वीरेन डंगवाल (तोप) — NCERT Solutions
CBSE · Class 10 · Hindi- Course B
NCERT Solutions for वीरेन डंगवाल (तोप), CBSE Class 10 Hindi- Course B: 12 textbook questions solved step by step.
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प्रश्न-अभ्यास — (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
1विरासत में मिली चीजों की बड़ी सँभाल क्यों होती है? स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: कविता 'तोप' में कंपनी बाग के मुहाने पर रखी 1857 की तोप का वर्णन है।
उत्तर:
विरासत में मिली चीजें केवल वस्तुएँ नहीं होतीं, वे इतिहास की जीवंत गवाह होती हैं। उनमें पूर्वजों की स्मृतियाँ, संघर्ष, बलिदान और गौरव समाए होते हैं। ये वस्तुएँ आने वाली पीढ़ियों को अपने अतीत से जोड़ती हैं और उन्हें प्रेरणा देती हैं। इसीलिए विरासत में मिली चीजों की बड़ी सँभाल की जाती है — ताकि इतिहास की वह धरोहर सुरक्षित रहे और भावी पीढ़ियाँ उससे सीख ले सकें। कविता में 1857 की तोप को भी इसीलिए सँभालकर कंपनी बाग में रखा गया है, क्योंकि वह उस युग के संघर्ष और शक्ति की प्रतीक है।
2इस कविता से आपको तोप के विषय में क्या जानकारी मिलती है?Show solution
दिया गया है: कविता 'तोप' — कवि वीरेन डंगवाल।
उत्तर:
इस कविता से तोप के विषय में निम्नलिखित जानकारियाँ मिलती हैं —
- यह तोप सन् 1857 की है, जो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के विरुद्ध प्रयोग की गई थी।
- इसे कानपुर के कंपनी बाग के मुहाने पर रखा गया है।
- यह तोप बहुत शक्तिशाली थी और इसने अनेक वीर सूरमाओं के धज्जे उड़ा दिए थे।
- अब यह तोप निष्क्रिय हो चुकी है — छोटे बच्चे उस पर घुड़सवारी करते हैं और चिड़ियाँ उस पर बैठकर गपशप करती हैं।
- 26 जनवरी और 15 अगस्त को इसे चमकाया जाता है।
- यह तोप इस बात का प्रतीक है कि कितनी भी बड़ी शक्ति हो, एक दिन उसका अंत अवश्य होता है।
3कंपनी बाग में रखी तोप क्या सीख देती है?Show solution
दिया गया है: कविता में तोप को कंपनी बाग में रखा गया है।
उत्तर:
कंपनी बाग में रखी तोप हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण सीख देती है —
- अत्याचार का अंत निश्चित है: कितनी भी बड़ी और शक्तिशाली तोप हो, एक दिन उसका मुँह बंद हो ही जाता है। अर्थात् अत्याचारी शक्तियाँ सदा नहीं टिकतीं।
- जन-शक्ति सर्वोपरि है: जो तोप कभी वीरों को मारती थी, आज उस पर बच्चे खेलते हैं और चिड़ियाँ बैठती हैं — यह जनसाधारण की विजय का प्रतीक है।
- इतिहास से प्रेरणा लें: यह तोप हमें याद दिलाती है कि हमारे पूर्वजों ने किस शक्ति के विरुद्ध संघर्ष किया और हमें उनके बलिदान को नहीं भूलना चाहिए।
4कविता में तोप को दो बार चमकाने की बात की गई है। ये दो अवसर कौन-से होंगे?Show solution
दिया गया है: कविता में तोप को साल में दो बार चमकाने का उल्लेख है।
उत्तर:
कविता में तोप को साल में दो बार चमकाने की बात कही गई है। ये दो अवसर हैं —
- 26 जनवरी — गणतंत्र दिवस: यह भारत के संविधान लागू होने का दिन है। इस दिन राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति की भावना से तोप को चमकाया जाता है।
- 15 अगस्त — स्वतंत्रता दिवस: यह भारत की आजादी का दिन है। इस दिन भी राष्ट्रीय पर्व के उपलक्ष्य में तोप को चमकाया जाता है।
इन दोनों अवसरों पर तोप को चमकाना एक प्रकार की विडंबना है — जो तोप कभी भारतीयों को दबाने के लिए प्रयोग की जाती थी, आज उसी को राष्ट्रीय पर्वों पर सजाया जाता है।
प्रश्न-अभ्यास — (ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए
1अब तो बहरहाल
छोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फ़ारिग हो
तो उसके ऊपर बैठकर
चिड़ियाँ ही अक्सर करती हैं गपशप।Show solution
भाव स्पष्टीकरण:
इन पंक्तियों में कवि ने तोप की वर्तमान दयनीय स्थिति का वर्णन किया है। जो तोप कभी अपनी भीषण मारक शक्ति के लिए जानी जाती थी और जिसने अनेक वीर सूरमाओं को मौत के घाट उतारा था, आज वही तोप पूरी तरह निष्क्रिय और शक्तिहीन हो चुकी है।
अब उस तोप पर छोटे-छोटे बच्चे घुड़सवारी करते हैं और जब बच्चे भी उसे छोड़ देते हैं, तब चिड़ियाँ उस पर बैठकर आपस में गपशप करती हैं।
व्यंग्यात्मक संदेश: यह पंक्तियाँ इस सत्य को उजागर करती हैं कि अत्याचार और दमन की शक्ति कितनी भी बड़ी क्यों न हो, समय के साथ वह निर्बल और उपहास का पात्र बन जाती है। जन-शक्ति और प्रकृति के सामने हर अहंकारी शक्ति झुक जाती है।
2वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप
एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद।Show solution
भाव स्पष्टीकरण:
इन पंक्तियों में 'वे' से तात्पर्य चिड़ियों से है। चिड़ियाँ तोप पर बैठकर जो 'गपशप' करती हैं, उसका सार यह है कि कोई भी शक्ति — चाहे वह कितनी भी विशाल, भयंकर और विनाशकारी क्यों न हो — सदा के लिए नहीं रहती। एक न एक दिन उसका अंत अवश्य होता है।
प्रतीकात्मक अर्थ: तोप यहाँ साम्राज्यवादी और अत्याचारी शक्ति का प्रतीक है। कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि अंग्रेजों की शक्ति भी एक दिन समाप्त हुई। इसी प्रकार संसार में जो भी अन्यायी और दमनकारी शक्तियाँ हैं, उनका मुँह एक दिन अवश्य बंद होगा। यह पंक्तियाँ आशा और विश्वास का संदेश देती हैं।
अच्छे-अच्छे सूरमाओं के धज्जे।
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Frequently Asked Questions
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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