यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय') — NCERT Solutions
CBSE · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'), CBSE Class 12 Hindi: 11 textbook questions solved step by.
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यह दीप अकेला
1'दीप अकेला' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए यह बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?Show solution
‘दीप अकेला’ का प्रतीक एक ऐसे व्यक्ति का है जो स्नेह, गर्व और अद्वितीयता से भरा हुआ है। वह अपनी अलग पहचान रखता है, उसके भीतर शक्ति, संवेदना और आत्मगौरव है। कवि ने उसे स्नेह भरा इसलिए कहा है क्योंकि उसमें प्रेम और अपनापन है; गर्व भरा इसलिए, क्योंकि उसमें आत्मसम्मान और आत्मबोध है; और मदमाता इसलिए, क्योंकि वह अपनी शक्ति और विशेषता के भाव में उत्साहित, प्रफुल्लित और आत्मविश्वासी है। लेकिन कवि चाहता है कि यह अकेलापन पंक्ति में मिल जाए, यानी व्यक्ति अपनी विशेषता बनाए रखते हुए समाज से जुड़ जाए।
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2यह दीप अकेला है 'पर इसको भी पंक्ति को दे दो' के आधार पर व्यष्टि का समष्टि में विलय क्यों और कैसे संभव है?Show solution
कवि के अनुसार व्यष्टि अर्थात व्यक्ति अपने-आप में सब कुछ होते हुए भी यदि समाज से अलग रह जाए तो उसकी शक्ति सीमित रह जाती है। पंक्ति “पर इसको भी पंक्ति को दे दो” का अर्थ है कि व्यक्ति को समाज की पंक्ति में, यानी समूह में शामिल कर देना चाहिए। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि व्यक्ति की विशेषता समाज में मिलकर और अधिक सार्थक बनती है। जैसे दीप पंक्ति में शामिल होकर अधिक प्रकाश देता है, वैसे ही मनुष्य समाज के साथ जुड़कर अपनी क्षमता का व्यापक उपयोग कर सकता है। इस तरह व्यक्तिगत सत्ता का सामाजिक सत्ता में विलय ही व्यष्टि का समष्टि में रूपांतरण है।
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3'गीत' और 'मोती' की सार्थकता किससे जुड़ी है?Show solution
कवि ने ‘गीत’ और ‘मोती’ की सार्थकता को समाज के लिए उपयोगिता और दूसरों तक पहुँचने से जोड़ा है। पंक्ति “यह जन है—गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा?” से भाव है कि किसी व्यक्ति का गीत तब अर्थपूर्ण है जब वह अन्य लोगों तक पहुँचे और उसकी गूँज समाज में सुनाई दे। इसी तरह “पनडुब्बा—ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा?” में मोती तभी सार्थक हैं जब उन्हें कोई खोजकर बाहर लाए और उपयोग में लाए। यानी गीत और मोती की सार्थकता अकेलेपन में नहीं, बल्कि दूसरों के लिए होने में है।
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4'यह अद्वितीय-यह मेरा-यह मैं स्वयं विसर्जित'-पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।Show solution
पंक्ति “यह अद्वितीय—यह मेरा—यह मैं स्वयं विसर्जित—” का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी अद्वितीयता और व्यक्तिगत पहचान बनाए रखते हुए भी स्वयं को समाज में समर्पित कर सकता है। ऐसे विसर्जन से व्यक्ति की शक्ति कम नहीं होती, बल्कि उसका महत्त्व बढ़ता है, क्योंकि वह अपने सीमित अस्तित्व से निकलकर व्यापक समाज के लिए उपयोगी बनता है। व्यष्टि का समष्टि में विसर्जन इसलिए उपयोगी है कि इससे व्यक्ति की शक्ति, ज्ञान, प्रेम और प्रतिभा समाज के हित में लगती है और समाज अधिक मजबूत, समृद्ध तथा अर्थपूर्ण बनता है।
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5'यह मधु है ... तकता निर्भय'-पंक्तियों के आधार पर बताइए कि 'मधु', 'गोरस' और 'अंकुर' की क्या विशेषता है?Show solution
इन पंक्तियों के आधार पर ‘मधु’, ‘गोरस’ और ‘अंकुर’ तीनों की विशेषता यह है कि वे स्वयं उत्पन्न, निर्मल, जीवनदायी और स्वाभाविक हैं।
- मधु: यह काल की मौनता का युग-संचय है, यानी समय के भीतर संचित मधुरता और जीवन का रस।
- गोरस: यह जीवन और कामधेनु का अमृत-पूत पय है, यानी पवित्र, पोषक और अमृत समान दूध।
- अंकुर: यह धरती को फोड़कर निर्भय होकर सूर्य की ओर देखने वाला है, यानी नया जीवन, आशा और विकास का प्रतीक।
अर्थात ये सब प्रकृत, स्वयंभू और शक्ति-संपन्न हैं।
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6भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए—(क) 'यह प्रकृत, स्वयंभू ... शक्ति को दे दो.'
(ख) 'यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक ... चिर-अखंड अपनाया.'
(ग) 'जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो.'
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(क) 'यह प्रकृत, स्वयंभू ... शक्ति को दे दो.'
(ख) 'यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक ... चिर-अखंड अपनाया.'
(ग) 'जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो.'
(क) प्रकृत, स्वयंभू और ब्रह्म कहकर दीप की सहज, स्वतंत्र और विराट सत्ता का चित्रण हुआ है। उसमें अपार सामर्थ्य है; फिर भी कवि उसे पंक्ति को देकर उसकी शक्ति को सामूहिक हित से जोड़ने की बात करता है।
(ख) अपमान और निंदा के अँधेरे में भी यह दीप करुणामय, सदा जागरूक और प्रेमपूर्ण बना रहता है। उसकी उठी हुई बाँहें और अखंड अपनापन मनुष्य के साहस, संवेदना और दूसरों से जुड़ाव को व्यक्त करते हैं।
(ग) दीप जिज्ञासु, प्रबुद्ध और श्रद्धा से भरा है। कवि चाहता है कि उसकी जिज्ञासा और समझ समाज के प्रति भक्ति तथा समर्पण में लगें। इन पंक्तियों में व्यक्तिगत गुणों को सामूहिक कल्याण के लिए अर्पित करने का भाव है।
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मैंने देखा, एक बूँद
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय') for CBSE Class 12 Hindi?
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How should I revise यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय') for the CBSE Class 12 board exam?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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