रवींद्रनाथ ठाकुर (आत्मत्राण) — NCERT Solutions
CBSE · Class 10 · Hindi- Course B
NCERT Solutions for रवींद्रनाथ ठाकुर (आत्मत्राण), CBSE Class 10 Hindi- Course B: 16 textbook questions solved step by step.
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प्रश्न-अभ्यास — (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
1कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है?Show solution
दिया गया: कविता 'आत्मत्राण' रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित है।
उत्तर:
कवि ईश्वर (करुणामय प्रभु) से प्रार्थना कर रहा है। वह ईश्वर से यह नहीं माँगता कि उसे विपदाओं से बचाया जाए, दुखों से मुक्त किया जाए या सहायक दिया जाए। इसके विपरीत वह प्रार्थना करता है कि —
- विपत्तियों का सामना करने की शक्ति और साहस मिले।
- दुख-ताप सहने की क्षमता मिले।
- जब कोई सहायक न हो तो उसका अपना बल और पौरुष न टूटे।
- हानि उठानी पड़े तो भी मन में क्षय (हार) का भाव न आए।
- सुख के दिनों में भी वह नत-शिर होकर ईश्वर को पहचानता रहे।
- अंत में वह यही अनुनय करता है कि प्रभु उसे कभी धोखा न दें और उस पर उनकी कृपा बनी रहे।
सार: कवि ईश्वर से बाहरी सहायता नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति, साहस और अटूट विश्वास की प्रार्थना करता है।
2'विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं'—कवि इस पंक्ति के द्वारा क्या कहना चाहता है?Show solution
दिया गया: यह पंक्ति कविता 'आत्मत्राण' से ली गई है।
उत्तर:
इस पंक्ति के द्वारा कवि यह कहना चाहता है कि वह ईश्वर से कायरों की तरह विपत्तियों से बचाने की प्रार्थना नहीं करता। वह जानता है कि जीवन में कठिनाइयाँ, दुख और विपदाएँ आना स्वाभाविक है। इनसे भागना या इनसे बचाने की याचना करना कमज़ोरी का प्रतीक है।
कवि चाहता है कि उसे इन विपदाओं का वीरतापूर्वक सामना करने की शक्ति मिले। वह आत्मनिर्भर बनना चाहता है। उसकी प्रार्थना का उद्देश्य है — आत्मबल की प्राप्ति, न कि कठिनाइयों से पलायन।
निष्कर्ष: कवि परिस्थितियों को बदलने की नहीं, बल्कि स्वयं को इतना सशक्त बनाने की प्रार्थना करता है कि वह हर परिस्थिति का सामना कर सके।
3कवि सहायक के न मिलने पर क्या प्रार्थना करता है?Show solution
दिया गया: कविता 'आत्मत्राण' — रवींद्रनाथ ठाकुर।
उत्तर:
कवि प्रार्थना करता है कि यदि जीवन की कठिन राहों पर उसे कोई सहायक (मददगार) न मिले, तो भी उसका बल और पौरुष (पराक्रम) नष्ट न हो। वह यह नहीं चाहता कि ईश्वर उसे सहायक भेजे, बल्कि वह चाहता है कि उसके भीतर इतनी आत्मशक्ति हो कि वह अकेले ही संकटों का सामना कर सके।
इसी प्रकार वह यह भी प्रार्थना करता है कि यदि उसे जगत् में हानि उठानी पड़े, तो भी उसके मन में क्षय (हार या निराशा) का भाव न आए।
सार: सहायक के अभाव में भी कवि अपने आत्मबल को अक्षुण्ण बनाए रखने की प्रार्थना करता है।
4अंत में कवि क्या अनुनय करता है?Show solution
दिया गया: कविता 'आत्मत्राण' का अंतिम भाग।
उत्तर:
कविता के अंत में कवि ईश्वर से यह अनुनय (विनम्र प्रार्थना) करता है कि —
- सुख के दिनों में भी वह नत-शिर (सिर झुकाकर) ईश्वर के मुख को पहचानता रहे, अर्थात् सुख में भी ईश्वर को न भूले।
- दुख की रात में जब सारा संसार उसे धोखा दे और वंचना (छल) करे, तब भी वह ईश्वर पर संशय (संदेह) न करे।
- वह यह प्रार्थना करता है कि ईश्वर में उसकी आस्था और विश्वास अटूट बना रहे — सुख में भी और दुख में भी।
निष्कर्ष: कवि की अंतिम अनुनय यह है कि उसका ईश्वर के प्रति अविचल विश्वास और भक्ति सदा बनी रहे।
5'आत्मत्राण' शीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया: कविता का शीर्षक 'आत्मत्राण' है। 'आत्म' = स्वयं, 'त्राण' = रक्षा/बचाव।
उत्तर:
'आत्मत्राण' का अर्थ है — स्वयं की रक्षा स्वयं करना अथवा आत्मशक्ति द्वारा संकटों से उबरना।
यह शीर्षक कविता के मूल भाव के साथ पूर्णतः सार्थक है, क्योंकि —
- कवि ईश्वर से बाहरी सहायता नहीं माँगता, बल्कि आंतरिक शक्ति माँगता है।
- वह विपदाओं से बचाने की नहीं, बल्कि विपदाओं को सहने की शक्ति माँगता है।
- वह सहायक नहीं माँगता, बल्कि अपने पौरुष को अटूट रखने की प्रार्थना करता है।
- वह चाहता है कि स्वयं के बल पर जीवन की कठिनाइयों को पार करे।
इस प्रकार पूरी कविता 'आत्मत्राण' — अर्थात् स्वयं की आत्मशक्ति से अपनी रक्षा करने — के भाव को व्यक्त करती है। अतः यह शीर्षक पूर्णतः सार्थक एवं उचित है।
6अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आप प्रार्थना के अतिरिक्त और क्या-क्या प्रयास करते हैं? लिखिए।Show solution
उत्तर (व्यक्तिगत एवं व्यावहारिक उत्तर):
प्रार्थना के अतिरिक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए हम निम्नलिखित प्रयास करते हैं —
- परिश्रम: लक्ष्य प्राप्ति के लिए कठोर परिश्रम करते हैं।
- योजना बनाना: अपने लक्ष्य को पाने के लिए एक सुनियोजित योजना तैयार करते हैं।
- आत्मविश्वास: स्वयं पर विश्वास रखते हैं और निराश नहीं होते।
- बड़ों का मार्गदर्शन: माता-पिता, शिक्षकों और अनुभवी लोगों से सलाह लेते हैं।
- अध्ययन एवं अभ्यास: ज्ञान और कौशल बढ़ाने के लिए नियमित अध्ययन और अभ्यास करते हैं।
- धैर्य: असफलता मिलने पर भी धैर्य रखते हैं और पुनः प्रयास करते हैं।
- सकारात्मक सोच: नकारात्मक विचारों को मन में न आने देकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं।
निष्कर्ष: प्रार्थना से आत्मबल मिलता है, किंतु परिश्रम और दृढ़ संकल्प से ही इच्छाएँ पूरी होती हैं।
7क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है? यदि हाँ, तो कैसे?Show solution
उत्तर:
हाँ, कवि रवींद्रनाथ ठाकुर की यह प्रार्थना अन्य प्रार्थना गीतों से बिल्कुल अलग और विशिष्ट लगती है। इसके कारण निम्नलिखित हैं —
सामान्य प्रार्थना गीतों में:
- लोग ईश्वर से दुखों को दूर करने की विनती करते हैं।
- विपत्तियों से बचाने की याचना की जाती है।
- सुख, समृद्धि और सहायता माँगी जाती है।
इस प्रार्थना में:
- कवि ईश्वर से विपदाओं से बचाने की नहीं, बल्कि उन्हें सहने की शक्ति माँगता है।
- वह सहायक नहीं, बल्कि आत्मबल माँगता है।
- वह दुख हटाने की नहीं, बल्कि दुख में भी ईश्वर पर विश्वास बनाए रखने की प्रार्थना करता है।
- यह प्रार्थना आत्मनिर्भरता और वीरता का संदेश देती है।
निष्कर्ष: यह प्रार्थना एक वीर और आत्मनिर्भर मनुष्य की प्रार्थना है जो परिस्थितियों को बदलने की नहीं, बल्कि स्वयं को सशक्त बनाने की कामना करती है। यही इसे अन्य प्रार्थना गीतों से अलग और श्रेष्ठ बनाता है।
प्रश्न-अभ्यास — (ख) निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए
1नत शिर होकर सुख के दिन में
तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में।Show solution
प्रसंग: यह पंक्तियाँ रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता 'आत्मत्राण' से ली गई हैं।
भाव स्पष्टीकरण:
इन पंक्तियों में कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि सुख के दिनों में भी वह सिर झुकाकर (नत-शिर होकर) ईश्वर के मुख को प्रतिपल (छिन-छिन में) पहचानता रहे, अर्थात् उन्हें याद करता रहे।
सामान्यतः मनुष्य दुख में ईश्वर को याद करता है, किंतु सुख में भूल जाता है। कवि इस मानवीय दुर्बलता से बचना चाहता है। वह चाहता है कि सुख-समृद्धि के समय भी उसके मन में अहंकार न आए और वह विनम्रतापूर्वक ईश्वर के प्रति कृतज्ञ बना रहे।
विशेष: यह पंक्तियाँ सुख में भी ईश्वर-स्मरण और विनम्रता का संदेश देती हैं।
तो भी मन में ना मानूँ क्षय।
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Frequently Asked Questions
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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