श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) (Part 2) — NCERT Solutions
CBSE · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) (Part 2), CBSE Class 12 Hindi: 6 textbook questions.
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पाठ के साथ
1जाति प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक रूप न मानने के पीछे आंबेडकर के क्या तर्क हैं?Show solution
आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा को केवल श्रम-विभाजन नहीं माना जा सकता, क्योंकि—
- यह श्रम-विभाजन के साथ-साथ श्रमिक-विभाजन भी है।
- सभ्य समाज में श्रम का विभाजन तो होता है, लेकिन वह श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन नहीं करता; जाति-प्रथा करती है।
- इसमें श्रमिकों को ऊँच-नीच के रूप में बाँट दिया जाता है, जो सामान्य समाजों में नहीं पाया जाता।
- यह मनुष्य की रुचि, क्षमता और प्रशिक्षण पर आधारित नहीं है।
- इसमें व्यक्ति का पेशा जन्म से ही, माता-पिता के सामाजिक स्तर के आधार पर तय कर दिया जाता है।
- व्यक्ति को पेशा बदलने की स्वतंत्रता नहीं होती, इसलिए यह स्वाभाविक श्रम-विभाजन नहीं है।
इसलिए आंबेडकर इसे श्रम-विभाजन का उचित रूप नहीं मानते।
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2जाति प्रथा भारतीय समाज में बेरोजगारी व भुखमरी का भी एक कारण कैसे बनती रही है? क्या यह स्थिति आज भी है?Show solution
जाति-प्रथा भारतीय समाज में बेरोजगारी और भुखमरी का कारण इस तरह बनती है कि—
- यह व्यक्ति को केवल पैतृक पेशा अपनाने देती है, भले ही वह उसके लिए अनुपयुक्त हो।
- यदि कोई पेशा अपर्याप्त हो जाए या बदलते उद्योगों के कारण बेकार हो जाए, तो व्यक्ति उसे बदल नहीं सकता।
- आधुनिक युग में उद्योग-धंधों में तकनीकी परिवर्तन होते रहते हैं, इसलिए पेशा बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है।
- लेकिन जाति-प्रथा इस परिवर्तन की अनुमति नहीं देती, जिससे व्यक्ति के सामने भूखों मरने के अलावा रास्ता नहीं बचता।
- इसीलिए आंबेडकर कहते हैं कि जाति-प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण है।
आज भी ऐसी स्थिति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है; कई जगह जाति-आधारित पेशागत बंधन और अवसरों की असमानता बनी हुई है, इसलिए यह समस्या अभी भी किसी-न-किसी रूप में मौजूद है।
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3लेखक के मत से 'दासता' की व्यापक परिभाषा क्या है?Show solution
आंबेडकर के मत से दासता केवल कानूनी पराधीनता नहीं है। उसकी व्यापक परिभाषा यह है कि—
- जब कुछ व्यक्तियों को दूसरे लोगों द्वारा निर्धारित व्यवहार और कर्तव्यों का पालन करने के लिए विवश होना पड़े,
- तो वह स्थिति भी दासता है,
- चाहे वहाँ कानूनी गुलामी न भी हो।
अर्थात, अपनी इच्छा के विरुद्ध किसी काम या पेशे में बँधकर रहना भी दासता है।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) for CBSE Class 12 Hindi?
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How should I revise श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) for the CBSE Class 12 board exam?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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