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Chapter 10 of 22
NCERT Solutions

भ्रान्तो बाल

CBSE · Class 9 · Sanskrit

NCERT Solutions for भ्रान्तो बाल — CBSE Class 9 Sanskrit.

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26 Questions Solved · 1 Section

अभ्यास: — भ्रान्तो बाल:

1(क)क: तन्द्रालु: भवति?Show solution
उत्तरम्: बाल: (बालक:) तन्द्रालु: भवति।
1(ख)बालक: कुत्र ब्रजन्तं मधुकरम् अपश्यत्?Show solution
उत्तरम्: बालक: उद्याने (पुष्पोद्याने) ब्रजन्तं मधुकरम् अपश्यत्।
1(ग)के मधुसंग्रहव्यग्रा: अभवन्?Show solution
उत्तरम्: मधुकरा: (भ्रमरा:) मधुसंग्रहव्यग्रा: अभवन्।
1(घ)चटक: कया तृणशालाकादिकम् आददाति?Show solution
उत्तरम्: चटक: चञ्च्वा (चोंच से) तृणशालाकादिकम् आददाति।
1(ङ)चटक: कस्य शाखायां नीडं रचयति?Show solution
उत्तरम्: चटक: वृक्षस्य शाखायां नीडं रचयति।
1(च)बालक: कीदृशं श्वानं पश्यति?Show solution
उत्तरम्: बालक: पलायमानं (इतस्तत: धावन्तं) श्वानं पश्यति।
1(छ)श्वा कीदृशे दिवसे पर्यटति?Show solution
उत्तरम्: श्वा उष्णे (ग्रीष्मकालीने) दिवसे पर्यटति।
2(क)बाल: कदा क्रीडितुम् अगच्छत्?Show solution
उत्तरम्: बाल: मध्याह्नसमये (अध्ययनकाले) क्रीडितुम् अगच्छत्। सः पाठशालागमनं विहाय क्रीडितुम् अगच्छत्।
2(ख)बालस्य मित्राणि किमर्थं त्वरमाणा अभवन्?Show solution
उत्तरम्: बालस्य मित्राणि पाठशालां गन्तुं त्वरमाणा अभवन्। तेषां पाठशालागमनस्य समय: आसीत्, अत: ते शीघ्रं गच्छन्ति स्म।
2(ग)मधुकर: बालकस्य आह्वानं केन कारणेन तिरस्कृतवान्?Show solution
उत्तरम्: मधुकर: मधुसंग्रहकार्ये व्यग्र: आसीत्। स: शीतकालाय मधुसञ्चयं करोति स्म। अत: स: बालकस्य क्रीडाया: आह्वानं तिरस्कृतवान्।
2(घ)बालक: कीदृशं चटकम् अपश्यत्?Show solution
उत्तरम्: बालक: स्वकर्मणि व्यग्रं, चञ्च्वा तृणशालाकादिकम् आददानं, नीडनिर्माणे संलग्नं चटकम् अपश्यत्।
2(ङ)बालक: चटकाय क्रीडनार्थं कीदृशं लोभं दत्तवान्?Show solution
उत्तरम्: बालक: चटकाय अकथयत् — "त्वं मया सह क्रीड, अहं तुभ्यं स्वादून् भक्ष्यकवलान् दास्यामि।" इत्थं सः भक्ष्यकवलानां लोभं दत्तवान्।
2(च)खिन्न: बालक: श्वानं किम् अकथयत्?Show solution
उत्तरम्: खिन्न: बालक: श्वानम् अकथयत् — "भो मित्र! त्वं तु मानुषाणां मित्रम् असि। अत: मया सह क्रीड।" इति।
2(छ)भग्नमनोरथ: बाल: किम् अचिन्तयत्?Show solution
उत्तरम्: भग्नमनोरथ: बाल: अचिन्तयत् — "अहो! सर्वे स्वकार्ये व्यग्रा: सन्ति। कोऽपि मया सह क्रीडितुं न इच्छति। परिश्रमेण एव जीवने सफलता प्राप्यते। अत: अहमपि पाठशालां गत्वा अध्ययनं करिष्यामि।" इति।
3निम्नलिखितस्य श्लोकस्य भावार्थं हिन्दीभाषया आङ्गलभाषया वा लिखत— यो मां पुत्रप्रीत्या पोषयति स्वामिनो गृहे तस्य। रक्षानियोगकरणान्न मया भ्रष्टव्यमीषदपि।।Show solution
भावार्थ (हिन्दी में):

इस श्लोक में कुत्ता (श्वान) बालक से कह रहा है —

"जो स्वामी मुझे अपने घर में पुत्र के समान स्नेह से पालता-पोसता है, उसके घर की रक्षा करने के कर्तव्य से मुझे तनिक भी विचलित नहीं होना चाहिए।"

भाव: यह श्लोक कर्तव्यनिष्ठा एवं स्वामिभक्ति का संदेश देता है। जो हमारा पालन-पोषण करता है, उसके प्रति हमारा कर्तव्य है कि हम अपने दायित्व का पूर्ण निर्वाह करें। स्वार्थ के लिए अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए।

English Meaning:

The dog says to the boy — "The master who rears me in his house with the affection of a son, I must not deviate even slightly from the duty of guarding his home." This verse conveys the message of devotion to duty and loyalty to one's master.
4"भ्रान्तो बाल:" इति कथाया: सारांशं हिन्दीभाषया आङ्गलभाषया वा लिखत।Show solution
कथासारांश (हिन्दी में):

'भ्रान्तो बाल:' कथा में एक आलसी और भ्रमित बालक का वर्णन है जो पाठशाला जाने के समय खेलने निकल जाता है। उसके मित्र पाठशाला जाने की जल्दी में होते हैं, इसलिए वे उसके साथ नहीं खेलते।

बालक एक पुष्पोद्यान में जाता है जहाँ वह भ्रमरों को मधु-संग्रह में व्यस्त देखता है। वह उन्हें खेलने के लिए बुलाता है, परन्तु भ्रमर शीतकाल के लिए मधु-संचय में व्यस्त होने के कारण मना कर देते हैं।

तब बालक एक चिड़िया (चटक) को देखता है जो अपनी चोंच से तिनके उठाकर घोंसला बना रही होती है। बालक उसे स्वादिष्ट भोजन का लालच देकर खेलने के लिए बुलाता है, परन्तु चिड़िया भी अपने घोंसला-निर्माण के कार्य में व्यस्त होने के कारण मना कर देती है।

अन्त में बालक एक कुत्ते को इधर-उधर दौड़ते देखता है और उसे मनुष्यों का मित्र बताकर खेलने के लिए कहता है। कुत्ता भी उत्तर देता है कि जो स्वामी उसे पुत्रवत् पालता है, उसके घर की रक्षा करना उसका कर्तव्य है, अतः वह खेलने में समय नष्ट नहीं कर सकता।

सबके द्वारा अस्वीकृत होने पर बालक को अनुभव होता है कि सभी प्राणी परिश्रमी हैं और अपने-अपने कार्य में लगे हैं। केवल वही आलसी और भ्रमित है। इस अनुभव से उसे ज्ञान होता है और वह पाठशाला जाने का निश्चय करता है।

कथा का संदेश: परिश्रम ही जीवन में सफलता का मार्ग है। आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
5(क)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — स्वादून् भक्ष्यकवलान् ते दास्यामि।Show solution
प्रश्न: स्वादून् कान् ते दास्यामि?

(अथवा: कीदृशान् भक्ष्यकवलान् ते दास्यामि? — यदि 'स्वादून्' स्थूलपदम् अस्ति।)
5(ख)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — चटक: स्वकर्मणि व्यग्र: आसीत्।Show solution
प्रश्न: चटक: कस्मिन् व्यग्र: आसीत्?
5(ग)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — कुक्कुर: मानुषाणां मित्रम् अस्ति।Show solution
प्रश्न: क: मानुषाणां मित्रम् अस्ति?
5(घ)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — स महतीं वैदुषीं लब्धवान्।Show solution
प्रश्न:कीदृशीं वैदुषीं लब्धवान्?
5(ङ)स्थूलपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — रक्षानियोगकरणात् मया न भ्रष्टव्यम् इति।Show solution
प्रश्न: कस्मात् मया न भ्रष्टव्यम् इति?
6"एतेभ्य: नम:" — इति उदाहरणमनुसृत्य नम: इत्यस्य योगे चतुर्थी विभक्ते: प्रयोगं कृत्वा पञ्चवाक्यानि रचयत।Show solution
उदाहरणम्: एतेभ्य: नम: ।

पञ्चवाक्यानि:

1. गुरवे नम:। (गुरु को नमस्कार।)

2. मात्रे नम:। (माता को नमस्कार।)

3. पित्रे नम:। (पिता को नमस्कार।)

4. देवाय नम:। (देव को नमस्कार।)

5. विद्यायै नम:। (विद्या को नमस्कार।)

व्याकरणटिप्पणी: 'नम:' के साथ सदा चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।
7'क' स्तम्भे समस्तपदानि 'ख' स्तम्भे च तेषां विग्रहवाक्यानि दत्तानि, तानि यथासमक्षं लिखत।Show solution
समस्तपद — विग्रहवाक्यम्

| 'क' स्तम्भ (समस्तपदम्) | 'ख' स्तम्भ (विग्रहवाक्यम्) |
|---|---|
| (क) दृष्टिपथम् | (3) दृष्टे: पन्था: |
| (ख) पुस्तकदासा: | (4) पुस्तकानां दासा: |
| (ग) विद्याव्यसनी | (2) विद्याया: व्यसनी |
| (घ) पुष्पोद्यानम् | (1) पुष्पाणाम् उद्यानम् |
7(अ)अधोलिखितेषु पदयुग्मेषु विशेषणपदम् विशेष्यपदं च पृथक्-पृथक् चित्वा लिखत — (क) खिन्न: बाल: (ख) पलायमानं श्वानम् (ग) प्रीत: बालक: (घ) स्वादून् भक्ष्यकवलान् (ङ) त्वरमाणा: वयस्या:Show solution
| पदयुग्मम् | विशेषणम् | विशेष्यम् |
|---|---|---|
| (क) खिन्न: बाल: | खिन्न: | बाल: |
| (ख) पलायमानं श्वानम् | पलायमानम् | श्वानम् |
| (ग) प्रीत: बालक: | प्रीत: | बालक: |
| (घ) स्वादून् भक्ष्यकवलान् | स्वादून् | भक्ष्यकवलान् |
| (ङ) त्वरमाणा: वयस्या: | त्वरमाणा: | वयस्या: |

व्याकरणटिप्पणी: विशेषण वह पद है जो विशेष्य (संज्ञा) की विशेषता बताता है। विशेषण सदा विशेष्य के लिंग, वचन एवं विभक्ति के अनुसार होता है।
परियोजनाकार्यम् (क)एकस्मिन् स्फोरकपले (chart-paper) एकस्य उद्यानस्य चित्रं निर्माय संकलय्य वा पञ्चवाक्येषु तस्य वर्णनं कुरुत।Show solution
उद्यानस्य वर्णनम् (संस्कृते):

1. इदम् उद्यानं सुन्दरम् अस्ति।
2. अत्र विविधानि पुष्पाणि विकसन्ति।
3. उद्याने हरिता: वृक्षा: सन्ति।
4. खगा: उद्याने मधुरं गायन्ति।
5. उद्यानं मनसः शान्तिं ददाति।

(चित्र स्वयं chart-paper पर बनाएँ — उद्यान में फूल, पेड़, पक्षी, तितलियाँ आदि का चित्र बनाएँ।)
परियोजनाकार्यम् (ख)"परिश्रमस्य महत्वम्" इति विषये हिन्दीभाषया आङ्गलभाषया वा पञ्चवाक्यानि लिखत।Show solution
परिश्रम का महत्त्व (हिन्दी में):

1. परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।
2. जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वह जीवन में अवश्य सफल होता है।
3. आलसी व्यक्ति कभी उन्नति नहीं कर सकता।
4. प्रकृति के सभी प्राणी — भ्रमर, चिड़िया, कुत्ता — सभी परिश्रमी हैं।
5. 'भ्रान्तो बाल:' कथा हमें यही संदेश देती है कि परिश्रम से ही जीवन सार्थक होता है।

Importance of Hard Work (English):

1. Hard work is the key to success in life.
2. A person who works diligently always achieves his goals.
3. A lazy person can never progress in life.
4. All creatures in nature — the bee, the sparrow, the dog — are hardworking.
5. The story 'Bhranto Baalah' teaches us that only through hard work can life become meaningful.

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Frequently Asked Questions

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