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Chapter 1 of 17
NCERT Solutions

कबीर (साखी)

CBSE · Class 10 · Hindi- Course B

NCERT Solutions for कबीर (साखी) — CBSE Class 10 Hindi- Course B.

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16 Questions Solved · 1 Section

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# प्रश्न-अभ्यास

1मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?Show solution
कबीर के अनुसार मीठी वाणी मन के अहंकार को दूर करती है। जब हम प्रेम और विनम्रता से बोलते हैं, तो हमारे शब्द दूसरों को अच्छा लगते हैं, उन्हें सुख मिलता है। ऐसी वाणी से बोलने वाले का मन भी शांत रहता है, इसलिए उसका तन शीतल हो जाता है।

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2दीपक दिखाई देने पर अंधियारा कैसे मिट जाता है? साखी के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।Show solution
साखी के अनुसार जब दीपक दिखाई देता है, तो उसका प्रकाश अंधकार को तुरंत मिटा देता है। उसी तरह जब मनुष्य को ज्ञान या आत्मबोध हो जाता है, तब अज्ञान का अंधियारा दूर हो जाता है। यहाँ दीपक ज्ञान का प्रतीक है और अंधियारा अज्ञान का।

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3ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते?Show solution
कबीर कहते हैं कि ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, लेकिन हम उन्हें इसलिए नहीं देख पाते क्योंकि हमारे मन में अज्ञान, माया, और अहंकार का आवरण पड़ा रहता है। जब तक यह आवरण हटता नहीं, तब तक ईश्वर का अनुभव नहीं हो पाता।

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4संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहाँ 'सोना' और 'जागना' किसके प्रतीक हैं? इसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया है? स्पष्ट कीजिए।Show solution
कबीर के अनुसार संसार में वही व्यक्ति सुखी है जो खाता और सोता है, अर्थात सांसारिक मोह में डूबा है और आत्मिक जागरण से दूर है। जो व्यक्ति ईश्वर-चिंतन में जागता है, विरह में रोता है, वही दुखी कहलाता है। यहाँ 'सोना' का प्रतीक है अज्ञान, लापरवाही और सांसारिक मस्ती, तथा 'जागना' का प्रतीक है सचेत रहना, ईश्वर-स्मरण और आत्मिक जागरण। यह प्रयोग इसलिए किया गया है ताकि यह समझाया जा सके कि सामान्य सुख-आराम वाला जीवन आध्यात्मिक दृष्टि से वास्तविक सुख नहीं है।

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5अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया है?Show solution
अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने निंदक को पास रखने का उपाय बताया है। वे कहते हैं कि निंदक को अपने आँगन में कुटी बनाकर बसा लेना चाहिए, क्योंकि वह साबुन-पानी के बिना ही स्वभाव को निर्मल कर देता है। अर्थात निंदा सुनने से अपने दोष दिखते हैं और मन शुद्ध होता है।

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6'ऐकै अघिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ'-इस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?Show solution
इस पंक्ति का आशय है कि प्रिय ईश्वर का एक अक्षर पढ़ लेना ही सच्चा ज्ञान है। कबीर कहना चाहते हैं कि पुस्तकीय ज्ञान से बड़ा आत्मज्ञान है। जो व्यक्ति ईश्वर के प्रेम और उसकी सच्ची अनुभूति को समझ लेता है, वही वास्तविक अर्थ में पंडित है।

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7कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।Show solution
कबीर की इन साखियों की भाषा की प्रमुख विशेषता यह है कि वह सधुक्कड़ी या पचमेल खिचड़ी भाषा है। इसमें पूर्वी हिंदी के साथ अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी के शब्दों का मिश्रण है। भाषा सरल, सहज, लोकभाषा-प्रधान और प्रभावशाली है।

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1बिरह भुवंगम तन बसे, मंत्र न लागे कोइ.Show solution
इस पंक्ति का भाव है कि विरह-रूपी साँप जब शरीर में बस जाता है, तब उसके प्रभाव को कोई मंत्र दूर नहीं कर सकता। यहाँ विरह यानी ईश्वर से जुदाई की पीड़ा को साँप के रूप में दिखाया गया है। कवि कहना चाहता है कि ईश्वर-वियोग की पीड़ा बहुत तीव्र और असह्य होती है।

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2कस्तूरी कुंडलि बसे, मृग ढूँढे बन माँहि.
3जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नौहि.
4पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ.
1पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप उदाहरण के अनुसार लिखिए-
उदाहरण- जिवै - जीना
औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेडा, आँगणि, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास.
1'साधु में निंदा सहन करने से विनयशीलता आती है' तथा 'व्यक्ति को मीठी व कल्याणकारी वाणी बोलनी चाहिए'-इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
2कस्तूरी के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
1मीठी वाणी / बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।
2कबीर की साखियों को याद कीजिए और कक्षा में अंत्याक्षरी में उनका प्रयोग कीजिए।

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Frequently Asked Questions

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Sources & Official References

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