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Chapter 3 of 17
NCERT Solutions

मीरा (पद) — NCERT Solutions

CBSE · Class 10 · Hindi- Course B

NCERT Solutions for मीरा (पद), CBSE Class 10 Hindi- Course B: 13 textbook questions solved step by step. Covers प्रश्न-अभ्यास — (क) निम्नलिखित प्रश्नों के.

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13 Questions Solved · 5 Sections

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प्रश्न-अभ्यास — (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?Show solution

उत्तर:

पहले पद में मीराबाई ने श्रीकृष्ण (हरि) से अपनी पीड़ा हरने की विनती अत्यंत विनम्र और भक्तिपूर्ण भाव से की है। वे कहती हैं — "हरि आप हरो जन री भीर" अर्थात् हे हरि! आप स्वयं अपने भक्तों की पीड़ा दूर करें।

मीरा अपनी विनती को बलवती बनाने के लिए श्रीकृष्ण के पूर्व के उपकारों का स्मरण कराती हैं:

  • द्रौपदी की लाज: जब दु:शासन ने द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा, तब श्रीकृष्ण ने उनका चीर बढ़ाकर उनकी लाज रखी।
  • प्रह्लाद की रक्षा: भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह (नरहरि) का रूप धारण किया।
  • गजराज की रक्षा: डूबते हुए हाथी (गजराज) को मगरमच्छ के मुँह से बचाया।

इन उदाहरणों के माध्यम से मीरा कहती हैं कि जैसे आपने अपने भक्तों की पीड़ा हरी है, वैसे ही मेरी (दासी मीरा की) पीड़ा भी हरें। इस प्रकार उन्होंने भक्ति, विनम्रता और ऐतिहासिक प्रसंगों के सहारे अपनी विनती की है।

2दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।Show solution

उत्तर:

दूसरे पद में मीराबाई श्रीकृष्ण (श्याम) की चाकरी (सेवा) इसलिए करना चाहती हैं क्योंकि उन्हें इस चाकरी से तीन अमूल्य लाभ प्राप्त होंगे:

  1. दर्शन की प्राप्ति: चाकरी करने से उन्हें श्रीकृष्ण के दर्शन निकट से होंगे। वे उनके रूप-सौंदर्य को निहार सकेंगी।
  1. स्मरण रूपी खर्ची: चाकरी करते हुए वे निरंतर श्रीकृष्ण का स्मरण (सुमरण) करती रहेंगी, जो उनके जीवन की पूँजी (खर्ची) बन जाएगी।
  1. भाव-भक्ति रूपी जागीर: इस सेवा से उन्हें भाव और भक्ति की जागीर (साम्राज्य) मिलेगी, जो सबसे बड़ी संपत्ति है।

इस प्रकार मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी को साधारण नौकरी नहीं, बल्कि भक्ति, दर्शन और स्मरण का माध्यम मानती हैं। वे वृंदावन की कुंजगलियों में विचरण करना चाहती हैं और श्रीकृष्ण के प्रेम में पूर्णतः समर्पित हो जाना चाहती हैं।

3मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?Show solution

उत्तर:

मीराबाई ने दूसरे पद में श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया है:

  • पीतांबर: श्रीकृष्ण पीले वस्त्र (पीतांबर) धारण करते हैं जो उनके श्याम वर्ण पर अत्यंत सुंदर लगते हैं।
  • बैजंती माला: उनके गले में बैजंती के फूलों की माला सुशोभित होती है।
  • मोर-मुकुट: उनके सिर पर मोर के पंखों का मुकुट है जो उनकी शोभा को और बढ़ाता है।
  • कुसुम्बी रंग: मीरा कुसुम्बी (केसरिया/लाल) रंग की साड़ी पहनकर श्रीकृष्ण के साथ रहना चाहती हैं।
  • यमुना तट पर लीला: वे श्रीकृष्ण को यमुना के तट पर विविध लीलाएँ करते हुए देखना चाहती हैं।

इस प्रकार मीरा ने श्रीकृष्ण के वस्त्र, आभूषण, मुकुट और लीला-स्थल का सजीव एवं भावपूर्ण चित्रण किया है।

4मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।Show solution

उत्तर:

मीराबाई की भाषा शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा: मीरा की भाषा मुख्यतः ब्रजभाषा है, परंतु उसमें राजस्थानी भाषा के शब्दों का भी प्रयोग हुआ है; जैसे — 'री' (की), 'भीर' (पीड़ा), 'धर्यो' (धारण किया), 'राख्यो' (रखा), 'पास्यूँ' (पाऊँगी) आदि।
  1. सरलता और सहजता: भाषा अत्यंत सरल, सहज और बोधगम्य है। कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया।
  1. संगीतात्मकता: पद गेय हैं और इनमें लय एवं तुक का सुंदर निर्वाह हुआ है।
  1. भक्ति रस की प्रधानता: पूरी भाषा में भक्ति और प्रेम का भाव ओत-प्रोत है।
  1. अलंकारों का प्रयोग: अनुप्रास, उपमा और दृष्टांत अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग हुआ है।
  1. विनय और समर्पण का स्वर: भाषा में दास्य भाव और आत्म-समर्पण की भावना स्पष्ट झलकती है।
5वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?Show solution

उत्तर:

मीराबाई श्रीकृष्ण को पाने के लिए निम्नलिखित कार्य करने को तैयार हैं:

  1. चाकरी करना: वे श्रीकृष्ण की दासी बनकर उनकी सेवा करना चाहती हैं।
  1. बाग लगाना: वे श्रीकृष्ण के लिए बाग (बगीचा) लगाने को तैयार हैं ताकि वे उसमें विचरण करें और उन्हें दर्शन मिलें।
  1. कुसुम्बी साड़ी पहनना: वे कुसुम्बी रंग की साड़ी पहनकर श्रीकृष्ण के साथ रहना चाहती हैं।
  1. वृंदावन में रहना: वे वृंदावन की कुंजगलियों में श्रीकृष्ण के साथ विचरण करना चाहती हैं।
  1. यमुना तट पर दर्शन करना: वे यमुना के तट पर श्रीकृष्ण की लीलाओं का दर्शन करना चाहती हैं।
  1. निरंतर स्मरण करना: वे हर पल श्रीकृष्ण का स्मरण करती रहना चाहती हैं।

संक्षेप में, मीरा अपना सर्वस्व — तन, मन, धन — श्रीकृष्ण को अर्पित करने को तैयार हैं।

प्रश्न-अभ्यास — (ख) निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए

1हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
Show solution

काव्य-सौंदर्य:

भाव-सौंदर्य:
इन पंक्तियों में मीराबाई ने श्रीकृष्ण से अपनी पीड़ा हरने की विनती की है। वे श्रीकृष्ण के पूर्व के उपकारों का स्मरण कराकर उनसे सहायता माँगती हैं। द्रौपदी के चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने चीर बढ़ाकर उनकी लाज रखी और भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह रूप धारण किया — इन प्रसंगों का उल्लेख भक्त की श्रद्धा और विश्वास को व्यक्त करता है।

शिल्प-सौंदर्य:

  • भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा — 'री', 'भीर', 'धर्यो' जैसे राजस्थानी शब्द।
  • अलंकार: 'हरि हरो' में अनुप्रास अलंकार है। 'आप बढ़ायो चीर' और 'धर्यो आप सरीर' में दृष्टांत अलंकार है।
  • रस: भक्ति रस एवं करुण रस का सुंदर समन्वय।
  • शैली: विनय शैली — भक्त का ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण।
  • तुक: 'भीर', 'चीर', 'सरीर' में तुकबंदी है जो संगीतात्मकता प्रदान करती है।
2बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।
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काव्य-सौंदर्य:

भाव-सौंदर्य:
इन पंक्तियों में मीरा ने गजराज (हाथी) के उद्धार का प्रसंग याद दिलाया है। जब गजराज मगरमच्छ के मुँह में फँसकर डूब रहा था, तब श्रीकृष्ण ने उसे बचाया और उसकी पीड़ा काटी। इसी प्रकार मीरा अपने आप को 'दासी' कहकर श्रीकृष्ण से अपनी पीड़ा हरने की प्रार्थना करती हैं।

शिल्प-सौंदर्य:

  • भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा — 'राख्यो', 'म्हारी', 'भीर' जैसे शब्द।
  • अलंकार: 'काटी कुण्जर' में अनुप्रास अलंकार। 'गजराज' और 'कुण्जर' दोनों हाथी के पर्यायवाची हैं — पर्यायोक्ति।
  • दास्य भाव: 'दासी मीराँ' में दास्य भक्ति का सुंदर उदाहरण है।
  • रस: भक्ति रस एवं करुण रस।
  • तुक: 'पीर' और 'भीर' में तुकबंदी — संगीतात्मकता।
  • संबोधन: 'लाल गिरधर' — श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और आत्मीयता का भाव।
3चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

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भाषा अध्ययन

1उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए —
चीर, धर्यो, कुण्जर, बिन्दरावन, रहस्यूँ, राखो, बूढ़तो, लगास्यूँ, घणा, सरसी, हिवड़ा, कुसुम्बी

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योग्यता विस्तार

1मीरा के अन्य पदों को याद करके कक्षा में सुनाइए।

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2यदि आपको मीरा के पदों के कैसेट मिल सकें तो अवसर मिलने पर उन्हें सुनिए।

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परियोजना

1मीरा के पदों का संकलन करके उन पदों को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।

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2पहले हमारे यहाँ दस अवतार माने जाते थे। विष्णु के अवतार राम और कृष्ण प्रमुख हैं। अन्य अवतारों के बारे में जानकारी प्राप्त करके एक चार्ट बनाइए।

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6 more solved questions in मीरा (पद)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in मीरा (पद) for CBSE Class 10 Hindi- Course B?
Key topics in मीरा (पद) include लेखिका परिचय और काव्य-परिचय, पद-१ का सार और भावार्थ, पद-२ का सार और भावार्थ, मुख्य काव्य-विशेषताएँ. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for मीरा (पद) free?
The first 7 of the 13 solutions on this page are open to read. The other 6 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise मीरा (पद) for the CBSE Class 10 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 80 practice questions on मीरा (पद). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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