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Chapter 13 of 22
NCERT Solutions

सन्धि

CBSE · Class 9 · Sanskrit

NCERT Solutions for सन्धि — CBSE Class 9 Sanskrit.

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14 Questions Solved · 14 Sections

सन्धि: — अभ्यास-प्रश्नोत्तर

1(क)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [अ, आ + अ, आ = आ]
i. सूर्य + आतपे = सूर्यातपे (अ+आ=आ)
ii. लोभ + आविष्टा = ?
iii. आगतास्तित = ? + ? (?)
iv. एव + अस्य = ? (?)
v. पूर्वार्द्ध: = ? + ? (?)
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दीर्घसन्धि: (अ/आ + अ/आ = आ)

सूत्र: 'अकः सवर्णे दीर्घः' — जब अ या आ के बाद अ या आ आए तो दोनों मिलकर दीर्घ 'आ' हो जाते हैं।

i. सूर्य + आतपे = सूर्यातपे (अ + आ = आ) — (उदाहरण)

ii. लोभ + आविष्टा = लोभाविष्टा (अ + आ = आ)

iii. आगतास्तित = आगताः + इति — (यहाँ वास्तव में विसर्ग-सन्धि है, किन्तु पाठ्यक्रम के अनुसार) = आगता + अस्तित (आ + अ = आ)

iv. एव + अस्य = एवास्य (अ + अ = आ)

v. पूर्वार्द्ध: = पूर्व + अर्द्ध: (अ + अ = आ)

प्रश्न 1(ख) — इ, ई + इ, ई = ई (दीर्घसन्धि)

1(ख)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [इ, ई + इ, ई = ई]
i. अति + इव = अतीव (इ+इ=ई)
ii. नदी + इयम् = ?
iii. कपि + ईदृश: = ?
iv. लघ्वौति = ? + ? (?)
v. कपीन्द्र: = ? + ? (?)
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दीर्घसन्धि: (इ/ई + इ/ई = ई)

सूत्र: 'अकः सवर्णे दीर्घः' — इ या ई के बाद इ या ई आए तो दीर्घ 'ई' हो जाता है।

i. अति + इव = अतीव (इ + इ = ई) — (उदाहरण)

ii. नदी + इयम् = नदीयम् (ई + इ = ई)

iii. कपि + ईदृश: = कपीदृश: (इ + ई = ई)

iv. लघ्वौति — (OCR अस्पष्ट है; सम्भावित रूप:) लघु + इति = लघ्विति (उ + इ = यण्-सन्धि) — अथवा पाठ के अनुसार: लघु + उति — यहाँ OCR अशुद्ध प्रतीत होता है। सम्भावित उत्तर: लघु + इति (इ/ई सन्धि नहीं; यण् सन्धि)

v. कपीन्द्र: = कपि + इन्द्र: (इ + इ = ई)

प्रश्न 1(ग) — उ, ऊ + उ, ऊ = ऊ (दीर्घसन्धि)

1(ग)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [उ, ऊ + उ, ऊ = ऊ]
i. गुरु + उचितम् = गुरूचितम् (उ+उ=ऊ)
ii. भानु + उदय: = ?
iii. लघूर्मि: = ? + ? (?)
iv. भू + ऊर्ध्वम् = ?
v. साधूपदेश: = ? + ? (?)
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दीर्घसन्धि: (उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ)

सूत्र: 'अकः सवर्णे दीर्घः' — उ या ऊ के बाद उ या ऊ आए तो दीर्घ 'ऊ' हो जाता है।

i. गुरु + उचितम् = गुरूचितम् (उ + उ = ऊ) — (उदाहरण)

ii. भानु + उदय: = भानूदय: (उ + उ = ऊ)

iii. लघूर्मि: = लघु + ऊर्मि: (उ + ऊ = ऊ)

iv. भू + ऊर्ध्वम् = भूर्ध्वम् (ऊ + ऊ = ऊ)

v. साधूपदेश: = साधु + उपदेश: (उ + उ = ऊ)

प्रश्न 1(घ) — ऋ + ऋ = ॠ (दीर्घसन्धि)

1(घ)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [ऋ + ऋ = ॠ]
i. पितृ + ऋणम् = पितृणम् (ऋ+ऋ=ॠ)
ii. मातृ + ऋद्धि: = ?
iii. भ्रातृणम् = ? + ? (?)
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दीर्घसन्धि: (ऋ + ऋ = ॠ)

सूत्र: 'अकः सवर्णे दीर्घः' — ऋ के बाद ऋ आए तो दीर्घ 'ॠ' हो जाता है।

i. पितृ + ऋणम् = पितॄणम् (ऋ + ऋ = ॠ) — (उदाहरण)

ii. मातृ + ऋद्धि: = मातॄद्धि: (ऋ + ऋ = ॠ)

iii. भ्रातॄणम् = भ्रातृ + ऋणम् (ऋ + ऋ = ॠ)

प्रश्न 2(क) — गुणसन्धि: (अ/आ + इ/ई = ए)

2(क)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [अ, आ + इ, ई = ए]
i. अनेन + इति = अनेनेति (अ+इ=ए)
ii. यथा + इच्छया = ?
iii. मातेव = ? + ? (?)
iv. लतेयम् = ? + ? (?)
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गुणसन्धि: (अ/आ + इ/ई = ए)

सूत्र: 'आद् गुणः' — अ या आ के बाद इ या ई आए तो 'ए' हो जाता है।

i. अनेन + इति = अनेनेति (अ + इ = ए) — (उदाहरण)

ii. यथा + इच्छया = यथेच्छया (आ + इ = ए)

iii. मातेव = माता + इव (आ + इ = ए)

iv. लतेयम् = लता + इयम् (आ + इ = ए)

प्रश्न 2(ख) — गुणसन्धि: (अ/आ + उ/ऊ = ओ)

2(ख)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [अ, आ + उ, ऊ = ओ]
i. वृक्षस्य + उपरि = वृक्षस्योपरि (अ+उ=ओ)
ii. सूर्योदयात् = ? + ? (?)
iii. घृत + उत्पत्ति: = ?
iv. मानवोचितम् = ? + ? (?)
v. गृह + उद्यानम् = ?
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गुणसन्धि: (अ/आ + उ/ऊ = ओ)

सूत्र: 'आद् गुणः' — अ या आ के बाद उ या ऊ आए तो 'ओ' हो जाता है।

i. वृक्षस्य + उपरि = वृक्षस्योपरि (अ + उ = ओ) — (उदाहरण)

ii. सूर्योदयात् = सूर्य + उदयात् (अ + उ = ओ)

iii. घृत + उत्पत्ति: = घृतोत्पत्ति: (अ + उ = ओ)

iv. मानवोचितम् = मानव + उचितम् (अ + उ = ओ)

v. गृह + उद्यानम् = गृहोद्यानम् (अ + उ = ओ)

प्रश्न 2(ग) — गुणसन्धि: (अ/आ + ऋ = अर्)

2(ग)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [अ, आ + ऋ = अर्]
i. महा + ऋषि: = महर्षि: (आ+ऋ=अर्)
ii. देवर्षि: = ? + ? (?)
iii. वसन्त + ऋतु: = ?
iv. वर्षर्तु: = ? + ? (?)
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गुणसन्धि: (अ/आ + ऋ = अर्)

सूत्र: 'आद् गुणः' — अ या आ के बाद ऋ आए तो 'अर्' हो जाता है।

i. महा + ऋषि: = महर्षि: (आ + ऋ = अर्) — (उदाहरण)

ii. देवर्षि: = देव + ऋषि: (अ + ऋ = अर्)

iii. वसन्त + ऋतु: = वसन्तर्तु: (अ + ऋ = अर्)

iv. वर्षर्तु: = वर्ष + ऋतु: (अ + ऋ = अर्)

प्रश्न 3(क) — वृद्धिसन्धि: (अ/आ + ए/ऐ = ऐ)

3(क)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [अ, आ + ए, ऐ = ऐ]
i. गत्वा + एव = गत्वैव (आ+ए=ऐ)
ii. एव + एनम् = ?
iii. क्षणेनैव = ? + ? (?)
iv. न + एतादृश: = ?
v. महैरावत: = ? + ? (?)
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वृद्धिसन्धि: (अ/आ + ए/ऐ = ऐ)

सूत्र: 'वृद्धिरेचि' — अ या आ के बाद ए या ऐ आए तो 'ऐ' हो जाता है।

i. गत्वा + एव = गत्वैव (आ + ए = ऐ) — (उदाहरण)

ii. एव + एनम् = एवैनम् (अ + ए = ऐ)

iii. क्षणेनैव = क्षणेन + एव (अ + ए = ऐ)

iv. न + एतादृश: = नैतादृश: (अ + ए = ऐ)

v. महैरावत: = महा + ऐरावत: (आ + ऐ = ऐ)

प्रश्न 3(ख) — वृद्धिसन्धि: (अ/आ + ओ/औ = औ)

3(ख)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [अ, आ + ओ, औ = औ]
i. जल + ओघ: = जलौघ: (अ+ओ=औ)
ii. तव + औदार्यम् = ?
iii. वनौषधि: = ? + ? (?)
iv. महा + औत्सुक्येन = ?
v. जनौघ: = ? + ? (?)
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वृद्धिसन्धि: (अ/आ + ओ/औ = औ)

सूत्र: 'वृद्धिरेचि' — अ या आ के बाद ओ या औ आए तो 'औ' हो जाता है।

i. जल + ओघ: = जलौघ: (अ + ओ = औ) — (उदाहरण)

ii. तव + औदार्यम् = तवौदार्यम् (अ + औ = औ)

iii. वनौषधि: = वन + ओषधि: (अ + ओ = औ)

iv. महा + औत्सुक्येन = महौत्सुक्येन (आ + औ = औ)

v. जनौघ: = जन + ओघ: (अ + ओ = औ)

प्रश्न 4(क) — यण्-सन्धि: (इ/ई + असमान स्वर = य्)

4(क)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [इ, ई + असमान-स्वर: = य् + स्वर:]
i. प्रति + अवदत् = प्रत्यवदत् (इ+अ=य)
ii. यदि + अहम् = ?
iii. तानि + एव = ?
iv. पर्यावरणम् = ? + ? (?)
v. इत्यवदत् = ? + ? (?)
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यण्-सन्धि: (इ/ई → य्)

सूत्र: 'इको यणचि' — इ या ई के बाद कोई असमान स्वर आए तो इ/ई के स्थान पर 'य्' हो जाता है और परवर्ती स्वर उसके साथ मात्रा रूप में जुड़ जाता है।

i. प्रति + अवदत् = प्रत्यवदत् (इ + अ = य) — (उदाहरण)

ii. यदि + अहम् = यद्यहम् (इ + अ = य)

iii. तानि + एव = तान्येव (इ + ए = ये)

iv. पर्यावरणम् = परि + आवरणम् (इ + आ = या)

v. इत्यवदत् = इति + अवदत् (इ + अ = य)

प्रश्न 4(ख) — यण्-सन्धि: (उ/ऊ + असमान स्वर = व्)

4(ख)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [उ, ऊ + असमान स्वर: = व् + स्वर:]
i. खलु + अयम् = खल्वयम् (उ+अ=व)
ii. मधु + अरि: = ?
iii. गुणोच्वेव = ? (OCR अस्पष्ट)
iv. विरमन्तु + एते = ? + ? (?)
v. स्वागतम् = ? + ? (?)
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यण्-सन्धि: (उ/ऊ → व्)

सूत्र: 'इको यणचि' — उ या ऊ के बाद कोई असमान स्वर आए तो उ/ऊ के स्थान पर 'व्' हो जाता है।

i. खलु + अयम् = खल्वयम् (उ + अ = व) — (उदाहरण)

ii. मधु + अरि: = मध्वरि: (उ + अ = व)

iii. गुणोच्वेव — OCR अस्पष्ट है। सम्भावित रूप: गुणौ + एव = गुणोच्वेव — अथवा गुणो + एव — पाठ के अनुसार यण्-सन्धि: गुणु + एव = गुण्वेव (उ + ए = वे)

iv. विरमन्तु + एते = विरमन्त्वेते (उ + ए = वे)

v. स्वागतम् = सु + आगतम् (उ + आ = वा)

प्रश्न 4(ग) — यण्-सन्धि: (ऋ + असमान स्वर = र्)

4(ग)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत — [ऋ + असमान-स्वर: = र् + स्वर:]
i. पितृ + आदेश: = पित्रादेश: (ऋ+आ=रा)
ii. मात्राज्ञा = ? + ? (?)
iii. भ्रातृ + इच्छा = ?
iv. कर्तृ + उपदेश: = ?
v. पित्रनुमति: = ? + ? (?)
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यण्-सन्धि: (ऋ → र्)

सूत्र: 'इको यणचि' — ऋ के बाद कोई असमान स्वर आए तो ऋ के स्थान पर 'र्' हो जाता है।

i. पितृ + आदेश: = पित्रादेश: (ऋ + आ = रा) — (उदाहरण)

ii. मात्राज्ञा = मातृ + आज्ञा (ऋ + आ = रा)

iii. भ्रातृ + इच्छा = भ्रात्रिच्छा (ऋ + इ = रि)

iv. कर्तृ + उपदेश: = कर्त्रुपदेश: (ऋ + उ = रु)

v. पित्रनुमति: = पितृ + अनुमति: (ऋ + अ = र)

प्रश्न 5(क) — व्यञ्जन-सन्धि: (म् + व्यञ्जन = अनुस्वार:)

5(क)उदाहरणमनुसृत्य सन्धि विच्छेदं वा कुरुत —
i. त्वम् + यासि = त्वं यासि
ii. अहम् + इच्छामि = ?
iii. किम् + कथयति = ?
iv. अयम् + राजा = ?
v. माम् + मुञ्च = ?
vi. कथमागत: = ? + ? (?)
vii. अयम् + राजा = ?
viii. हर्तुम् + इच्छति = ?
ix. सन्ध्याम् + यावत् = ?
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व्यञ्जन-सन्धि: (मोऽनुस्वारः)

सूत्र: 'मोऽनुस्वारः' — 'म्' के बाद कोई व्यञ्जन वर्ण हो तो 'म्' के स्थान पर अनुस्वार (ं) हो जाता है। यदि 'म्' के बाद स्वर हो तो 'म्' का स्वर के साथ संयोग होता है।

i. त्वम् + यासि = त्वं यासि (म् + य = ं) — (उदाहरण)

ii. अहम् + इच्छामि = अहमिच्छामि (म् + इ — स्वर है, अतः म् का संयोग; अनुस्वार नहीं)

iii. किम् + कथयति = किं कथयति (म् + क = ं)

iv. अयम् + राजा = अयं राजा (म् + र = ं)

v. माम् + मुञ्च = मां मुञ्च (म् + म = ं)

vi. कथमागत: = कथम् + आगत: (म् + आ — स्वर, अतः संयोग)

vii. अयम् + राजा = अयं राजा (म् + र = ं) [iv के समान]

viii. हर्तुम् + इच्छति = हर्तुमिच्छति (म् + इ — स्वर, अतः संयोग)

ix. सन्ध्याम् + यावत् = सन्ध्यां यावत् (म् + य = ं)

अभ्यास: — प्रश्न 1

अभ्यास-1प्रदत्त-पदेषु सन्धि विच्छेदं वा कुरुत —
i. हिताहितम्
ii. पश्चिमोत्तरम्
iii. वृथा + अटनम्
iv. इति + उभौ
v. नमाम्येनम्
vi. वृकोदरेग (वृकोदर + एव)
vii. राजमार्गण + एव
viii. इहागत:
ix. पूर्व + इतरम्
x. वदतीति
xi. तव + औषधम्
xii. राजर्षि:
xiii. अत्रान्तरम्
xiv. अहम् + गच्छामि
xv. खलु + एष:
xvi. साधूक्तम्
xvii. मातृ + ऋणम्
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सन्धि-विच्छेद एवं सन्धि:

i. हिताहितम् = हित + अहितम् (अ + अ = आ; दीर्घसन्धि:)

ii. पश्चिमोत्तरम् = पश्चिम + उत्तरम् (अ + उ = ओ; गुणसन्धि:)

iii. वृथा + अटनम् = वृथाटनम् (आ + अ = आ; दीर्घसन्धि:)

iv. इति + उभौ = इत्युभौ (इ + उ = यु; यण्-सन्धि:)

v. नमाम्येनम् = नमामि + एनम् (इ + ए = ये; यण्-सन्धि:)

vi. वृकोदरेव = वृकोदर + एव (अ + ए = ऐ; वृद्धिसन्धि:) — अथवा वृक + उदर (अ + उ = ओ; गुणसन्धि:) [दोनों सन्धियाँ हैं]

vii. राजमार्गण + एव = राजमार्गणैव (अ + ए = ऐ; वृद्धिसन्धि:)

viii. इहागत: = इह + आगत: (अ + आ = आ; दीर्घसन्धि:)

ix. पूर्व + इतरम् = पूर्वेतरम् (अ + इ = ए; गुणसन्धि:)

x. वदतीति = वदति + इति (इ + इ = ई; दीर्घसन्धि:)

xi. तव + औषधम् = तवौषधम् (अ + औ = औ; वृद्धिसन्धि:)

xii. राजर्षि: = राज + ऋषि: (अ + ऋ = अर्; गुणसन्धि:)

xiii. अत्रान्तरम् = अत्र + अन्तरम् (अ + अ = आ; दीर्घसन्धि:)

xiv. अहम् + गच्छामि = अहं गच्छामि (म् + ग = ं; व्यञ्जन-सन्धि: — मोऽनुस्वारः)

xv. खलु + एष: = खल्वेष: (उ + ए = वे; यण्-सन्धि:)

xvi. साधूक्तम् = साधु + उक्तम् (उ + उ = ऊ; दीर्घसन्धि:)

xvii. मातृ + ऋणम् = मातॄणम् (ऋ + ऋ = ॠ; दीर्घसन्धि:)

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Sources & Official References

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