जामुन का पेड़ (कृश्नचंदर)
CBSE · Class 11 · Hindi
NCERT Solutions for जामुन का पेड़ (कृश्नचंदर) — CBSE Class 11 Hindi.
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पाठ के साथ
1बेचारा जामुन का पेड़। कितना फलदार था। और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं।
क. ये संवाद कहानी के किस प्रसंग में आए हैं?
ख. इससे लोगों की कैसी मानसिकता का पता चलता है?Show solution
ये संवाद उस प्रसंग में आए हैं जब रात को आई आँधी-तूफ़ान में सचिवालय के लॉन में लगा जामुन का पेड़ गिर जाता है और उसके नीचे एक आदमी दब जाता है। सुबह जब माली और चपरासी वहाँ पहुँचते हैं और दबे हुए आदमी को देखते हैं, तो वे उसे निकालने की कोशिश करने की बजाय जामुन के पेड़ की तारीफ़ में ये संवाद बोलते हैं।
ख. मानसिकता:
इन संवादों से लोगों की निम्नलिखित मानसिकता का पता चलता है—
- लोग संवेदनहीन और स्वार्थी हैं। एक इंसान पेड़ के नीचे दबकर तड़प रहा है, फिर भी लोग उसकी पीड़ा की परवाह न करके पेड़ के फलों की रसीलेपन की चर्चा कर रहे हैं।
- लोगों की प्राथमिकताएँ विकृत हैं — वे मानवीय जीवन से अधिक महत्त्व भौतिक वस्तुओं को देते हैं।
- यह व्यंग्यात्मक रूप से समाज की उस प्रवृत्ति को उजागर करता है जहाँ मनुष्य की जान से ज़्यादा तुच्छ बातें महत्त्वपूर्ण लगती हैं।
2दबा हुआ आदमी एक कवि है, यह बात कैसे पता चली और इस जानकारी का फ़ाइल की यात्रा पर क्या असर पड़ा?Show solution
जब दबे हुए आदमी की फ़ाइल विभिन्न सरकारी विभागों में घूमती रही और कोई निर्णय नहीं हो पाया, तब किसी ने उस आदमी से बात की। उसने बताया कि वह एक कवि है और उसने अपनी पीड़ा को कविता के रूप में व्यक्त किया। उसकी कविता सुनकर वहाँ उपस्थित लोगों को पता चला कि वह कवि है। इसकी चर्चा शहर में फैल गई और शाम तक गली-गली से शायर उसके पास जमा होने लगे।
फ़ाइल की यात्रा पर असर:
- कवि होने की जानकारी मिलते ही फ़ाइल की यात्रा और जटिल हो गई।
- पहले फ़ाइल कृषि विभाग, हॉर्टिकल्चर विभाग आदि में घूम रही थी।
- अब यह मामला 'कल्चरल डिपार्टमेंट' (सांस्कृतिक विभाग) को सौंप दिया गया, क्योंकि दबा हुआ व्यक्ति कवि था।
- इस प्रकार फ़ाइल एक नए विभाग में चली गई और उसकी यात्रा और लंबी हो गई, जिससे उस बेचारे कवि की मृत्यु हो गई।
- लेखक ने इसके माध्यम से व्यंग्य किया है कि सरकारी तंत्र में मानवीय संवेदना का कोई स्थान नहीं है।
3कृषि-विभाग वालों ने मामले को हॉर्टिकल्चर विभाग को सौंपने के पीछे क्या तर्क दिया?Show solution
कृषि-विभाग वालों ने यह तर्क दिया कि जामुन का पेड़ एक फलदार वृक्ष है और फलदार वृक्षों से संबंधित मामले 'हॉर्टिकल्चर विभाग' (उद्यान-कृषि विभाग) के अंतर्गत आते हैं, न कि कृषि-विभाग के अंतर्गत। उनका कहना था कि कृषि-विभाग केवल खेती-बाड़ी और फसलों से संबंधित मामले देखता है, जबकि बाग-बगीचों और फलदार पेड़ों का काम हॉर्टिकल्चर विभाग का है।
इस प्रकार एक बेहद तुच्छ और बनावटी तर्क देकर कृषि-विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और फ़ाइल को आगे बढ़ा दिया। लेखक ने इस प्रसंग के माध्यम से सरकारी विभागों की जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति और नौकरशाही की विवेकहीनता पर करारा व्यंग्य किया है।
4इस पाठ में सरकार के किन-किन विभागों की चर्चा की गई है और पाठ से उनके कार्य के बारे में क्या अंदाजा मिलता है?Show solution
| विभाग | कार्य (पाठ के अनुसार) |
|---|---|
| कृषि विभाग (Agriculture Department) | खेती-बाड़ी और फसलों से संबंधित कार्य |
| हॉर्टिकल्चर विभाग (Horticulture Department) | बाग-बगीचों और फलदार पेड़ों से संबंधित कार्य |
| फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट (Forest Department) | जंगल और वृक्षों से संबंधित कार्य |
| सांस्कृतिक विभाग (Cultural Department) | कला, साहित्य और संस्कृति से संबंधित कार्य |
| विदेश विभाग (Foreign Department) | विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय मामले |
विभागों के कार्य के बारे में अंदाज़ा:
- पाठ से पता चलता है कि सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचने में माहिर हैं। हर विभाग फ़ाइल को दूसरे विभाग को सौंप देता है।
- विभागों में आपसी तालमेल का पूर्णतः अभाव है।
- कोई भी विभाग मानवीय संकट को प्राथमिकता नहीं देता; सब नियम-कायदों और विभागीय सीमाओं में उलझे रहते हैं।
- फ़ाइलें महीनों तक एक विभाग से दूसरे विभाग में घूमती रहती हैं और निर्णय नहीं होता।
- इस प्रकार पाठ सरकारी तंत्र की लालफीताशाही, संवेदनहीनता और विवेकहीनता को उजागर करता है।
पाठ के आस-पास
1कहानी में दो प्रसंग ऐसे हैं, जहाँ लोग पेड़ के नीचे दबे आदमी को निकालने के लिए कटिबद्ध होते हैं। ऐसा कब-कब होता है और लोगों का यह संकल्प दोनों बार किस-किस वजह से भंग होता है।Show solution
जब पेड़ के नीचे दबे आदमी की खबर फैलती है तो माली और चपरासी उसे निकालने के लिए तैयार होते हैं। वे पेड़ की डालियाँ काटकर उसे निकालना चाहते हैं।
पहली बार संकल्प भंग होने का कारण:
सुपरिंटेंडेंट ने यह कहकर रोक दिया कि पेड़ काटना उनके अधिकार-क्षेत्र में नहीं है। इसके लिए ऊपर से आदेश लेना होगा। इस प्रकार नौकरशाही के नियमों ने पहला संकल्प भंग कर दिया।
दूसरा प्रसंग:
जब शायरों और कवियों की भीड़ जमा हो गई और उन्होंने दबे हुए कवि को निकालने का बीड़ा उठाया। वे सब मिलकर पेड़ हटाने को तैयार हो गए।
दूसरी बार संकल्प भंग होने का कारण:
तभी किसी ने बताया कि सरकार ने इस मामले पर विचार करने के लिए एक कमेटी बना दी है और जल्द ही निर्णय होगा। इस आश्वासन पर लोग शांत हो गए और संकल्प भंग हो गया।
निष्कर्ष: दोनों बार सरकारी तंत्र और नौकरशाही ने लोगों के मानवीय संकल्प को विफल कर दिया। यही इस कहानी का केंद्रीय व्यंग्य है।
2यह कहना कहाँ तक युक्तिसंगत है कि इस कहानी में हास्य के साथ-साथ करुणा की भी अंतर्धारा है। अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दें।Show solution
हास्य के तत्त्व:
- विभिन्न सरकारी विभागों का फ़ाइल को एक-दूसरे को सौंपते रहना हास्यास्पद है।
- कृषि विभाग का यह तर्क कि 'यह हॉर्टिकल्चर का मामला है' — हास्य उत्पन्न करता है।
- दबे हुए आदमी के कवि होने पर फ़ाइल का सांस्कृतिक विभाग में जाना हास्यास्पद है।
- माली और चपरासी का पेड़ की जामुनों की तारीफ़ करना व्यंग्यात्मक हास्य है।
- विदेश विभाग तक फ़ाइल पहुँचना हास्य की पराकाष्ठा है।
करुणा के तत्त्व:
- एक निर्दोष इंसान पेड़ के नीचे दबा तड़प रहा है — यह करुण दृश्य है।
- वह कवि है, अपनी पीड़ा को कविता में व्यक्त करता है — यह करुणा जगाता है।
- सरकारी तंत्र की विवेकहीनता के कारण उसकी मृत्यु हो जाती है — यह गहरी करुणा उत्पन्न करता है।
- अंत में चींटियों का उसके मुँह में जाना और उसका ठंडा हाथ — यह दृश्य पाठक के हृदय को द्रवित कर देता है।
निष्कर्ष: इस प्रकार यह कहानी 'हास्य-व्यंग्य' और 'करुणा' का अद्भुत संगम है। हास्य ऊपरी सतह पर है और करुणा उसकी अंतर्धारा में बहती है। यही इस कहानी की साहित्यिक विशेषता है।
3यदि आप माली की जगह पर होते, तो हुकूमत के फैसले का इंतजार करते या नहीं? अगर हाँ, तो क्यों? और नहीं, तो क्यों?Show solution
यदि मैं माली की जगह होता, तो मैं हुकूमत के फैसले का इंतज़ार कदापि नहीं करता। इसके निम्नलिखित कारण हैं—
1. मानवीय संवेदना: एक इंसान की जान खतरे में हो तो नियम-कायदों से पहले उसे बचाना मेरा नैतिक कर्तव्य है। मानवता किसी भी नियम से बड़ी होती है।
2. समय की महत्ता: जब कोई व्यक्ति पेड़ के नीचे दबा हो तो हर पल कीमती है। सरकारी फैसले का इंतज़ार करने में जान जा सकती है — और वास्तव में गई भी।
3. विवेक का उपयोग: नियमों का पालन तब तक उचित है जब तक वे मानवता की रक्षा करें। जब नियम ही मानवता के विरुद्ध हो जाएँ, तो विवेक से काम लेना चाहिए।
4. नैतिक जिम्मेदारी: यदि मेरे सामने कोई मर रहा हो और मैं केवल 'आदेश का इंतज़ार' करता रहूँ, तो मैं भी उसकी मृत्यु का उतना ही जिम्मेदार हूँगा जितना सरकारी तंत्र।
निष्कर्ष: मैं तुरंत पेड़ की डालियाँ काटकर उस व्यक्ति को निकालने का प्रयास करता और बाद में सरकारी कार्रवाई का सामना करता। जान बचाना सर्वोपरि है।
शीर्षक सुझाइए
1कहानी के वैकल्पिक शीर्षक सुझाएँ। निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखकर शीर्षक गढ़े जा सकते हैं— (i) कहानी में बार-बार फ़ाइल का ज़िक्र आया है, (ii) सरकारी दफ़्तरों की लंबी और विवेकहीन कार्यप्रणाली, (iii) कहानी का मुख्य पात्र उस विवेकहीनता का शिकार हो जाता है।Show solution
फ़ाइल के आधार पर:
1. 'एक फ़ाइल की मौत' — क्योंकि फ़ाइल के पूर्ण होने के साथ ही उस व्यक्ति की जान भी चली जाती है।
2. 'फ़ाइलों का जंगल' — सरकारी विभागों की उलझी हुई कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
सरकारी कार्यप्रणाली के आधार पर:
3. 'लालफीताशाही' — सरकारी तंत्र की विवेकहीन और धीमी कार्यप्रणाली का प्रतीक।
4. 'विभागों का चक्रव्यूह' — फ़ाइल का एक विभाग से दूसरे विभाग में घूमते रहना।
मुख्य पात्र की त्रासदी के आधार पर:
5. 'एक कवि की मौत' — कहानी के दुखद अंत को उजागर करता है।
6. 'तंत्र का शिकार' — सरकारी तंत्र की विवेकहीनता का शिकार होने वाले व्यक्ति की कहानी।
7. 'नियमों की बलि' — नियम-कायदों के चक्कर में एक इंसान की जान जाने की त्रासदी।
सर्वश्रेष्ठ वैकल्पिक शीर्षक: 'एक फ़ाइल की मौत' — यह शीर्षक कहानी के व्यंग्य, करुणा और मूल भाव को सबसे सटीक रूप से व्यक्त करता है।
भाषा की बात
1नीचे दिए गए अंग्रेज़ी शब्दों के हिंदी प्रयोग लिखिए— अजैट, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, मेंबर, डिप्टी सेक्रेटरी, चीफ़ सेक्रेटरी, मिनिस्टर, अंडर सेक्रेटरी, हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंटShow solution
| अंग्रेज़ी शब्द | हिंदी प्रयोग |
|---|---|
| अजैट (Agent) | अभिकर्ता / प्रतिनिधि |
| फॉरेस्ट डिपार्टमेंट (Forest Department) | वन विभाग |
| मेंबर (Member) | सदस्य |
| डिप्टी सेक्रेटरी (Deputy Secretary) | उप-सचिव |
| चीफ़ सेक्रेटरी (Chief Secretary) | मुख्य सचिव |
| मिनिस्टर (Minister) | मंत्री |
| अंडर सेक्रेटरी (Under Secretary) | अवर सचिव |
| हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट (Horticulture Department) | उद्यान-कृषि विभाग |
| एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट (Agriculture Department) | कृषि विभाग |
2पाठ में से पाँच संयुक्त वाक्यों को चुनिए और उन्हें सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए।Show solution
1.
- संयुक्त वाक्य: इसकी चर्चा शहर में भी फैल गई और शाम तक गली-गली से शायर जमा होने शुरू हो गए।
- सरल वाक्य: इसकी चर्चा शहर में फैलते ही शाम तक गली-गली से शायर जमा होने शुरू हो गए।
2.
- संयुक्त वाक्य: माली ने पेड़ को देखा और वह दौड़कर चपरासी के पास गया।
- सरल वाक्य: पेड़ देखते ही माली दौड़कर चपरासी के पास गया।
3.
- संयुक्त वाक्य: फ़ाइल कृषि विभाग में गई और वहाँ से हॉर्टिकल्चर विभाग को भेज दी गई।
- सरल वाक्य: कृषि विभाग से होती हुई फ़ाइल हॉर्टिकल्चर विभाग को भेज दी गई।
4.
- संयुक्त वाक्य: सुपरिंटेंडेंट ने फ़ाइल देखी और उसे डिप्टी सेक्रेटरी के पास भेज दिया।
- सरल वाक्य: फ़ाइल देखकर सुपरिंटेंडेंट ने उसे डिप्टी सेक्रेटरी के पास भेज दिया।
5.
- संयुक्त वाक्य: रात को आँधी आई और जामुन का पेड़ गिर गया।
- सरल वाक्य: रात को आई आँधी से जामुन का पेड़ गिर गया।
3साक्षात्कार अपने-आप में एक विधा है। जामुन के पेड़ के नीचे दबे आदमी के फाइल बंद होने (मृत्यु) के लिए जिम्मेदार किसी एक व्यक्ति का काल्पनिक साक्षात्कार करें और लिखें।Show solution
*(साक्षात्कारकर्ता: एक पत्रकार; साक्षात्कार-दाता: सचिवालय के सुपरिंटेंडेंट साहब)*
---
पत्रकार: सुपरिंटेंडेंट साहब, जामुन के पेड़ के नीचे दबे उस कवि की मृत्यु के लिए आप खुद को कितना जिम्मेदार मानते हैं?
सुपरिंटेंडेंट: देखिए, मैं बिल्कुल जिम्मेदार नहीं हूँ। मैंने तो अपना काम किया। फ़ाइल बनाई, ऊपर भेजी। यह मेरा कर्तव्य था।
पत्रकार: लेकिन आपने माली को पेड़ काटने से क्यों रोका? उस आदमी को तुरंत निकाला जा सकता था।
सुपरिंटेंडेंट: अरे भाई, नियम तो नियम होते हैं। बिना आदेश के पेड़ काटना मेरे अधिकार में नहीं था। अगर मैं बिना आदेश के पेड़ कटवा देता तो मेरे खिलाफ़ कार्रवाई होती।
पत्रकार: तो क्या आपको नियमों की परवाह एक इंसान की जान से ज़्यादा थी?
सुपरिंटेंडेंट: *(थोड़ा असहज होकर)* यह आप गलत तरीके से देख रहे हैं। मैं तो बस अपनी ड्यूटी कर रहा था।
पत्रकार: क्या आपको अफ़सोस नहीं है?
सुपरिंटेंडेंट: *(चुप रहकर)* ...फ़ाइल तो मैंने समय पर भेजी थी।
पत्रकार: शायद यही इस देश की सबसे बड़ी त्रासदी है। धन्यवाद।
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*(यह साक्षात्कार सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और नियमों की आड़ में जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति को उजागर करता है।)*
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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