प्रेमचंद ( बड़े भाई साहब) — NCERT Solutions
CBSE · Class 10 · Hindi- Course B
NCERT Solutions for प्रेमचंद ( बड़े भाई साहब), CBSE Class 10 Hindi- Course B: 32 textbook questions solved step by step.
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मौखिक प्रश्न
1कथा नायक की रुचि किन कार्यों में थी?Show solution
उत्तर:
कथा नायक (छोटे भाई) की रुचि खेल-कूद, कनकौए उड़ाना, गुल्ली-डंडा खेलना, मैदान में उछल-कूद करना तथा मेला-तमाशा देखने जैसे कार्यों में थी। पढ़ाई में उसका बिल्कुल मन नहीं लगता था।
2बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?Show solution
उत्तर:
बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल यही पूछते थे — "कहाँ थे?" अर्थात् वे हमेशा छोटे भाई की अनुपस्थिति और खेल-कूद में समय बर्बाद करने पर नज़र रखते थे।
3दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?Show solution
उत्तर:
दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के मन में अभिमान आ गया। उसे लगने लगा कि बिना पढ़े भी वह पास हो जाता है, इसलिए उसने खेल-कूद और मनोरंजन में और अधिक समय बिताना शुरू कर दिया तथा बड़े भाई साहब की डाँट-फटकार की परवाह कम हो गई।
4बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे?Show solution
उत्तर:
बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में पाँच साल बड़े थे। जब छोटा भाई नौवीं कक्षा में था, तब बड़े भाई साहब दसवीं (मैट्रिक) की कक्षा में पढ़ते थे। कहानी के आरंभ में छोटा भाई पाँचवीं कक्षा में और बड़े भाई साहब आठवीं कक्षा में थे।
5बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?Show solution
उत्तर:
बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए कभी कापी पर, कभी किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों और बिल्लियों के चित्र बनाते थे। कभी-कभी वे किसी एक शब्द या नाम को बार-बार लिखते रहते थे।
लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर
1छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?Show solution
उत्तर:
छोटे भाई ने टाइम-टेबिल बनाते समय सोचा कि वह सुबह उठकर पढ़ेगा, खेलने का समय निश्चित करेगा और हर विषय को उचित समय देगा। परंतु वह उसका पालन नहीं कर पाया क्योंकि खेल के मैदान की हवा, दोस्तों का साथ और खेल-कूद का आकर्षण उसे टाइम-टेबिल भुला देता था। मन पढ़ाई में लगता ही नहीं था।
2एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?Show solution
उत्तर:
गुल्ली-डंडा खेलकर लौटने पर बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कड़े शब्दों में डाँटते हुए कहा कि तुम्हें खेल-कूद के अलावा कुछ नहीं सूझता। उन्होंने उसे समझाया कि यदि इसी तरह समय बर्बाद करते रहे तो जीवन में कुछ नहीं बन पाओगे और परीक्षा में फेल हो जाओगे।
3बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?Show solution
उत्तर:
बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ इसलिए दबानी पड़ती थीं क्योंकि वे परिवार में बड़े थे और छोटे भाई के अभिभावक की भूमिका निभा रहे थे। यदि वे स्वयं खेल-कूद में लग जाते, तो छोटे भाई को सही राह दिखाने का उनका नैतिक अधिकार समाप्त हो जाता। उन्हें अपना कर्तव्य निभाना था।
4बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?Show solution
उत्तर:
बड़े भाई साहब छोटे भाई को सलाह देते थे कि वह खेल-कूद छोड़कर मन लगाकर पढ़ाई करे, समय की पाबंदी रखे और अपनी नींव मजबूत करे। वे यह सलाह इसलिए देते थे क्योंकि वे उसका भला चाहते थे और जानते थे कि बिना परिश्रम के जीवन में सफलता नहीं मिलती।
5छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फ़ायदा उठाया?Show solution
उत्तर:
जब बड़े भाई साहब का व्यवहार नरम पड़ा तो छोटे भाई ने इसका पूरा फायदा उठाया। उसने खेल-कूद और मनोरंजन में और अधिक समय बिताना शुरू कर दिया। उसने सोचा कि अब भाई साहब कुछ नहीं कहेंगे, इसलिए वह पहले से भी अधिक स्वच्छंद हो गया और पढ़ाई की ओर ध्यान देना लगभग बंद कर दिया।
लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर
1बड़े भाई की डॉट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।Show solution
उत्तर:
यदि बड़े भाई साहब की डाँट-फटकार न मिलती तो छोटा भाई कक्षा में अव्वल नहीं आता। छोटे भाई का स्वभाव खेल-कूद और मनोरंजन में रमने का था। उसे पढ़ाई में बिल्कुल रुचि नहीं थी। बड़े भाई साहब की डाँट ही उसे समय-समय पर सचेत करती थी और उसके मन में एक भय बनाए रखती थी। इसी भय के कारण वह कभी-कभी पढ़ाई की ओर ध्यान देता था। बड़े भाई की फटकार न होती तो वह पूरी तरह खेल-कूद में डूब जाता और परीक्षा में फेल हो जाता। अतः बड़े भाई की डाँट-फटकार उसकी सफलता में सहायक थी।
2इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन गौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?Show solution
उत्तर:
लेखक प्रेमचंद ने इस पाठ में रटंत शिक्षा पद्धति पर व्यंग्य किया है। उन्होंने बताया है कि बड़े भाई साहब वर्षों से एक ही कक्षा में पढ़ते हैं, फिर भी फेल होते हैं क्योंकि वे केवल रटते हैं, समझते नहीं। अंग्रेजी के कठिन पाठ्यक्रम, इतिहास की तारीखें रटना, बेकार के प्रश्नों को याद करना — इन सब पर व्यंग्य किया गया है। लेखक का मानना है कि परीक्षा पास करना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है, बल्कि बुद्धि का विकास और जीवन की समझ असली शिक्षा है। हम लेखक के विचार से पूरी तरह सहमत हैं क्योंकि व्यावहारिक ज्ञान और समझ ही जीवन में काम आती है।
3बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?Show solution
उत्तर:
बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ केवल किताबी पढ़ाई से नहीं आती। उनका मानना था कि जीवन के अनुभव, बड़े-बुजुर्गों की सीख और संसार के व्यावहारिक ज्ञान से जीवन की असली समझ आती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि उनकी माँ और दादा ने कोई बड़ी पढ़ाई नहीं की, फिर भी वे घर-परिवार को बखूबी चलाते हैं। किताबें पढ़कर डिग्री लेना अलग बात है और जीवन को समझना अलग। जीवन की समझ संघर्ष, अनुभव और परिपक्वता से आती है।
4छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?Show solution
उत्तर:
छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा कई कारणों से उत्पन्न हुई। बड़े भाई साहब हमेशा उसकी भलाई चाहते थे और उसे सही राह दिखाते थे। वे स्वयं अपनी इच्छाओं को दबाकर अपना कर्तव्य निभाते थे। उनकी डाँट-फटकार में भी प्रेम और चिंता झलकती थी। जब बड़े भाई साहब ने कनकौआ पकड़ने के लिए दौड़ लगाई, तब छोटे भाई को समझ आया कि उनके भीतर भी बच्चा है, फिर भी वे अपनी जिम्मेदारी नहीं भूलते। यही देखकर उसके मन में श्रद्धा जागी।
5बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।Show solution
उत्तर:
बड़े भाई साहब की स्वभावगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- जिम्मेदार: वे अपने छोटे भाई की देखभाल को अपना कर्तव्य मानते थे।
- अनुशासनप्रिय: वे स्वयं कठोर परिश्रम करते और छोटे भाई को भी अनुशासन में रहने की सीख देते थे।
- उपदेश देने में निपुण: वे बड़े प्रभावशाली ढंग से नसीहत देते थे।
- स्नेही: डाँट-फटकार के बावजूद उनके मन में छोटे भाई के प्रति गहरा प्रेम था।
- व्यावहारिक: वे किताबी ज्ञान से अधिक जीवन के अनुभव को महत्व देते थे।
- बालसुलभ: मन से वे भी बच्चे थे — कनकौआ पकड़ने के लिए दौड़ पड़ना इसका प्रमाण है।
6बड़े भाई साहब ने ज़िदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्वपूर्ण कहा है?Show solution
उत्तर:
बड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव को किताबी ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण बताया है। उनका तर्क था कि उनकी माँ और दादा ने कोई बड़ी पढ़ाई नहीं की, फिर भी वे घर-परिवार, खेती-बाड़ी और जीवन की जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाते हैं। इसके विपरीत, पढ़े-लिखे लोग भी कभी-कभी व्यावहारिक जीवन में असफल हो जाते हैं। किताबें पढ़कर परीक्षा पास करना अलग बात है, परंतु जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति अनुभव से ही आती है। इसीलिए उन्होंने जीवन के अनुभव को श्रेष्ठ माना।
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लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए
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Frequently Asked Questions
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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