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Chapter 27 of 38
NCERT Solutions

सुमिरिनी के मनके (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी) — NCERT Solutions

CBSE · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for सुमिरिनी के मनके (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी), CBSE Class 12 Hindi: 23 textbook questions solved step by step.

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23 Questions Solved · 2 Sections

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प्रश्न-अभ्यास

(क)1बालक से उसकी उम्र और योग्यता से ऊपर के कौन-कौन से प्रश्न पूछे गए?Show solution

पाठ में बालक से उसकी उम्र और समझ से बहुत ऊपर के प्रश्न पूछे गए थे। जैसे—

  • धर्म के दस लक्षण
  • नौ रसों के उदाहरण
  • पानी चार डिग्री के नीचे शीतता में फैलने का कारण और उससे मछलियों की प्राणरक्षा
  • चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक समाधान
  • अभाव को पदार्थ मानने न मानने का शास्त्रार्थ
  • इंग्लैंड के राजा आठवें हेनरी की स्त्रियों के नाम
  • पेशवाओं का कुर्सीनामा

ये सभी प्रश्न आठ वर्ष के बालक की योग्यता से ऊपर थे।

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(क)2बालक ने क्यों कहा कि मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा?Show solution

बालक ने सीखा-सिखाया, बनावटी उत्तर दिया था कि वह यावज्जन्म लोकसेवा करेगा, क्योंकि उससे यह अपेक्षा की जा रही थी कि वह बड़े-बड़ों जैसा गंभीर और आदर्शवादी उत्तर दे। यह उत्तर उसकी अपनी स्वाभाविक इच्छा नहीं, बल्कि पढ़ाई और वातावरण के दबाव का परिणाम था। भीतर से वह कुछ और ही चाहता था, इसलिए आगे चलकर उसने सचमुच ‘लड़ू’ माँगा।

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(क)3बालक द्वारा इनाम में लड्डू माँगने पर लेखक ने सुख की साँस क्यों भरी?Show solution

लेखक ने सुख की साँस इसलिए भरी क्योंकि बालक ने अंत में अपनी स्वाभाविक रुचि प्रकट की। वह जाँच-परख से बने हुए कृत्रिम आदर्शों की ओर नहीं गया, बल्कि मन से ‘लड़ू’ माँगा। इससे लेखक को लगा कि बालक की प्राकृतिक प्रवृत्तियाँ पूरी तरह मरी नहीं हैं; वह बच गया है।

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(क)4बालक की प्रवृत्तियों का गला घोटना अनुचित है, पाठ में ऐसा आभास किन स्थलों पर होता है कि उसकी प्रवृत्तियों का गला घोटा जाता है?Show solution

पाठ में बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने का आभास इन स्थलों पर होता है—

  • उसे लाड़-प्यार में दिखावा-पुत्र की तरह प्रस्तुत किया जा रहा था।
  • उससे उसकी उम्र से बाहर के अति कठिन और रटंत प्रश्न पूछे जा रहे थे।
  • उससे बनावटी, सिखाए हुए उत्तर कहलवाए जा रहे थे।
  • बालक के मन में उठने वाले स्वाभाविक भावों को दबाकर उसके ऊपर कृत्रिम शिक्षा लादी जा रही थी।
  • लेखक को लग रहा था कि पिता और अध्यापक उसकी प्रवृत्तियों का गला घोंटने में लगे हैं।

इन सब से स्पष्ट होता है कि उसकी स्वाभाविक बाल-सुलभ रुचियों को दबाया जा रहा था।

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(क)5"बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह 'लड़ू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखानेवाली खड़खड़ाहट नहीं" कथन के आधार पर बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।Show solution

इस कथन से बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियाँ प्रकट होती हैं—

  • उसे कृत्रिम गंभीरता नहीं, बल्कि बच्चों जैसी सरल इच्छा प्रिय है।
  • उसका मन जीवंत, स्वाभाविक और सहज है।
  • वह पढ़ाई के बोझ के नीचे पूरी तरह मरा नहीं है।
  • उसका ‘लड़ू’ माँगना बताता है कि उसके भीतर अभी भी बाल-प्रकृति, आनंद, रुचि और निर्दोष आकांक्षा जीवित है।

अर्थात वह मरे हुए काठ की अलमारी जैसा नहीं, बल्कि हरे पत्तों वाले जीवित वृक्ष जैसा है।

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(क)6उम्र के अनुसार बालक में योग्यता का होना आवश्यक है किन्तु उसका ज्ञानी या दार्शनिक होना जरूरी नहीं। 'लर्निंग आउटकम' के बारे में विचार कीजिए।Show solution

पाठ के अनुसार, उम्र के अनुसार बालक में योग्यता का होना आवश्यक है, लेकिन उसे ज्ञानी या दार्शनिक होना जरूरी नहीं। Learning Outcome का अर्थ केवल रटकर बहुत-सी बातें कहना नहीं, बल्कि बच्चे में उसकी उम्र के अनुसार समझ, रुचि, स्वाभाविक विकास, व्यवहारिक ज्ञान और सीखने की क्षमता का विकास होना है।

इसलिए शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो बच्चे पर बोझ न बने, बल्कि उसकी मानसिक, भावनात्मक और बौद्धिक वृद्धि को सहज रूप से बढ़ाए। बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार सीखना चाहिए; उससे वयस्कों जैसा ज्ञान या दर्शन अपेक्षित करना अनुचित है।

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(ख)1लेखक ने धर्म का रहस्य जानने के लिए 'घड़ी के पुर्जे' का दृष्टांत क्यों दिया है?Show solution

लेखक ने ‘घड़ी के पुर्जे’ का दृष्टांत इसलिए दिया है ताकि यह बताया जा सके कि जैसे घड़ी केवल समय बताती है और उसके भीतर के पुर्जे खोलना हर किसी का काम नहीं माना जाता, वैसे ही धर्म के रहस्यों को कुछ लोग अपने अधिकार में रखकर दूसरों को उससे दूर नहीं कर सकते।

लेखक इस उपमा के माध्यम से धर्माचार्यों के एकाधिकार पर प्रश्न उठाते हैं। वे कहना चाहते हैं कि यदि घड़ी देखना सीखा जा सकता है तो धर्म को समझना भी मनुष्य का अधिकार है; जिज्ञासा पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।

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(ख)2'धर्म का रहस्य जानना वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है।' आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? धर्म संबंधी अपने विचार व्यक्त कीजिए।Show solution

मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत नहीं हूँ। धर्म का गहरा ज्ञान रखने वाले लोग अवश्य होते हैं, लेकिन धर्म का संबंध केवल उन्हीं से नहीं है। धर्म मनुष्य के आचरण, करुणा, सत्य, न्याय, अहिंसा और सद्भाव से जुड़ा है; इसलिए सामान्य व्यक्ति भी उसे समझ सकता है और उस पर विचार कर सकता है।

मेरी दृष्टि में धर्म का अर्थ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि मानवता है। यदि धर्म मानव के हित, प्रेम और नैतिकता को बढ़ाए, तो वह सबका विषय है, न कि केवल कुछ धर्माचार्यों का।

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(ख)3घड़ी समय का ज्ञान कराती है। क्या धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार अपने समय का बोध नहीं कराते?Show solution

हाँ, धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार भी अपने समय का बोध कराते हैं। जैसे घड़ी समय बताती है, वैसे ही धर्म-सम्बंधी विचार समाज की मानसिकता, मूल्य, विश्वास, परंपराएँ और जीवन-स्थितियों को प्रकट करते हैं।

लेकिन लेखक का संकेत यह भी है कि धर्म को केवल कुछ लोगों की समझ का विषय बनाकर सीमित नहीं किया जाना चाहिए। धर्म के विचार यदि समाज को दिशा दें, मानवीय मूल्यों को बढ़ाएँ और समय के अनुसार बदलती जरूरतों को समझें, तभी वे सार्थक हैं।

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(ख)4धर्म अगर कुछ विशेष लोगों वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों, मठाधीशों, पंडे-पुजारियों की मुट्ठी में है तो आम आदमी और समाज का उससे क्या संबंध होगा? अपनी राय लिखिए।Show solution

यदि धर्म कुछ मुट्ठीभर लोगों—जैसे वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्य, मठाधीश, पंडे-पुजारी—की मुट्ठी में रहेगा, तो आम आदमी उससे दूर और निर्भर रहेगा। उसे धर्म के नाम पर केवल आदेश, निषेध और डर मिलेगा।

ऐसी स्थिति में धर्म का संबंध मानव-कल्याण से कम और आडंबर, शोषण और एकाधिकार से अधिक होगा। समाज के लिए धर्म एक जीवंत मार्गदर्शक नहीं, बल्कि कुछ लोगों का नियंत्रण-तंत्र बन जाएगा।

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(ख)5'जहाँ धर्म पर कुछ मुट्ठीभर लोगों का एकाधिकार धर्म को संकुचित अर्थ प्रदान करता है वहीं धर्म का आम आदमी से संबंध उसके विकास एवं विस्तार का द्योतक है।' तर्क सहित व्याख्या कीजिए।Show solution

यह कथन सही है कि जब धर्म पर कुछ मुट्ठीभर लोगों का एकाधिकार हो जाता है, तो धर्म का अर्थ सीमित और संकुचित हो जाता है। तब धर्म केवल कर्मकांड, नियमों और सत्ता का साधन बनकर रह जाता है।

इसके विपरीत, जब धर्म का संबंध आम आदमी से जुड़ता है, तब वह जीवन के नैतिक, सामाजिक और मानवीय पक्षों को प्रभावित करता है। ऐसा धर्म विकसित और विस्तृत रूप लेता है, क्योंकि वह जनजीवन की समस्याओं, करुणा, समानता और सदाचार से जुड़ जाता है।

अर्थात धर्म का सच्चा विकास तब है जब वह सबके लिए खुला हो, न कि कुछ लोगों की संपत्ति बन जाए।

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(ख)6निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए--
  1. (क) 'वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है कि घड़ी के पुर्जे जानें, तुम्हें इससे क्या?
  2. (ख) 'अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो पर जो घड़ीसाजी का इम्तहान पास कर आया है, उसे तो देखने दो।'
  3. (ग) 'हमें तो धोखा होता है कि परदादा की घड़ी जेब में डाले फिरते हो, वह बंद हो गई है, तुम्हें न चाबी देना आता है न पुर्जे सुधारना, तो भी दूसरों को हाथ नहीं लगाने देते।'
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(क) इस कथन में धर्म के रहस्यों को जानने का अधिकार केवल वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों तक सीमित बताया गया है। आम लोगों से कहा जाता है कि वे केवल उपदेश सुनें और धर्म के भीतर क्या है, यह जानने की कोशिश न करें। लेखक इस सोच पर प्रश्न उठाते हैं और कहते हैं कि इससे लोगों की जिज्ञासा को दबाया जाता है।

(ख) लेखक मानते हैं कि किसी अनुभवहीन व्यक्ति को घड़ी के पुर्जे खोलने नहीं देने चाहिए, पर जिसने घड़ीसाजी सीखी और उसकी परीक्षा पास की है, उसे घड़ी देखने और जाँचने का अधिकार होना चाहिए। इसी तरह धर्म के विषय में भी जानने-समझने की योग्यता रखने वाले लोगों की जिज्ञासा को केवल इसलिए नहीं रोकना चाहिए कि वे धर्माचार्य नहीं हैं।

(ग) लेखक की तुलना में धर्माचार्य ऐसी पुरानी घड़ी साथ लिए फिरते हैं जो बंद हो चुकी है। उन्हें न उसमें चाबी देना आता है, न उसके पुर्जे सुधारना; फिर भी वे दूसरों को उसे छूने नहीं देते। आशय यह है कि यदि धर्म के ठेकेदार स्वयं धर्म की समस्याओं का समाधान नहीं कर पाते, तो उन्हें आम लोगों की जिज्ञासा और जाँच-पड़ताल पर रोक नहीं लगानी चाहिए।

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(ग)1वैदिककाल में हिंदुओं में कैसी लाटरी चलती थी जिसका जिक्र लेखक ने किया है।

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(ग)2'दुर्लभ बंधु' की पेटियों की कथा लिखिए।

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(ग)3'जीवन साथी' का चुनाव मिट्टी के ढेलों पर छोड़ने के कौन-कौन से फल प्राप्त होते हैं।

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(ग)4मिट्टी के ढेलों के संदर्भ में कबीर की साखी की व्याख्या कीजिए--
  1. पत्थर पूजे हरि मिलें तो तू पूज पहार.
  2. इससे तो चक्की भली, पीस खाय संसार॥

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(ग)5जन्मभर के साथी का चुनाव मिट्टी के ढेले पर छोड़ना बुद्धिमानी नहीं है। इसलिए बेटी का शिक्षित होना अनिवार्य है। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के संदर्भ में विचार कीजिए।

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(ग)6निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए—

(क) 'अपनी आँखों से जगह देखकर, अपने हाथ से चुने हुए मिट्टी के डगलों पर भरोसा करना क्यों बुरा है और लाखों करोड़ों कोस दूर बैठे बड़े-बड़े मट्टी और आग के ढेलों-मंगल, शनिश्चर और बृहस्पति की कल्पित चाल के कल्पित हिसाब का भरोसा करना क्यों अच्छा है।'
(ख) 'आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से, आज का पैसा अच्छा है कल की मोहर से। आँखों देखा ढेला अच्छा ही होना चाहिए लाखों कोस के तेज पिंड से।'

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योग्यता-विस्तार

(क)2ज्ञान के क्षेत्र में 'रटने' का निषेध है किंतु क्या आप रटने में विश्वास करते हैं। अपने विचार प्रकट कीजिए।

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(ख)1धर्म संबंधी अपनी मान्यता पर लेख / निबंध लिखिए।

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(ख)2'धर्म का रहस्य जानना सिर्फ धर्माचार्यों का काम नहीं, कोई भी व्यक्ति अपने स्तर पर उस रहस्य को जानने की कोशिश कर सकता है, अपनी राय दे सकता है'—टिप्पणी कीजिए।

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(ग)1समाज में धर्म संबंधी अंधविश्वास पूरी तरह व्याप्त है। वैज्ञानिक प्रगति के संदर्भ में धर्म, विश्वास और आस्था पर निबंध लिखिए।

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(ग)2अपने घर में या आस-पास दिखाई देने वाले किसी रिवाज या अंधविश्वास पर एक लेख लिखिए।

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11 more solved questions in सुमिरिनी के मनके (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in सुमिरिनी के मनके (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी) for CBSE Class 12 Hindi?
Key topics in सुमिरिनी के मनके (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी) include लेखक परिचय और रचना-परिचय, ‘बालक बच गया’ — मूल भाव और अर्थ, ‘बालक बच गया’ — घटनाक्रम और संदेश, ‘घड़ी के पुर्जे’ — धर्म और जिज्ञासा. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 12 board exam.
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The first 12 of the 23 solutions on this page are open to read. The other 11 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
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Sources & Official References

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