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Chapter 5 of 20
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अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय) — NCERT Solutions

CBSE · Class 11 · Hindi

NCERT Solutions for अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय), CBSE Class 11 Hindi: 14 textbook questions solved step by step.

43 questions30 flashcards5 concepts

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14 Questions Solved · 3 Sections

The first 7 solutions are open to read. The other 7 are free with a Super Tutor account.

पाठ के साथ

1पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला?Show solution

दिया गया है: पथेर पांचाली फ़िल्म के निर्माण से संबंधित सत्यजित राय का संस्मरण।

उत्तर:
पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग ढाई साल तक चलने के निम्नलिखित कारण थे:

  1. धन की कमी: फ़िल्म के निर्माण के लिए पर्याप्त धन नहीं था। जब भी पैसे मिलते, शूटिंग होती और पैसे खत्म होने पर काम रुक जाता।
  1. मौसम पर निर्भरता: कई दृश्य विशेष मौसम में ही फ़िल्माए जा सकते थे, जैसे बारिश का दृश्य, कांस के फूलों का दृश्य आदि। इसलिए उचित मौसम की प्रतीक्षा करनी पड़ती थी।
  1. कलाकारों की समस्याएँ: 'भूलो' नामक कुत्ते की मृत्यु हो गई, जिसके कारण दूसरा कुत्ता लाना पड़ा। इसी प्रकार श्रीनिवास (इंसुरेंस एजेंट की भूमिका निभाने वाले कलाकार) का निधन हो गया, जिससे बाकी दृश्यों को नए तरीके से फ़िल्माना पड़ा।
  1. तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयाँ: शूटिंग स्थल की मरम्मत, उचित स्थान की खोज आदि में भी समय लगा।

इन सभी कारणों से फ़िल्म की शूटिंग ढाई साल तक चलती रही।

2'अब अगर हम उस जगह बाकी आधे सीन की शूटिंग करते, तो पहले आधे सीन के साथ उसका मेल कैसे बैठता? उसमें से 'कंटिन्युइटी' नदारद हो जाती' – इस कथन के पीछे क्या भाव है?Show solution

दिया गया है: यह कथन उस प्रसंग से संबंधित है जब काशफूल (कांस के फूल) वाले दृश्य की शूटिंग के दौरान आधा दृश्य एक मौसम में फ़िल्माया गया और बाकी आधा दूसरे मौसम में फ़िल्माना था।

भाव:
इस कथन के पीछे यह भाव है कि फ़िल्म में निरंतरता (Continuity) बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि एक ही दृश्य के दो हिस्से अलग-अलग समय या मौसम में फ़िल्माए जाएँ, तो दोनों हिस्सों में —

  • प्रकाश की स्थिति,
  • पेड़-पौधों का रंग-रूप,
  • पात्रों की वेशभूषा और रूप-रंग,
  • वातावरण

आदि में अंतर आ जाता है। इससे दर्शकों को दृश्य असंगत और अस्वाभाविक लगता है। फ़िल्म की विश्वसनीयता नष्ट हो जाती है। इसीलिए सत्यजित राय ने उस स्थान पर शूटिंग न करके दूसरी जगह उसी प्रकार के काशफूल ढूँढ़े और वहाँ शूटिंग पूरी की, ताकि दृश्य में एकरूपता बनी रहे।

3किन दो दृश्यों में दर्शक यह पहचान नहीं पाते कि उनकी शूटिंग में कोई तरकीब अपनाई गई है?Show solution

दिया गया है: सत्यजित राय द्वारा फ़िल्म निर्माण के दौरान अपनाई गई विभिन्न तरकीबों का वर्णन।

उत्तर:
निम्नलिखित दो दृश्यों में दर्शक तरकीब को नहीं पहचान पाते:

पहला दृश्य — काशफूल (कांस के फूल) का दृश्य:
इस दृश्य का पहला आधा हिस्सा एक स्थान पर फ़िल्माया गया था। बाद में उस स्थान पर काशफूल नहीं रहे, इसलिए दूसरी जगह काशफूल ढूँढ़कर बाकी आधे दृश्य की शूटिंग की गई। दर्शक यह नहीं पहचान पाते कि यह दृश्य दो अलग-अलग स्थानों पर फ़िल्माया गया है।

दूसरा दृश्य — 'भूलो' कुत्ते का दृश्य:
फ़िल्म में 'भूलो' नामक कुत्ते की मृत्यु हो जाने के बाद उसी जैसा दिखने वाला दूसरा कुत्ता लाया गया और उससे बाकी दृश्य पूरा किया गया। दर्शक यह नहीं पहचान पाते कि फ़िल्म में दो अलग-अलग कुत्तों का उपयोग किया गया है।

इन दोनों दृश्यों में निर्देशक की कुशलता के कारण दर्शकों को कोई असंगति महसूस नहीं होती।

4'भूलो' की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया? उसने फ़िल्म के किस दृश्य को पूरा किया?Show solution

दिया गया है: फ़िल्म में 'भूलो' नामक कुत्ते की भूमिका और उससे जुड़ी समस्या।

उत्तर:
'भूलो' की जगह दूसरा कुत्ता इसलिए लाया गया क्योंकि शूटिंग के दौरान 'भूलो' की मृत्यु हो गई थी और फ़िल्म के कुछ दृश्य अभी भी शेष थे जिनमें उस कुत्ते की आवश्यकता थी।

दूसरे कुत्ते ने जो दृश्य पूरा किया:
दूसरे कुत्ते ने वह दृश्य पूरा किया जिसमें अपू और दुर्गा रेलगाड़ी देखने जाते हैं। इस दृश्य में कुत्ते को बच्चों के साथ काशफूलों के बीच से गुज़रते हुए दिखाया जाना था। चूँकि 'भूलो' की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए उसी जैसा दिखने वाला दूसरा कुत्ता लाकर यह दृश्य पूरा किया गया। दर्शक फ़िल्म देखते समय यह अंतर नहीं पहचान पाए।

5फ़िल्म में श्रीनिवास की क्या भूमिका थी और उनसे जुड़े बाकी दृश्यों को उनके गुज़र जाने के बाद किस प्रकार फ़िल्माया गया?Show solution

दिया गया है: फ़िल्म में श्रीनिवास की भूमिका और उनके निधन के बाद उत्पन्न समस्या का समाधान।

उत्तर:
श्रीनिवास की भूमिका:
श्रीनिवास फ़िल्म में इंसुरेंस एजेंट की भूमिका निभा रहे थे। वे एक अनुभवी और प्रतिभाशाली कलाकार थे।

उनके गुज़र जाने के बाद दृश्यों को फ़िल्माने का तरीका:
शूटिंग के दौरान श्रीनिवास का निधन हो गया, जबकि उनसे जुड़े कुछ दृश्य अभी भी शेष थे। इस समस्या का समाधान इस प्रकार किया गया:

  • बाकी बचे दृश्यों में श्रीनिवास को सामने से नहीं दिखाया गया।
  • उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को उनके जैसी वेशभूषा पहनाकर केवल पीठ दिखाते हुए फ़िल्माया गया।
  • इस तरकीब से दर्शकों को यह पता नहीं चला कि वह श्रीनिवास नहीं हैं।

इस प्रकार सत्यजित राय ने अपनी सूझ-बूझ से इस कठिन परिस्थिति का सामना किया और फ़िल्म को पूरा किया।

6बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल आई और उसका समाधान किस प्रकार हुआ?Show solution

दिया गया है: फ़िल्म में बारिश के दृश्य की शूटिंग से संबंधित कठिनाई।

उत्तर:
मुश्किल:
बारिश का दृश्य फ़िल्माने के लिए वास्तविक बारिश की आवश्यकता थी। परंतु जब भी शूटिंग दल शूटिंग के लिए तैयार होता, बारिश नहीं होती और जब बारिश होती तो शूटिंग के लिए तैयारी नहीं होती या कोई अन्य समस्या आ जाती। उचित समय पर बारिश का न होना सबसे बड़ी मुश्किल थी।

समाधान:
अंततः सत्यजित राय को मानसून के मौसम की प्रतीक्षा करनी पड़ी। जब उचित समय पर अच्छी बारिश हुई, तब उन्होंने तुरंत अपनी पूरी टीम को तैयार किया और बारिश के दृश्य की शूटिंग पूरी की। इस प्रकार धैर्य और सही समय की प्रतीक्षा करके इस समस्या का समाधान हुआ। यह दृश्य फ़िल्म के सबसे प्रभावशाली दृश्यों में से एक बना।

7किसी फ़िल्म की शूटिंग करते समय फ़िल्मकार को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें सूचीबद्ध कीजिए।Show solution

दिया गया है: पाठ में वर्णित फ़िल्म निर्माण की विभिन्न कठिनाइयाँ।

उत्तर:
फ़िल्म की शूटिंग के दौरान फ़िल्मकार को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:

  1. धन की कमी: पर्याप्त बजट न होने से शूटिंग बार-बार रोकनी पड़ती है।
  1. मौसम की अनिश्चितता: विशेष मौसम में फ़िल्माए जाने वाले दृश्यों के लिए उचित मौसम की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
  1. कलाकारों की अनुपलब्धता या मृत्यु: किसी कलाकार के बीमार पड़ने, मृत्यु हो जाने या अनुपलब्ध होने पर दृश्यों को नए तरीके से फ़िल्माना पड़ता है।
  1. कंटिन्युइटी बनाए रखना: लंबे समय तक चलने वाली शूटिंग में दृश्यों में निरंतरता बनाए रखना कठिन होता है।
  1. स्थान की समस्या: उचित शूटिंग स्थल ढूँढ़ना और उसे तैयार करना समय और धन दोनों लेता है।
  1. तकनीकी समस्याएँ: साउंड रिकॉर्डिंग, कैमरा आदि तकनीकी उपकरणों में खराबी आ सकती है।
  1. जानवरों से जुड़ी समस्याएँ: जानवरों को निर्देशित करना कठिन होता है; उनकी मृत्यु या बीमारी से दृश्य अधूरे रह सकते हैं।
  1. प्राकृतिक बाधाएँ: साँप जैसे जीव-जंतुओं का अचानक प्रकट होना शूटिंग में बाधा डाल सकता है।
  1. स्थानीय लोगों का सहयोग: स्थानीय मान्यताओं और लोगों के सहयोग की आवश्यकता होती है।
  1. समय प्रबंधन: सभी कलाकारों और तकनीशियनों की उपलब्धता एक साथ सुनिश्चित करना कठिन होता है।

पाठ के आस-पास

1तीन प्रसंगों में राय ने कुछ इस तरह की टिप्पणियाँ की हैं कि दर्शक पहचान नहीं पाते कि... या फ़िल्म देखते हुए इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया कि... इत्यादि। ये प्रसंग कौन से हैं, चर्चा करें और इसपर भी विचार करें कि शूटिंग के समय की असलियत फ़िल्म को देखते समय कैसे छिप जाती है।

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2मान लीजिए कि आपको अपने विद्यालय पर एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनानी है। इस तरह की फ़िल्म में आप किस तरह के दृश्यों को चित्रित करेंगे? फ़िल्म बनाने से पहले और बनाते समय किन बातों पर ध्यान देंगे?

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3पथेर पांचाली फ़िल्म में इंदिरा टाकरून की भूमिका निभाने वाली अस्सी साल की चुन्नीबाला देवी ढाई साल तक काम कर सकीं। यदि आधी फ़िल्म बनने के बाद चुन्नीबाला देवी की अचानक मृत्यु हो जाती तो सत्यजित राय क्या करते? चर्चा करें।

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4पठित पाठ के आधार पर यह कह पाना कहाँ तक उचित है कि फ़िल्म को सत्यजित राय एक कला-माध्यम के रूप में देखते हैं, व्यावसायिक-माध्यम के रूप में नहीं?

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भाषा की बात

1पाठ में कई स्थानों पर तत्सम, तद्भव, क्षेत्रीय सभी प्रकार के शब्द एक साथ सहज भाव से आए हैं। ऐसी भाषा का प्रयोग करते हुए अपनी प्रिय फ़िल्म पर एक अनुच्छेद लिखें।

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2हर क्षेत्र में कार्य करने या व्यवहार करने की अपनी निजी या विशिष्ट प्रकार की शब्दावली होती है। जैसे अपू के साथ ढाई साल पाठ में फ़िल्म से जुड़े शब्द शूटिंग, शॉट, सीन आदि। फ़िल्म से जुड़ी शब्दावली में से किन्हीं दस की सूची बनाइए।

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3नीचे दिए गए शब्दों के पर्याय इस पाठ में ढूँढ़िए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए— इश्तहार, खुशकिस्मती, सीन, वृष्टि, जमा

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7 more solved questions in अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय) for CBSE Class 11 Hindi?
Key topics in अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय) include लेखक, विधा और कृति का परिचय, फ़िल्म-निर्माण का संघर्ष और ढाई साल की शूटिंग, अपू की भूमिका के लिए कलाकार की खोज, काशफूल, रेलगाड़ी और कंटिन्युइटी. Study these first, then practise questions on each for Class 11 exams.
Are these NCERT Solutions for अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय) free?
The first 7 of the 14 solutions on this page are open to read. The other 7 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय) for Class 11 exams?
Learn the core ideas first, then work through the 43 practice questions on अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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