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Chapter 10 of 17
NCERT Solutions

रवींद्रनाथ ठाकुर (आत्मत्राण)

CBSE · Class 10 · Hindi- Course B

NCERT Solutions for रवींद्रनाथ ठाकुर (आत्मत्राण) — CBSE Class 10 Hindi- Course B.

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16 Questions Solved · 1 Section

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प्रश्न-अभ्यास

1कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है?Show solution
कवि प्रभु/करुणामय ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है। वह उनसे यह चाहता है कि वे उसे विपदाओं से बचाने के बजाय ऐसी शक्ति दें कि वह स्वयं विपदाओं, दुख और संघर्षों पर विजय पा सके

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2'विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं'-कवि इस पंक्ति के द्वारा क्या कहना चाहता है?Show solution
इस पंक्ति के द्वारा कवि यह कहना चाहता है कि वह ईश्वर से हर संकट को हटाने की प्रार्थना नहीं कर रहा। वह चाहता है कि संकट आएँ तो भी उसमें डर न हो और वह स्वयं साहस के साथ उनका सामना कर सके।

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3कवि सहायक के न मिलने पर क्या प्रार्थना करता है?Show solution
सहायक के न मिलने पर कवि प्रार्थना करता है कि उसका बल और पौरुष न डगमगाए। वह चाहता है कि यदि संसार में सहायता न मिले, तो भी वह अपना साहस बनाए रखे और हानि-लाभ से विचलित न हो

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4अंत में कवि क्या अनुनय करता है?Show solution
अंत में कवि अनुनय करता है कि प्रभु उसे दुःख सहने, उसे निर्भय होकर वहन करने और अपनी शक्ति से तरने की क्षमता दें। वह यह भी चाहता है कि सुख के दिनों में वह अहंकार से न झुके और दुःख के समय प्रभु पर संशय न करे

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5'आत्मत्राण' शीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।Show solution
'आत्मत्राण' का अर्थ है अपने-आप का त्राण/बचाव। कविता में कवि ईश्वर से यह नहीं माँगता कि वे उसके लिए सब कुछ कर दें, बल्कि यह प्रार्थना करता है कि उसे इतनी आत्मशक्ति, धैर्य और साहस मिले कि वह स्वयं विपत्तियों से उबर सके। इसलिए शीर्षक कविता के भाव के बिलकुल अनुरूप और सार्थक है।

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6अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आप प्रार्थना के अतिरिक्त और क्या-क्या प्रयास करते हैं? लिखिए।Show solution
अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मैं प्रार्थना के साथ-साथ परिश्रम, नियमित अभ्यास, समय का सदुपयोग, धैर्य, आत्मविश्वास और सही योजना बनाकर प्रयास करता हूँ। केवल चाहने से काम नहीं बनता, इसलिए लक्ष्य पाने के लिए निरंतर मेहनत करनी पड़ती है।

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7क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है? यदि हाँ, तो कैसे?Show solution
हाँ, यह प्रार्थना अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है। सामान्य प्रार्थनाओं में ईश्वर से कष्ट दूर करने या वरदान देने की माँग होती है, लेकिन इस कविता में कवि बाहरी सहायता नहीं, बल्कि स्वयं संघर्ष करने की शक्ति माँगता है। यह प्रार्थना आत्मनिर्भरता, साहस और आत्मबल पर जोर देती है।

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1नत शिर होकर सुख के दिन में
तब मुख पहचानूँ छिन-छिन में।
Show solution
इन पंक्तियों का भाव यह है कि सुख के दिनों में भी कवि सिर झुकाकर विनम्र बना रहे और हर क्षण ईश्वर को याद करता रहे। वह चाहता है कि सुख में वह अभिमान में न डूबे, बल्कि लगातार ईश्वर का स्मरण करता रहे।

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2हानि उठानी पड़े जगत् में लाभ अगर बचना रही
तो भी मन में ना मानूँ क्षय।
3तरने की हो शक्ति अनामय
मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।
1रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीतों की रचना की है। उनके गीत-संग्रह में से दो गीत छाँटिए और कक्षा में कविता-पाठ कीजिए।
2अनेक अन्य कवियों ने भी प्रार्थना गीत लिखे हैं, उन्हें पढ़ने का प्रयास कीजिए; जैसे-
1रवींद्रनाथ ठाकुर को नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय होने का गौरव प्राप्त है। उनके विषय में और जानकारी एकत्र कर परियोजना पुस्तिका में लिखिए।
2रवींद्रनाथ ठाकुर की 'गीतांजलि' को पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।
3रवींद्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता (कोलकाता) के निकट एक शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी। पुस्तकालय की मदद से उसके विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।
4रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीत लिखे, जिन्हें आज भी गाया जाता है और उसे रवींद्र संगीत कहा जाता है। यदि संभव हो तो रवींद्र संगीत संबंधी कैसेट व सी.डी. लेकर सुनिए।

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