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Chapter 9 of 20
NCERT Solutions

गलता लोहा (शेखर जोशी)

CBSE · Class 11 · Hindi

NCERT Solutions for गलता लोहा (शेखर जोशी) — CBSE Class 11 Hindi.

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15 Questions Solved · 4 Sections

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अभ्यास

1कहानी के उस प्रसंग का उल्लेख करें, जिसमें किताबों की विद्या और धन चलाने की विद्या का जिक्र आया है।Show solution
कहानी में यह प्रसंग तब आया है जब धनराम अपने बचपन की बातें सुनाता है। मास्टर त्रिलोक सिंह उसके तेरह का पहाड़ा न सुना पाने पर कहते हैं— “तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें?” इसी प्रसंग में किताबों की विद्या और धन चलाने की विद्या का विरोध सामने आता है। आगे पाठ में बताया गया है कि धनराम के पिता उसे बचपन से ही धौंकनी फूँकने, सान लगाने, हथौड़ा-घन चलाने जैसे कामों में लगा देते थे। इस तरह स्कूल की विद्या और लोहे का काम करने की विद्या का अंतर स्पष्ट होता है।

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2धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी क्यों नहीं समझता था?Show solution
धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं समझता था क्योंकि उसके मन में बचपन से ही जातिगत हीनता बैठा दी गई थी। वह मोहन को ब्राह्मण परिवार का, पढ़ने में तेज़ और गुरुजी का चहेता शिष्य मानता था। त्रिलोक सिंह का यह कहना भी कि मोहन एक दिन बड़ा आदमी बनेगा, धनराम के मन में मोहन के प्रति ईर्ष्या की जगह स्नेह और आदर पैदा करता था। इसलिए वह मोहन को मुकाबले का व्यक्ति नहीं, अपने से ऊपर और अलग स्थिति वाला व्यक्ति समझता था।

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3धनराम को मोहन के किस व्यवहार पर आश्चर्य होता है और क्यों?Show solution
धनराम को मोहन के शिल्पकार टोले की भट्टी पर बैठकर लोहे का काम करने पर आश्चर्य होता है। वह इसलिए चकित होता है क्योंकि मोहन ब्राह्मण खानदान का युवक है और सामान्यतः ब्राह्मण टोले के लोग शिल्पकार टोले में बैठते नहीं, काम में हाथ भी नहीं डालते। मोहन न केवल बैठता है, बल्कि धनराम की मदद करके हथौड़ा चलाता है, लोहे को गरम करता है और उसे सुंदर गोलाई देता है। यही बात धनराम के लिए सबसे असाधारण थी।

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4मोहन के लखनऊ आने के बाद के समय को लेखक ने उसके जीवन का एक नया अध्याय क्यों कहा है?Show solution
लेखक ने मोहन के लखनऊ आने के बाद के समय को उसके जीवन का नया अध्याय इसलिए कहा है क्योंकि यहाँ से उसके जीवन की दिशा बदल जाती है। गाँव में वह छात्र था, लेकिन लखनऊ में वह घर के काम-काज में लगा रहने वाला लड़का बन जाता है। आगे की पढ़ाई, स्वतंत्रता और परिवार के स्वप्न—सब कुछ परिस्थितियों में बदल जाता है। उसका जीवन अब पढ़ाई और भविष्य-निर्माण से अधिक समझौते, श्रम और संघर्ष का जीवन बन जाता है। इसलिए यह उसके जीवन का नया और अलग चरण है।

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5मास्टर त्रिलोक सिंह के किस कथन को लेखक ने ज़बान के चाबुक कहा है और क्यों?Show solution
लेखक ने “तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें?” वाले कथन को ज़बान का चाबुक कहा है। यह कथन इसलिए ऐसा है क्योंकि इसमें एक कठोर, अपमानजनक और चुभने वाली चोट है। मास्टर त्रिलोक सिंह यह बात धनराम को तंज़ के रूप में कहते हैं, जिससे उसकी बुद्धि पर चोट पहुँचती है। यह केवल डाँट नहीं, बल्कि शब्दों से मार करने जैसा कथन है।

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6(1)बिरादरी का यही सहारा होता है।Show solution
### क. किसने किससे कहा?
यह वाक्य वंशीधर ने रमेश से कहा।

### ख. किस प्रसंग में कहा?
यह तब कहा गया जब वंशीधर ने मोहन की पढ़ाई और उसके लिए शहर में रहने की व्यवस्था के बारे में रमेश से बात की। रमेश ने मोहन को अपने साथ लखनऊ भेजने का सुझाव दिया था।

### ग. किस आशय से कहा?
इसका आशय था कि अपने समाज या बिरादरी के लोग ही संकट की घड़ी में एक-दूसरे का सहारा बनते हैं। वंशीधर रमेश की मदद को बिरादरी-धर्म और आपसी सहानुभूति के रूप में देख रहा था।

### घ. क्या कहानी में यह आशय स्पष्ट हुआ है?
हाँ, कहानी में यह आशय आंशिक रूप से स्पष्ट हुआ है। रमेश ने वास्तव में मोहन को लखनऊ भेजने में मदद की, लेकिन आगे चलकर वही मोहन को नौकर की तरह इस्तेमाल करने लगता है। इसलिए बिरादरी का सहारा तो दिखता है, पर उसका रूप पूरी तरह आदर्श नहीं रहता।

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6(2)उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी— कहानी का यह वाक्य—Show solution
### क. किसके लिए कहा गया है?
यह वाक्य मोहन के लिए कहा गया है।

### ख. किस प्रसंग में कहा गया है?
यह तब कहा गया है जब मोहन ने धनराम की भट्टी पर बैठकर लोहे के छल्ले को अपने हाथों से सँभाला, गरम किया, ठोका-पीटा और सुंदर गोल रूप दे दिया।

### ग. यह पात्र-विशेष के किन चारित्रिक पहलुओं को उजागर करता है?
यह वाक्य मोहन के इन गुणों को उजागर करता है—
1. कौशल और दक्षता
2. रचनात्मकता
3. आत्मविश्वास
4. सांप्रदायिक/जातिगत संकोच से ऊपर उठने की क्षमता

इससे यह भी पता चलता है कि मोहन में काम को सुंदर रूप देने वाली सर्जनशील दृष्टि है, और वह हाथ के काम को तुच्छ नहीं समझता।

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पाठ के आस-पास

1गाँव और शहर, दोनों जगहों पर चलने वाले मोहन के जीवन-संघर्ष में क्या फ़र्क है? चर्चा करें और लिखें।Show solution
गाँव और शहर, दोनों जगहों पर मोहन का संघर्ष है, लेकिन दोनों के रूप अलग हैं।

गाँव में उसका संघर्ष मुख्यतः पढ़ाई तक पहुँचने का है। उसे लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, नदी पार करनी पड़ती है, और बाद में पढ़ाई के लिए घर-गाँव से दूर रहना पड़ता है। वहाँ कठिनाई प्राकृतिक परिस्थितियों और आर्थिक तंगी से जुड़ी है।

शहर में उसका संघर्ष जीवन-निर्वाह और आत्मसम्मान से जुड़ जाता है। वहाँ वह घरेलू कामों में लग जाता है, नौकर जैसा व्यवहार सहता है, और पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पहचान बचाने की कोशिश करता है। शहर का संघर्ष अधिक सामाजिक और मानसिक है।

इस तरह गाँव में संघर्ष सुविधा और पहुँच का है, जबकि शहर में संघर्ष पहचान, श्रम और समझौते का।

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2एक अध्यापक के रूप में त्रिलोक सिंह का व्यक्तित्व आपको कैसा लगता है? अपनी समझ में उनकी खूबियों और खामियों पर विचार करें।
3गलता लोहा कहानी का अंत एक खास तरीके से होता है। क्या इस कहानी का कोई अन्य अंत हो सकता है? चर्चा करें।

भाषा की बात

1पाठ में निम्नलिखित शब्द लौहकर्म से संबंधित हैं। किसका क्या प्रयोजन है? शब्द के सामने लिखिए—
2पाठ में काट-छाँटकर जैसे कई संयुक्त क्रिया शब्दों का प्रयोग हुआ है। कोई पाँच शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
3बूते का प्रयोग पाठ में तीन स्थानों पर हुआ है उन्हें छाँटकर लिखिए और जिन संदर्भों में उनका प्रयोग है, उन संदर्भों में उन्हें स्पष्ट कीजिए।
4मोहन! थोड़ा दही तो ला दे बाजार से।
मोहन! ये कपड़े धोबी को दे तो आ।
मोहन! एक किलो आलू तो ला दे।
ऊपर के वाक्यों में मोहन को आदेश दिए गए हैं। इन वाक्यों में आप सर्वनाम का इस्तेमाल करते हुए उन्हें दुबारा लिखिए।

विज्ञापन की दुनिया

1विभिन्न व्यापारी अपने उत्पाद की बिक्री के लिए अनेक तरह के विज्ञापन बनाते हैं। आप भी हाथ से बनी किसी वस्तु की बिक्री के लिए एक ऐसा विज्ञापन बनाइए जिससे हस्तकला का कारोबार चले।

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