1पाठ में आदर्श निबंध लेखन के विषय में विस्तार से बताया गया है। अब आप सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' का लेख 'मैं क्यों लिखता हूँ?' पढ़िए—

### मैं क्यों लिखता हूँ?

मैं क्यों लिखता हूँ? यह प्रश्न बड़ा सरल जान पड़ता है पर बड़ा कठिन भी है, क्योंकि इसका सच्चा उत्तर लेखक के आंतरिक जीवन के स्तरों से संबंध रखता है। उन सबको संक्षेप में कुछ वाक्यों में बाँध देना आसान तो नहीं ही है, न जाने संभव भी है या नहीं? इतना ही किया जा सकता है कि उनमें से कुछ का स्पर्श किया जाए— विशेष रूप से ऐसों का जिन्हें जानना दूसरों के लिए उपयोगी हो सकता है।

एक उत्तर तो यह है कि मैं इसीलिए लिखता हूँ कि स्वयं जानना चाहता हूँ कि क्यों लिखता हूँ— लिखे बिना इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल सकता है। वास्तव में सच्चा उत्तर यही है। लिखकर ही लेखक उस आभ्यंतर विवशता को पहचानता है जिसके कारण उसने लिखा और लिखकर ही वह उससे मुक्त हो जाता है। मैं भी उस आंतरिक विवशता से मुक्ति पाने के लिए तटस्थ होकर उसे देखने और पहचान लेने के लिए लिखता हूँ। मेरा विश्वास है कि सभी कृतिकार— क्योंकि सभी लेखक कृतिकार नहीं होते, न उनका सब लेखन ही कृति होता है— इसीलिए लिखते हैं। यह ठीक है कि कुछ ख्याति मिल जाने के बाद कुछ बाहर की विवशता से भी लिखा जाता है— संपादकों के आग्रह से, प्रकाशक के तकाजे से, आर्थिक आवश्यकता से। पर एक तो कृतिकार हमेशा अपने सम्मुख ईमानदारी से यह भेद बनाए रखता है कि कौन-सी कृति भीतरी प्रेरणा का फल है, कौन-सा लेखन बाहरी दबाव का, दूसरे यह भी होता है कि बाहर का दबाव वास्तव में दबाव नहीं रहता, वह मानो भीतरी उन्मेष का निमित्त बन जाता है।

—सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'

## खोजबीन

पाठ में आए साहित्यकारों बाणभट्ट, श्रीहर्ष, अमीर खुसरो, सेनापति, महात्मा गांधी, ए.जी. गार्डिनर, शेक्सपीयर, मानटेन के विषय में पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
2मैं क्यों लिखता हूँ?

अभ्यास

1“तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक”

यदि उपर्युक्त वाक्य का भाव-विस्तार किया जाए तो कहा जा सकता है कि— युवा पीढ़ी में किसी समस्या को लेकर आक्रोश की भावना प्रबल होती है। वह किसी भी समस्या के समाधान के लिए बैठकर बातचीत करने के बजाय उस पर त्वरित निर्णय लेना चाहते हैं जबकि वृद्ध पीढ़ी किसी समस्या के समाधान के लिए अनुभव और परंपरागत ढंग पर विश्वास करती है.

पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए—

- “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
- “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
- “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
- “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
1'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है.

आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी— 'आम के आम गुठलियों के दाम'। अब आप इस लोकोक्ति और 'जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास' विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए.
2"जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।"

आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी

डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो.

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