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·38 chapters

CBSE Class 12 Hindi — NCERT Solutions

CBSE Class 12 Hindi NCERT solutions, chapter by chapter — 384 textbook questions solved across 38 chapters. Follows the CBSE syllabus.

About these solutions

384 NCERT textbook questions for CBSE Class 12 Hindi, solved step by step across 38 chapters. Each chapter page has every exercise: half the solutions are open to read and the rest are free with a Super Tutor account.

  • प्रश्न-अभ्यास · 11 questions
Q1.“मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई”—पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

देवसेना कहती है कि उसने भ्रमवश अपने जीवन की पूँजी को व्यर्थ ही खर्च कर दिया। उसने जो कुछ संचित किया था, वह मधुकरियों की भीख की तरह तुच्छ और निरर्थक कामों में लुटा दिया। भाव यह है कि यौवन और जीवन-शक्ति को उसने गलत समझ, गलत आशाओं और भूलों में नष्ट कर दिया, इसलिए अब उसे पछतावा हो रहा है।

Q2.कवि ने आशा को बावली क्यों कहा है?

कवि ने आशा को बावली इसलिए कहा है क्योंकि वह अंधी तरह देवसेना को बार-बार आगे बढ़ने, पाने और बचाने के लिए प्रेरित करती रही, जबकि वास्तविकता में उसके हाथ कुछ भी नहीं था। यानी आशा ने उसे बार-बार भ्रम में रखा और उसकी कमाई भी डुबो दी, इसलिए वह उन्मत्त, अविवेकी-सी लगती है।

  • प्रश्न-अभ्यास · 7 questions
Q1.'चूल्हा ठंडा किया होता, तो दुश्मनों का कलेजा कैसे ठंडा होता?' नायकराम के इस कथन में निहित भाव को स्पष्ट कीजिए।

नायकराम के कथन में व्यंग्य और कड़वाहट का भाव है। वह सूरदास के झोंपड़े में आग लगने पर सीधे-सीधे नहीं, बल्कि ताना मारते हुए कहता है कि यदि चूल्हा ठंडा कर दिया होता, तो दुश्मनों का भी कलेजा ठंडा हो जाता। इसका आशय है कि उसे लगता है सूरदास के साथ कुछ लोगों ने शरारत या बदला लेने की भावना से यह काम किया है। नायकराम के शब्दों में ईर्ष्या, विरोध और बदले की भावना छिपी हुई है। वह यह भी जताता है कि जिन लोगों के मन में खोट है, वे इस तरह की विपत्ति से प्रसन्न हो सकते हैं।

Q2.भैरों ने सूरदास की झोपड़ी क्यों जलाई?

भैरों ने सूरदास की झोपड़ी इसलिए जलाई क्योंकि वह अपने अपमान और बदनामी का बदला लेना चाहता था। मुहल्ले में सूरदास और सुभागी के संबंधों की चर्चा होने से भैरों को यह विश्वास हो गया था कि सूरदास के कारण उसकी लाज और इज्जत को ठेस पहुँची है। जगधर की बातों और उकसावे से उसका गुस्सा और भड़क गया। वह सूरदास को रुलाना और तड़पाना चाहता था, इसलिए उसने उसकी थैली भी उठा ली और झोपड़ी में आग लगा दी।

  • अभ्यास · 8 questions
Q1.कविता एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करती है और दूसरी ओर मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ— विपरीत से लगते इन कथनों का क्या आशय है?

इन दोनों कथनों में विरोधाभास है, पर आशय एक ही है। कवि समाज और जीवन के संपर्क में रहते हुए भी उसके प्रति पूरी तरह आसक्त नहीं है। वह संसार का बोझ, दुख और अनुभव अपने साथ लिए चलता है, लेकिन अपने मन की स्वतंत्रता, निजी स्वप्न और आत्मानुभूति को भी बनाए रखता है। इसलिए वह जग-जीवन में रहते हुए भी भीतर से अपने ढंग से जीता है।

Q2.जहाँ पर दाना रहते हैं, वहीं नादान भी होते हैं— कवि ने ऐसा क्यों कहा होगा?

कवि यह बताना चाहता है कि संसार में ज्ञान और अज्ञान, समझदार और नादान दोनों साथ-साथ रहते हैं। जहाँ दानेदार, अनुभवी, समझदार लोग होते हैं, वहीं उनके बीच या आसपास कम समझ वाले लोग भी मिल जाते हैं। इससे यह भी व्यंग्य झलकता है कि मनुष्य सीखते हुए भी पूरी तरह दाना नहीं बन पाता।

  • अभ्यास · 8 questions
Q1.यशोधर बाबू की पत्नी समय के साथ ढल सकने में सफल होती है लेकिन यशोधर बाबू असफल रहते हैं। ऐसा क्यों?

यशोधर बाबू की पत्नी समय के साथ ढल जाती है क्योंकि वह घर और समाज की बदलती जरूरतों के साथ समझौता कर लेती है। वह बेटी की तरह जीन, बगैर बाँह का टॉप, ऊँची हील, खिज़ाब, लाली जैसी आधुनिक चीजें अपना लेती है और बच्चों की तरफ़दारी भी करती है।

यशोधर बाबू ऐसा नहीं कर पाते, क्योंकि वे किशनदा की परंपराओं और अपने पुराने संस्कारों से गहरे जुड़े हैं। उनके लिए धर्म-कर्म, कुल-परंपरा, सादगी, परिवार-केन्द्रित जीवन महत्त्वपूर्ण हैं। वे बदलाव को पूरी तरह गलत नहीं मानते, फिर भी उसे सहज रूप से स्वीकार नहीं कर पाते। उनके मन में हर नए बदलाव पर “समहाउ इंप्रॉपर” की भावना रहती है। इसीलिए पत्नी व्यावहारिक ढंग से बदल जाती है, लेकिन यशोधर बाबू अपने पुराने मूल्यों को नहीं छोड़ पाते।

  • सरोज स्मृति · 7 questions
Q1.सरोज के नव-वधू रूप का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

सरोज के नव-वधू रूप में उसका सौंदर्य बहुत कोमल और मनोहर दिखाया गया है। उसके माथे पर विवाह का कलश-जल पड़ा हुआ है, वह मंद हँस रही है, उसके होठों में कंपन है, और उसके उर में सुंदर प्रिय-छवि झूल रही है। उसकी आँखें झुकी हुई हैं और उसके अंग-अंग में विश्वास और लज्जा की स्तब्धता है। कवि ने उसे एक ऐसी नववधू के रूप में देखा है जिसमें सौंदर्य, लज्जा, कोमलता और नवजीवन का उल्लास एक साथ झलकता है।

  • प्रश्न-अभ्यास · 9 questions
Q1.कोइयाँ किसे कहते हैं? उसकी विशेषताएँ बताइए।

कोइयाँ जलपुष्प है, जिसे कुमुद भी कहते हैं। इसे कोका-बेली भी कहा गया है। इसकी विशेषता है कि शरद ऋतु में जहाँ कहीं गड्ढा और पानी होता है, वहाँ यह खिल उठती है। यह प्रायः रेलवे-लाइन के दोनों ओर पानी भरे गड्ढों में भी दिखाई देती है। इसकी गंध विशेष होती है और जो उसे पसंद करता है, वही उसकी गंध का महत्व समझ सकता है।

  • कविता के साथ · 6 questions
  • कविता के आसपास · 3 questions
  • आपकी कविता · 1 question
Q1.'सबसे तेज बौछारें गयीं, भादो गया' के बाद प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने दिखाया है, उसका वर्णन अपने शब्दों में करें।

कवि के अनुसार भादो के तेज़ बादल और बौछारें समाप्त हो जाती हैं। उसके बाद सवेरा होता है, लाल चमकीला शरद-काल आता है। प्रकृति में उजाला, साफ़ी, हल्कापन और रंगीनपन छा जाता है। पुलों को पार करते हुए शरद जैसे सक्रिय रूप से आता है और आकाश को मुलायम बना देता है, ताकि पतंगें आसानी से उड़ सकें। चारों ओर चमकीलापन, ताजगी और उत्साह फैल जाता है।

8

जूझ

6 questions solved

  • अभ्यास · 6 questions
Q1.'जूझ' शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्या यह शीर्षक कथा नायक की किसी केंद्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता है?

‘जूझ’ का अर्थ है संघर्ष करना। पूरी कथा में नायक का जीवन संघर्षों से भरा है—एक ओर खेत-घर का काम, दूसरी ओर पढ़ने की इच्छा, और बीच में दादा का डर। फिर भी वह हार नहीं मानता। वह माँ के साथ दत्ता जी राव के पास जाता है, फिर दादा को समझाने की कोशिश करता है, और अंततः फिर से पाठशाला लौटकर पढ़ाई में लग जाता है।

इसलिए यह शीर्षक कथा के केंद्रीय भाव को प्रकट करता है। साथ ही यह नायक की मुख्य चारित्रिक विशेषता भी उजागर करता है—दृढ़ इच्छा, धैर्य, और कठिन परिस्थितियों से जूझते रहने की प्रवृत्ति। वह डरता जरूर है, लेकिन भीतर से पढ़ने के लिए जूझता रहता है। इस तरह शीर्षक बिल्कुल सार्थक है।

  • यह दीप अकेला · 7 questions
  • मैंने देखा, एक बूँद · 4 questions
Q1.'दीप अकेला' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए यह बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?

‘दीप अकेला’ का प्रतीक एक ऐसे व्यक्ति का है जो स्नेह, गर्व और अद्वितीयता से भरा हुआ है। वह अपनी अलग पहचान रखता है, उसके भीतर शक्ति, संवेदना और आत्मगौरव है। कवि ने उसे स्नेह भरा इसलिए कहा है क्योंकि उसमें प्रेम और अपनापन है; गर्व भरा इसलिए, क्योंकि उसमें आत्मसम्मान और आत्मबोध है; और मदमाता इसलिए, क्योंकि वह अपनी शक्ति और विशेषता के भाव में उत्साहित, प्रफुल्लित और आत्मविश्वासी है। लेकिन कवि चाहता है कि यह अकेलापन पंक्ति में मिल जाए, यानी व्यक्ति अपनी विशेषता बनाए रखते हुए समाज से जुड़ जाए।

  • प्रश्न-अभ्यास · 7 questions
Q1.मालवा में जब सब जगह बरसात की झड़ी लगी रहती है तब मालवा के जनजीवन पर इसका क्या असर पड़ता है?

जब मालवा में बरसात की झड़ी लगी रहती है, तब वहाँ जनजीवन में रौनक आ जाती है। खेत-खलिहान हरे-भरे हो जाते हैं, सोयाबीन, ज्वार, बाजरा जैसी फसलें लहलहाने लगती हैं और कुएँ, बावड़ियाँ, तालाब, नदी-नाले भर जाते हैं। लोग इसे समृद्धि का समय मानते हैं; नवरात्रि, त्योहार और खेती-बाड़ी सब में उत्साह बढ़ जाता है। पाठ में बताया गया है कि ऐसी बारिश से मालवा की धरती फिर से “गहन गंभीर, डग-डग रोटी, पग-पग नीर” जैसी दिखाई देती है।

  • अभ्यास · 7 questions
Q1.'सब घर एक कर देने के माने' क्या है?

'सब घर एक कर देने के माने' का अर्थ है—कविता के खेल में भेद-भाव, सीमाएँ और अलग-अलग घरों की दीवारें मिट जाना। जैसे बच्चा खेलते-खेलते सबको एक साथ कर लेता है, वैसे ही कविता भी बाहर-भीतर, इस घर-उस घर की सीमाओं को तोड़कर सबको एक कर देती है।

  • अभ्यास · 7 questions
Q1.सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था। कैसे?

सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थी क्योंकि वहाँ उन्नत खेती, व्यापार, कुएँ, स्नानागार, महाकुंड, कोठार, पक्की ईंटों के घर, ढकी हुई नालियाँ, तौलने के बाट, मुहरें, मूर्तियाँ और खिलौने आदि मिले हैं। फिर भी उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था, क्योंकि वहाँ भव्य राजप्रासाद, मंदिर, पिरामिड, राजाओं या महंतों की विशाल समाधियाँ नहीं मिलीं। उसके मूर्तिशिल्प और औजार छोटे हैं, नावें भी छोटी रहीं, और नगर-व्यवस्था व कला में भव्य प्रदर्शन की जगह सादगी, व्यवस्था और सुरुचि दिखाई देती है।

  • बनारस · 8 questions
  • दिशा · 2 questions
  • योग्यता-विस्तार · 1 question
Q1.बनारस में वसंत का आगमन कैसे होता है और उसका क्या प्रभाव इस शहर पर पड़ता है?

कविता में वसंत का आगमन अचानक होता है। वह लहरतारा या मडुवाडीह की तरफ से उठते धूल के बवंडर के साथ आता है। उसके आने से पुराने शहर की जीभ किरकिराने लगती है; यानी शहर का वातावरण जाग उठता है। सुगबुगाहट फैलती है, खालीपन में भी जीवन का संचार होने लगता है। घाटों, बंदरों, भिखारियों के कटोरों—सब पर वसंत का प्रभाव दिखता है।

  • कविता के साथ · 5 questions
  • कविता के आसपास · 4 questions
Q1.कविता में कुछ पंक्तियाँ कोष्ठकों में रखी गई हैं—आपकी समझ से इसका क्या औचित्य है?

कोष्ठकों में दी गई पंक्तियाँ दृश्य-निर्देश और व्यंग्यात्मक टिप्पणी की तरह हैं। इससे पता चलता है कि मंच/टी.वी. पर क्या दिखाया जा रहा है, प्रश्नकर्ता और कैमरे का व्यवहार कैसा है, और कार्यक्रम की कृत्रिमता भी सामने आती है। इनके कारण कविता केवल संवाद नहीं रह जाती, बल्कि उसमें नाटकीयता और व्यंग्य बढ़ जाता है।

  • वसंत आया · 5 questions
Q1.'पत्थर' और 'चट्टान' शब्द किसके प्रतीक हैं?

कविता में पत्थर और चट्टान उन चीज़ों के प्रतीक हैं जो सृजन में बाधा डालती हैं। ये झूठे बंधनों, जड़ता, रुकावटों और कठोरता का संकेत हैं, जिन्हें तोड़कर ही आगे बढ़ा जा सकता है।

  • अभ्यास · 3 questions
Q1.कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उषा कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र है?

कविता में गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र जिन उपमानों से बनता है, वे हैं—

  • राख से लीपा हुआ चौका — इससे गाँव के घर-आँगन की छवि उभरती है।
  • बहुत काली सिल जरा से लाल केसर से धुल गई हो — इसमें घर-गृहस्थी का ग्रामीण दृश्य है।
  • स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने — यह गाँव के बच्चों की स्लेट और चाक से जुड़ा उपमान है।
  • नील जल में या किसी की गौर झिलमिल देह — इसमें प्रकृति की झिलमिलाती, बदलती हुई छवि आती है।

इन सब उपमानों से भोर के आकाश को सिर्फ रंगों के रूप में नहीं, बल्कि गाँव के रोज़मर्रा जीवन और लगातार बदलती प्रकृति के रूप में देखा जा सकता है। इसलिए यह कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र बन जाती है।

  • भरत-राम का प्रेम · 5 questions
  • पद · 5 questions
  • योग्यता-विस्तार · 2 questions
Q1.'हारहु खेल जितावहिं मोही' भरत के इस कथन का क्या आशय है?

भरत का आशय है कि वे राम के साथ खेल में भी जीतना नहीं चाहते। वे राम को बार-बार अपने ऊपर जीतने देते हैं, क्योंकि वे राम के प्रति अत्यंत प्रेम, आदर और समर्पण रखते हैं। यह कथन उनके विनम्र और भक्तिभावपूर्ण स्वभाव को प्रकट करता है।

  • कविता के साथ · 4 questions
  • व्याख्या कीजिए · 2 questions
  • कला की बात · 5 questions
Q1.अस्थिर सुख पर दुख की छाया पंक्ति में दुख की छाया किसे कहा गया है और क्यों?

पंक्ति में दुख की छाया से तात्पर्य विप्लव/क्रांति की छाया से है। कवि ने अस्थिर सुख के ऊपर दुख की छाया इसलिए कही है क्योंकि संसार का सुख स्थायी नहीं है; उसके भीतर संघर्ष, पीड़ा और परिवर्तन छिपे रहते हैं। बादल के आगमन से यह सुख-व्यवस्था हिलती है और दुख/विप्लव का संकेत मिलता है।

  • प्रश्न-अभ्यास · 6 questions
Q1.अगहन मास की विशेषता बताते हुए विरहिणी (नागमती) की व्यथा-कथा का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।

अगहन मास में रातें लंबी और दिन छोटे होते हैं, इसलिए ठंड और अँधेरा बढ़ जाता है। कविता में नागमती की विरह-व्यथा इसी रूप में दिखाई गई है कि उसे दिन भी रात जैसे लगते हैं। प्रिय के बिना उसका हृदय शीत से काँपता है और विरह की आग में वह भीतर-ही-भीतर जलती रहती है। उसके लिए यह दुख इतना भारी है कि उसे सहना कठिन हो गया है। वह अपनी दशा बताते हुए भँवरे और काग से प्रियतम तक संदेश पहुँचाने की प्रार्थना करती है। इस प्रकार अगहन की ठंडी और लंबी रातें नागमती के वियोग-ताप को और भी तीव्र कर देती हैं।

  • पाठ के साथ · 8 questions
  • पाठ के आसपास · 4 questions
Q1.कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।

कवित्तों में तुलसीदास ने अपने युग की आर्थिक विषमता बहुत स्पष्ट रूप से दिखायी है। पहले छंद में वे कहते हैं कि किसान, व्यापारी, भिखारी, भाट, चाकर, नट, चोर आदि सभी किसी न किसी रूप में “पेटको पढ़त” हैं; यानी सबका जीवन पेट की चिंता से संचालित है। लोग जीविका के लिए पर्वत चढ़ते हैं, जंगलों में भटकते हैं, और ऊँचे-नीचे कर्म, धर्म-अधर्म तक करते हैं। सबसे मार्मिक बात यह है कि पेट भरने के लिए वे “बेटा-बेटकी” तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

दूसरे छंद में वे आर्थिक बदहाली को और साफ़ करते हैं—किसान के लिए खेती नहीं, भिखारी के लिए भीख नहीं, व्यापारी के लिए बनिज नहीं, चाकर के लिए चाकरी नहीं। यानी हर वर्ग की रोज़ी-रोटी छिन गई है। लोग जीविका-विहीन होकर एक-दूसरे से पूछते हैं—“कहाँ जाएँ, क्या करें?” यह चित्रण दिखाता है कि तुलसी ने केवल गरीबी नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न बेकारी, भूख, असुरक्षा और सामाजिक पतन को भी समझा था।

  • प्रश्न-अभ्यास · 8 questions
  • योग्यता-विस्तार · 2 questions
Q1.प्रियतमा के दुख के क्या कारण हैं?

प्रियतमा को दुख इस कारण है कि उसका प्रियतम उससे दूर हो गया है। वह गोकुल छोड़कर मधुपुर चला गया है, इसलिए वह विरहिणी बनकर अत्यंत दुःखी, कातर और अकेली है।

  • पाठ के साथ · 2 questions
  • कविता के आसपास · 1 question
  • आपसदारी · 3 questions
Q1.शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है?

शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर राखी की सुंदरता, चमक और उत्साह का भाव व्यंजित करना चाहता है। इससे सावन की घटा, रक्षाबंधन और बहन के प्रेम की उल्लासपूर्ण छवि बनती है।

  • प्रश्न-अभ्यास · 7 questions
  • योग्यता-विस्तार · 1 question
Q1.कवि ने 'चाहत चलन ये संदेशो ले सुजान को' क्यों कहा है?

कवि के प्राण बहुत दिन से सुजान के दर्शन की प्रतीक्षा में अटके हुए हैं। इसलिए वह कहता है कि अब वे सुजान को संदेश लेकर चलना चाहते हैं, ताकि प्रियतम/प्रिय के दर्शन की चाह पूरी हो सके।

  • कविता के साथ · 4 questions
  • कविता के आसपास · 2 questions
Q1.छोटे चौकोने खेत को कागज का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है?

कवि छोटे चौकोने खेत से कागज का पन्ना कहकर यह बताना चाहता है कि जैसे खेत में बीज बोया जाता है, उसी तरह कागज के पन्ने पर भी रचना का बीज बोया जाता है। कागज का पन्ना कवि-कर्म का क्षेत्र है, जहाँ विचार और कल्पना से शब्द उगते हैं और कविता रूपी फसल तैयार होती है।

  • प्रश्न-अभ्यास · 10 questions
  • भाषा-शिल्प · 3 questions
  • योग्यता-विस्तार · 4 questions
Q1.लेखक ने अपने पिता जी की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?

लेखक ने अपने पिता जी के बारे में बताया है कि वे फ़ारसी के अच्छे ज्ञाता थे और पुरानी हिंदी कविता के बड़े प्रेमी थे। उन्हें फ़ारसी कवियों की उक्तियों को हिंदी कवियों की उक्तियों के साथ मिलाने में आनंद आता था। वे रात को घर के सब लोगों को एकत्र करके रामचरितमानस और रामचंद्रिका बड़े चित्ताकर्षक ढंग से पढ़ते थे। साथ ही वे भारतेंदु जी के नाटक भी बहुत पसंद करते थे और कभी-कभी उन्हें सुनाते थे।

  • अभ्यास · 10 questions
Q1.भक्तिन अपना वास्तविक नाम लोगों से क्यों छुपाती थी? भक्तिन को यह नाम किसने और क्यों दिया होगा?

भक्तिन अपना वास्तविक नाम लछमिन इसलिए छुपाती थी, क्योंकि वह अपने समृद्धि-सूचक नाम और अपने दरिद्र/संघर्षपूर्ण जीवन के बीच के विरोधाभास को लोगों के सामने नहीं लाना चाहती थी। लेखिका के अनुसार वह बहुत समझदार थी, इसलिए नौकरी की खोज में आते समय केवल ईमानदारी दिखाने के लिए उसने अपना नाम बताया, पर यह भी अनुरोध किया कि उसका नाम कभी उपयोग न किया जाए।

उसे यह नाम उसके पिता ने दिया होगा, क्योंकि पाठ में बताया गया है कि वह एक गोपालिका की कन्या थी और उसका नाम लछमिन अर्थात् लक्ष्मी था। यह नाम संभवतः लक्ष्मी के अर्थ में, यानी समृद्धि और सौभाग्य की कामना से दिया गया होगा।

  • प्रश्न-अभ्यास · 18 questions
  • योग्यता-विस्तार · 5 questions
Q(क)1.बालक से उसकी उम्र और योग्यता से ऊपर के कौन-कौन से प्रश्न पूछे गए?

पाठ में बालक से उसकी उम्र और समझ से बहुत ऊपर के प्रश्न पूछे गए थे। जैसे—

  • धर्म के दस लक्षण
  • नौ रसों के उदाहरण
  • पानी चार डिग्री के नीचे शीतता में फैलने का कारण और उससे मछलियों की प्राणरक्षा
  • चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक समाधान
  • अभाव को पदार्थ मानने न मानने का शास्त्रार्थ
  • इंग्लैंड के राजा आठवें हेनरी की स्त्रियों के नाम
  • पेशवाओं का कुर्सीनामा

ये सभी प्रश्न आठ वर्ष के बालक की योग्यता से ऊपर थे।

  • पाठ के साथ · 5 questions
  • पाठ के आसपास · 5 questions
  • आपसदारी · 2 questions
  • विज्ञापन की दुनिया · 2 questions
  • भाषा की बात · 4 questions
  • चर्चा करें · 1 question
Q1.बाजार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या-क्या असर पड़ता है?

बाजार का जादू चढ़ने पर मनुष्य की आँखों और मन पर असर पड़ता है। उसे लगता है कि उसे और-और चीज़ें चाहिए; वह असंतोष, तृष्णा और ईर्ष्या से भर सकता है। यदि वह ठीक से न जाने कि क्या चाहता है, तो वह हर वस्तु की ओर खिंचता चला जाता है, खोया-सा और कभी-कभी पागल-सा हो जाता है।

बाजार का जादू उतरने पर उसे समझ में आता है कि बहुत-सी फैंसी चीज़ें वास्तव में आराम नहीं बढ़ातीं, बल्कि खलल डालती हैं। तब मनुष्य को अपनी वास्तविक ज़रूरत याद आती है और वह अनावश्यक सामान से बच सकता है।

  • प्रश्न-अभ्यास · 10 questions
  • भाषा-शिल्प · 2 questions
  • योग्यता-विस्तार · 1 question
Q1.संवदिया की क्या विशेषताएँ हैं और गाँववालों के मन में संवदिया की क्या अवधारणा है?

संवदिया वह होता है जो संदेशवाहक का काम करता है और एक गाँव/घर का संदेश दूसरे तक पहुँचाता है। कहानी के अनुसार संवदिया के लिए यह ज़रूरी है कि वह संवाद के प्रत्येक शब्द को याद रखे, और जिस सुर-स्वर में संदेश दिया गया है, उसी ढंग से उसे पहुँचाए। वह केवल संदेश ले जाने वाला नहीं, बल्कि लोगों की भावनाएँ भी साथ लेकर चलता है।

गाँववालों की धारणा इससे अलग है। वे समझते हैं कि निठल्ला, कामचोर, पेटू, आगे नाथ न पीछे पगहा वाला आदमी ही संवदिया होता है। वे उसे ऐसा आदमी मानते हैं जो बिना मजदूरी लिए गाँव-गाँव संदेश पहुँचाता है और औरतों की मीठी बोली सुनकर तुरंत पिघल जाता है।

  • पाठ के साथ · 6 questions
  • पाठ के आसपास · 6 questions
Q1.लोगों ने लड़कों की टोली को मेढक-मंडली नाम किस आधार पर दिया? यह टोली अपने आपको इंदर सेना कहकर क्यों बुलाती थी?

लोगों ने उस टोली को मेढक-मंडली इसलिए कहा क्योंकि वे नंगे बदन, उछल-कूद करते हुए, शोर मचाते हुए और कीचड़-काँदों में लथपथ होकर गली में निकलते थे। उनका रूप और हरकतें मेढ़कों जैसी लगती थीं।

वे अपने आपको इंदर सेना इसलिए कहते थे क्योंकि वे इंद्र देवता की सेना माने जाते थे। उनका विश्वास था कि वे इंद्र से वर्षा की प्रार्थना करने वाली टोली हैं, जो गली-गली जाकर पानी माँगती है ताकि मेघ बरसें।

  • प्रश्न-अभ्यास · 9 questions
Q1.लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था?

लेखक ने बताया है कि यह सन् 1938 के आसपास की बात थी, जब कांग्रेस का हरिपुरा अधिवेशन हुआ था। वह अपने भाई बलराज के पास कुछ दिन उनके साथ बिताने के लिए सेवाग्राम गया था, क्योंकि बलराज वहाँ ‘नयी तालीम’ पत्रिका के सह-संपादक के रूप में काम कर रहे थे।

  • पाठ के साथ · 9 questions
  • पाठ के आसपास · 3 questions
  • भाषा की बात · 3 questions
Q1.कुश्ती के समय ढोल की आवाज और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए।

कुश्ती के समय ढोल की थाप और लुट्टन के दाँव-पेंच में पूरा तालमेल था। ढोल की आवाज उसे बार-बार उत्तेजित, सावधान और सक्रिय करती थी। पाठ में ढोल की ध्वनि जैसे शब्द आए हैं—‘चट्-धा, गिड्-धा’, ‘चटाक्-चट्-धा’, ‘ढाक्-ढिना’, ‘धाक-धिना’, ‘धिना-धिना, धिक-धिना’, ‘धा-गिड़-गिड़’। इनसे कानों में ऐसी ध्वनि गूँजती है जैसे कोई तेज, तालबद्ध, युद्ध-सी ललकार हो रही हो। यह ध्वनि मन में जोश, ललकार, उठाकर पटक देने और सामने वाले को चुनौती देने जैसा प्रभाव पैदा करती है। ढोल मानो लुट्टन को दाँव काटने, बाहर निकलने, और जोर लगाकर चित करने का संकेत देता है।

  • प्रश्न-अभ्यास · 4 questions
  • प्रश्न-अभ्यास · 5 questions
  • प्रश्न-अभ्यास · 2 questions
  • प्रश्न-अभ्यास · 3 questions
  • योग्यता-विस्तार · 2 questions
  • योग्यता-विस्तार · 1 question
  • योग्यता-विस्तार · 1 question
Q1.लोमड़ी स्वेच्छा से शेर के मुँह में क्यों चली जा रही थी?

लोमड़ी ने कहा कि शेर के मुँह के अंदर रोजगार का दफ्तर है और वहाँ नौकरी मिल जाएगी। उसी झूठे विश्वास के कारण वह स्वेच्छा से शेर के मुँह में चली जा रही थी।

  • अभ्यास · 11 questions
Q1.लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत(संन्यासी) की तरह क्यों माना है?

लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत इसलिए माना है क्योंकि वह जेठ की जलती धूप, लू और उमस में भी अविचल रहकर फूलता है। वह दुःख-सुख, आँधी-तूफान और मौसम की कठोरता से विचलित नहीं होता। जैसे अवधूत संसार के द्वंद्वों से ऊपर उठकर मस्त, निर्भय और अनासक्त रहता है, वैसे ही शिरीष भी जीवन की प्रचंड परिस्थितियों में अपने रस और सौंदर्य को बनाए रखता है। इसलिए वह लेखक को अजेय जिजीविषा और धैर्य का प्रतीक लगता है।

  • प्रश्न-अभ्यास · 14 questions
Q1.अमझर से आप क्या समझते हैं? अमझर गाँव में सुनापन क्यों है?

अमझर सिंगरौली क्षेत्र का एक गाँव है, जो आम के पेड़ों से घिरा हुआ था। पाठ में बताया गया है कि सरकारी घोषणा के बाद जब यह तय हो गया कि अमरौली प्रोजेक्ट के अंतर्गत नवागाँव के कई गाँव उजाड़ दिए जाएंगे, तब से वहाँ के आम के पेड़ सूखने लगे। इसलिए गाँव में सूनापन है, क्योंकि उजड़ने की आशंका ने वहाँ की जीवन्तता को खत्म कर दिया है।

  • पाठ के साथ · 6 questions
Q1.जाति प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक रूप न मानने के पीछे आंबेडकर के क्या तर्क हैं?

आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा को केवल श्रम-विभाजन नहीं माना जा सकता, क्योंकि—

  • यह श्रम-विभाजन के साथ-साथ श्रमिक-विभाजन भी है।
  • सभ्य समाज में श्रम का विभाजन तो होता है, लेकिन वह श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन नहीं करता; जाति-प्रथा करती है।
  • इसमें श्रमिकों को ऊँच-नीच के रूप में बाँट दिया जाता है, जो सामान्य समाजों में नहीं पाया जाता।
  • यह मनुष्य की रुचि, क्षमता और प्रशिक्षण पर आधारित नहीं है।
  • इसमें व्यक्ति का पेशा जन्म से ही, माता-पिता के सामाजिक स्तर के आधार पर तय कर दिया जाता है।
  • व्यक्ति को पेशा बदलने की स्वतंत्रता नहीं होती, इसलिए यह स्वाभाविक श्रम-विभाजन नहीं है।

इसलिए आंबेडकर इसे श्रम-विभाजन का उचित रूप नहीं मानते।

  • प्रश्न-अभ्यास · 10 questions
Q1.पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगा जी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

हर की पौड़ी पर गंगा जी की आरती का दृश्य अत्यंत भव्य, दिव्य और भावपूर्ण है। साँझ होते ही घाटों पर रौनक बढ़ जाती है। पुजारी पंचमंजिली नीलांजलि लेकर आरती शुरू करते हैं, घंटे-घड़ियाल बजते हैं और “जय गंगे माता” का समवेत स्वर वातावरण में गूँज उठता है। सहस्र दीप जलते हैं, गंगाजल पर उनकी झिलमिलाती प्रतिच्छवियाँ दिखाई देती हैं और चारों ओर अगर-चंदन की सुगंध फैल जाती है। भक्त फूलों की टोकनियाँ और मनौतियों के दीप गंगा में प्रवाहित करते हैं। आरती के साथ लता मंगेशकर के भजन मिलकर एक स्निग्ध सौंदर्य रचते हैं। इस समय पूरा घाट श्रद्धा, शांति, आस्था और उल्लास से भर जाता है।

  • प्रश्न-अभ्यास · 10 questions
Q1.कुटज को 'गाढ़े के साथी' क्यों कहा गया है?

कुटज को 'गाढ़े के साथी' इसलिए कहा गया है क्योंकि वह कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहता है। वह सूखी, पथरीली, धधकती लू वाली पहाड़ियों में भी हरा-भरा, फूलों से लदा और मुसकुराता हुआ खड़ा रहता है। जैसे सच्चा साथी संकट के समय साथ देता है, वैसे ही कुटज दुःख, अभाव और संघर्ष में भी जीवन-शक्ति बनाए रखता है।

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38 chapters

1

देवसेना का गीत / कार्नेलिया का गीत (जयशंकर प्रसाद)

2

सूरदास की झोंपड़ी

3

आत्मपरिचय | एक गीत (हरिवंश राय बच्चन)

4

सिल्वर वैडिंग

5

सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला')

6

बिस्कोहर की माटी

7

पतंग (आलोक धन्वा)

8

जूझ

9

यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय')

10

अपना मालवा-खाऊ-उजाड़ सभ्यता में

11

कविता के बहाने | बात सीधी थी पर -( कुवर नारायण)

12

अतीत में दबे पाँव

13

बनारस / दिशा (केदारनाथ सिंह)

14

कैमरे में बंद अपाहिज-(रघुवीर सहाय)

15

वसंत आया / तोड़ो (रघुवीर सहाय)

16

उषा - (शमशेर बहादुर सिंह)

17

भरत-राम का प्रेम / पद (तुलसीदास)

18

बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला')

19

बारहमासा (मलिक मुहम्मद जायसी)

20

कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूरच्छा और राम का विलाप-(तुलसीदास)

21

पद (विद्यापति)

22

रुबाइयाँ-( फ़िराक गोरखपुरी)

23

कवित्त (घनानंद)

24

छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी)

25

प्रेमघन की छाया-स्मृति (रामचंद्र शुक्ल)

26

भक्तिन-(महादेवी वर्मा)

27

सुमिरिनी के मनके (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी)

28

बाज़ार दर्शन-(जैनेन्द्र कुमार)

29

संवदिया (फणीश्वरनाथ 'रेणु')

30

काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती)

31

गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात (भीष्म साहनी)

32

पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु)

33

शेर, पहचान, चार हाथ, साझा (असगर वजाहत)

34

शिरीष के फूल-(हजारी प्रसाद द्विवेदी)

35

जहाँ कोई वापसी नहीं (निर्मल वर्मा)

36

श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर)

37

दूसरा देवदास (ममता कालिया)

38

कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी)

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