कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) — NCERT Solutions
CBSE · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी), CBSE Class 12 Hindi: 10 textbook questions solved step by step. Covers प्रश्न-अभ्यास.
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प्रश्न-अभ्यास
1कुटज को 'गाढ़े के साथी' क्यों कहा गया है?Show solution
कुटज को 'गाढ़े के साथी' इसलिए कहा गया है क्योंकि वह कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहता है। वह सूखी, पथरीली, धधकती लू वाली पहाड़ियों में भी हरा-भरा, फूलों से लदा और मुसकुराता हुआ खड़ा रहता है। जैसे सच्चा साथी संकट के समय साथ देता है, वैसे ही कुटज दुःख, अभाव और संघर्ष में भी जीवन-शक्ति बनाए रखता है।
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2'नाम' क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
लेखक के अनुसार नाम बड़ा इसलिए है क्योंकि उसे समाज की स्वीकृति मिली होती है। रूप व्यक्ति-सत्य है, लेकिन नाम समाज-सत्य है। नाम केवल ध्वनि नहीं, बल्कि वह पद है जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। लेखक का मन ऐसे नाम की ओर खिंचता है जो समाज, इतिहास और समष्टि-मानव की चेतना में प्रमाणित हो। इसलिए नाम का महत्व रूप से अधिक माना गया है।
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3'कुटज', 'कुटज' और 'कुटनी' शब्दों का विश्लेषण कर उनमें आपसी संबंध स्थापित कीजिए।Show solution
लेखक ने कुटज, कुटज और कुटनी के संबंध को शब्द-व्युत्पत्ति के आधार पर समझाया है।
- कुटज का अर्थ है—कूट से उत्पन्न। यहाँ कूट का अर्थ घड़ा/घर आदि माना गया है।
- कुटज शब्द में वही मूल है, पर लेखक के अनुसार यह जंगल में उगने वाला पौधा है, इसलिए घड़े या गमले से उसका सीधा संबंध नहीं बैठता।
- कुटनी भी इसी मूल से जुड़ा शब्द माना गया है, जिसका अर्थ दासी या चालाक स्त्री के रूप में आया है।
इस प्रकार तीनों शब्दों में 'कुट/कूट' मूल का संबंध है, पर अर्थ-प्रयोग अलग-अलग हैं। लेखक ने यह भी दिखाया कि संस्कृत में कई शब्द विभिन्न भाषाई स्रोतों से आए हैं।
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4कुटज किस प्रकार अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा करता है?Show solution
कुटज अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा अपने रूप और स्वभाव दोनों से करता है। वह सूखी शिलाओं, कठोर पाषाण, तीव्र लू और अभावग्रस्त पर्वतीय प्रदेश में भी हरा-भरा और फूलों से लदा रहता है। वह चट्टानों को भेदकर जड़ें फैलाता है, पाताल से पानी खींचता है और कठिन परिस्थितियों में भी मुसकुराता रहता है। इस तरह वह बताता है कि जीवन में संघर्ष के बीच भी स्वावलंबन, साहस और दृढ़ता से जिया जा सकता है।
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5'कुटज' हम सभी को क्या उपदेश देता है? टिप्पणी कीजिए।Show solution
कुटज हमें यह उपदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं माननी चाहिए। वह सिखाता है कि मनुष्य को अपने भीतर स्वावलंबन, आत्मविश्वास, अपराजेयता और शान रखनी चाहिए। वह यह भी बताता है कि जीवन केवल सुख पाने के लिए नहीं, बल्कि संघर्षों के बीच निर्भय और संतुलित रहकर जीने के लिए है। कुटज का संदेश है—जो मिल जाए उसे स्वीकार करो, पर मन से पराजित मत हो।
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- (क) 'कभी-कभी जो लोग ऊपर से बेहया दिखते हैं, उनकी जड़ें काफ़ी गहरी पैठी रहती हैं। ये भी पाषाण की छाती फाड़कर न जाने किस अतल गह्वर से अपना भोग्य खींच लाते हैं।'
- (ख) 'रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। आधुनिक शिक्षित लोग जिसे 'सोशल सेक्शन' कहा करते हैं। मेरा मन नाम के लिए व्याकुल है, समाज द्वारा स्वीकृत, इतिहास द्वारा प्रमाणित, समष्टि-मानव की चित्त-गंगा में स्नातक।'
- (ग) 'रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।'
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) for CBSE Class 12 Hindi?
Are these NCERT Solutions for कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) free?
How should I revise कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) for the CBSE Class 12 board exam?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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