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Chapter 6 of 20
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आलो-आँधारि (बेबी हालदार)

CBSE · Class 11 · Hindi

NCERT Solutions for आलो-आँधारि (बेबी हालदार) — CBSE Class 11 Hindi.

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अभ्यास

1पाठ के किन अंशों से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है। क्या वर्तमान समय में स्त्रियों की इस सामाजिक स्थिति में कोई परिवर्तन आया है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।Show solution
पाठ में यह सामाजिक सच्चाई कई जगह सामने आती है कि स्त्री को पुरुष के बिना अधूरी या असुरक्षित माना जाता है। जैसे पड़ोस की औरतें बार-बार पूछती हैं— “तुम यहाँ अकेली रहती हो? तुम्हारा स्वामी कहाँ रहता है?”। मकान-मालिक की स्त्री भी कहती है— “तेरा स्वामी है नहीं, तू तो अकेली ही है!”। मकान-मालिक का बड़ा लड़का भी बेबी की मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश करता है। इन अंशों से पता चलता है कि समाज स्त्री की पहचान को पुरुष से जोड़कर देखता है और अकेली स्त्री को शक, तिरस्कार और असुरक्षा झेलनी पड़ती है।

वर्तमान समय में कुछ परिवर्तन आया है। अब स्त्रियाँ शिक्षा, नौकरी और अपने निर्णय खुद लेने में पहले से अधिक सक्षम हुई हैं। वे अकेले रहकर भी काम कर सकती हैं, घर चला सकती हैं और सामाजिक स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। लेकिन यह भी सच है कि समाज की सोच पूरी तरह नहीं बदली है। आज भी कई जगह अकेली स्त्री को प्रश्नों, टिप्पणियों और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। इसलिए परिवर्तन हुआ है, पर वह अधूरा और असमान है।

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2अपने परिवार से तातुश के घर तक के सफ़र में बेबी के सामने रिश्तों की कौन-सी सच्चाई उजागर होती है?Show solution
बेबी के परिवार से तातुश के घर तक के सफ़र में रिश्तों की यह सच्चाई उजागर होती है कि रिश्ते केवल खून के नहीं होते, अपनापन और सहारा भी रिश्ते बनाते हैं। अपने परिवार में बेबी को बहुत उपेक्षा, दुख और असुरक्षा मिली—मा की मृत्यु का समाचार भी उसे समय पर नहीं बताया गया, भाई-बंधु पास रहते हुए भी उसकी खोज-खबर लेने नहीं आए। इसके विपरीत तातुश के घर में उसे बाप, भाई, अभिभावक, सहारा और स्नेह सब कुछ मिला। तातुश ने उसे सिर्फ काम करने वाली लड़की नहीं माना, बल्कि अपनी बेटी जैसी समझा।

इससे यह समझ में आता है कि सच्चा रिश्ता वह है जिसमें प्रेम, जिम्मेदारी, सम्मान और सुरक्षा हो। रक्त-संबंध होते हुए भी यदि अपनापन न हो तो वे रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं, और अनजान लोग भी स्नेह देकर अपने से लगने लगते हैं।

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3इस पाठ से घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताओं का पता चलता है। घरेलू नौकरों को और किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस पर विचार करिए।Show solution
इस पाठ से घरेलू नौकरों के जीवन की कई जटिलताएँ सामने आती हैं। उन्हें केवल काम ही नहीं करना पड़ता, बल्कि कम वेतन, असुरक्षित रहने की जगह, लंबा काम का समय, और मालिकों के व्यवहार की समस्या भी झेलनी पड़ती है। अक्सर उनसे साफ-सफाई, खाना बनाना, बच्चों की देखभाल, बाजार-हाट, सब कुछ करवाया जाता है, फिर भी उन्हें पूरी तरह सम्मान नहीं मिलता।

घरेलू नौकरों को और जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उनमें ये प्रमुख हैं:
- असुरक्षा: नौकरी कभी भी छिन सकती है।
- शोषण: कम पैसे में अधिक काम लिया जाता है।
- तिरस्कार: उन्हें नीची नजर से देखा जाता है।
- निजी जीवन में दखल: उनके आने-जाने, मिलने-जुलने पर सवाल किए जाते हैं।
- लंबे समय तक श्रम: सुबह से रात तक काम, विश्राम कम।
- महिला नौकरों के साथ छेड़छाड़/असुरक्षा: अकेली स्त्रियों को कई बार अनुचित टिप्पणियाँ, ताने और खतरे सहने पड़ते हैं।
- रहने-खाने की कठिनाई: उचित बाथरूम, पानी, कमरे, और साफ़ वातावरण का अभाव।

इसलिए घरेलू नौकरों का जीवन मेहनत के साथ-साथ सामाजिक अपमान और असुरक्षा से भी भरा होता है।

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4आलो-आँधारि रचना बेबी की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक मुद्दों को समेटे हैं। किन्हीं दो मुख्य समस्याओं पर अपने विचार प्रकट कीजिए।Show solution
आलो-आँधारि बेबी की व्यक्तिगत कहानी के माध्यम से कई सामाजिक समस्याएँ सामने लाती है। इनमें से दो मुख्य समस्याएँ हैं—

1. स्त्री की असुरक्षा और सामाजिक शोषण: बेबी अकेली स्त्री है, इसलिए समाज उसके बारे में तरह-तरह की बातें करता है। मकान-मालिक का बड़ा लड़का उसकी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश करता है। इससे पता चलता है कि अकेली स्त्री को घर, मोहल्ले और समाज में लगातार असुरक्षा झेलनी पड़ती है।

2. गरीबी और श्रम का संघर्ष: बेबी को अपने बच्चों का पेट पालने, घर का किराया देने और रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। वह एक साथ कई घरों में काम करती है, फिर भी आर्थिक चिंता बनी रहती है। इससे समझ में आता है कि गरीब मजदूर स्त्री के लिए जीवन केवल मेहनत नहीं, बल्कि लगातार जीविका-संघर्ष भी है।

इन दोनों समस्याओं के साथ पाठ यह भी दिखाता है कि शिक्षा, सम्मान और सहारा मिलने पर स्त्री का जीवन बदल सकता है।

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5तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो— जेठू का यह कथन रचना संसार के किस सत्य को उद्घाटित करता है?
6बेबी की जिंदगी में तातुश का परिवार न आया होता तो उसका जीवन कैसा होता? कल्पना करें और लिखें।
7'सबेरे कोई पेशाब के लिए उसमें घुसता तो दूसरा उसमें घुसने के लिए बाहर खड़ा रहता। टट्टी के लिए बाहर जाना पड़ता था लेकिन वहाँ भी चैन से कोई टट्टी नहीं कर सकता था क्योंकि सुअर पीछे से आकर तंग करना शुरू कर देते। लड़के-लड़कियाँ, बड़े-बूढ़े, सभी हाथ में पानी की बोतल ले टट्टी के लिए बाहर जाते। अब वे वहाँ बोतल सँभालें या सुअर भगाएँ! मुझे तो यह देख-सुनकर बहुत खराब लगता'—अनुवाद के नाम पर मात्र अंग्रेजी से होने वाले अनुवादों के बीच भारतीय भाषाओं में रची-बसी हिंदी का यह एक अनुकरणीय नमूना है—उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यान में रखते हुए बताइए कि इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं।

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