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Chapter 21 of 22
NCERT Solutions

धातुरूपाणि

CBSE · Class 9 · Sanskrit

NCERT Solutions for धातुरूपाणि — CBSE Class 9 Sanskrit.

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4 Questions Solved · 1 Section

धातुरूपाणि — अभ्यास प्रश्नोत्तर

1कोष्ठके प्रदत्त-धातूनाम् उचितै: रूपै: रिक्तस्थानानि पूर्यत —Show solution
दत्त सूचना: कोष्ठक में दिए गए धातु तथा लकार के अनुसार उचित क्रियापद लिखना है।

i. ये छात्रा: कक्षायां ध्यानेन पाठ शृण्वन्ति (श्रु, लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन), ते अभीष्टं परिणामं लभन्ते (लभ्, लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)।

ii. भो छात्रा: ! जंक इति भोज्यवस्तूनि तु कदापि मा भक्षयत (भक्षु, लोट्, मध्यमपुरुष, बहुवचन)।

iii. अनुशासनबद्ध: बाल: यथाकालं सर्वं कार्यं कर्तुं शक्नोति (शक्, लट्, प्रथमपुरुष, एकवचन)।

iv. पुत्र! पश्य (दृश्, लोट्, मध्यमपुरुष, एकवचन) स्वलेखम्। त्वं ध्यानेन सुलेखं लिख (लिख्, लोट्, मध्यमपुरुष, एकवचन)।

v. पितः! अद्य अहम् ध्यानेन लिखित्वा भवते दर्शयिष्यामि (दृश्, लृट्, उत्तमपुरुष, एकवचन)।

vi. रमा आश्रमे पुष्पाणि चिनोति (चि, लट्, प्रथमपुरुष, एकवचन)।

vii. यदि अहम् तत् कार्यं कुर्याम् तर्हि किम् उपहारं लप्स्ये (लभ्, लृट्, उत्तमपुरुष, एकवचन)?

viii. ये जना: यत्किमपि अखाद्यम् भक्षयन्ति (भक्षु, लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन) ते प्राय: अस्वस्था: भवन्ति (भू, लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)।

ix. भो बाला:! कमपि प्राणिनं मा तुदत (तुद्, लोट्, मध्यमपुरुष, बहुवचन)।

x. भवान् किं सत्यं ब्रवीति (ब्रू, लट्, प्रथमपुरुष, एकवचन)?
2रेलदुर्घटनाया: विषये प्रकाशितेऽस्मिन् समाचारपत्रे धातुरूपाणाम् अशुद्धय: सञ्जाता:। एतत् समाचारपत्रं पठित्वा क्रियापदानि शुद्धानि कुरुत।Show solution
दत्त सूचना: समाचारपत्र में अशुद्ध क्रियापदों को शुद्ध करना है। यथा — 'पठामि' के स्थान पर 'अपठम्' शुद्ध है।

i. 'असेवन्' के स्थान पर शुद्ध रूप — असेवन्त (सेव्, लङ्, प्रथमपुरुष, बहुवचन, आत्मनेपद)

ii. 'सन्ति' के स्थान पर शुद्ध रूप — अस्ति (अस्, लट्, प्रथमपुरुष, एकवचन) अथवा आसीत् (लङ्, एकवचन) — (संदर्भानुसार)

iii. 'अचोरय:' के स्थान पर शुद्ध रूप — अचोरयन् (चुर्, लङ्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)

iv. 'अमिलत्' के स्थान पर शुद्ध रूप — अमिलत् (मिल्, लङ्, प्रथमपुरुष, एकवचन) — यह रूप शुद्ध है; यदि बहुवचन हो तो अमिलन्

v. 'संवेदनहीना:' — यहाँ क्रियापद 'आसन्' होना चाहिए — आसन् (अस्, लङ्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)

vi. 'चलदूरभाषयन्त्रेण' के साथ क्रियापद — आसन् अथवा अभवन् (भू, लङ्, बहुवचन)

vii. 'निर्माणि' के स्थान पर शुद्ध रूप — निर्माणे अथवा क्रियापद संलग्ना: आसन् (अस्, लङ्, बहुवचन)

*(विशेष: समाचारपत्र का पूर्ण पाठ OCR में अस्पष्ट है, अतः प्रत्येक पंक्ति में अशुद्ध क्रियापद को उसके लकार, पुरुष एवं वचन के अनुसार शुद्ध किया गया है।)*
3उचित-धातुरूपेण रिक्तस्थानानि पूर्यत —Show solution
दत्त सूचना: वाक्य के काल (लकार) को पहचानकर उचित धातुरूप भरना है।

i. न कोऽपि जानाति श्व: किम् भविष्यति ?
(भू, लृट्, प्रथमपुरुष, एकवचन — 'श्व:' = कल, अतः भविष्यत्काल)

ii. ह्व: त्वम् आपणात् किं अक्रीणा: ?
(क्री, लङ्, मध्यमपुरुष, एकवचन — 'ह्व:' = कल/बीता हुआ कल, अतः भूतकाल)

iii. आगामिवर्षे अहम् विदेशम् गमिष्यामि
(गम्, लृट्, उत्तमपुरुष, एकवचन — 'आगामिवर्षे' = भविष्यत्काल)

iv. अधुना त्वं किं पचसि ?
(पच्, लट्, मध्यमपुरुष, एकवचन — 'अधुना' = वर्तमानकाल)

v. गतदिवसे अहम् एतत् पुस्तकम् ऐच्छम्
(इष्, लङ्, उत्तमपुरुष, एकवचन — 'गतदिवसे' = भूतकाल)

vi. परश्व: अहम् तव गृहे स्थास्यामि
(स्था, लृट्, उत्तमपुरुष, एकवचन — 'परश्व:' = परसों, अतः भविष्यत्काल)
4प्रदत्त: पद: वाक्यानि रचयत —Show solution
दत्त सूचना: दिए गए क्रियापद का प्रयोग करते हुए सार्थक संस्कृत वाक्य बनाना है।

i. सिञ्चति (सिच्, लट्, प्रथमपुरुष, एकवचन)
वाक्य: माली उद्याने पुष्पाणि सिञ्चति।
(माली बगीचे में फूलों को सींचता है।)

ii. पठेयु: (पठ्, विधिलिङ्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)
वाक्य: छात्रा: प्रतिदिनं ध्यानेन पठेयु:।
(छात्रों को प्रतिदिन ध्यान से पढ़ना चाहिए।)

iii. कथयानि (कथ्, लोट्, उत्तमपुरुष, एकवचन)
वाक्य: अहम् भवते सत्यं कथयानि।
(मैं आपको सत्य बताऊँ।)

iv. पिबाव (पा, लोट्, उत्तमपुरुष, द्विवचन)
वाक्य: आवाम् उष्णं दुग्धं पिबाव।
(हम दोनों गर्म दूध पिएँ।)

v. सेवामहे (सेव्, लट्, उत्तमपुरुष, बहुवचन, आत्मनेपद)
वाक्य: वयम् प्रतिदिनं ईश्वरं सेवामहे।
(हम सब प्रतिदिन ईश्वर की सेवा करते हैं।)

vi. आसन् (अस्, लङ्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)
वाक्य: ते सर्वे विद्यालये आसन्।
(वे सभी विद्यालय में थे।)

vii. लेखिष्यसि (लिख्, लृट्, मध्यमपुरुष, एकवचन)
वाक्य: त्वम् श्व: परीक्षायां सुन्दरं लेखिष्यसि।
(तुम कल परीक्षा में सुन्दर लिखोगे।)

viii. अपश्य: (दृश्, लङ्, मध्यमपुरुष, एकवचन)
वाक्य: त्वम् ह्य: किम् अपश्य:?
(तुमने कल क्या देखा?)

ix. लभन्ते (लभ्, लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन, आत्मनेपद)
वाक्य: परिश्रमिण: जना: सफलतां लभन्ते।
(परिश्रमी लोग सफलता प्राप्त करते हैं।)

x. अस्ति (अस्, लट्, प्रथमपुरुष, एकवचन)
वाक्य: सत्यमेव जयते इति भारतस्य आदर्शवाक्यम् अस्ति।
('सत्यमेव जयते' भारत का आदर्शवाक्य है।)

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