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Chapter 3 of 20
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मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) — NCERT Solutions

CBSE · Class 11 · Hindi

NCERT Solutions for मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती), CBSE Class 11 Hindi: 13 textbook questions solved step by step.

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13 Questions Solved · 4 Sections

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पाठ के साथ

1मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है?Show solution

दिया गया है: मियाँ नसीरुद्दीन एक अनुभवी और कुशल नानबाई हैं।

उत्तर:
मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा इसलिए कहा गया है क्योंकि —

  1. वे नानबाइयों की तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं और अपने खानदानी पेशे को पूरी निष्ठा एवं कुशलता से निभाते आए हैं।
  2. वे छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने में माहिर हैं — बाकरखानी, शीरमाल, ताफ़तान, बेसनी, खमीरी, रूमाली, गाव-दीदा, गाजेबान, तुनकी आदि।
  3. उनका मानना है कि रोटी बनाने का हुनर केवल किताबों से नहीं, बल्कि व्यावहारिक तालीम (प्रशिक्षण) से आता है। वे इस कला को जीवित रखने के लिए कारीगरों को प्रशिक्षित करते हैं।
  4. वे रोटी बनाने की कला को एक पवित्र विरासत मानते हैं और उसे आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं।

इन्हीं कारणों से उन्हें नानबाइयों का मसीहा (उद्धारकर्ता/महान व्यक्ति) कहा गया है।

2लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास क्यों गई थीं?Show solution

दिया गया है: लेखिका कृष्णा सोबती एक पत्रकार/लेखिका की भूमिका में हैं।

उत्तर:
लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास उनसे बातचीत करने और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से गई थीं। मियाँ नसीरुद्दीन मटियामहल के प्रसिद्ध नानबाई थे जो छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर थे। लेखिका उनके खानदानी पेशे, रोटी बनाने की कला, उनके जीवन-अनुभव और उनकी विशेषताओं के बारे में जानना चाहती थीं। संक्षेप में, लेखिका एक साक्षात्कार (इंटरव्यू) लेने के उद्देश्य से उनके पास गई थीं ताकि उनके व्यक्तित्व और कार्य को पाठकों के सामने प्रस्तुत कर सकें।

3बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?Show solution

दिया गया है: लेखिका ने बादशाह के नाम का प्रसंग छेड़ा था।

उत्तर:
जब लेखिका ने बादशाह के नाम का प्रसंग छेड़ा तो मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी इसलिए खत्म होने लगी क्योंकि —

  1. मियाँ नसीरुद्दीन एक स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर व्यक्ति थे। वे अपनी कला और मेहनत को किसी बादशाह या शाही संरक्षण से जोड़कर नहीं देखते थे।
  2. उनके लिए उनका हुनर ही उनकी असली पहचान थी, न कि किसी बादशाह से संबंध।
  3. वे अपनी कला को स्वयं के परिश्रम और पारिवारिक विरासत का फल मानते थे। बादशाह का नाम लेकर उनकी कला को किसी और से जोड़ना उन्हें उचित नहीं लगा।
  4. संभवतः उन्हें लगा कि लेखिका उनकी कला की महत्ता को बादशाह के संदर्भ में देख रही हैं, जबकि उनकी दृष्टि में उनकी कला स्वयंसिद्ध थी।

इस प्रकार बादशाह का प्रसंग उनके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाता था, इसलिए उनकी रुचि समाप्त होने लगी।

4मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर किसी दबे हुए अंधड़ के आसार देख यह मज़मून न छेड़ने का फ़ैसला किया – इस कथन के पहले और बाद के प्रसंग का उल्लेख करते हुए इसे स्पष्ट कीजिए।Show solution

दिया गया है: उपर्युक्त कथन पाठ 'मियाँ नसीरुद्दीन' से लिया गया है।

इस कथन से पहले का प्रसंग:
लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन से बातचीत कर रही थीं। बातों-बातों में लेखिका के मन में आया कि वे मियाँ से पूछें कि उनके बेटे-बेटियाँ हैं या नहीं, अर्थात् उनके परिवार के बारे में जानकारी लें। यह एक व्यक्तिगत और संवेदनशील विषय था।

कथन का स्पष्टीकरण:
जब लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर गौर किया तो उन्हें वहाँ एक दबे हुए तूफान (अंधड़) के संकेत दिखे — अर्थात् मियाँ का चेहरा किसी भीतरी दर्द, तनाव या नाराज़गी का संकेत दे रहा था। लेखिका ने समझदारी दिखाते हुए यह विषय (परिवार के बारे में पूछना) न छेड़ने का निर्णय किया।

इस कथन के बाद का प्रसंग:
लेखिका ने विषय बदलते हुए पूछा — 'ये कारीगर लोग आपकी शागिर्दी करते हैं?' इस पर मियाँ ने बताया कि वे कारीगरों को गिनकर मजूरी देते हैं — दो रुपये मन आटे की और चार रुपये मन मैदे की।

निष्कर्ष:
इस कथन से स्पष्ट होता है कि लेखिका एक कुशल साक्षात्कारकर्ता थीं जो मियाँ के मनोभावों को पढ़ सकती थीं और उचित समय पर संवेदनशील विषयों से बचना जानती थीं।

5पाठ में मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र लेखिका ने कैसे खींचा है?Show solution

दिया गया है: यह प्रश्न पाठ 'मियाँ नसीरुद्दीन' के समग्र अध्ययन पर आधारित है।

उत्तर:
लेखिका कृष्णा सोबती ने मियाँ नसीरुद्दीन का अत्यंत जीवंत और प्रभावशाली शब्दचित्र निम्नलिखित रूप में खींचा है —

1. शारीरिक वर्णन:
मियाँ नसीरुद्दीन की आँखें कंचे जैसी चमकदार हैं। उनके चेहरे पर भाव तुरंत बदलते हैं — कभी रुखाई, कभी गर्व, कभी पुरानी यादों की उदासी।

2. स्वभाव और व्यक्तित्व:

  • वे स्वाभिमानी और आत्मविश्वासी हैं।
  • वे कम बोलते हैं, पर जो बोलते हैं वह सटीक और प्रभावशाली होता है।
  • वे रुखाई से जवाब देते हैं — 'अपने कारीगर, और कौन होंगे!'
  • वे अपने काम को लेकर गंभीर और समर्पित हैं।

3. कला के प्रति समर्पण:
वे छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने में माहिर हैं और इस कला को खानदानी विरासत मानते हैं। उनका कहना है — 'तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है।'

4. पुरानी यादों का दर्द:
जब वे पुराने जमाने और कद्रदानों को याद करते हैं तो उनकी आँखों में उदासी छा जाती है — 'उतर गए वे जमाने।'

5. भाषा-शैली:
लेखिका ने उर्दू मिश्रित हिंदी के माध्यम से मियाँ के व्यक्तित्व को और अधिक प्रामाणिक बनाया है।

निष्कर्ष: इस प्रकार लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन को एक जीवंत, स्वाभिमानी, कला-प्रेमी और परंपरा के रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया है।

पाठ के आस-पास

1मियाँ नसीरुद्दीन की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं?Show solution

उत्तर:
मियाँ नसीरुद्दीन की निम्नलिखित बातें मुझे अच्छी लगीं —

  1. अपने काम के प्रति समर्पण: वे अपने खानदानी पेशे को पूरी निष्ठा से निभाते हैं और उसे गर्व के साथ आगे बढ़ाते हैं।
  1. व्यावहारिक ज्ञान पर बल: उनका यह कथन — 'तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है' — बताता है कि वे किताबी ज्ञान से अधिक व्यावहारिक प्रशिक्षण को महत्त्व देते हैं। यह बात आज भी प्रासंगिक है।
  1. स्वाभिमान: वे किसी के आगे झुकते नहीं, अपनी बात सीधे और स्पष्ट रूप से कहते हैं।
  1. परंपरा का सम्मान: वे अपनी पारिवारिक विरासत को जीवित रखने के लिए प्रयासरत हैं।
  1. कला के प्रति जागरूकता: वे रोटी बनाने को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि एक कला मानते हैं और उसकी बारीकियों को जानते हैं।
2तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है – यहाँ लेखक ने तालीम शब्द का दो बार प्रयोग क्यों किया है? क्या आप दूसरी बार आए तालीम शब्द की जगह कोई अन्य शब्द रख सकते हैं? लिखिए।Show solution

दिया गया है: 'तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है' — मियाँ नसीरुद्दीन का कथन।

तालीम शब्द के दो बार प्रयोग का कारण:
यहाँ 'तालीम' शब्द का दो बार प्रयोग दो अलग-अलग अर्थों में किया गया है —

  • पहला 'तालीम' — सामान्य शिक्षा या पढ़ाई के अर्थ में (किताबी ज्ञान)।
  • दूसरा 'तालीम' — व्यावहारिक प्रशिक्षण या हुनर सीखने के अर्थ में (कार्य-कौशल)।

मियाँ का आशय यह है कि केवल किताबी पढ़ाई से काम नहीं चलता; असली महत्त्व तो व्यावहारिक प्रशिक्षण (हुनर) का है। इस प्रकार एक ही शब्द के दो प्रयोग से वाक्य में गहराई और व्यंग्य दोनों आ जाते हैं।

दूसरे 'तालीम' के स्थान पर वैकल्पिक शब्द:
दूसरे 'तालीम' की जगह निम्नलिखित शब्द रखे जा सकते हैं —

  • प्रशिक्षण — 'तालीम की प्रशिक्षण ही बड़ी चीज़ होती है।'
  • हुनर — 'तालीम की हुनर ही बड़ी चीज़ होती है।'
  • कार्य-कौशल — 'तालीम की कार्य-कौशल ही बड़ी चीज़ होती है।'
  • सीख — 'तालीम की सीख ही बड़ी चीज़ होती है।'
3मियाँ नसीरुद्दीन तीसरी पीढ़ी के हैं जिसने अपने खानदानी व्यवसाय को अपनाया। वर्तमान समय में प्रायः लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय को नहीं अपना रहे हैं। ऐसा क्यों?

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4मियाँ, कहीं अखबारनवीस तो नहीं हो? यह तो खोजियों की खुराफ़ात है – अखबार की भूमिका को देखते हुए इस पर टिप्पणी करें।

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पकवानों को जानें

1पाठ में आए रोटियों के अलग-अलग नामों की सूची बनाएँ और इनके बारे में जानकारी प्राप्त करें।

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भाषा की बात

1तीन चार वाक्यों में अनुकूल प्रसंग तैयार कर नीचे दिए गए वाक्यों का इस्तेमाल करें।
क. पंचहजारी अंदाज़ से सिर हिलाया।
ख. आँखों के कंचे हम पर फेर दिए।
ग. आ बैठे उन्हीं के ठीये पर।

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2बिटर-बिटर देखना – यहाँ देखने के एक खास तरीके को प्रकट किया गया है? देखने संबंधी इस प्रकार के चार क्रिया-विशेषणों का प्रयोग कर वाक्य बनाइए।

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3नीचे दिए वाक्यों में अर्थ पर बल देने के लिए शब्द-क्रम परिवर्तित किया गया है। सामान्यतः इन वाक्यों को किस क्रम में लिखा जाता है? लिखें।
क. मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए।
ख. निकाल लेंगे वक्त थोड़ा।
ग. दिमाग में चक्कर काट गई है बात।
घ. रोटी जनाब पकती है आँच से।

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) for CBSE Class 11 Hindi?
Key topics in मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) include लेखिका और कृति का परिचय, मियाँ नसीरुद्दीन का व्यक्तित्व, वंश और पारिवारिक परंपरा, हुनर, सीख और मेहनत. Study these first, then practise questions on each for Class 11 exams.
Are these NCERT Solutions for मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) free?
The first 7 of the 13 solutions on this page are open to read. The other 6 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) for Class 11 exams?
Learn the core ideas first, then work through the 41 practice questions on मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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