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Chapter 7 of 20
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विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) — NCERT Solutions

CBSE · Class 11 · Hindi

NCERT Solutions for विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त), CBSE Class 11 Hindi: 13 textbook questions solved step by step.

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13 Questions Solved · 4 Sections

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पाठ के साथ

1शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?Show solution

दिया गया है: पाठ 'विदाई-संभाषण' में लेखक बालमुकुंद गुप्त ने शिवशंभु की दो गायों की कहानी का उल्लेख किया है।

उत्तर:
लेखक इस कहानी के माध्यम से यह बताना चाहता है कि एक साधारण गरीब आदमी शिवशंभु के पास दो गाएँ थीं। जब उनमें से एक गाय बिक गई या चली गई, तो दूसरी गाय उसके वियोग में दुखी होकर रोती रही, खाना-पीना छोड़ दिया। अर्थात् एक पशु भी अपने साथी के बिछड़ने पर इतना दुखी होता है।

इस कहानी के माध्यम से लेखक व्यंग्यपूर्वक लॉर्ड कर्जन पर यह कटाक्ष करता है कि भारत की करोड़ों जनता ने कर्जन के जाने पर कोई दुख नहीं मनाया, कोई आँसू नहीं बहाया। जबकि एक पशु भी अपने साथी के जाने पर दुखी होता है। इससे स्पष्ट होता है कि कर्जन का शासन इतना अत्याचारपूर्ण था कि भारत की जनता उनके जाने पर दुखी होने के बजाय प्रसन्न थी। लेखक यह भी कहना चाहता है कि यदि शासक जनता के प्रति संवेदनशील और हितकारी हो, तो जनता उसके जाने पर अवश्य दुखी होती है।

2आठ करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना पर आपने जरा भी ध्यान नहीं दिया—यहाँ किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?Show solution

दिया गया है: पाठ में लेखक ने 'आठ करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना' का उल्लेख किया है।

उत्तर:
यहाँ लेखक ने बंगाल-विभाजन (1905) की ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया है। लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया था। बंगाल की आठ करोड़ जनता ने इस विभाजन का घोर विरोध किया। जनता ने गिड़गिड़ाकर, प्रार्थनाएँ करके, आंदोलन करके कर्जन से बंगाल को न बाँटने की विनती की, परंतु कर्जन ने किसी की एक न सुनी और अपनी जिद पर अड़े रहे। उन्होंने बंगाल का विभाजन कर दिया। इसी घटना की ओर लेखक ने यहाँ संकेत किया है। इस विभाजन के विरोध में ही 'स्वदेशी आंदोलन' प्रारंभ हुआ था।

3कर्जन को इस्तीफ़ा क्यों देना पड़ा?Show solution

दिया गया है: पाठ में लॉर्ड कर्जन के इस्तीफे का उल्लेख है।

उत्तर:
लॉर्ड कर्जन को निम्नलिखित कारणों से इस्तीफा देना पड़ा:

  1. किचनर से विवाद: कर्जन का भारत के सेनापति लॉर्ड किचनर से गहरा मतभेद हो गया था। किचनर सेना पर पूर्ण नियंत्रण चाहते थे, जबकि कर्जन इसके विरुद्ध थे।
  1. ब्रिटिश सरकार का असहयोग: इस विवाद में ब्रिटेन की सरकार ने कर्जन का साथ न देकर किचनर का पक्ष लिया।
  1. अपमान की स्थिति: जब ब्रिटिश सरकार ने कर्जन की बात नहीं मानी और उनके द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी को भी नहीं रखा गया, तो कर्जन को अपमानित महसूस हुआ।
  1. जिद और अहंकार: कर्जन की अपनी जिद और अहंकार भी उनके पतन का कारण बना। उनकी जिस जिद ने भारत की जनता को पीड़ित किया, उसी जिद ने उन्हें भी पीड़ा दी और अंततः उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

इस प्रकार कर्जन का इस्तीफा उनकी अपनी नीतियों और अहंकार का परिणाम था।

4बिचारिए तो, क्या शान आपकी इस देश में थी और अब क्या हो गई! कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे! — आशय स्पष्ट कीजिए।Show solution

दिया गया है: पाठ 'विदाई-संभाषण' की उपर्युक्त पंक्तियाँ।

आशय:
लेखक बालमुकुंद गुप्त इन पंक्तियों में लॉर्ड कर्जन के उत्थान और पतन पर व्यंग्यपूर्ण टिप्पणी कर रहे हैं।

जब कर्जन भारत के वायसराय बनकर आए थे, तब उनकी बड़ी शान-शौकत थी। वे भारत के सर्वोच्च शासक थे। उनके एक इशारे पर सब कुछ होता था। करोड़ों लोग उनके अधीन थे। उनका रुतबा और वैभव अत्यंत ऊँचा था। वे स्वयं को सर्वशक्तिमान समझते थे।

परंतु अपनी जिद, अहंकार और अत्याचारी नीतियों के कारण वे इतने नीचे गिरे कि उन्हें अपमानित होकर इस्तीफा देना पड़ा। जिस ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि बनकर वे भारत आए थे, उसी सरकार ने उनका साथ नहीं दिया। उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी को भी नहीं रखा गया।

लेखक का आशय है कि कर्जन जितनी ऊँचाई पर थे, उनका पतन उतना ही गहरा और दुखद रहा। यह उनके अहंकार और दुर्नीति का स्वाभाविक परिणाम था।

5आपके और यहाँ के निवासियों के बीच में कोई तीसरी शक्ति और भी है— यहाँ तीसरी शक्ति किसे कहा गया है?Show solution

दिया गया है: पाठ की उपर्युक्त पंक्ति।

उत्तर:
यहाँ 'तीसरी शक्ति' से लेखक का आशय ईश्वर अथवा विधाता से है। कुछ विद्वान इसे ब्रिटिश संसद या ब्रिटिश सरकार भी मानते हैं।

लेखक कहना चाहता है कि एक ओर कर्जन हैं और दूसरी ओर भारत के निवासी हैं। इन दोनों के बीच एक तीसरी शक्ति भी है जो सबके ऊपर है और जो अंततः न्याय करती है। यह शक्ति न तो कर्जन के अत्याचार को सहन करती है और न ही भारतीय जनता को सदा पीड़ित रहने देती है।

इस तीसरी शक्ति ने ही कर्जन को उनकी जिद और अत्याचार का दंड दिया और उन्हें अपमानित होकर भारत छोड़ने पर विवश किया। लेखक का संकेत है कि ईश्वरीय न्याय अवश्य होता है — अत्याचारी को उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है।

पाठ के आस-पास

1पाठ का यह अंश शिवशंभु के चिट्ठे से लिया गया है। शिवशंभु नाम की चर्चा पाठ में भी हुई है। बालमुकुंद गुप्त ने इस नाम का उपयोग क्यों किया होगा?Show solution

उत्तर:
बालमुकुंद गुप्त ने 'शिवशंभु' नाम का उपयोग अत्यंत सोच-समझकर किया है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  1. प्रतीकात्मकता: 'शिवशंभु' भगवान शिव का नाम है। शिव को भोलेनाथ भी कहा जाता है — जो सरल, निष्कपट और सत्यवादी हैं। इस नाम के माध्यम से लेखक यह दर्शाना चाहता है कि वे एक सामान्य, सीधे-सादे भारतीय की तरह बात कर रहे हैं जिसमें कोई छल-कपट नहीं है।
  1. सुरक्षा का उपाय: ब्रिटिश शासन के दौरान सीधे आलोचना करना खतरनाक था। छद्म नाम 'शिवशंभु' का उपयोग करके लेखक ने अपनी पहचान छुपाई और साथ ही व्यंग्य भी किया।
  1. आम भारतीय का प्रतिनिधित्व: शिवशंभु एक आम हिंदुस्तानी का प्रतीक है जो अपनी बात निडरता से कहता है। इस नाम के माध्यम से लेखक ने संपूर्ण भारतीय जनमानस की भावनाओं को अभिव्यक्ति दी है।
  1. व्यंग्य की धार: शिव का एक रूप विध्वंसक भी है। इस नाम के माध्यम से लेखक ने कर्जन की नीतियों पर तीखा व्यंग्य किया है।
2नादिर से भी बढ़कर आपकी जिद है— कर्जन के संदर्भ में क्या आपको यह बात सही लगती है? पक्ष या विपक्ष में तर्क दीजिए।Show solution

उत्तर (पक्ष में):
नादिरशाह एक क्रूर और जिद्दी शासक था जिसने दिल्ली में भीषण नरसंहार किया था। लेखक ने कर्जन की तुलना नादिर से की है। यह तुलना अनेक दृष्टियों से उचित प्रतीत होती है:

  1. बंगाल-विभाजन की जिद: करोड़ों लोगों के विरोध के बावजूद कर्जन ने बंगाल का विभाजन किया। यह उनकी अदम्य जिद का प्रमाण है।
  1. किसी की न सुनना: कर्जन ने न भारतीय जनता की सुनी, न अपने अधिकारियों की, न ब्रिटिश सरकार की। यह हठधर्मिता नादिर जैसी ही थी।
  1. स्वयं का नुकसान: नादिर की जिद ने जहाँ दूसरों को नुकसान पहुँचाया, वहीं कर्जन की जिद ने उन्हें स्वयं भी बर्बाद किया।

विपक्ष में:
नादिर एक विदेशी आक्रमणकारी था जिसने केवल लूट और हत्या की। कर्जन एक प्रशासक थे जिनकी कुछ नीतियाँ भले ही गलत थीं, परंतु उनका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य को मजबूत करना था। अतः दोनों की तुलना पूर्णतः उचित नहीं है।

निष्कर्ष: लेखक ने यह तुलना व्यंग्यात्मक रूप से की है जो कर्जन की हठधर्मिता को उजागर करती है।

3क्या आँख बंद करके मनमाने हुक्म चलाना और किसी की कुछ न सुनने का नाम ही शासन है?— इन पंक्तियों को ध्यान में रखते हुए शासन क्या है? इस पर चर्चा कीजिए।

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4इस पाठ में आए अलिफ़ लैला, अलहदीन, अबुल हसन और बगदाद के खलीफ़ा के बारे में सूचना एकत्रित कर कक्षा में चर्चा कीजिए।

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गौर करने की बात

कइससे आपका जाना भी परंपरा की चाल से कुछ अलग नहीं है, तथापि आपके शासनकाल का नाटक घोर दुखांत है, और अधिक आश्चर्य की बात यह है कि दर्शक तो क्या, स्वयं सूत्रधार भी नहीं जानता था कि उसने जो खेल सुखांत समझकर खेलना आरंभ किया था, वह दुखांत हो जावेगा। — इस अंश का आशय स्पष्ट कीजिए।

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खयहाँ की प्रजा ने आपकी जिद का फल यहाँ देख लिया। उसने देख लिया कि आपकी जिस जिद ने इस देश की प्रजा को पीड़ित किया, आपको भी उसने कम पीड़ा न दी, यहाँ तक कि आप स्वयं उसका शिकार हुए। — इस अंश का आशय स्पष्ट कीजिए।

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भाषा की बात

1वे दिन-रात यही मनाते थे कि जल्द श्रीमान् यहाँ से पधारें। सामान्य तौर पर आने के लिए पधारें शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ पधारें शब्द का क्या अर्थ है?

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2पाठ में से कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं, जिनमें भाषा का विशिष्ट प्रयोग (भारतेंदु युगीन हिंदी) हुआ है। उन्हें सामान्य हिंदी में लिखिए— क. आगे भी इस देश में जो प्रधान शासक आए, अंत को उनको जाना पड़ा। ख. आप किस को आए थे और क्या कर चले? ग. उनका रखाया एक आदमी नौकर न रखा। घ. पर आशीर्वाद करता हूँ कि तू फिर उठे और अपने प्राचीन गौरव और यश को फिर से लाभ करे।

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6 more solved questions in विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) for CBSE Class 11 Hindi?
Key topics in विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) include लेखक परिचय, पाठ का स्वरूप और संदर्भ, मुख्य भाव और विचार, महत्वपूर्ण कथन और उनके अर्थ. Study these first, then practise questions on each for Class 11 exams.
Are these NCERT Solutions for विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) free?
The first 7 of the 13 solutions on this page are open to read. The other 6 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) for Class 11 exams?
Learn the core ideas first, then work through the 48 practice questions on विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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