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Chapter 2 of 38
NCERT Solutions

सूरदास की झोंपड़ी (Part 2) — NCERT Solutions

CBSE · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for सूरदास की झोंपड़ी (Part 2), CBSE Class 12 Hindi: 7 textbook questions solved step by step. Covers प्रश्न-अभ्यास.

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एक रात में सूरदास की झोंपड़ी में आग लगने का दृश्य, जिसमें ग्रामीण लोग आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं और आसमान में लालिमा छाई हुई है।
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7 Questions Solved · 1 Section

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प्रश्न-अभ्यास

1'चूल्हा ठंडा किया होता, तो दुश्मनों का कलेजा कैसे ठंडा होता?' नायकराम के इस कथन में निहित भाव को स्पष्ट कीजिए।Show solution

नायकराम के कथन में व्यंग्य और कड़वाहट का भाव है। वह सूरदास के झोंपड़े में आग लगने पर सीधे-सीधे नहीं, बल्कि ताना मारते हुए कहता है कि यदि चूल्हा ठंडा कर दिया होता, तो दुश्मनों का भी कलेजा ठंडा हो जाता। इसका आशय है कि उसे लगता है सूरदास के साथ कुछ लोगों ने शरारत या बदला लेने की भावना से यह काम किया है। नायकराम के शब्दों में ईर्ष्या, विरोध और बदले की भावना छिपी हुई है। वह यह भी जताता है कि जिन लोगों के मन में खोट है, वे इस तरह की विपत्ति से प्रसन्न हो सकते हैं।

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2भैरों ने सूरदास की झोपड़ी क्यों जलाई?Show solution

भैरों ने सूरदास की झोपड़ी इसलिए जलाई क्योंकि वह अपने अपमान और बदनामी का बदला लेना चाहता था। मुहल्ले में सूरदास और सुभागी के संबंधों की चर्चा होने से भैरों को यह विश्वास हो गया था कि सूरदास के कारण उसकी लाज और इज्जत को ठेस पहुँची है। जगधर की बातों और उकसावे से उसका गुस्सा और भड़क गया। वह सूरदास को रुलाना और तड़पाना चाहता था, इसलिए उसने उसकी थैली भी उठा ली और झोपड़ी में आग लगा दी।

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3'यह फूस की राख न थी, उसकी अभिलाषाओं की राख थी।' संदर्भ सहित विवेचन कीजिए।Show solution

यह पंक्ति उस प्रसंग से जुड़ी है जब सूरदास की झोपड़ी जल जाती है और वह अपनी सारी बचत वाली पोटली खोजते-खोजते राख में रो पड़ता है। लेखक कहता है कि यह केवल फूस की राख नहीं थी, बल्कि सूरदास की आशाओं, जीवनभर की कमाई, और भविष्य की योजनाओं की राख थी। उस पोटली में उसके लगभग पाँच सौ रुपये थे, जिनसे वह पितरों का पिंडदान, मिठुआ की सगाई, बहू का घर में आना और कुआँ बनवाना चाहता था। इसीलिए झोपड़ी की राख उसके लिए केवल जल चुके फूस की नहीं, बल्कि उसकी अभिलाषाओं और सपनों की राख थी।

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4जगधर के मन में किस तरह का ईर्ष्या-भाव जगा और क्यों?Show solution

जगधर के मन में ईर्ष्या का भाव इसलिए जगा क्योंकि उसे यह सहन नहीं हुआ कि भैरों के हाथ इतने रुपये लग गए, जबकि उसके अपने जीवन में तंगी थी। वह देखता है कि सूरदास के पास जमा की हुई बड़ी रकम है और भैरों ने उसे लूट लिया है। उसे लगता है कि सूरदास की तकदीर खुल गई, जबकि उसे कभी पड़ा हुआ पैसा भी नहीं मिलता। साथ ही वह स्वयं भी बेईमानी करता था, इसलिए उसे यह बात चुभती थी कि दूसरों के हाथ लाभ लग रहा है। इसी हसद और असंतोष ने उसके मन में ईर्ष्या पैदा की।

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5सूरदास जगधर से अपनी आर्थिक हानि को गुप्त क्यों रखना चाहता था?

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6'सूरदास उठ खड़ा हुआ और विजय-गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा।' इस कथन के संदर्भ में सूरदास की मनोदशा का वर्णन कीजिए।

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7'तो हम सौ लाख बार बनाएँगे' इस कथन के संदर्भ में सूरदास के चरित्र का विवेचन कीजिए।

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3 more solved questions in सूरदास की झोंपड़ी

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in सूरदास की झोंपड़ी for CBSE Class 12 Hindi?
Key topics in सूरदास की झोंपड़ी include कथानक का संक्षिप्त क्रम, मुख्य पात्र और उनके कार्य, महत्त्वपूर्ण उद्धरण और भावार्थ, सूरदास का चरित्र-चित्रण. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for सूरदास की झोंपड़ी free?
The first 4 of the 7 solutions on this page are open to read. The other 3 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise सूरदास की झोंपड़ी for the CBSE Class 12 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 45 practice questions on सूरदास की झोंपड़ी. Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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