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Chapter 7 of 17
NCERT Solutions

सुमित्रानंदन पंत (पर्वत प्रदेश में पावस) — NCERT Solutions

CBSE · Class 10 · Hindi- Course B

NCERT Solutions for सुमित्रानंदन पंत (पर्वत प्रदेश में पावस), CBSE Class 10 Hindi- Course B: 16 textbook questions solved step by step.

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16 Questions Solved · 5 Sections

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प्रश्न-अभ्यास — (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1पावस ऋतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।Show solution

दिया गया है: कविता 'पर्वत प्रदेश में पावस' — सुमित्रानंदन पंत।

उत्तर:
पावस (वर्षा) ऋतु में पर्वतीय प्रदेश में निम्नलिखित परिवर्तन आते हैं—

  1. पर्वत का रूप-परिवर्तन: पर्वत मेखलाकार (करघनी के आकार में) दिखाई देता है और उसकी ढलानें हरियाली से ढक जाती हैं।
  2. झरनों का प्रकट होना: पर्वत से असंख्य झरने फूट पड़ते हैं जो मोती की लड़ियों के समान प्रतीत होते हैं।
  3. तालाब का दर्पण-सा दिखना: तालाब का जल इतना स्वच्छ और शांत हो जाता है कि वह दर्पण जैसा लगता है।
  4. बादलों का घिरना: आकाश में घने बादल छा जाते हैं जिससे ऐसा लगता है जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो।
  5. धुंध और धुएँ का आभास: बादलों के कारण तालाब का जल धुएँ जैसा दिखने लगता है।
  6. वृक्षों का भयभीत होना: शाल के विशाल वृक्ष भयभीत होकर धरती में धँसते प्रतीत होते हैं।
  7. इंद्र का इंद्रजाल: बादल रूपी विमान में विचरते हुए इंद्र अपना जादू दिखाते हैं — अर्थात् वर्षा, बिजली, इंद्रधनुष आदि प्राकृतिक घटनाएँ घटित होती हैं।

निष्कर्ष: पावस ऋतु में पर्वतीय प्रकृति का रूप पल-पल बदलता रहता है और वह अत्यंत मनोरम एवं रहस्यमय हो जाती है।

2'मेखलाकार' शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?Show solution

दिया गया है: कविता की पंक्ति — 'मेखलाकार पर्वत अपार'।

अर्थ: 'मेखलाकार' का अर्थ है — करघनी (कमरबंद) के आकार का, अर्थात् गोलाई लिए हुए, वृत्ताकार।

प्रयोग का कारण:
कवि ने इस शब्द का प्रयोग पर्वत की उस विशेष आकृति को व्यक्त करने के लिए किया है जिसमें पर्वत की ढलानें चारों ओर से घेरे के रूप में फैली हुई हैं — ठीक उसी प्रकार जैसे कमरबंद (मेखला) कमर के चारों ओर लिपटी होती है। पर्वत की गोलाकार, विस्तृत और लहरदार ढलानें इस शब्द से सटीक रूप से चित्रित हो जाती हैं। इससे पर्वत की विशालता और उसके घेरावदार स्वरूप का सुंदर बिम्ब उभरता है।

3'सहस्र दृग-सुमन' से क्या तात्पर्य है? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया होगा?Show solution

दिया गया है: कविता की पंक्ति — 'सहस्र दृग-सुमन फाड़ अवलोक'।

तात्पर्य:

  • सहस्र = हजारों
  • दृग = आँखें
  • सुमन = फूल

अतः 'सहस्र दृग-सुमन' का तात्पर्य है — हजारों फूल रूपी आँखें।

किसके लिए प्रयोग:
कवि ने इस पद का प्रयोग पर्वत की ढलानों पर खिले हजारों फूलों के लिए किया है। पर्वत पर वर्षा ऋतु में असंख्य फूल खिल जाते हैं। कवि ने इन फूलों की तुलना आँखों से की है — जैसे पर्वत इन हजारों फूल-रूपी आँखों से तालाब (दर्पण) में अपना प्रतिबिंब निहार रहा हो। यहाँ मानवीकरण अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है।

4कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों?Show solution

दिया गया है: कविता की पंक्तियाँ — 'दर्पण-सा फैला है विशाल / महाकार नभ के नीचे ताल'।

उत्तर:
कवि ने तालाब की समानता दर्पण (आईने) के साथ दिखाई है।

कारण:
वर्षा ऋतु में पर्वतीय तालाब का जल अत्यंत स्वच्छ, शांत और निर्मल हो जाता है। उसकी सतह इतनी चिकनी और पारदर्शी हो जाती है कि उसमें आकाश, पर्वत और वृक्षों का स्पष्ट प्रतिबिंब दिखाई देता है — ठीक उसी प्रकार जैसे दर्पण में प्रतिबिंब दिखता है। इसीलिए कवि ने तालाब की तुलना दर्पण से की है। यहाँ उपमा अलंकार का प्रयोग हुआ है।

5पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं?Show solution

दिया गया है: कविता की पंक्तियाँ — 'गिरिवर के उर से उठ-उठ कर / उच्चाकांक्षाओं से तरुवर / हैं झाँक रहे नीरव नभ पर / अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।'

उत्तर:
पर्वत के हृदय (ढलानों) से उगे ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर इसलिए देख रहे थे क्योंकि उनमें ऊँचे उठने की अदम्य आकांक्षा थी। वे एकटक, अटल और चिंतित भाव से शांत आकाश को निहार रहे थे।

प्रतिबिंबित भाव:
ये वृक्ष उन महत्त्वाकांक्षी मनुष्यों को प्रतिबिंबित करते हैं जो जीवन में ऊँचाइयाँ प्राप्त करने की चाह रखते हैं, किंतु साथ ही चिंतित और गंभीर भी रहते हैं। वे अपने लक्ष्य की ओर अटल दृष्टि से देखते हैं — न विचलित होते हैं, न पलक झपकाते हैं। यहाँ मानवीकरण अलंकार के माध्यम से वृक्षों में मानवीय भावनाओं का आरोपण किया गया है।

6शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए?Show solution

दिया गया है: कविता की पंक्ति — 'धँस गए धरा में सभय शाल।'

उत्तर:
वर्षा ऋतु में अचानक घने बादल छा जाते हैं और ऐसा प्रतीत होता है जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो। बिजली की कड़क, मूसलाधार वर्षा और घनघोर बादलों के कारण चारों ओर अंधकार और भय का वातावरण बन जाता है।

इस भयावह दृश्य को देखकर शाल के विशाल वृक्ष भयभीत हो गए और ऐसा लगा जैसे वे डर के मारे धरती में धँस गए हों। वास्तव में घने कोहरे और बादलों में वृक्षों का निचला भाग छिप जाता है, जिससे ऐसा भ्रम होता है कि वे धरती में समा गए हैं। यहाँ मानवीकरण अलंकार का सुंदर प्रयोग है।

7झरने किसके गौरव का गान कर रहे हैं? बहते हुए झरने की तुलना किससे की गई है?Show solution

दिया गया है: कविता की पंक्तियाँ — 'मोती की लड़ियों-से सुंदर / झरते हैं झाग भरे निर्झर।'

उत्तर:

गौरव-गान: झरने पर्वत (गिरिवर) के गौरव का गान कर रहे हैं। पर्वत की ऊँचाइयों से गिरते ये झरने पर्वत की महानता, विशालता और शक्ति का बखान करते प्रतीत होते हैं — जैसे कोई भक्त अपने स्वामी की स्तुति गा रहा हो।

तुलना: बहते हुए झरने की तुलना मोती की लड़ियों से की गई है। झरने का श्वेत, चमकदार और लयबद्ध जल मोतियों की माला के समान सुंदर और आकर्षक लगता है। यहाँ उपमा अलंकार का प्रयोग हुआ है।

प्रश्न-अभ्यास — (ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए

1है टूट पड़ा भू पर अंबर।Show solution

पंक्ति का संदर्भ: यह पंक्ति कविता 'पर्वत प्रदेश में पावस' से ली गई है।

भाव:
इस पंक्ति में कवि ने वर्षा ऋतु के उस दृश्य का वर्णन किया है जब आकाश में घने काले बादल इतनी तेज़ी से नीचे उतर आते हैं और मूसलाधार वर्षा होती है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे आकाश (अंबर) स्वयं धरती (भू) पर टूट पड़ा हो। बादलों की घनघोर उपस्थिति और तेज़ वर्षा के कारण आकाश और धरती के बीच का अंतर समाप्त-सा हो जाता है। यह पंक्ति वर्षा की भयंकरता और प्रकृति की अपार शक्ति को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है। यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग हुआ है।

2—यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।

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3गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।

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कविता का सौंदर्य

1इस कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किस प्रकार किया गया है? स्पष्ट कीजिए।

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2आपकी दृष्टि में इस कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर करता है—
(क) अनेक शब्दों की आवृत्ति पर।
(ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर।
(ग) कविता की संगीतात्मकता पर।

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3कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। ऐसे स्थलों को छाँटकर लिखिए।

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योग्यता विस्तार

1इस कविता में वर्षा ऋतु में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों की बात कही गई है। आप अपने यहाँ वर्षा ऋतु में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।

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परियोजना कार्य

1वर्षा ऋतु पर लिखी गई अन्य कवियों की कविताओं का संग्रह कीजिए और कक्षा में सुनाइए।

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2बारिश, झरने, इंद्रधनुष, बादल, कोयल, पानी, पक्षी, सूरज, हरियाली, फूल, फल आदि या कोई भी प्रकृति विषयक शब्द का प्रयोग करते हुए एक कविता लिखने का प्रयास कीजिए।

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8 more solved questions in सुमित्रानंदन पंत (पर्वत प्रदेश में पावस)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in सुमित्रानंदन पंत (पर्वत प्रदेश में पावस) for CBSE Class 10 Hindi- Course B?
Key topics in सुमित्रानंदन पंत (पर्वत प्रदेश में पावस) include कवि परिचय और साहित्यिक महत्व, कविता का केंद्रीय भाव, पंक्ति-आधारित मुख्य अर्थ, काव्य-शिल्प और अलंकार. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for सुमित्रानंदन पंत (पर्वत प्रदेश में पावस) free?
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How should I revise सुमित्रानंदन पंत (पर्वत प्रदेश में पावस) for the CBSE Class 10 board exam?
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Sources & Official References

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