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Chapter 36 of 38
NCERT Solutions

श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) (Part 2) — NCERT Solutions

CBSE · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) (Part 2), CBSE Class 12 Hindi: 6 textbook questions.

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डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, जन्म, शिक्षा, प्रमुख रचनाओं और निधन को दर्शाने वाली एक समयरेखा.
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One of 6 illustrations for श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) in Super Tutor — alongside flashcards, concept maps and practice questions.

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पाठ के साथ

1जाति प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक रूप न मानने के पीछे आंबेडकर के क्या तर्क हैं?Show solution

आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा को केवल श्रम-विभाजन नहीं माना जा सकता, क्योंकि—

  • यह श्रम-विभाजन के साथ-साथ श्रमिक-विभाजन भी है।
  • सभ्य समाज में श्रम का विभाजन तो होता है, लेकिन वह श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन नहीं करता; जाति-प्रथा करती है।
  • इसमें श्रमिकों को ऊँच-नीच के रूप में बाँट दिया जाता है, जो सामान्य समाजों में नहीं पाया जाता।
  • यह मनुष्य की रुचि, क्षमता और प्रशिक्षण पर आधारित नहीं है।
  • इसमें व्यक्ति का पेशा जन्म से ही, माता-पिता के सामाजिक स्तर के आधार पर तय कर दिया जाता है।
  • व्यक्ति को पेशा बदलने की स्वतंत्रता नहीं होती, इसलिए यह स्वाभाविक श्रम-विभाजन नहीं है।

इसलिए आंबेडकर इसे श्रम-विभाजन का उचित रूप नहीं मानते।

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2जाति प्रथा भारतीय समाज में बेरोजगारी व भुखमरी का भी एक कारण कैसे बनती रही है? क्या यह स्थिति आज भी है?Show solution

जाति-प्रथा भारतीय समाज में बेरोजगारी और भुखमरी का कारण इस तरह बनती है कि—

  • यह व्यक्ति को केवल पैतृक पेशा अपनाने देती है, भले ही वह उसके लिए अनुपयुक्त हो।
  • यदि कोई पेशा अपर्याप्त हो जाए या बदलते उद्योगों के कारण बेकार हो जाए, तो व्यक्ति उसे बदल नहीं सकता।
  • आधुनिक युग में उद्योग-धंधों में तकनीकी परिवर्तन होते रहते हैं, इसलिए पेशा बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • लेकिन जाति-प्रथा इस परिवर्तन की अनुमति नहीं देती, जिससे व्यक्ति के सामने भूखों मरने के अलावा रास्ता नहीं बचता।
  • इसीलिए आंबेडकर कहते हैं कि जाति-प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण है।

आज भी ऐसी स्थिति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है; कई जगह जाति-आधारित पेशागत बंधन और अवसरों की असमानता बनी हुई है, इसलिए यह समस्या अभी भी किसी-न-किसी रूप में मौजूद है।

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3लेखक के मत से 'दासता' की व्यापक परिभाषा क्या है?Show solution

आंबेडकर के मत से दासता केवल कानूनी पराधीनता नहीं है। उसकी व्यापक परिभाषा यह है कि—

  • जब कुछ व्यक्तियों को दूसरे लोगों द्वारा निर्धारित व्यवहार और कर्तव्यों का पालन करने के लिए विवश होना पड़े,
  • तो वह स्थिति भी दासता है,
  • चाहे वहाँ कानूनी गुलामी न भी हो।

अर्थात, अपनी इच्छा के विरुद्ध किसी काम या पेशे में बँधकर रहना भी दासता है।

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4शारीरिक वंश-परंपरा और सामाजिक उत्तराधिकार की दृष्टि से मनुष्यों में असमानता संभावित रहने के बावजूद आंबेडकर 'समता' को एक व्यवहार्य सिद्धांत मानने का आग्रह क्यों करते हैं? इसके पीछे उनके क्या तर्क हैं?

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5सही में आंबेडकर ने भावनात्मक समत्व की मानवीय दृष्टि के तहत जातिवाद का उन्मूलन चाहा है, जिसकी प्रतिष्ठा के लिए भौतिक स्थितियों और जीवन-सुविधाओं का तर्क दिया है। क्या इससे आप सहमत हैं?

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6आदर्श समाज के तीन तत्वों में से एक 'भ्रातृता' को रखकर लेखक ने अपने आदर्श समाज में स्त्रियों को भी सम्मिलित किया है अथवा नहीं? आप इस 'भ्रातृता' शब्द से कहाँ तक सहमत हैं? यदि नहीं तो आप क्या शब्द उचित समझेंगे/समझेंगी?

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3 more solved questions in श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) for CBSE Class 12 Hindi?
Key topics in श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) include बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : जीवन, विचार और प्रेरणा, ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ और पाठ का संदर्भ, श्रम विभाजन और जाति-प्रथा : मुख्य तर्क, जाति-प्रथा के दुष्परिणाम. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) free?
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How should I revise श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) for the CBSE Class 12 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 44 practice questions on श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

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