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Chapter 16 of 17
NCERT Solutions

रवींद्र केलेकर (गिन्नी का सोना ,झेन की देन ) — NCERT Solutions

CBSE · Class 10 · Hindi- Course B

NCERT Solutions for रवींद्र केलेकर (गिन्नी का सोना ,झेन की देन ), CBSE Class 10 Hindi- Course B: 28 textbook questions solved step by step.

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28 Questions Solved · 1 Section

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प्रश्न-अभ्यास

1शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?Show solution

शुद्ध सोना 24 कैरेट का, यानी बिना मिलावट का होता है। गिन्नी का सोना 22 कैरेट का होता है, जिसमें थोड़ा-सा ताँबा मिला होता है। इसी मिलावट के कारण वह शुद्ध सोने से अलग होता है, अधिक चमकता है और मजबूत भी होता है।

2प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?Show solution

पाठ के अनुसार प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट वे हैं जो आदर्शों में थोड़ा-सा व्यावहारिकता का ताँबा मिला देते हैं और उन्हें चलाकर दिखाते हैं।

3पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?Show solution

पाठ में शुद्ध आदर्श की तुलना शुद्ध सोने से की गई है। जैसे शुद्ध सोना बिना किसी मिलावट के होता है, वैसे ही शुद्ध आदर्श भी बिना किसी व्यावहारिक समझौते के होते हैं।

4लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड' का इंजन लगाने की बात क्यों कही है?Show solution

लेखक के मित्र के अनुसार जापान में जीवन की रफ़्तार बहुत बढ़ गई है। लोग हर काम को बहुत जल्दी करना चाहते हैं, अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करते हैं और दिमाग पर लगातार दबाव रहता है। इसलिए लेखक ने कहा कि जैसे दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगा दिया गया हो, जो उसे बहुत तेज़ चला रहा है।

5जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?Show solution

जापानी में चाय पीने की विधि को चा-नो-यू कहते हैं।

6जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?Show solution

टी-सेरेमनी का स्थान एक सुंदर पर्णकुटी था। उसमें दफ्ती की दीवारें, तातामी की ज़मीन थी। बाहर हाथ-पाँव धोने के लिए पानी से भरा बरतन था। अंदर का वातावरण इतना शांत था कि चायदानी के पानी का खदबदाना भी सुनाई देता था।

1शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?Show solution

पाठ में शुद्ध सोना और ताँबा प्रतीक के रूप में आए हैं। सोना = शुद्ध आदर्श, क्योंकि वह स्वयं में मूल्यवान है। ताँबा = व्यावहारिकता, क्योंकि वह आदर्श को व्यवहार में लाने में मदद करता है और उसे मजबूत बनाता है।

2चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी की?Show solution

चाजीन ने आते ही प्रणाम किया, आइए कहकर स्वागत किया, बैठने की जगह दिखाई, अँगीठी सुलगाई, उस पर चायदानी रखी, फिर बगल के कमरे से बरतन लाकर उन्हें तौलिए से साफ़ किया। ये सब क्रियाएँ उसने बहुत गरिमापूर्ण ढंग से कीं।

3'टी-सेरेमनी' में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?Show solution

पाठ में स्पष्ट है कि इस विधि में शांति मुख्य बात होती है, इसलिए वहाँ तीन से अधिक आदमियों को प्रवेश नहीं दिया जाता।

4चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?Show solution

चाय पीते-पीते लेखक के मन की उलझन दूर होने लगी। उनके दिमाग की रफ़्तार धीमी पड़ गई और वह लगभग शांत हो गया। उन्हें लगा कि वे अनंतकाल में जी रहे हैं और भूत-भविष्य हटकर केवल वर्तमान बचा है।

1गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।Show solution

पाठ के अनुसार गांधीजी प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट थे, लेकिन वे आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर नहीं उतारते थे, बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे। इसी कारण उनके आदर्श मजबूत रहे और लोग उनके पीछे चले। यही उनकी नेतृत्व क्षमता का उदाहरण है।

2आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।Show solution

शाश्वत मूल्य वे हैं जो समय के साथ बदलते नहीं, जैसे सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, न्याय, करुणा और मानवता। वर्तमान समय में भी इनके बिना समाज में विश्वास, शांति और सही दिशा संभव नहीं है, इसलिए ये आज भी उतने ही आवश्यक हैं।

3अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब-Show solution

यह प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। इसमें अपने जीवन की ऐसी घटना लिखनी है जब शुद्ध आदर्श से लाभ या हानि हुई हो, और फिर ऐसी घटना जब आदर्श में व्यावहारिकता जोड़ने से लाभ हुआ हो।

4'शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना', गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।Show solution

लेखक कहता है कि गांधीजी आदर्शों को व्यवहार के स्तर पर नहीं लाते थे, बल्कि व्यवहार को आदर्श के स्तर तक उठाते थे। इसलिए वे ताँबे में सोना मिलाते थे, न कि सोने में ताँबा घटाकर। इसका अर्थ है कि उनके काम में भी आदर्श की ऊँचाई बनी रहती थी।

5'गिरगिट' कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश 'गिन्नी का सोना' के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि 'आदर्शवादिता' और 'व्यावहारिकता' इनमें से जीवन में किसका महत्त्व है?

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6लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?

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7लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।

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1समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।

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2जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है तब 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों' के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है।

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3हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।

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4सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।

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26I 1. नीचे दिए गए शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-

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2'लाभ-हानि' का विग्रह इस प्रकार होगा-लाभ और हानि
यहाँ द्वंद्व समास है जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं। दोनों पदों के बीच योजक शब्द का लोप करने के लिए योजक चिह्न लगाया जाता है। नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए-

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3नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए-

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4नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए और शब्द के अर्थ को समझिए—

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5नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए—

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6नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए—

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33II 2. पाठ में वर्णित 'टी-सेरेमनी' का शब्द चित्र प्रस्तुत कीजिए।

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in रवींद्र केलेकर (गिन्नी का सोना ,झेन की देन ) for CBSE Class 10 Hindi- Course B?
Key topics in रवींद्र केलेकर (गिन्नी का सोना ,झेन की देन ) include रवींद्र केलेकर का परिचय, ‘गिन्नी का सोना’ का केंद्रीय भाव, गांधीजी के संदर्भ में लेखक का दृष्टिकोण, आदर्शवादी और व्यवहारवादी का अंतर. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for रवींद्र केलेकर (गिन्नी का सोना ,झेन की देन ) free?
The first 14 of the 28 solutions on this page are open to read. The other 14 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise रवींद्र केलेकर (गिन्नी का सोना ,झेन की देन ) for the CBSE Class 10 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 83 practice questions on रवींद्र केलेकर (गिन्नी का सोना ,झेन की देन ). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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