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Chapter 15 of 17
NCERT Solutions

निदा फ़ाज़ली (अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले) — NCERT Solutions

CBSE · Class 10 · Hindi- Course B

NCERT Solutions for निदा फ़ाज़ली (अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले), CBSE Class 10 Hindi- Course B: 24 textbook questions solved step by step.

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24 Questions Solved · 6 Sections

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मौखिक प्रश्न (एक-दो पंक्तियों में उत्तर)

1बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?Show solution

उत्तर:
बड़े-बड़े बिल्डर अपनी इमारतें और कॉलोनियाँ बनाने के लिए अधिक से अधिक जमीन प्राप्त करना चाहते थे। इसीलिए वे समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी जमीन पर कब्जा कर रहे थे।

2लेखक का घर किस शहर में था?Show solution

उत्तर:
लेखक का घर बंबई (मुंबई) शहर में था।

3जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?Show solution

उत्तर:
बढ़ती हुई आबादी और शहरीकरण के कारण जीवन छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में सिमटने लगा है। पहले जहाँ बड़े-बड़े आँगन, बाग-बगीचे और खुले मैदान होते थे, अब वहाँ बहुमंजिली इमारतों के छोटे-छोटे फ्लैट बन गए हैं।

4कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?Show solution

उत्तर:
लेखक की पत्नी ने कबूतरों के आशियाने वाली जगह पर जाली लगा दी थी और उनके बच्चों को दूसरी जगह कर दिया था। अपने बच्चों से बिछड़ने और घर छिन जाने के कारण कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।

लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर

1अरब में लराकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?Show solution

उत्तर:
हजरत नूह एक पैगंबर थे जो लगभग 950 वर्षों तक जीवित रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक कठिनाइयाँ झेलीं और लंबे समय तक संघर्ष किया। इसीलिए अरब में किसी बहुत अधिक उम्र वाले व्यक्ति को 'नूह' के नाम से याद किया जाता है। 'नूह' का अर्थ ही है — बहुत अधिक रोने वाला अर्थात् दुखी रहने वाला।

2लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?Show solution

उत्तर:
लेखक की माँ रात के समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं। उनका मानना था कि रात को पेड़-पौधे सो जाते हैं और उस समय उनके पत्ते तोड़ने से उन्हें कष्ट होता है। यह प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का भाव था।

3प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?Show solution

उत्तर:
प्रकृति में आए असंतुलन के कारण कई भयंकर परिणाम सामने आए — असमय बाढ़, भूकंप, तूफान और सूखे जैसी आपदाएँ बढ़ गईं। ऋतुओं का चक्र बिगड़ गया। पशु-पक्षियों के आवास नष्ट हो गए और अनेक प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर आ गईं।

4लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोजा क्यों रखा?Show solution

उत्तर:
लेखक के घर के पास एक कबूतर के घोंसले में दो अंडे थे। एक दिन अचानक बिल्ली ने उन अंडों को तोड़ दिया। इस घटना से लेखक की माँ को बहुत दुख हुआ। उन्होंने उन बेजुबान पक्षियों के दुख में सहभागिता जताने के लिए पूरे दिन का रोजा रखा।

5लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।Show solution

उत्तर:
लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक आते-आते अनेक बदलाव महसूस किए। ग्वालियर में उनका बड़ा घर था जिसमें आँगन, बाग-बगीचे और खुली जगह थी। वहाँ पशु-पक्षियों के लिए भी स्थान था। लेकिन बंबई में आकर जीवन एक छोटे से फ्लैट में सिमट गया। पेड़-पौधे, खुला आकाश और प्रकृति से निकटता समाप्त हो गई। शहरीकरण के कारण पशु-पक्षियों के आवास भी छिन गए।

6'डेरा डालने' से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।Show solution

उत्तर:
'डेरा डालना' का अर्थ है — किसी स्थान पर अस्थायी रूप से रहना या पड़ाव डालना। पाठ में इस शब्द का प्रयोग उन पशु-पक्षियों के संदर्भ में हुआ है जिनके घर मनुष्य ने छीन लिए। वे अपना स्थायी घर खोकर यहाँ-वहाँ अस्थायी आश्रय ढूँढ़ने पर मजबूर हो गए हैं।

7शेख अयाज के पिता अपने बाजू पर काला च्यांटा रेंगता देख भोजन छोड़ कर क्यों उठ खड़े हुए?Show solution

उत्तर:
शेख अयाज के पिता कुएँ से नहाकर आए थे। भोजन करते समय उन्होंने देखा कि उनके बाजू पर एक काला च्यूँटा रेंग रहा है। उन्हें एहसास हुआ कि वे उस च्यूँटे को उसके घर (कुएँ) से बेघर करके ले आए हैं। इसलिए उन्होंने तुरंत भोजन छोड़ दिया और उस च्यूँटे को वापस कुएँ पर छोड़ने चले गए। यह उनकी दूसरे जीवों के प्रति गहरी संवेदनशीलता और करुणा का प्रमाण था।

लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर

1बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?Show solution

उत्तर:
बढ़ती हुई आबादी के कारण पर्यावरण पर अत्यंत विनाशकारी प्रभाव पड़ा। अधिक जनसंख्या के लिए आवास बनाने हेतु जंगल काटे गए, पहाड़ खोदे गए और समुद्र को पीछे धकेला गया। पशु-पक्षियों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए। प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया जिसके परिणामस्वरूप बाढ़, भूकंप, तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ने लगीं। वायु और जल प्रदूषण में वृद्धि हुई। अनेक वन्य प्राणियों की प्रजातियाँ विलुप्त होने लगीं। कुल मिलाकर मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति को गंभीर क्षति पहुँचाई।

2लेखक की पत्नी को खिड़की में जाली क्यों लगवानी पड़ी?

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3समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?

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4'मट्टी से मट्टी मिले, खो के सभी निशान, किसमें कितना कौन है, कैसे हो पहचान' — इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

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लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए

1नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था।

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2जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।

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3इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है।

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4शेख अयाज के पिता बोले, 'नहीं, यह बात नहीं है। मैंने एक घरवाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ।'

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भाषा-अध्ययन

1उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित वाक्यों में कारक चिह्नों को पहचानकर रेखांकित कीजिए और उनके नाम रिक्त स्थानों में लिखिए।

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2नीचे दिए गए शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए — चींटी, घोड़ा, आवाज, बिल, फ़ौज, रोटी, बिंदु, दीवार, टुकड़ा।

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3निम्नलिखित वाक्यों में उचित शब्द भरकर वाक्य पूरे कीजिए — (क) आजकल _____ बहुत खराब है। (जमाना/ज़माना) (ख) पूरे कमरे को _____ दो। (सजा/सज़ा) (ग) _____ चीनी तो देना। (जरा/ज़रा) (घ) माँ दही _____ भूल गई। (जमाना/ज़माना) (ङ) दोषी को _____ दी गई। (सजा/सज़ा) (च) महात्मा के चेहरे पर _____ था। (तेज/तेज़)

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योग्यता विस्तार एवं परियोजना कार्य

1पशु-पक्षी एवं वन्य संरक्षण केंद्रों में जाकर पशु-पक्षियों की सेवा-सुश्रूषा के संबंध में जानकारी प्राप्त कीजिए।

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2 (परियोजना)किसी ऐसी घटना का वर्णन कीजिए जब अपने मनोरंजन के लिए मानव द्वारा पशु-पक्षियों का उपयोग किया गया हो।

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12 more solved questions in निदा फ़ाज़ली (अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in निदा फ़ाज़ली (अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले) for CBSE Class 10 Hindi- Course B?
Key topics in निदा फ़ाज़ली (अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले) include पाठ का केंद्रीय भाव, महत्त्वपूर्ण प्रसंग और उनका भावार्थ, प्रकृति और पर्यावरण का संदेश, कबूतर, मुर्गा और लोक-संवेदना. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for निदा फ़ाज़ली (अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले) free?
The first 12 of the 24 solutions on this page are open to read. The other 12 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise निदा फ़ाज़ली (अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले) for the CBSE Class 10 board exam?
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Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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