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Chapter 14 of 17
NCERT Solutions

प्रहलाद अग्रवाल (तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र) — NCERT Solutions

CBSE · Class 10 · Hindi- Course B

NCERT Solutions for प्रहलाद अग्रवाल (तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र), CBSE Class 10 Hindi- Course B: 38 textbook questions solved step by step.

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38 Questions Solved · 7 Sections

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मौखिक प्रश्न

1'तीसरी कसम' फ़िल्म को कौन-कौन से पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है?Show solution

उत्तर:
'तीसरी कसम' फ़िल्म को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक (राष्ट्रीय पुरस्कार) से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त इसे बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार भी मिला तथा मास्को फ़िल्म फेस्टिवल में भी इसे पुरस्कृत किया गया।

2शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं?Show solution

उत्तर:
शैलेंद्र ने अपने जीवन में केवल एक ही फ़िल्म बनाई — 'तीसरी कसम'। वे मूलतः गीतकार थे, फ़िल्म निर्माता नहीं।

3राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए।Show solution

उत्तर:
राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ प्रमुख फ़िल्में हैं — 'आग', 'बरसात', 'आवारा', 'श्री 420', 'जागते रहो', 'मेरा नाम जोकर', 'बॉबी' आदि।

4'तीसरी कसम' फ़िल्म के नायक व नायिकाओं के नाम बताइए और फ़िल्म में इन्होंने किन पात्रों का अभिनय किया है?Show solution

उत्तर:
'तीसरी कसम' फ़िल्म के नायक राजकपूर थे, जिन्होंने हीरामन (एक भोले-भाले गाड़ीवान) का अभिनय किया। नायिका वहीदा रहमान थीं, जिन्होंने हीराबाई (एक नौटंकी कलाकार) का अभिनय किया।

5फ़िल्म 'तीसरी कसम' का निर्माण किसने किया था?Show solution

उत्तर:
फ़िल्म 'तीसरी कसम' का निर्माण प्रसिद्ध गीतकार शैलेंद्र ने किया था। यह उनके द्वारा निर्मित एकमात्र फ़िल्म थी।

6राजकपूर ने 'मेरा नाम जोकर' के निर्माण के समय किस बात की कल्पना भी नहीं की थी?Show solution

उत्तर:
राजकपूर ने 'मेरा नाम जोकर' के निर्माण के समय यह कल्पना भी नहीं की थी कि इस फ़िल्म को बनाने में उन्हें पूरे छह साल लग जाएँगे और इसके निर्माण में इतना अधिक समय व धन व्यय होगा।

7राजकपूर की किस बात पर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया?Show solution

उत्तर:
जब राजकपूर ने शैलेंद्र से फ़िल्म में काम करने के लिए अपना मेहनताना (पारिश्रमिक) माँगा, तो शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया। उन्हें यह अपेक्षा नहीं थी कि उनका घनिष्ठ मित्र उनसे पारिश्रमिक माँगेगा।

8फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को किस तरह का कलाकार मानते थे?Show solution

उत्तर:
फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन मानते थे। वे उन्हें एक ऐसा कुशल अभिनेता मानते थे जो अपनी आँखों से भी अभिनय कर सकते थे — अर्थात् उनकी आँखें बोलती थीं।

लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर

1'तीसरी कसम' फ़िल्म को 'सैल्यूलाइड पर लिखी कविता' क्यों कहा गया है?Show solution

उत्तर:
'तीसरी कसम' फ़िल्म में कविता जैसी संवेदनशीलता, भावप्रवणता और कलात्मकता थी। इसमें लोक-तत्त्व, मानवीय भावनाएँ और साहित्यिक गहराई इस प्रकार उतरी थीं जैसे कोई कविता कैमरे की रील पर लिख दी गई हो। इसीलिए इसे 'सैल्यूलाइड पर लिखी कविता' कहा गया।

2'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?Show solution

उत्तर:
'तीसरी कसम' फ़िल्म की संवेदना अत्यंत गहरी और साहित्यिक थी। यह व्यावसायिक दृष्टि से लाभदायक नहीं लगती थी। वितरकों को लगता था कि यह फ़िल्म दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाएगी और उन्हें आर्थिक लाभ नहीं होगा, इसलिए कोई खरीददार नहीं मिला।

3शैलेंद्र के अनुसार कलाकार का कर्तव्य क्या है?Show solution

उत्तर:
शैलेंद्र के अनुसार कलाकार का कर्तव्य केवल दर्शकों की रुचि के अनुसार उथला मनोरंजन परोसना नहीं है। कलाकार को दर्शकों की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करना चाहिए और उन्हें उच्च भावनाओं व संवेदनाओं से जोड़ना चाहिए।

4फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफाई क्यों कर दिया जाता है?Show solution

उत्तर:
फ़िल्मों में त्रासद (दुखद) स्थितियों को ग्लोरिफाई इसलिए कर दिया जाता है क्योंकि फ़िल्म निर्माता दर्शकों को आकर्षित करने और अधिक धन कमाने के लिए दुख को भी मनोरंजक बना देते हैं। व्यावसायिक लाभ के लिए वे यथार्थ को बदल देते हैं।

5'शैलेंद्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्द दिए हैं'—इस कथन से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।Show solution

उत्तर:
राजकपूर एक संवेदनशील कलाकार थे जो अपनी भावनाओं को अभिनय के माध्यम से व्यक्त करते थे। शैलेंद्र ने अपने गीतों में उन्हीं भावनाओं को शब्दों में पिरोया। दोनों की संवेदनाएँ एक-दूसरे की पूरक थीं — राजकपूर जो अभिनय से कहते थे, शैलेंद्र वही गीतों में कह देते थे।

6लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?Show solution

उत्तर:
'शोमैन' से तात्पर्य ऐसे कलाकार से है जो दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दे। राजकपूर में अभिनय, निर्देशन और मनोरंजन की अद्भुत क्षमता थी। वे अपनी प्रस्तुति से दर्शकों पर गहरा प्रभाव डालते थे, इसीलिए उन्हें एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा गया।

7फ़िल्म 'श्री 420' के गीत 'रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति क्यों की?Show solution

उत्तर:
संगीतकार जयकिशन को लगा कि 'दसों दिशाओं' वाली बात सामान्य दर्शकों की समझ से परे है क्योंकि लोग चार दिशाएँ जानते हैं, दस नहीं। उन्होंने 'चारों दिशाओं' करने का सुझाव दिया। परंतु शैलेंद्र ने अपनी बात पर अडिग रहते हुए 'दसों दिशाओं' ही रखा।

लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर

1राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेंद्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?Show solution

उत्तर:
शैलेंद्र एक आदर्शवादी और भावुक कवि थे। उन्हें धन और यश की उतनी चाह नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि की। फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'मारे गए गुलफाम' उन्हें बेहद प्रिय थी और वे उसे पर्दे पर उतारना चाहते थे। उनके लिए यह फ़िल्म एक कलात्मक अभिव्यक्ति थी, व्यावसायिक उद्यम नहीं। वे जानते थे कि यह फ़िल्म उनके हृदय की आवाज़ है और इसे बनाना उनके लिए आवश्यक था, चाहे आर्थिक हानि ही क्यों न हो।

2'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया है? स्पष्ट कीजिए।Show solution

उत्तर:
राजकपूर एक महान् अभिनेता थे जो अपनी आँखों से भी बोल सकते थे। 'तीसरी कसम' में उन्होंने हीरामन के भोलेपन, सरलता और निश्छल प्रेम को इतनी तन्मयता से जिया कि उनका अपना व्यक्तित्व पूरी तरह हीरामन में समा गया। वे एक खालिस देहाती गाड़ीवान बन गए जो दिल की भाषा समझता है। हीराबाई की उपेक्षा पर उनके चेहरे पर जो भाव आते हैं, वे हीरामन के हैं, राजकपूर के नहीं — यही उनकी महानता है।

3लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि 'तीसरी कसम' ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?Show solution

उत्तर:
फणीश्वरनाथ रेणु ने स्वयं इस फ़िल्म की पटकथा तैयार की थी। मूल कहानी 'मारे गए गुलफाम' का रेशा-रेशा, उसकी छोटी-से-छोटी बारीकियाँ फ़िल्म में पूरी तरह उतर आईं। कहानी के पात्रों, भावनाओं, लोक-तत्त्वों और संवेदनाओं को बिना किसी व्यावसायिक समझौते के पर्दे पर प्रस्तुत किया गया। इसीलिए लेखक ने कहा कि इस फ़िल्म ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया।

4शैलेंद्र के गीतों की क्या विशेषताएँ हैं? अपने शब्दों में लिखिए।Show solution

उत्तर:
शैलेंद्र के गीतों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं —

  • उनके गीत भाव-प्रवण थे अर्थात् भावनाओं से भरपूर थे।
  • वे दुरूह (कठिन) नहीं थे — सरल भाषा में गहरी बात कहते थे।
  • उनके गीतों में जीवन का यथार्थ झलकता था।
  • वे दर्शकों की रुचि का परिष्कार करते थे, उथलेपन को नहीं थोपते थे।
  • उनके गीतों में व्यथा भी थी, किंतु वह पराजित नहीं करती थी, बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा देती थी।
  • उनके गीत लोक-संस्कृति से जुड़े थे।
5फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेंद्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

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6शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है—कैसे? स्पष्ट कीजिए।

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7लेखक के इस कथन से कि 'तीसरी कसम' फ़िल्म कोई सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था, आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।

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लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए

1...वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।

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2उनका यह दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।

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3व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।

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4दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।

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5उनके गीत भाव-प्रवण थे—दुरूह नहीं।

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भाषा अध्ययन

1पाठ में आए 'से' के विभिन्न प्रयोगों से वाक्य की संरचना को समझिए।

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2इस पाठ में आए निम्नलिखित वाक्यों की संरचना पर ध्यान दीजिए।

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3पाठ में आए निम्नलिखित मुहावरों से वाक्य बनाइए — चेहरा मुरझाना, चक्कर खा जाना, दो से चार बनाना, आँखों से बोलना

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4निम्नलिखित शब्दों के हिंदी पर्याय दीजिए।

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5निम्नलिखित का संधिविच्छेद कीजिए।

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6निम्नलिखित का समास विग्रह कीजिए और समास का नाम भी लिखिए।

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योग्यता विस्तार

1फणीश्वरनाथ रेणु की किस कहानी पर 'तीसरी कसम' फ़िल्म आधारित है, जानकारी प्राप्त कीजिए और मूल रचना पढ़िए।

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2समाचार पत्रों में फ़िल्मों की समीक्षा दी जाती है। किन्हीं तीन फ़िल्मों की समीक्षा पढ़िए और 'तीसरी कसम' फ़िल्म को देखकर इस फ़िल्म की समीक्षा स्वयं लिखने का प्रयास कीजिए।

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परियोजना कार्य

1वर्तमान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए।

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2'तीसरी कसम' जैसी और भी फ़िल्में हैं जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची तैयार करें।

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3लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। आप भी अपने क्षेत्र के प्रचलित दो-तीन लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए।

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in प्रहलाद अग्रवाल (तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र) for CBSE Class 10 Hindi- Course B?
Key topics in प्रहलाद अग्रवाल (तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र) include लेखक परिचय और अध्याय का संदर्भ, शैलेंद्र का व्यक्तित्व और रचनाशीलता, ‘तीसरी कसम’ का साहित्यिक और कलात्मक महत्व, राजकपूर, हीरामन और अभिनय की शक्ति. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 10 board exam.
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Sources & Official References

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