विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) — NCERT Solutions
CBSE · Class 11 · Hindi
NCERT Solutions for विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त), CBSE Class 11 Hindi: 13 textbook questions solved step by step.
Interactive on Super Tutor
Studying विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त)? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for NCERT solutions and more.
Free trial, no card needed.
The first 7 solutions are open to read. The other 6 are free with a Super Tutor account.
पाठ के साथ
1शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?Show solution
दिया गया है: पाठ 'विदाई-संभाषण' में लेखक बालमुकुंद गुप्त ने शिवशंभु की दो गायों की कहानी का उल्लेख किया है।
उत्तर:
लेखक इस कहानी के माध्यम से यह बताना चाहता है कि एक साधारण गरीब आदमी शिवशंभु के पास दो गाएँ थीं। जब उनमें से एक गाय बिक गई या चली गई, तो दूसरी गाय उसके वियोग में दुखी होकर रोती रही, खाना-पीना छोड़ दिया। अर्थात् एक पशु भी अपने साथी के बिछड़ने पर इतना दुखी होता है।
इस कहानी के माध्यम से लेखक व्यंग्यपूर्वक लॉर्ड कर्जन पर यह कटाक्ष करता है कि भारत की करोड़ों जनता ने कर्जन के जाने पर कोई दुख नहीं मनाया, कोई आँसू नहीं बहाया। जबकि एक पशु भी अपने साथी के जाने पर दुखी होता है। इससे स्पष्ट होता है कि कर्जन का शासन इतना अत्याचारपूर्ण था कि भारत की जनता उनके जाने पर दुखी होने के बजाय प्रसन्न थी। लेखक यह भी कहना चाहता है कि यदि शासक जनता के प्रति संवेदनशील और हितकारी हो, तो जनता उसके जाने पर अवश्य दुखी होती है।
2आठ करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना पर आपने जरा भी ध्यान नहीं दिया—यहाँ किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?Show solution
दिया गया है: पाठ में लेखक ने 'आठ करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना' का उल्लेख किया है।
उत्तर:
यहाँ लेखक ने बंगाल-विभाजन (1905) की ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया है। लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया था। बंगाल की आठ करोड़ जनता ने इस विभाजन का घोर विरोध किया। जनता ने गिड़गिड़ाकर, प्रार्थनाएँ करके, आंदोलन करके कर्जन से बंगाल को न बाँटने की विनती की, परंतु कर्जन ने किसी की एक न सुनी और अपनी जिद पर अड़े रहे। उन्होंने बंगाल का विभाजन कर दिया। इसी घटना की ओर लेखक ने यहाँ संकेत किया है। इस विभाजन के विरोध में ही 'स्वदेशी आंदोलन' प्रारंभ हुआ था।
3कर्जन को इस्तीफ़ा क्यों देना पड़ा?Show solution
दिया गया है: पाठ में लॉर्ड कर्जन के इस्तीफे का उल्लेख है।
उत्तर:
लॉर्ड कर्जन को निम्नलिखित कारणों से इस्तीफा देना पड़ा:
- किचनर से विवाद: कर्जन का भारत के सेनापति लॉर्ड किचनर से गहरा मतभेद हो गया था। किचनर सेना पर पूर्ण नियंत्रण चाहते थे, जबकि कर्जन इसके विरुद्ध थे।
- ब्रिटिश सरकार का असहयोग: इस विवाद में ब्रिटेन की सरकार ने कर्जन का साथ न देकर किचनर का पक्ष लिया।
- अपमान की स्थिति: जब ब्रिटिश सरकार ने कर्जन की बात नहीं मानी और उनके द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी को भी नहीं रखा गया, तो कर्जन को अपमानित महसूस हुआ।
- जिद और अहंकार: कर्जन की अपनी जिद और अहंकार भी उनके पतन का कारण बना। उनकी जिस जिद ने भारत की जनता को पीड़ित किया, उसी जिद ने उन्हें भी पीड़ा दी और अंततः उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
इस प्रकार कर्जन का इस्तीफा उनकी अपनी नीतियों और अहंकार का परिणाम था।
4बिचारिए तो, क्या शान आपकी इस देश में थी और अब क्या हो गई! कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे! — आशय स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: पाठ 'विदाई-संभाषण' की उपर्युक्त पंक्तियाँ।
आशय:
लेखक बालमुकुंद गुप्त इन पंक्तियों में लॉर्ड कर्जन के उत्थान और पतन पर व्यंग्यपूर्ण टिप्पणी कर रहे हैं।
जब कर्जन भारत के वायसराय बनकर आए थे, तब उनकी बड़ी शान-शौकत थी। वे भारत के सर्वोच्च शासक थे। उनके एक इशारे पर सब कुछ होता था। करोड़ों लोग उनके अधीन थे। उनका रुतबा और वैभव अत्यंत ऊँचा था। वे स्वयं को सर्वशक्तिमान समझते थे।
परंतु अपनी जिद, अहंकार और अत्याचारी नीतियों के कारण वे इतने नीचे गिरे कि उन्हें अपमानित होकर इस्तीफा देना पड़ा। जिस ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि बनकर वे भारत आए थे, उसी सरकार ने उनका साथ नहीं दिया। उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी को भी नहीं रखा गया।
लेखक का आशय है कि कर्जन जितनी ऊँचाई पर थे, उनका पतन उतना ही गहरा और दुखद रहा। यह उनके अहंकार और दुर्नीति का स्वाभाविक परिणाम था।
5आपके और यहाँ के निवासियों के बीच में कोई तीसरी शक्ति और भी है— यहाँ तीसरी शक्ति किसे कहा गया है?Show solution
दिया गया है: पाठ की उपर्युक्त पंक्ति।
उत्तर:
यहाँ 'तीसरी शक्ति' से लेखक का आशय ईश्वर अथवा विधाता से है। कुछ विद्वान इसे ब्रिटिश संसद या ब्रिटिश सरकार भी मानते हैं।
लेखक कहना चाहता है कि एक ओर कर्जन हैं और दूसरी ओर भारत के निवासी हैं। इन दोनों के बीच एक तीसरी शक्ति भी है जो सबके ऊपर है और जो अंततः न्याय करती है। यह शक्ति न तो कर्जन के अत्याचार को सहन करती है और न ही भारतीय जनता को सदा पीड़ित रहने देती है।
इस तीसरी शक्ति ने ही कर्जन को उनकी जिद और अत्याचार का दंड दिया और उन्हें अपमानित होकर भारत छोड़ने पर विवश किया। लेखक का संकेत है कि ईश्वरीय न्याय अवश्य होता है — अत्याचारी को उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है।
पाठ के आस-पास
1पाठ का यह अंश शिवशंभु के चिट्ठे से लिया गया है। शिवशंभु नाम की चर्चा पाठ में भी हुई है। बालमुकुंद गुप्त ने इस नाम का उपयोग क्यों किया होगा?Show solution
उत्तर:
बालमुकुंद गुप्त ने 'शिवशंभु' नाम का उपयोग अत्यंत सोच-समझकर किया है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:
- प्रतीकात्मकता: 'शिवशंभु' भगवान शिव का नाम है। शिव को भोलेनाथ भी कहा जाता है — जो सरल, निष्कपट और सत्यवादी हैं। इस नाम के माध्यम से लेखक यह दर्शाना चाहता है कि वे एक सामान्य, सीधे-सादे भारतीय की तरह बात कर रहे हैं जिसमें कोई छल-कपट नहीं है।
- सुरक्षा का उपाय: ब्रिटिश शासन के दौरान सीधे आलोचना करना खतरनाक था। छद्म नाम 'शिवशंभु' का उपयोग करके लेखक ने अपनी पहचान छुपाई और साथ ही व्यंग्य भी किया।
- आम भारतीय का प्रतिनिधित्व: शिवशंभु एक आम हिंदुस्तानी का प्रतीक है जो अपनी बात निडरता से कहता है। इस नाम के माध्यम से लेखक ने संपूर्ण भारतीय जनमानस की भावनाओं को अभिव्यक्ति दी है।
- व्यंग्य की धार: शिव का एक रूप विध्वंसक भी है। इस नाम के माध्यम से लेखक ने कर्जन की नीतियों पर तीखा व्यंग्य किया है।
2नादिर से भी बढ़कर आपकी जिद है— कर्जन के संदर्भ में क्या आपको यह बात सही लगती है? पक्ष या विपक्ष में तर्क दीजिए।Show solution
उत्तर (पक्ष में):
नादिरशाह एक क्रूर और जिद्दी शासक था जिसने दिल्ली में भीषण नरसंहार किया था। लेखक ने कर्जन की तुलना नादिर से की है। यह तुलना अनेक दृष्टियों से उचित प्रतीत होती है:
- बंगाल-विभाजन की जिद: करोड़ों लोगों के विरोध के बावजूद कर्जन ने बंगाल का विभाजन किया। यह उनकी अदम्य जिद का प्रमाण है।
- किसी की न सुनना: कर्जन ने न भारतीय जनता की सुनी, न अपने अधिकारियों की, न ब्रिटिश सरकार की। यह हठधर्मिता नादिर जैसी ही थी।
- स्वयं का नुकसान: नादिर की जिद ने जहाँ दूसरों को नुकसान पहुँचाया, वहीं कर्जन की जिद ने उन्हें स्वयं भी बर्बाद किया।
विपक्ष में:
नादिर एक विदेशी आक्रमणकारी था जिसने केवल लूट और हत्या की। कर्जन एक प्रशासक थे जिनकी कुछ नीतियाँ भले ही गलत थीं, परंतु उनका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य को मजबूत करना था। अतः दोनों की तुलना पूर्णतः उचित नहीं है।
निष्कर्ष: लेखक ने यह तुलना व्यंग्यात्मक रूप से की है जो कर्जन की हठधर्मिता को उजागर करती है।
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
गौर करने की बात
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
भाषा की बात
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
6 more solved questions in विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त)
They are free with a Super Tutor account, along with practice quizzes and flashcards for this chapter. Free to start, no card needed.
Frequently Asked Questions
What are the important topics in विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) for CBSE Class 11 Hindi?
Are these NCERT Solutions for विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) free?
How should I revise विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) for Class 11 exams?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त)
Practice Quiz
Test yourself with a quick quiz
Important Questions
Exam-style questions with answers
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Concept Maps
See how topics connect
Study Plan
Step-by-step plan for this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Syllabus
What topics to cover
For serious students
Get the full विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) chapter — start free.
Quizzes, flashcards, an AI doubt solver and a study plan for CBSE Class 11 Hindi. Free to start, no card needed.