भ्रान्तो बाल
CBSE · Class 9 · Sanskrit
NCERT Solutions for भ्रान्तो बाल — CBSE Class 9 Sanskrit.
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अभ्यास: — भ्रान्तो बाल:
1(क)क: तन्द्रालु: भवति?Show solution
1(ख)बालक: कुत्र ब्रजन्तं मधुकरम् अपश्यत्?Show solution
1(ग)के मधुसंग्रहव्यग्रा: अभवन्?Show solution
1(घ)चटक: कया तृणशालाकादिकम् आददाति?Show solution
1(ङ)चटक: कस्य शाखायां नीडं रचयति?Show solution
1(च)बालक: कीदृशं श्वानं पश्यति?Show solution
1(छ)श्वा कीदृशे दिवसे पर्यटति?Show solution
2(क)बाल: कदा क्रीडितुम् अगच्छत्?Show solution
2(ख)बालस्य मित्राणि किमर्थं त्वरमाणा अभवन्?Show solution
2(ग)मधुकर: बालकस्य आह्वानं केन कारणेन तिरस्कृतवान्?Show solution
2(घ)बालक: कीदृशं चटकम् अपश्यत्?Show solution
2(ङ)बालक: चटकाय क्रीडनार्थं कीदृशं लोभं दत्तवान्?Show solution
2(च)खिन्न: बालक: श्वानं किम् अकथयत्?Show solution
2(छ)भग्नमनोरथ: बाल: किम् अचिन्तयत्?Show solution
3निम्नलिखितस्य श्लोकस्य भावार्थं हिन्दीभाषया आङ्गलभाषया वा लिखत— यो मां पुत्रप्रीत्या पोषयति स्वामिनो गृहे तस्य। रक्षानियोगकरणान्न मया भ्रष्टव्यमीषदपि।।Show solution
इस श्लोक में कुत्ता (श्वान) बालक से कह रहा है —
"जो स्वामी मुझे अपने घर में पुत्र के समान स्नेह से पालता-पोसता है, उसके घर की रक्षा करने के कर्तव्य से मुझे तनिक भी विचलित नहीं होना चाहिए।"
भाव: यह श्लोक कर्तव्यनिष्ठा एवं स्वामिभक्ति का संदेश देता है। जो हमारा पालन-पोषण करता है, उसके प्रति हमारा कर्तव्य है कि हम अपने दायित्व का पूर्ण निर्वाह करें। स्वार्थ के लिए अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए।
English Meaning:
The dog says to the boy — "The master who rears me in his house with the affection of a son, I must not deviate even slightly from the duty of guarding his home." This verse conveys the message of devotion to duty and loyalty to one's master.
4"भ्रान्तो बाल:" इति कथाया: सारांशं हिन्दीभाषया आङ्गलभाषया वा लिखत।Show solution
'भ्रान्तो बाल:' कथा में एक आलसी और भ्रमित बालक का वर्णन है जो पाठशाला जाने के समय खेलने निकल जाता है। उसके मित्र पाठशाला जाने की जल्दी में होते हैं, इसलिए वे उसके साथ नहीं खेलते।
बालक एक पुष्पोद्यान में जाता है जहाँ वह भ्रमरों को मधु-संग्रह में व्यस्त देखता है। वह उन्हें खेलने के लिए बुलाता है, परन्तु भ्रमर शीतकाल के लिए मधु-संचय में व्यस्त होने के कारण मना कर देते हैं।
तब बालक एक चिड़िया (चटक) को देखता है जो अपनी चोंच से तिनके उठाकर घोंसला बना रही होती है। बालक उसे स्वादिष्ट भोजन का लालच देकर खेलने के लिए बुलाता है, परन्तु चिड़िया भी अपने घोंसला-निर्माण के कार्य में व्यस्त होने के कारण मना कर देती है।
अन्त में बालक एक कुत्ते को इधर-उधर दौड़ते देखता है और उसे मनुष्यों का मित्र बताकर खेलने के लिए कहता है। कुत्ता भी उत्तर देता है कि जो स्वामी उसे पुत्रवत् पालता है, उसके घर की रक्षा करना उसका कर्तव्य है, अतः वह खेलने में समय नष्ट नहीं कर सकता।
सबके द्वारा अस्वीकृत होने पर बालक को अनुभव होता है कि सभी प्राणी परिश्रमी हैं और अपने-अपने कार्य में लगे हैं। केवल वही आलसी और भ्रमित है। इस अनुभव से उसे ज्ञान होता है और वह पाठशाला जाने का निश्चय करता है।
कथा का संदेश: परिश्रम ही जीवन में सफलता का मार्ग है। आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
5(क)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — स्वादून् भक्ष्यकवलान् ते दास्यामि।Show solution
(अथवा: कीदृशान् भक्ष्यकवलान् ते दास्यामि? — यदि 'स्वादून्' स्थूलपदम् अस्ति।)
5(ख)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — चटक: स्वकर्मणि व्यग्र: आसीत्।Show solution
5(ग)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — कुक्कुर: मानुषाणां मित्रम् अस्ति।Show solution
5(घ)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — स महतीं वैदुषीं लब्धवान्।Show solution
5(ङ)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — रक्षानियोगकरणात् मया न भ्रष्टव्यम् इति।Show solution
6"एतेभ्य: नम:" — इति उदाहरणमनुसृत्य नम: इत्यस्य योगे चतुर्थी विभक्ते: प्रयोगं कृत्वा पञ्चवाक्यानि रचयत।Show solution
पञ्चवाक्यानि:
1. गुरवे नम:। (गुरु को नमस्कार।)
2. मात्रे नम:। (माता को नमस्कार।)
3. पित्रे नम:। (पिता को नमस्कार।)
4. देवाय नम:। (देव को नमस्कार।)
5. विद्यायै नम:। (विद्या को नमस्कार।)
व्याकरणटिप्पणी: 'नम:' के साथ सदा चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।
7'क' स्तम्भे समस्तपदानि 'ख' स्तम्भे च तेषां विग्रहवाक्यानि दत्तानि, तानि यथासमक्षं लिखत।Show solution
| 'क' स्तम्भ (समस्तपदम्) | 'ख' स्तम्भ (विग्रहवाक्यम्) |
|---|---|
| (क) दृष्टिपथम् | (3) दृष्टे: पन्था: |
| (ख) पुस्तकदासा: | (4) पुस्तकानां दासा: |
| (ग) विद्याव्यसनी | (2) विद्याया: व्यसनी |
| (घ) पुष्पोद्यानम् | (1) पुष्पाणाम् उद्यानम् |
7(अ)अधोलिखितेषु पदयुग्मेषु विशेषणपदम् विशेष्यपदं च पृथक्-पृथक् चित्वा लिखत — (क) खिन्न: बाल: (ख) पलायमानं श्वानम् (ग) प्रीत: बालक: (घ) स्वादून् भक्ष्यकवलान् (ङ) त्वरमाणा: वयस्या:Show solution
|---|---|---|
| (क) खिन्न: बाल: | खिन्न: | बाल: |
| (ख) पलायमानं श्वानम् | पलायमानम् | श्वानम् |
| (ग) प्रीत: बालक: | प्रीत: | बालक: |
| (घ) स्वादून् भक्ष्यकवलान् | स्वादून् | भक्ष्यकवलान् |
| (ङ) त्वरमाणा: वयस्या: | त्वरमाणा: | वयस्या: |
व्याकरणटिप्पणी: विशेषण वह पद है जो विशेष्य (संज्ञा) की विशेषता बताता है। विशेषण सदा विशेष्य के लिंग, वचन एवं विभक्ति के अनुसार होता है।
परियोजनाकार्यम् (क)एकस्मिन् स्फोरकपले (chart-paper) एकस्य उद्यानस्य चित्रं निर्माय संकलय्य वा पञ्चवाक्येषु तस्य वर्णनं कुरुत।Show solution
1. इदम् उद्यानं सुन्दरम् अस्ति।
2. अत्र विविधानि पुष्पाणि विकसन्ति।
3. उद्याने हरिता: वृक्षा: सन्ति।
4. खगा: उद्याने मधुरं गायन्ति।
5. उद्यानं मनसः शान्तिं ददाति।
(चित्र स्वयं chart-paper पर बनाएँ — उद्यान में फूल, पेड़, पक्षी, तितलियाँ आदि का चित्र बनाएँ।)
परियोजनाकार्यम् (ख)"परिश्रमस्य महत्वम्" इति विषये हिन्दीभाषया आङ्गलभाषया वा पञ्चवाक्यानि लिखत।Show solution
1. परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।
2. जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वह जीवन में अवश्य सफल होता है।
3. आलसी व्यक्ति कभी उन्नति नहीं कर सकता।
4. प्रकृति के सभी प्राणी — भ्रमर, चिड़िया, कुत्ता — सभी परिश्रमी हैं।
5. 'भ्रान्तो बाल:' कथा हमें यही संदेश देती है कि परिश्रम से ही जीवन सार्थक होता है।
Importance of Hard Work (English):
1. Hard work is the key to success in life.
2. A person who works diligently always achieves his goals.
3. A lazy person can never progress in life.
4. All creatures in nature — the bee, the sparrow, the dog — are hardworking.
5. The story 'Bhranto Baalah' teaches us that only through hard work can life become meaningful.
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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