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Chapter 38 of 38
NCERT Solutions

कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) — NCERT Solutions

CBSE · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी), CBSE Class 12 Hindi: 10 textbook questions solved step by step. Covers प्रश्न-अभ्यास.

45 questions30 flashcards5 concepts

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हजारी प्रसाद द्विवेदी के जीवन, शिक्षा, प्रमुख पदों, पुरस्कारों और साहित्यिक योगदान को दर्शाने वाला एक इन्फोग्राफिक.
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10 Questions Solved · 1 Section

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प्रश्न-अभ्यास

1कुटज को 'गाढ़े के साथी' क्यों कहा गया है?Show solution

कुटज को 'गाढ़े के साथी' इसलिए कहा गया है क्योंकि वह कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहता है। वह सूखी, पथरीली, धधकती लू वाली पहाड़ियों में भी हरा-भरा, फूलों से लदा और मुसकुराता हुआ खड़ा रहता है। जैसे सच्चा साथी संकट के समय साथ देता है, वैसे ही कुटज दुःख, अभाव और संघर्ष में भी जीवन-शक्ति बनाए रखता है।

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2'नाम' क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए।Show solution

लेखक के अनुसार नाम बड़ा इसलिए है क्योंकि उसे समाज की स्वीकृति मिली होती है। रूप व्यक्ति-सत्य है, लेकिन नाम समाज-सत्य है। नाम केवल ध्वनि नहीं, बल्कि वह पद है जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। लेखक का मन ऐसे नाम की ओर खिंचता है जो समाज, इतिहास और समष्टि-मानव की चेतना में प्रमाणित हो। इसलिए नाम का महत्व रूप से अधिक माना गया है।

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3'कुटज', 'कुटज' और 'कुटनी' शब्दों का विश्लेषण कर उनमें आपसी संबंध स्थापित कीजिए।Show solution

लेखक ने कुटज, कुटज और कुटनी के संबंध को शब्द-व्युत्पत्ति के आधार पर समझाया है।

  • कुटज का अर्थ है—कूट से उत्पन्न। यहाँ कूट का अर्थ घड़ा/घर आदि माना गया है।
  • कुटज शब्द में वही मूल है, पर लेखक के अनुसार यह जंगल में उगने वाला पौधा है, इसलिए घड़े या गमले से उसका सीधा संबंध नहीं बैठता।
  • कुटनी भी इसी मूल से जुड़ा शब्द माना गया है, जिसका अर्थ दासी या चालाक स्त्री के रूप में आया है।

इस प्रकार तीनों शब्दों में 'कुट/कूट' मूल का संबंध है, पर अर्थ-प्रयोग अलग-अलग हैं। लेखक ने यह भी दिखाया कि संस्कृत में कई शब्द विभिन्न भाषाई स्रोतों से आए हैं।

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4कुटज किस प्रकार अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा करता है?Show solution

कुटज अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा अपने रूप और स्वभाव दोनों से करता है। वह सूखी शिलाओं, कठोर पाषाण, तीव्र लू और अभावग्रस्त पर्वतीय प्रदेश में भी हरा-भरा और फूलों से लदा रहता है। वह चट्टानों को भेदकर जड़ें फैलाता है, पाताल से पानी खींचता है और कठिन परिस्थितियों में भी मुसकुराता रहता है। इस तरह वह बताता है कि जीवन में संघर्ष के बीच भी स्वावलंबन, साहस और दृढ़ता से जिया जा सकता है।

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5'कुटज' हम सभी को क्या उपदेश देता है? टिप्पणी कीजिए।Show solution

कुटज हमें यह उपदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं माननी चाहिए। वह सिखाता है कि मनुष्य को अपने भीतर स्वावलंबन, आत्मविश्वास, अपराजेयता और शान रखनी चाहिए। वह यह भी बताता है कि जीवन केवल सुख पाने के लिए नहीं, बल्कि संघर्षों के बीच निर्भय और संतुलित रहकर जीने के लिए है। कुटज का संदेश है—जो मिल जाए उसे स्वीकार करो, पर मन से पराजित मत हो।

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6कुटज के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है?

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7कुटज क्या केवल जी रहा है—लेखक ने यह प्रश्न उठाकर किन मानवीय कमजोरियों पर टिप्पणी की है?

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8लेखक क्यों मानता है कि स्वार्थ से भी बढ़कर जिजीविषा से भी प्रचंड कोई न कोई शक्ति अवश्य है? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।

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9'कुटज' पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि 'दुख और सुख तो मन के विकल्प हैं।'

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10निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए—
  1. (क) 'कभी-कभी जो लोग ऊपर से बेहया दिखते हैं, उनकी जड़ें काफ़ी गहरी पैठी रहती हैं। ये भी पाषाण की छाती फाड़कर न जाने किस अतल गह्वर से अपना भोग्य खींच लाते हैं।'
  2. (ख) 'रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। आधुनिक शिक्षित लोग जिसे 'सोशल सेक्शन' कहा करते हैं। मेरा मन नाम के लिए व्याकुल है, समाज द्वारा स्वीकृत, इतिहास द्वारा प्रमाणित, समष्टि-मानव की चित्त-गंगा में स्नातक।'
  3. (ग) 'रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।'

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5 more solved questions in कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) for CBSE Class 12 Hindi?
Key topics in कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) include निबंध का केंद्रीय भाव, नाम और रूप का संबंध, कुटज का प्रतीकात्मक सौंदर्य, स्वार्थ, परमार्थ और मन की परिधि. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) free?
The first 5 of the 10 solutions on this page are open to read. The other 5 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) for the CBSE Class 12 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 45 practice questions on कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

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