गज़ल (दुष्यंत कुमार) — NCERT Solutions
CBSE · Class 11 · Hindi
NCERT Solutions for गज़ल (दुष्यंत कुमार), CBSE Class 11 Hindi: 6 textbook questions solved step by step. Covers गज़ल के साथ and गज़ल के आस-पास.
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गज़ल के साथ
1आखिरी शेर में गुलमोहर की चर्चा हुई है। क्या उसका आशय एक खास तरह के फूलदार वृक्ष से है या उसमें कोई सांकेतिक अर्थ निहित है? समझाकर लिखें।Show solution
दिया गया शेर:
'जिएं तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले,
मरें तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।'
आशय एवं सांकेतिक अर्थ:
गुलमोहर यहाँ केवल एक फूलदार वृक्ष का नाम नहीं है, बल्कि इसमें गहरा सांकेतिक अर्थ निहित है। गुलमोहर का शाब्दिक अर्थ है — 'फूलों का राजा' या 'सुंदरता, वैभव और समृद्धि का प्रतीक'।
सांकेतिक अर्थ:
- 'अपने बगीचे में गुलमोहर के तले जीना' — इसका अर्थ है कि यदि जीना है तो अपने सुख-वैभव, अपनी सुविधाओं और अपने स्वार्थ के लिए जीना।
- 'गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए मरना' — इसका अर्थ है कि यदि मरना (बलिदान देना) है तो दूसरों की खुशी, समाज की भलाई और सुंदर भविष्य के निर्माण के लिए मरना।
निष्कर्ष: कवि दुष्यंत कुमार यहाँ स्वार्थपूर्ण जीवन की तुलना परोपकारी बलिदान से कर रहे हैं। गुलमोहर सुंदर, उज्ज्वल और बेहतर भविष्य का प्रतीक है। कवि का संदेश है कि सच्चा जीवन वही है जो दूसरों के लिए, समाज के लिए, एक बेहतर कल के लिए समर्पित हो।
2पहले शेर में चिराग शब्द एक बार बहुवचन में आया है और दूसरी बार एकवचन में। अर्थ एवं काव्य-सौंदर्य की दृष्टि से इसका क्या महत्व है?Show solution
संबंधित शेर:
'हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।'
(पहले शेर का संदर्भ — 'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है / चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए।')
'चिराग' का बहुवचन और एकवचन में प्रयोग:
पहले शेर में 'चिराग' बहुवचन में आया है — अर्थात् अनेक दीपक, अनेक आशाएँ, अनेक प्रयास। परंतु दूसरी बार 'चिराग' एकवचन में आया है — अर्थात् एक अकेला दीपक, एक अकेली उम्मीद।
अर्थ की दृष्टि से महत्व:
- बहुवचन 'चिराग' — समाज में अनेक लोग, अनेक नेता, अनेक आंदोलन हैं जो परिवर्तन का दावा करते हैं।
- एकवचन 'चिराग' — परंतु वास्तव में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं जो सच्चे अर्थों में रोशनी दे सके, जो व्यवस्था को बदल सके।
काव्य-सौंदर्य की दृष्टि से महत्व:
यह प्रयोग व्यंग्यात्मक विरोधाभास (Irony) उत्पन्न करता है — जहाँ बहुत सारे दीपक हों, वहाँ एक भी काम का न हो। यह शासन-व्यवस्था पर करारा व्यंग्य है। बहुवचन से एकवचन की यात्रा निराशा और विडंबना को और अधिक तीव्र बना देती है।
3गजल के तीसरे शेर को गौर से पढ़ें। यहाँ दुष्यंत का इशारा किस तरह के लोगों की ओर है?Show solution
तीसरा शेर:
'न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे,
ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफर के लिए।'
व्याख्या:
इस शेर में दुष्यंत कुमार उन लोगों की ओर इशारा कर रहे हैं जो —
- समझौतावादी और अवसरवादी हैं — जो अपनी सुविधा के लिए किसी भी परिस्थिति से समझौता कर लेते हैं।
- स्वार्थी और कायर हैं — जो अन्याय, शोषण और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठाने की बजाय उसी व्यवस्था में अपना काम निकाल लेते हैं।
- नेता और राजनेता — जो जनता की समस्याओं को दूर करने के बजाय उन्हें किसी-न-किसी तरह बहला-फुसलाकर चुप करा देते हैं।
- वे लोग जो क्रांति के लिए अयोग्य हैं — 'इस सफर के लिए' से तात्पर्य परिवर्तन और क्रांति की यात्रा से है। ऐसे लोग जो अभाव में भी संतुष्ट रहते हैं, वे बदलाव की लड़ाई नहीं लड़ सकते।
निष्कर्ष: कवि व्यंग्यपूर्वक कह रहे हैं कि जो लोग अपनी दुर्दशा को भी सहज स्वीकार कर लेते हैं, वे क्रांति और परिवर्तन के मार्ग पर चलने के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं हैं।
तेरा निजाम है सिल दे जुबान शायर की,
ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए।
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गज़ल के आस-पास
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दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा है'
दुष्यंत की गजल का चौथा शेर पढ़ें और बताएँ कि गालिब के उपर्युक्त शेर से वह किस तरह जुड़ता है?
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Frequently Asked Questions
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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