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CBSE Class 11 Hindi — NCERT Solutions

CBSE Class 11 Hindi NCERT solutions, chapter by chapter — 196 textbook questions solved across 20 chapters. Follows the CBSE syllabus.

About these solutions

196 NCERT textbook questions for CBSE Class 11 Hindi, solved step by step across 20 chapters. Each chapter page has every exercise: half the solutions are open to read and the rest are free with a Super Tutor account.

  • पाठ के साथ · 6 questions
  • पाठ के आस-पास · 6 questions
  • समझाइए तो ज़रा · 8 questions
  • भाषा की बात · 3 questions
  • चर्चा करें · 1 question
Q1.कहानी का कौन-सा पात्र आपको सर्वाधिक प्रभावित करता है और क्यों?

सर्वाधिक प्रभावशाली पात्र — वंशीधर

इस कहानी में वंशीधर का पात्र मुझे सर्वाधिक प्रभावित करता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं—

  1. ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा: वंशीधर एक ऐसे युग में जब भ्रष्टाचार सामान्य बात थी, अपने कर्तव्य पर अडिग रहा। उसने धन के लालच में आकर पंडित अलोपीदीन जैसे प्रभावशाली व्यक्ति को नहीं छोड़ा।
  1. दबाव में न झुकना: जब पूरा प्रशासन, वकील, भीड़ और यहाँ तक कि उसके अधिकारी भी अलोपीदीन के पक्ष में थे, तब भी वंशीधर ने अपना निर्णय नहीं बदला।
  1. नैतिक साहस: नौकरी जाने के बाद भी उसने अपनी ईमानदारी पर पछतावा नहीं किया। यह उसके दृढ़ चरित्र का प्रमाण है।
  1. आदर्श का प्रतीक: वह प्रेमचंद के उस आदर्श पुरुष का प्रतिनिधित्व करता है जो धर्म को धन से ऊँचा मानता है।

इस प्रकार वंशीधर का पात्र ईमानदारी, साहस और नैतिकता का जीवंत उदाहरण है, जो पाठक को गहराई से प्रभावित करता है।

Q2.'नमक का दारोगा' कहानी में पंडित अलोपीदीन के व्यक्तित्व के कौन से दो पहलू (पक्ष) उभरकर आते हैं?

पंडित अलोपीदीन के व्यक्तित्व के दो प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं—

पहला पहलू — धन का दुरुपयोग करने वाला भ्रष्ट व्यक्ति:
अलोपीदीन एक धनी जमींदार हैं जो अपने धन के बल पर कानून को भी खरीद लेते हैं। वे नमक की अवैध तस्करी करते हैं और पकड़े जाने पर अपने वकीलों तथा धन के माध्यम से न्यायालय से बरी हो जाते हैं। उनके लिए न्याय और नीति सब धन के खिलौने हैं। यह पहलू उनके नकारात्मक चरित्र को दर्शाता है।

दूसरा पहलू — ईमानदारी का सम्मान करने वाला विवेकशील व्यक्ति:
कहानी के अंत में अलोपीदीन का दूसरा और सकारात्मक पहलू सामने आता है। वे वंशीधर की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से इतने प्रभावित होते हैं कि उन्हें अपनी सारी संपत्ति का स्थायी मैनेजर नियुक्त करते हैं। वे कहते हैं कि ऐसे बेदाग, ऐसे उज्ज्वल रत्न की उन्हें तलाश थी। यह पहलू उनके विवेक और सच्चे मूल्यों की पहचान को दर्शाता है।

इस प्रकार अलोपीदीन एक जटिल पात्र हैं जिनमें भ्रष्टाचार और ईमानदारी के प्रति सम्मान — दोनों एक साथ विद्यमान हैं।

All 24 नमक का दारोगा (प्रेमचंद) solutions
  • अभ्यास · 6 questions
  • कुछ करने और सोचने के लिए · 2 questions
Q1.लेखक ने पाठ में गानपन का उल्लेख किया है। पाठ के संदर्भ में स्पष्ट करते हुए बताएँ कि आपके विचार में इसे प्राप्त करने के लिए किस प्रकार के अभ्यास की आवश्यकता है?

दिया गया है: कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर की गायकी के संदर्भ में 'गानपन' शब्द का प्रयोग किया है।

पाठ के संदर्भ में 'गानपन' का अर्थ:
कुमार गंधर्व के अनुसार 'गानपन' वह विशेष गुण है जो किसी गायन को केवल स्वरों की तकनीकी प्रस्तुति से ऊपर उठाकर एक जीवंत, भावपूर्ण और आत्मीय अनुभव बना देता है। लता मंगेशकर के गायन में यह गानपन स्वाभाविक रूप से विद्यमान है — उनके स्वर में एक ऐसी तरलता और मिठास है जो सुनने वाले के हृदय को सीधे छू लेती है। गाने में केवल सुर-ताल का ज्ञान ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उस गाने की आत्मा को महसूस करके उसे श्रोता तक पहुँचाना ही 'गानपन' है।

गानपन प्राप्त करने के लिए आवश्यक अभ्यास:

  1. निरंतर रियाज़: प्रतिदिन स्वर-साधना करना आवश्यक है ताकि स्वर पर पूर्ण नियंत्रण हो।
  2. भावनात्मक तैयारी: गाने के भाव को गहराई से समझना और उसे अनुभव करके गाना।
  3. श्रवण-अभ्यास: श्रेष्ठ गायकों को ध्यान से सुनना और उनकी गायकी की बारीकियों को आत्मसात करना।
  4. शास्त्रीय संगीत का आधार: रागों, तालों और स्वरों की शास्त्रीय जानकारी गायन को परिपक्वता देती है।
  5. प्राकृतिक स्वर की पहचान: अपनी आवाज़ की प्रकृति को पहचानकर उसके अनुरूप गायन शैली विकसित करना।

निष्कर्ष: गानपन केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि संगीत के प्रति समर्पण, भावनात्मक गहराई और निरंतर साधना से प्राप्त होने वाला वह दुर्लभ गुण है जो गायन को कला के उच्चतम स्तर पर ले जाता है।

Q2.लेखक ने लता की गायकी की किन विशेषताओं को उजागर किया है? आपको लता की गायकी में कौन-सी विशेषताएँ नजर आती हैं? उदाहरण सहित बताइए।

दिया गया है: कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर की गायकी का विस्तृत विश्लेषण किया है।

लेखक द्वारा उजागर की गई विशेषताएँ:

  1. स्वर की कोमलता और मिठास: लता के स्वर में एक अद्भुत कोमलता है। उनकी आवाज़ में एक ऐसी मिठास है जो श्रोता को तुरंत आकर्षित कर लेती है।
  1. शुद्ध उच्चारण: लेखक के अनुसार लता के गायन में शब्दों का उच्चारण अत्यंत स्पष्ट और शुद्ध होता है। प्रत्येक शब्द सुनाई देता है, जो अन्य गायिकाओं में प्रायः नहीं मिलता।
  1. आवाज़ की तरलता: उनके स्वर में एक प्रवाह है — जैसे निर्मल जल की धारा बहती हो। एक स्वर से दूसरे स्वर पर जाना उनके लिए अत्यंत सहज है।
  1. भावाभिव्यक्ति की क्षमता: शृंगारपरक गानों में वे भावों को इतनी उत्कटता से व्यक्त करती हैं कि श्रोता उस भाव में डूब जाता है।
  1. गानपन: लेखक ने विशेष रूप से उल्लेख किया है कि लता के गायन में 'गानपन' है — एक ऐसी जीवंतता जो गाने को केवल स्वरों की प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक संपूर्ण अनुभव बना देती है।
  1. विविधता: वे शास्त्रीय, लोक और चित्रपट — सभी प्रकार के गानों को समान दक्षता से गाती हैं।

व्यक्तिगत दृष्टि से विशेषताएँ (उदाहरण सहित):

  • 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाने में उनकी आवाज़ में देशभक्ति का जो भाव है, वह श्रोता की आँखें नम कर देता है।
  • 'लग जा गले' जैसे गानों में उनकी आवाज़ की कोमलता और भावनात्मक गहराई अतुलनीय है।

निष्कर्ष: लता मंगेशकर की गायकी बहुआयामी है — तकनीकी दृष्टि से परिपूर्ण और भावनात्मक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध।

All 8 भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व) solutions
  • पाठ के साथ · 5 questions
  • पाठ के आस-पास · 4 questions
  • पकवानों को जानें · 1 question
  • भाषा की बात · 3 questions
Q1.मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है?

दिया गया है: मियाँ नसीरुद्दीन एक अनुभवी और कुशल नानबाई हैं।

उत्तर:
मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा इसलिए कहा गया है क्योंकि —

  1. वे नानबाइयों की तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं और अपने खानदानी पेशे को पूरी निष्ठा एवं कुशलता से निभाते आए हैं।
  2. वे छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने में माहिर हैं — बाकरखानी, शीरमाल, ताफ़तान, बेसनी, खमीरी, रूमाली, गाव-दीदा, गाजेबान, तुनकी आदि।
  3. उनका मानना है कि रोटी बनाने का हुनर केवल किताबों से नहीं, बल्कि व्यावहारिक तालीम (प्रशिक्षण) से आता है। वे इस कला को जीवित रखने के लिए कारीगरों को प्रशिक्षित करते हैं।
  4. वे रोटी बनाने की कला को एक पवित्र विरासत मानते हैं और उसे आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं।

इन्हीं कारणों से उन्हें नानबाइयों का मसीहा (उद्धारकर्ता/महान व्यक्ति) कहा गया है।

Q2.लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास क्यों गई थीं?

दिया गया है: लेखिका कृष्णा सोबती एक पत्रकार/लेखिका की भूमिका में हैं।

उत्तर:
लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास उनसे बातचीत करने और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से गई थीं। मियाँ नसीरुद्दीन मटियामहल के प्रसिद्ध नानबाई थे जो छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर थे। लेखिका उनके खानदानी पेशे, रोटी बनाने की कला, उनके जीवन-अनुभव और उनकी विशेषताओं के बारे में जानना चाहती थीं। संक्षेप में, लेखिका एक साक्षात्कार (इंटरव्यू) लेने के उद्देश्य से उनके पास गई थीं ताकि उनके व्यक्तित्व और कार्य को पाठकों के सामने प्रस्तुत कर सकें।

All 13 मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) solutions
  • अभ्यास — राजस्थान की रजत बूँदें (अनुपम मिश्र) · 5 questions
Q1.राजस्थान में कुंई किसे कहते हैं? इसकी गहराई और व्यास तथा सामान्य कुओं की गहराई और व्यास में क्या अंतर होता है?

दिया गया है: पाठ 'राजस्थान की रजत बूँदें' में कुंई का विस्तृत वर्णन किया गया है।

कुंई क्या है:
राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में वर्षा का जल रेत में समा जाता है और खड़िया पत्थर की पट्टी के ऊपर एकत्र हो जाता है। इस नमी को संग्रहीत करने के लिए जो छोटी-छोटी संरचनाएँ बनाई जाती हैं, उन्हें कुंई कहते हैं। कुंई में वर्षा का पानी सीधे नहीं आता, बल्कि रेत में समाई हुई नमी रिस-रिसकर कुंई में एकत्र होती है। यह पानी मीठा और स्वच्छ होता है।

कुंई और सामान्य कुएँ में अंतर:

आधारकुंईसामान्य कुआँ
गहराईअपेक्षाकृत कम गहरी (लगभग 15 से 20 फुट)बहुत अधिक गहरा (कई सौ फुट तक)
व्यासबहुत कम — केवल 4 से 5 हाथ (लगभग 3–4 फुट)बहुत अधिक — कई फुट चौड़ा
जल-स्रोतरेत में समाई वर्षा की नमी (रेजाणीपानी)भूमिगत जल (पातालपानी)
उद्देश्यनमी को रिसाकर एकत्र करनाभूजल को सीधे खींचना

निष्कर्ष: कुंई का व्यास इतना कम इसलिए रखा जाता है ताकि वाष्पीकरण कम हो और पानी सुरक्षित रहे। इसकी गहराई खड़िया पत्थर की पट्टी तक ही होती है।

All 5 राजस्थान की रजत बूँदें (अनुपम मिश्र) solutions
  • पाठ के साथ · 7 questions
  • पाठ के आस-पास · 4 questions
  • भाषा की बात · 3 questions
Q1.पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला?

दिया गया है: पथेर पांचाली फ़िल्म के निर्माण से संबंधित सत्यजित राय का संस्मरण।

उत्तर:
पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग ढाई साल तक चलने के निम्नलिखित कारण थे:

  1. धन की कमी: फ़िल्म के निर्माण के लिए पर्याप्त धन नहीं था। जब भी पैसे मिलते, शूटिंग होती और पैसे खत्म होने पर काम रुक जाता।
  1. मौसम पर निर्भरता: कई दृश्य विशेष मौसम में ही फ़िल्माए जा सकते थे, जैसे बारिश का दृश्य, कांस के फूलों का दृश्य आदि। इसलिए उचित मौसम की प्रतीक्षा करनी पड़ती थी।
  1. कलाकारों की समस्याएँ: 'भूलो' नामक कुत्ते की मृत्यु हो गई, जिसके कारण दूसरा कुत्ता लाना पड़ा। इसी प्रकार श्रीनिवास (इंसुरेंस एजेंट की भूमिका निभाने वाले कलाकार) का निधन हो गया, जिससे बाकी दृश्यों को नए तरीके से फ़िल्माना पड़ा।
  1. तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयाँ: शूटिंग स्थल की मरम्मत, उचित स्थान की खोज आदि में भी समय लगा।

इन सभी कारणों से फ़िल्म की शूटिंग ढाई साल तक चलती रही।

All 14 अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय) solutions
  • अभ्यास · 7 questions
  • चर्चा करें · 1 question
Q1.पाठ के किन अंशों से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है। क्या वर्तमान समय में स्त्रियों की इस सामाजिक स्थिति में कोई परिवर्तन आया है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

दिया गया है: 'आलो-आँधारि' बेबी हालदार की आत्मकथा है जिसमें उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों का वर्णन किया है।

पाठ के प्रासंगिक अंश:

पाठ में कई ऐसे अंश हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि समाज में स्त्री का अस्तित्व पुरुष पर निर्भर माना जाता है:

  1. बेबी का विवाह: बेबी का विवाह बहुत कम उम्र में कर दिया गया। पति के क्रूर व्यवहार और मारपीट के बावजूद उसे पति के साथ रहने के लिए बाध्य किया गया, क्योंकि समाज में बिना पति के स्त्री को सम्मान नहीं मिलता।
  1. पति का घर छोड़ना: जब बेबी का पति उसे और बच्चों को छोड़कर चला गया, तो समाज ने बेबी को ही दोषी ठहराया। एक परित्यक्ता स्त्री को समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता है।
  1. पिता का व्यवहार: बेबी के पिता ने उसकी माँ को छोड़कर दूसरी स्त्री से विवाह कर लिया। माँ बच्चों को लेकर असहाय हो गई — यह भी पुरुष-निर्भरता का प्रमाण है।
  1. घरेलू काम और शोषण: बेबी को घरों में काम करना पड़ा। नियोक्ता परिवारों में भी उसके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हुआ।

वर्तमान स्थिति में परिवर्तन:

हाँ, वर्तमान समय में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति में कुछ परिवर्तन अवश्य आया है:

  • स्त्रियाँ शिक्षित होकर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन रही हैं।
  • कानूनी अधिकार (घरेलू हिंसा अधिनियम, तलाक का अधिकार, संपत्ति का अधिकार) मिले हैं।
  • महिलाएँ राजनीति, विज्ञान, खेल, साहित्य आदि क्षेत्रों में आगे आ रही हैं।

किंतु ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग में आज भी स्त्री को पुरुष के बिना अधूरा माना जाता है। दहेज, बाल-विवाह, घरेलू हिंसा जैसी समस्याएँ अभी भी विद्यमान हैं।

निष्कर्ष: सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है, परंतु पूर्ण समानता अभी भी एक लक्ष्य है।

All 8 आलो-आँधारि (बेबी हालदार) solutions
  • पाठ के साथ · 5 questions
  • पाठ के आस-पास · 4 questions
  • गौर करने की बात · 2 questions
  • भाषा की बात · 2 questions
Q1.शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

दिया गया है: पाठ 'विदाई-संभाषण' में लेखक बालमुकुंद गुप्त ने शिवशंभु की दो गायों की कहानी का उल्लेख किया है।

उत्तर:
लेखक इस कहानी के माध्यम से यह बताना चाहता है कि एक साधारण गरीब आदमी शिवशंभु के पास दो गाएँ थीं। जब उनमें से एक गाय बिक गई या चली गई, तो दूसरी गाय उसके वियोग में दुखी होकर रोती रही, खाना-पीना छोड़ दिया। अर्थात् एक पशु भी अपने साथी के बिछड़ने पर इतना दुखी होता है।

इस कहानी के माध्यम से लेखक व्यंग्यपूर्वक लॉर्ड कर्जन पर यह कटाक्ष करता है कि भारत की करोड़ों जनता ने कर्जन के जाने पर कोई दुख नहीं मनाया, कोई आँसू नहीं बहाया। जबकि एक पशु भी अपने साथी के जाने पर दुखी होता है। इससे स्पष्ट होता है कि कर्जन का शासन इतना अत्याचारपूर्ण था कि भारत की जनता उनके जाने पर दुखी होने के बजाय प्रसन्न थी। लेखक यह भी कहना चाहता है कि यदि शासक जनता के प्रति संवेदनशील और हितकारी हो, तो जनता उसके जाने पर अवश्य दुखी होती है।

All 13 विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त) solutions
  • अभ्यास · 3 questions
  • चर्चा करें · 1 question
Q1.कला और भाषा के अंतर्संबंध पर आपकी क्या राय है? लिखकर बताएँ।

दिया गया है: कला और भाषा के बीच संबंध पर विचार करना है।

अवधारणा: कला और भाषा दोनों मानव अभिव्यक्ति के माध्यम हैं। दोनों विचारों, भावनाओं और संस्कृति को संप्रेषित करते हैं।

उत्तर:

कला और भाषा का अंतर्संबंध अत्यंत गहरा और अविभाज्य है। दोनों मनुष्य की आंतरिक अनुभूतियों को बाहरी रूप देने के साधन हैं।

(i) अभिव्यक्ति का माध्यम: जिस प्रकार भाषा शब्दों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को व्यक्त करती है, उसी प्रकार कला रेखाओं, रंगों, ध्वनियों और गतियों के माध्यम से अभिव्यक्ति देती है। दोनों का मूल उद्देश्य संप्रेषण है।

(ii) सांस्कृतिक वाहक: भाषा और कला दोनों किसी समाज की संस्कृति, परंपरा और इतिहास को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाते हैं। लोकगीत, लोककथाएँ, नाटक आदि में भाषा और कला का समन्वय स्पष्ट दिखता है।

(iii) परस्पर पूरक: कला को समझने के लिए भाषा की आवश्यकता होती है और भाषा को प्रभावशाली बनाने के लिए कलात्मकता की। कविता में लय और छंद कला का ही रूप है।

(iv) सीमाओं का अतिक्रमण: जहाँ भाषा की सीमाएँ समाप्त होती हैं, वहाँ कला अपना काम शुरू करती है। संगीत, नृत्य और चित्रकला भाषाई बाधाओं को पार कर सार्वभौमिक संवाद स्थापित करती हैं।

निष्कर्ष: कला और भाषा एक-दूसरे की पूरक हैं। दोनों मिलकर मानव सभ्यता को समृद्ध करती हैं। कला एक ऐसी भाषा है जिसे बिना शब्दों के भी समझा जा सकता है।

All 4 भारतीय कलाएँ solutions
  • पाठ के साथ · 7 questions
  • पाठ के आस-पास · 3 questions
  • भाषा की बात · 4 questions
  • विज्ञापन की दुनिया · 1 question
Q1.कहानी के उस प्रसंग का उल्लेख करें, जिसमें किताबों की विद्या और घन चलाने की विद्या का जिक्र आया है।

प्रसंग का उल्लेख:

कहानी में यह प्रसंग तब आता है जब मोहन पाठशाला में पढ़ता था और धनराम लुहार के बेटे के रूप में अपने पिता के साथ लोहे का काम सीख रहा था। मास्टर त्रिलोक सिंह कक्षा में पढ़ाते समय धनराम से कोई प्रश्न पूछते हैं, किंतु धनराम उत्तर नहीं दे पाता। इस पर मास्टर जी व्यंग्यपूर्वक कहते हैं कि "किताबों की विद्या तुम्हारे बूते की नहीं, जाओ घन चलाओ।" अर्थात् पढ़ाई-लिखाई तुम्हारे लिए नहीं है, तुम तो लोहार का काम ही करो।

इस कथन में मास्टर जी ने जाति-आधारित पूर्वाग्रह को उजागर किया। उनका आशय था कि धनराम जैसे लोहार-पुत्र के लिए किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि हथौड़ा चलाने का काम ही उचित है। यह प्रसंग कहानी में जातिगत भेदभाव और शिक्षा-व्यवस्था की संकीर्णता को दर्शाता है।

All 15 गलता लोहा (शेखर जोशी) solutions
  • पाठ के साथ · 4 questions
  • पाठ के आस-पास · 4 questions
  • भाषा की बात · 1 question
  • कोड मिक्सिंग/कोड स्विचिंग · 1 question
  • पटकथा की दुनिया · 1 question
Q1.रजनी ने अमित के मुद्दे को गंभीरता से लिया, क्योंकि –
क. वह अमित से बहुत स्नेह करती थी।
ख. अमित उसकी मित्र लीला का बेटा था।
ग. वह अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की सामथ्य रखती थी।
घ. उसे अखबार की सुर्खियों में आने का शौक था।

सही उत्तर: ग. वह अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की सामथ्य रखती थी।

औचित्य: रजनी का स्वभाव ही अन्याय के विरुद्ध लड़ने का है। पाठ में यह स्पष्ट है कि वह किसी भी अन्याय को चुपचाप सहन नहीं करती। अमित का मामला उसे इसलिए नहीं उठाना पड़ा क्योंकि वह अमित से विशेष स्नेह रखती थी या लीला की मित्र थी, बल्कि इसलिए उठाया क्योंकि उसे लगा कि शिक्षक द्वारा अंक काटना और ट्यूशन के लिए दबाव बनाना एक सामाजिक अन्याय है। वह अन्याय को देखकर चुप नहीं रह सकती — यही उसके चरित्र की मूल विशेषता है।

All 11 रजनी (मन्नू भंडारी) solutions
  • पाठ के साथ · 6 questions
  • पाठ के आस-पास · 3 questions
  • शीर्षक सुझाइए · 1 question
  • भाषा की बात · 3 questions
Q1.बेचारा जामुन का पेड़। कितना फलदार था।
और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं।

यह कथन व्यंग्य के साथ कहा गया है। बाहर से यह जामुन के पेड़ की प्रशंसा लगती है, लेकिन वास्तव में यह उस सरकारी दफ़्तर की संवेदनहीनता और औपचारिकता पर कटाक्ष है, जहाँ पेड़ के नीचे दबे आदमी की बजाय पेड़ और उसकी जामुनों की चर्चा हो रही है।

All 13 जामुन का पेड़ (कृश्नचंदर) solutions
  • पाठ के साथ · 6 questions
  • पाठ के आस-पास · 5 questions
  • भाषा की बात · 2 questions
Q1.भारत की चर्चा नेहरू जी कब और किससे करते थे?

दिया गया है: पाठ 'भारत माता' — जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखित।

उत्तर:
नेहरू जी भारत की चर्चा अपनी देशव्यापी यात्राओं के दौरान करते थे। वे जब भी किसी गाँव, कस्बे या शहर में जाते और वहाँ किसानों तथा आम जनता से मिलते, तब उनसे भारत के बारे में बातें करते थे। चुनाव-प्रचार और राजनीतिक सभाओं के अवसर पर भी वे देश के विभिन्न भागों में घूमते और वहाँ के गरीब किसानों, मजदूरों और साधारण लोगों से भारत की एकता, संस्कृति और स्वतंत्रता के विषय में चर्चा करते थे।

All 13 भारत माता (जवाहरलाल नेहरू) solutions
  • पद के साथ · 4 questions
  • पद के आस-पास · 2 questions
Q1.कबीर की दृष्टि में ईश्वर एक है। इसके समर्थन में उन्होंने क्या तर्क दिए हैं?

दिया गया है: कबीर का पद 'हम तो एक एक करि जांनां'।

उत्तर:

कबीर ने ईश्वर की एकता सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित तर्क दिए हैं —

  1. पवन (वायु) एक है: सम्पूर्ण सृष्टि में एक ही वायु व्याप्त है। अलग-अलग प्राणियों में साँस लेने वाली वायु एक ही है।
  1. पानी एक है: सारे संसार में जल का स्रोत एक ही है। सभी जीव एक ही जल पीते हैं।
  1. ज्योति (प्रकाश) एक है: सभी प्राणियों के भीतर एक ही दिव्य ज्योति (आत्मा) व्याप्त है।
  1. मिट्टी (खाक) एक है: सभी मनुष्यों के शरीर एक ही मिट्टी से बने हैं, जैसे एक ही कुम्हार एक ही मिट्टी से अनेक बर्तन बनाता है।
  1. ईश्वर सर्वव्यापी है: जिस प्रकार बढ़ई लकड़ी को काट सकता है किन्तु उसमें व्याप्त अग्नि को नहीं काट सकता, उसी प्रकार ईश्वर सभी घटों (शरीरों) के भीतर व्याप्त है — उसे अलग नहीं किया जा सकता।

निष्कर्ष: इन सभी तर्कों के आधार पर कबीर यह सिद्ध करते हैं कि ईश्वर एक ही है और वह सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त है। जो लोग उसे दो या अनेक मानते हैं, वे अज्ञानी हैं।

All 6 हम तौ एक एक करि जांनां (कबीर) solutions
  • पद के साथ · 3 questions
  • पद के आस-पास · 2 questions
Q1.मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती हैं? वह रूप कैसा है?

दिया गया संदर्भ: मीरा के पद 'मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई' के आधार पर।

उत्तर:

मीरा कृष्ण की उपासना पति अथवा प्रियतम के रूप में करती हैं। वे कृष्ण को अपना सर्वस्व मानती हैं — उनके लिए कृष्ण ही माता, पिता, बंधु, सखा और पति सब कुछ हैं। वे कहती हैं —

"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।"\text{"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।"}

कृष्ण का रूप:
मीरा के आराध्य 'गिरधर गोपाल' हैं — अर्थात् वे कृष्ण जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी उँगली पर उठाया था और जो गायों के पालक (गोपाल) हैं। उनके सिर पर मोर-मुकुट है, वे पीताम्बर धारण करते हैं और उनके गले में वैजयंती माला सुशोभित है। मीरा उन्हें एक दिव्य, सर्वशक्तिमान एवं परम प्रेमी के रूप में देखती हैं।

निष्कर्ष: मीरा की उपासना माधुर्य भाव की उपासना है जिसमें भक्त और भगवान के बीच प्रेमी-प्रेमिका अथवा पति-पत्नी का संबंध होता है।

All 5 मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई (मीरा) solutions
  • कविता के साथ · 5 questions
  • कविता के आस-पास · 2 questions
Q1.पानी के रात भर गिरने और प्राण-मन के घिरने में परस्पर क्या संबंध है?

दिया गया संदर्भ: कविता 'घर की याद' में कवि भवानी प्रसाद मिश्र जेल में बंद हैं और सावन की रात को वर्षा हो रही है।

संबंध:
पानी का रात भर गिरना और प्राण-मन का घिरना — दोनों में गहरा भावनात्मक संबंध है। सावन की वर्षा बाहर से बरसती है, किंतु उसकी रिमझिम ध्वनि और वातावरण कवि के मन के भीतर घर की यादों को जगा देती है। जिस प्रकार बादल चारों ओर से घिरकर वर्षा करते हैं, उसी प्रकार घर की स्मृतियाँ कवि के प्राण और मन को चारों ओर से घेर लेती हैं।

अर्थात् बाहर की वर्षा कवि के भीतर की भावनाओं को उद्वेलित करती है — दोनों एक साथ घटित होते हैं और एक-दूसरे को तीव्र करते हैं। प्रकृति की यह क्रिया कवि की विरह-वेदना को और गहरा कर देती है।

निष्कर्ष: पानी का गिरना बाह्य घटना है और प्राण-मन का घिरना आंतरिक अनुभव — दोनों में कारण-कार्य का संबंध है।

All 7 घर की याद (भवानी प्रसाद मिश्र) solutions
  • कविता के साथ · 4 questions
  • कविता के आस-पास · 3 questions
Q1.चंपा ने ऐसा क्यों कहा कि कलकत्ता पर बजर गिरे?

चंपा ने "कलकत्ते पर बजर गिरे" इसलिए कहा क्योंकि उसे लगता था कि कलकत्ता उसके होने वाले जीवन में एक बड़ी बाधा और डर का कारण है। कविता में कवि समझाता है कि यदि वह ब्याह के बाद अपने पति के साथ कलकत्ता जाएगी, तो उसे पत्र पढ़ने-लिखने में कठिनाई होगी और वह अपने बालम से दूर भी पड़ सकती है। इसलिए चंपा अपने मन की घबराहट, विरोध और जीवट के साथ कलकत्ता को भारी विपत्ति की जगह के रूप में देखती है और कहती है कि उस पर वज्र गिर जाए।

All 7 चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती (त्रिलोचन) solutions
  • गज़ल के साथ · 4 questions
  • गज़ल के आस-पास · 2 questions
Q1.आखिरी शेर में गुलमोहर की चर्चा हुई है। क्या उसका आशय एक खास तरह के फूलदार वृक्ष से है या उसमें कोई सांकेतिक अर्थ निहित है? समझाकर लिखें।

दिया गया शेर:
'जिएं तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले,
मरें तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।'

आशय एवं सांकेतिक अर्थ:

गुलमोहर यहाँ केवल एक फूलदार वृक्ष का नाम नहीं है, बल्कि इसमें गहरा सांकेतिक अर्थ निहित है। गुलमोहर का शाब्दिक अर्थ है — 'फूलों का राजा' या 'सुंदरता, वैभव और समृद्धि का प्रतीक'।

सांकेतिक अर्थ:

  • 'अपने बगीचे में गुलमोहर के तले जीना' — इसका अर्थ है कि यदि जीना है तो अपने सुख-वैभव, अपनी सुविधाओं और अपने स्वार्थ के लिए जीना।
  • 'गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए मरना' — इसका अर्थ है कि यदि मरना (बलिदान देना) है तो दूसरों की खुशी, समाज की भलाई और सुंदर भविष्य के निर्माण के लिए मरना।

निष्कर्ष: कवि दुष्यंत कुमार यहाँ स्वार्थपूर्ण जीवन की तुलना परोपकारी बलिदान से कर रहे हैं। गुलमोहर सुंदर, उज्ज्वल और बेहतर भविष्य का प्रतीक है। कवि का संदेश है कि सच्चा जीवन वही है जो दूसरों के लिए, समाज के लिए, एक बेहतर कल के लिए समर्पित हो।

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Q1.लक्ष्य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधक होती हैं— इसके संदर्भ में अपने तर्क दीजिए।

दिया गया संदर्भ: अक्कमहादेवी की कविता 'हे भूख! मत मचल' में कवयित्री ने इंद्रियों की चंचलता को ईश्वर-प्राप्ति के मार्ग में बाधक बताया है।

तर्क एवं स्पष्टीकरण:

मनुष्य की पाँच ज्ञानेंद्रियाँ — आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा — सदैव बाहरी विषयों की ओर आकर्षित रहती हैं। जब तक ये इंद्रियाँ अपने-अपने विषयों (रूप, शब्द, गंध, रस, स्पर्श) में उलझी रहती हैं, तब तक मन एकाग्र नहीं हो सकता।

  • भूख (जिह्वा की लालसा): जब पेट भोजन की माँग करता है और जीभ स्वाद में लिप्त रहती है, तो साधक का ध्यान ईश्वर से हट जाता है। इसीलिए कवयित्री कहती हैं — 'हे भूख! मत मचल।'
  • प्यास (तृष्णा): शारीरिक और मानसिक तृष्णा मनुष्य को संसार के मोह में बाँधे रखती है।
  • मद (अहंकार व नशा): इंद्रियों का मद मनुष्य को अंधा कर देता है और वह सत्य से दूर हो जाता है।

निष्कर्ष: इंद्रियों पर नियंत्रण किए बिना आत्मा का परमात्मा से मिलन संभव नहीं। जब साधक इंद्रियों के पाश से मुक्त होता है, तभी वह अपने लक्ष्य — ईश्वर-प्राप्ति — की ओर अग्रसर हो सकता है। अतः इंद्रियाँ लक्ष्य-प्राप्ति में निश्चित रूप से बाधक हैं।

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Q1.कवि ने किस आशय से मेहनत की लूट, पुलिस की मार, गद्दारी-लोभ को सबसे खतरनाक नहीं माना।

दिया गया: कविता 'सबसे खतरनाक' — अवतार सिंह पाश

आशय एवं व्याख्या:

कवि पाश का मानना है कि मेहनत की लूट, पुलिस की मार और गद्दारी-लोभ — ये सब बुरी बातें अवश्य हैं, किंतु ये 'सबसे खतरनाक' नहीं हैं। इसके पीछे कवि का निम्नलिखित आशय है:

  1. मेहनत की लूट — जब किसी मजदूर या श्रमिक की मेहनत का फल छीन लिया जाता है, तो वह शारीरिक और आर्थिक कष्ट देती है, परंतु इससे व्यक्ति की चेतना और संघर्ष की भावना जीवित रहती है। वह अन्याय को पहचानता है और उसके विरुद्ध लड़ सकता है।
  1. पुलिस की मार — यह शारीरिक यातना है। इससे शरीर को कष्ट होता है, परंतु व्यक्ति की आत्मा और विद्रोह की भावना नहीं मरती।
  1. गद्दारी-लोभ — यह नैतिक पतन है, किंतु इसे समाज पहचान सकता है और इसके विरुद्ध प्रतिक्रिया कर सकता है।

कवि के अनुसार सबसे खतरनाक वह स्थिति है जब मनुष्य की संवेदनशीलता, सपने देखने की क्षमता और विद्रोह की चेतना ही समाप्त हो जाए — जब वह अन्याय को देखकर भी चुप रहे, मुर्दा शांति में डूब जाए। क्योंकि जब तक व्यक्ति अन्याय को महसूस करता है, वह उससे लड़ सकता है; परंतु जब उसकी आत्मा ही सो जाए, तो परिवर्तन की कोई संभावना नहीं रहती।

निष्कर्ष: कवि का आशय है कि बाहरी शोषण और अत्याचार से मनुष्य टूटता नहीं, बल्कि आंतरिक संवेदनहीनता और चेतनाहीनता ही सबसे बड़ा खतरा है।

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Q1.माटी का रंग प्रयोग करते हुए किस बात की ओर संकेत किया गया है?

दिया गया संदर्भ: कविता में कवयित्री निर्मला पुतुल ने 'माटी का रंग' का प्रयोग किया है।

व्याख्या एवं उत्तर:

'माटी का रंग' से कवयित्री ने आदिवासी समाज की अपनी मूल पहचान, संस्कृति और जड़ों की ओर संकेत किया है। माटी का रंग अर्थात् अपनी धरती से जुड़ाव, अपनी मिट्टी की सोंधी महक और अपने मूल स्वभाव को बनाए रखना। इस प्रयोग के माध्यम से कवयित्री यह कहना चाहती हैं कि आदिवासी समाज को अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, अपनी परंपराओं और अपने मूल स्वरूप को बचाए रखना चाहिए। आधुनिकता की आँधी में यह 'माटी का रंग' धुँधला पड़ता जा रहा है, इसलिए इसे सहेजना आवश्यक है।

निष्कर्ष: 'माटी का रंग' आदिवासी समाज की अपनी भूमि, अपनी संस्कृति और अपनी मौलिक पहचान का प्रतीक है।

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नमक का दारोगा (प्रेमचंद)

2

भारतीय गायिकाओं में / बेजोड़ : लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व)

3

मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती)

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राजस्थान की रजत बूँदें (अनुपम मिश्र)

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अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय)

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आलो-आँधारि (बेबी हालदार)

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विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त)

8

भारतीय कलाएँ

9

गलता लोहा (शेखर जोशी)

10

रजनी (मन्नू भंडारी)

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जामुन का पेड़ (कृश्नचंदर)

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भारत माता (जवाहरलाल नेहरू)

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हम तौ एक एक करि जांनां (कबीर)

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मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई (मीरा)

15

घर की याद (भवानी प्रसाद मिश्र)

16

चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती (त्रिलोचन)

17

गज़ल (दुष्यंत कुमार)

18

हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर (अक्कमहादेवी)

19

सबसे खतरनाक (अवतार सिंह पाश)

20

आओ, मिलकर बचाएँ (निर्मला पुतुल)

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