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Chapter 2 of 20
NCERT Solutions

भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व) (Part 2) — NCERT Solutions

CBSE · Class 11 · Hindi

NCERT Solutions for भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व) (Part 2), CBSE Class 11 Hindi: 8 textbook questions solved step by step.

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8 Questions Solved · 2 Sections

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अभ्यास

1लेखक ने पाठ में गानपन का उल्लेख किया है। पाठ के संदर्भ में स्पष्ट करते हुए बताएँ कि आपके विचार में इसे प्राप्त करने के लिए किस प्रकार के अभ्यास की आवश्यकता है?Show solution

दिया गया है: कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर की गायकी के संदर्भ में 'गानपन' शब्द का प्रयोग किया है।

पाठ के संदर्भ में 'गानपन' का अर्थ:
कुमार गंधर्व के अनुसार 'गानपन' वह विशेष गुण है जो किसी गायन को केवल स्वरों की तकनीकी प्रस्तुति से ऊपर उठाकर एक जीवंत, भावपूर्ण और आत्मीय अनुभव बना देता है। लता मंगेशकर के गायन में यह गानपन स्वाभाविक रूप से विद्यमान है — उनके स्वर में एक ऐसी तरलता और मिठास है जो सुनने वाले के हृदय को सीधे छू लेती है। गाने में केवल सुर-ताल का ज्ञान ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उस गाने की आत्मा को महसूस करके उसे श्रोता तक पहुँचाना ही 'गानपन' है।

गानपन प्राप्त करने के लिए आवश्यक अभ्यास:

  1. निरंतर रियाज़: प्रतिदिन स्वर-साधना करना आवश्यक है ताकि स्वर पर पूर्ण नियंत्रण हो।
  2. भावनात्मक तैयारी: गाने के भाव को गहराई से समझना और उसे अनुभव करके गाना।
  3. श्रवण-अभ्यास: श्रेष्ठ गायकों को ध्यान से सुनना और उनकी गायकी की बारीकियों को आत्मसात करना।
  4. शास्त्रीय संगीत का आधार: रागों, तालों और स्वरों की शास्त्रीय जानकारी गायन को परिपक्वता देती है।
  5. प्राकृतिक स्वर की पहचान: अपनी आवाज़ की प्रकृति को पहचानकर उसके अनुरूप गायन शैली विकसित करना।

निष्कर्ष: गानपन केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि संगीत के प्रति समर्पण, भावनात्मक गहराई और निरंतर साधना से प्राप्त होने वाला वह दुर्लभ गुण है जो गायन को कला के उच्चतम स्तर पर ले जाता है।

2लेखक ने लता की गायकी की किन विशेषताओं को उजागर किया है? आपको लता की गायकी में कौन-सी विशेषताएँ नजर आती हैं? उदाहरण सहित बताइए।Show solution

दिया गया है: कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर की गायकी का विस्तृत विश्लेषण किया है।

लेखक द्वारा उजागर की गई विशेषताएँ:

  1. स्वर की कोमलता और मिठास: लता के स्वर में एक अद्भुत कोमलता है। उनकी आवाज़ में एक ऐसी मिठास है जो श्रोता को तुरंत आकर्षित कर लेती है।
  1. शुद्ध उच्चारण: लेखक के अनुसार लता के गायन में शब्दों का उच्चारण अत्यंत स्पष्ट और शुद्ध होता है। प्रत्येक शब्द सुनाई देता है, जो अन्य गायिकाओं में प्रायः नहीं मिलता।
  1. आवाज़ की तरलता: उनके स्वर में एक प्रवाह है — जैसे निर्मल जल की धारा बहती हो। एक स्वर से दूसरे स्वर पर जाना उनके लिए अत्यंत सहज है।
  1. भावाभिव्यक्ति की क्षमता: शृंगारपरक गानों में वे भावों को इतनी उत्कटता से व्यक्त करती हैं कि श्रोता उस भाव में डूब जाता है।
  1. गानपन: लेखक ने विशेष रूप से उल्लेख किया है कि लता के गायन में 'गानपन' है — एक ऐसी जीवंतता जो गाने को केवल स्वरों की प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक संपूर्ण अनुभव बना देती है।
  1. विविधता: वे शास्त्रीय, लोक और चित्रपट — सभी प्रकार के गानों को समान दक्षता से गाती हैं।

व्यक्तिगत दृष्टि से विशेषताएँ (उदाहरण सहित):

  • 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाने में उनकी आवाज़ में देशभक्ति का जो भाव है, वह श्रोता की आँखें नम कर देता है।
  • 'लग जा गले' जैसे गानों में उनकी आवाज़ की कोमलता और भावनात्मक गहराई अतुलनीय है।

निष्कर्ष: लता मंगेशकर की गायकी बहुआयामी है — तकनीकी दृष्टि से परिपूर्ण और भावनात्मक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध।

3लता ने करुण रस के गानों के साथ न्याय नहीं किया है, जबकि शृंगारपरक गाने वे बड़ी उत्कटता से गाती हैं— इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?Show solution

दिया गया है: कुमार गंधर्व का यह मत है कि लता मंगेशकर शृंगारपरक गाने तो बड़ी उत्कटता से गाती हैं, परंतु करुण रस के गानों में वे पूरा न्याय नहीं कर पातीं।

कुमार गंधर्व के तर्क का विश्लेषण:
लेखक का मानना है कि करुण रस के गानों में जो गहरी पीड़ा, विषाद और आँसुओं की अनुभूति होनी चाहिए, वह लता की आवाज़ में पूरी तरह नहीं उभर पाती। उनकी आवाज़ की स्वाभाविक मिठास और कोमलता करुण रस की गहन वेदना को उस तीव्रता से व्यक्त नहीं कर पाती जो इस रस की माँग है।

सहमति के बिंदु:

  • यह सत्य है कि करुण रस के लिए आवाज़ में एक विशेष भारीपन और गहराई की आवश्यकता होती है।
  • लता की आवाज़ की स्वाभाविक प्रकृति कोमल और मधुर है, जो शृंगार रस के लिए अधिक उपयुक्त है।

असहमति के बिंदु:

  • 'ऐ मेरे वतन के लोगों' जैसे गानों में लता ने करुण भाव को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
  • कई फ़िल्मी गानों में उनके करुण रस के गायन ने श्रोताओं को भावविभोर किया है।
  • कला की समीक्षा व्यक्तिनिष्ठ होती है; जो एक को अपर्याप्त लगे, वह दूसरे को पर्याप्त लग सकता है।

निष्कर्ष: कुमार गंधर्व की यह राय एक विद्वान संगीतकार की आलोचनात्मक दृष्टि है जिसमें आंशिक सत्य है। परंतु लता की करुण रस की गायकी को पूरी तरह अन्यायपूर्ण कहना उचित नहीं होगा। वे करुण रस में भी अपनी विशिष्ट शैली में भाव व्यक्त करती हैं, भले ही वह शैली पारंपरिक करुण रस की अपेक्षाओं से भिन्न हो।

4संगीत का क्षेत्र ही विस्तीर्ण है। वहाँ अब तक अलंक्षित, असंशोधित और अद्वितिपूर्व ऐसा खूब बड़ा प्रांत है तथापि बड़े जोश से इसकी खोज और उपयोग चित्रपट के लोग करते चले आ रहे हैं— इस कथन को वर्तमान फ़िल्मी संगीत के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।Show solution

दिया गया है: कुमार गंधर्व का यह कथन संगीत की असीमित संभावनाओं और चित्रपट संगीत की खोजी प्रवृत्ति के बारे में है।

कथन का भावार्थ:
संगीत एक विशाल सागर है जिसका अधिकांश भाग अभी भी अनछुआ, अपरिष्कृत और अन्वेषण की प्रतीक्षा में है। चित्रपट (फ़िल्म) संगीत के निर्माता इस विशाल क्षेत्र में निरंतर नई संभावनाओं की खोज करते रहे हैं।

वर्तमान फ़िल्मी संगीत के संदर्भ में स्पष्टीकरण:

  1. विविध रागों का उपयोग: आज के फ़िल्मी संगीत में शास्त्रीय रागों — भैरवी, यमन, भीमपलासी आदि — का सृजनात्मक उपयोग किया जा रहा है।
  1. लोक संगीत का समावेश: राजस्थानी, पंजाबी, बंगाली, भोजपुरी आदि लोक धुनों को फ़िल्मी संगीत में सम्मिलित किया गया है, जिससे नई ध्वनियाँ उभरी हैं।
  1. पाश्चात्य और भारतीय संगीत का मिश्रण: आधुनिक फ़िल्मी संगीत में पश्चिमी वाद्ययंत्रों और भारतीय रागों का अद्भुत संयोजन देखने को मिलता है।
  1. नए प्रयोग: A.R. रहमान जैसे संगीतकारों ने सूफ़ी, कर्नाटक और पाश्चात्य संगीत को मिलाकर एक नई शैली विकसित की है।
  1. अनछुए भावों की अभिव्यक्ति: फ़िल्मी संगीत ने ऐसे भावों और अनुभवों को संगीत में ढाला है जो शास्त्रीय संगीत में प्रायः नहीं आते।

निष्कर्ष: कुमार गंधर्व का यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। वर्तमान फ़िल्मी संगीत संगीत के उस विशाल अनछुए क्षेत्र को निरंतर खोज रहा है और नई-नई संभावनाओं को साकार कर रहा है।

5चित्रपट संगीत ने लोगों के कान बिगाड़ दिए— अक्सर यह आरोप लगाया जाता रहा है। इस संदर्भ में कुमार गंधर्व की राय और अपनी राय लिखें।

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6शास्त्रीय एवं चित्रपट दोनों तरह के संगीतों के महत्व को आधार क्या होना चाहिए? कुमार गंधर्व की इस संबंध में क्या राय है? स्वयं आप क्या सोचते हैं?

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कुछ करने और सोचने के लिए

1पाठ में किए गए अंतरों के अलावा संगीत शिक्षक से चित्रपट संगीत एवं शास्त्रीय संगीत का अंतर पता करें। इन अंतरों को सूचीबद्ध करें।

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2कुमार गंधर्व ने लिखा है— चित्रपट संगीत गाने वाले को शास्त्रीय संगीत की उत्तम जानकारी होना आवश्यक है? क्या शास्त्रीय गायकों को भी चित्रपट संगीत से कुछ सीखना चाहिए? कक्षा में विचार-विमर्श करें।

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4 more solved questions in भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व) for CBSE Class 11 Hindi?
Key topics in भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व) include १. लेखक की प्रथम अनुभूति और लता की पहचान, २. लता का चित्रपट संगीत पर प्रभाव, ३. लता की गायकी की विशेषताएँ, ४. करुण रस, मध्यलय और द्रुतलय. Study these first, then practise questions on each for Class 11 exams.
Are these NCERT Solutions for भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व) free?
The first 4 of the 8 solutions on this page are open to read. The other 4 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व) for Class 11 exams?
Learn the core ideas first, then work through the 43 practice questions on भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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