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Chapter 20 of 38
NCERT Solutions

कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूरच्छा और राम का विलाप-(तुलसीदास) (Part 2) — NCERT Solutions

CBSE · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूरच्छा और राम का विलाप-(तुलसीदास) (Part 2), CBSE Class 12 Hindi: 12 textbook questions solved step.

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एक समयरेखा जो तुलसीदास के जन्म, बचपन के कष्ट, गुरु नरहरिदास से भेंट, रत्नावली से विवाह (विवादित), गृहत्याग, तीर्थयात्रा, रामचरितमानस की रचना का प्रारंभ, काशी में निवास और निधन जैसी प्रमुख घटनाओं को दर
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12 Questions Solved · 2 Sections

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पाठ के साथ

1कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।Show solution

कवित्तों में तुलसीदास ने अपने युग की आर्थिक विषमता बहुत स्पष्ट रूप से दिखायी है। पहले छंद में वे कहते हैं कि किसान, व्यापारी, भिखारी, भाट, चाकर, नट, चोर आदि सभी किसी न किसी रूप में “पेटको पढ़त” हैं; यानी सबका जीवन पेट की चिंता से संचालित है। लोग जीविका के लिए पर्वत चढ़ते हैं, जंगलों में भटकते हैं, और ऊँचे-नीचे कर्म, धर्म-अधर्म तक करते हैं। सबसे मार्मिक बात यह है कि पेट भरने के लिए वे “बेटा-बेटकी” तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

दूसरे छंद में वे आर्थिक बदहाली को और साफ़ करते हैं—किसान के लिए खेती नहीं, भिखारी के लिए भीख नहीं, व्यापारी के लिए बनिज नहीं, चाकर के लिए चाकरी नहीं। यानी हर वर्ग की रोज़ी-रोटी छिन गई है। लोग जीविका-विहीन होकर एक-दूसरे से पूछते हैं—“कहाँ जाएँ, क्या करें?” यह चित्रण दिखाता है कि तुलसी ने केवल गरीबी नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न बेकारी, भूख, असुरक्षा और सामाजिक पतन को भी समझा था।

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2पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति का भेष ही कर सकता है— तुलसी का यह काव्य-सत्य क्या इस समय का भी युग-सत्य है? तर्कसंगत उत्तर दीजिए।Show solution

हाँ, बहुत हद तक यह आज का भी युग-सत्य है। पुस्तक में तुलसी ने कहा है कि “पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी”—अर्थात भूख और गरीबी मनुष्य को ऐसी दशा में पहुँचा देती है कि वह अपने नैतिक निर्णय भी खो देता है। आज भी कई जगह भुखमरी, बेरोज़गारी, किसान-आत्महत्या, कर्ज़, और असुरक्षा के कारण लोग अत्यंत दुखद कदम उठाने को विवश होते हैं।

हालाँकि आज शिक्षा, तकनीक और सरकारी योजनाओं के कारण परिस्थितियाँ तुलसी के युग से कुछ बदली हैं, फिर भी गरीबी और भूख की मार अब भी समाज में मौजूद है। इसलिए तुलसी का यह कथन कि जीवन की मूल समस्या का समाधान केवल बाहरी व्यवस्था से नहीं, बल्कि राम-कृपा से ही संभव है, एक आध्यात्मिक सत्य है; और सामाजिक अर्थ में यह हमें याद दिलाता है कि जब तक भूख और अभाव रहेंगे, तब तक मनुष्य की स्वतंत्रता और गरिमा भी संकट में रहेगी।

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3तुलसी ने यह कहने की जरूरत क्यों समझी?
धूत कहो, अवधूत कहो, रजपूत कहो, जोलहा कहौ कोऊ / काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटासों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?
Show solution

तुलसी ने यह इसलिए कहा क्योंकि वे समाज में फैली जाति-भेद की संकीर्णता को अस्वीकार करना चाहते थे। वे अपने को “राम को गुलाम” कहकर एक ऐसी पहचान देते हैं जो जाति से ऊपर है। इसलिए वे कहते हैं कि कोई उन्हें धूत, अवधूत, रजपूत, जोलहा कुछ भी कहे, उन्हें कोई आपत्ति नहीं; वे किसी की जाति बिगाड़ने या विवाह-संबंधों से सामाजिक तनाव बढ़ाने का काम नहीं करेंगे। यह उनकी निर्भय, समन्वयी और स्वाभिमानी भक्त-चेतना का संकेत है।

यदि वे “काहू की बेटासों बेटी न ब्याहब” कहते, तो सामाजिक अर्थ बदल जाता। तब वे केवल लड़की के विवाह की बात नहीं, बल्कि लड़की को दूसरे के पुत्र से न ब्याहने की बात कहते। इससे कथन का सामाजिक संदर्भ उलट जाता, क्योंकि अब यह लड़के-घराने से संबंध न रखने का संकेत देता। पुस्तक के वाक्यांश का अर्थ यह है कि वे किसी की जाति को बिगाड़ना नहीं चाहते; इसलिए “बेटीसों बेटा” कहने में परिवार-सम्बन्ध और विवाह-नियमों की सामाजिक दिशा बनी रहती है।

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4धूत कहो... वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?Show solution

हाँ, मैं इससे सहमत हूँ। इस सवैया में तुलसी ऊपर से बहुत साधारण और निर्भय दिखते हैं—वे कहते हैं कि कोई उन्हें कुछ भी कहे, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इस बाहरी सादगी के भीतर उनका स्वाभिमान छिपा है। वे स्पष्ट घोषणा करते हैं कि वे “राम को गुलाम” हैं, इसलिए समाज के जातिगत लेबल उनके लिए गौण हैं।

यह केवल विनम्रता नहीं, बल्कि आत्मगौरव भी है। वे किसी के सामने अपनी भक्ति और अपनी पहचान को कम नहीं होने देते। साथ ही वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि वे किसी की जाति बिगाड़ने में विश्वास नहीं रखते। इससे उनका व्यक्तित्व एक ऐसे भक्त का बनता है जो बाहरी आडंबर से रहित है, लेकिन भीतर से दृढ़, निर्भीक और आत्मसम्मानी है।

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5व्याख्या करें—

(क) मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।
जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पितु बचन मनतेउँ नहिं ओहू।
(ख) जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।
(ग) माँगि कै खेबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।
(घ) ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।

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(क) राम लक्ष्मण को याद दिलाते हैं कि उन्होंने उनके हित के लिए माता-पिता को छोड़ दिया और वन में सर्दी, धूप तथा हवा-कष्ट सहे। राम शोक में पछताते हैं कि यदि उन्हें पता होता कि वन में उन्हें भाई से बिछुड़ना पड़ेगा, तो वे पिता की आज्ञा भी न मानते। इन पंक्तियों में लक्ष्मण के प्रति राम का गहरा प्रेम और उनके वियोग की असहनीय पीड़ा प्रकट होती है।

(ख) जैसे पंखों के बिना पक्षी, मणि के बिना सर्प और सूँड़ के बिना हाथी असहाय हो जाते हैं, वैसे ही राम लक्ष्मण के बिना अपने जीवन को निरर्थक और असहाय मानते हैं। वे कहते हैं कि यदि कठोर भाग्य उन्हें लक्ष्मण के बिना जीवित रखेगा, तो ऐसा जीवन उनके लिए अत्यंत दुःखद होगा।

(ग) तुलसीदास कहते हैं कि वे माँगकर भोजन कर लेंगे और मस्जिद में भी सो लेंगे; उन्हें न किसी से कुछ लेना है, न किसी को कुछ देना। इन शब्दों से उनका संतोष, निर्लिप्तता और सांसारिक बंधनों से मुक्त स्वभाव व्यक्त होता है। वे राम के भक्त हैं और जाति या धर्म के भेदों की परवाह किए बिना अपनी सरल जीवन-पद्धति में प्रसन्न हैं।

(घ) इन पंक्तियों में पेट की आग से विवश लोगों की दुर्दशा दिखाई गई है। आजीविका के लिए लोग ऊँचे-नीचे और धर्म-अधर्म के भेद से परे होकर तरह-तरह के काम करते हैं; अत्यंत गरीबी में तो वे अपने बेटे-बेटियों तक को बेचने के लिए विवश हो जाते हैं। तुलसीदास इस चित्रण से भूख और आर्थिक विषमता की भयावहता प्रकट करते हैं।

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6भ्रातृशोक में हुई राम की दशा को कवि ने प्रभु की नर लीला की अपेक्षा सच्ची मानवीय अनुभूति के रूप में रचा है। क्या आप इससे सहमत हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।Show solution

हाँ, मैं इससे सहमत हूँ। कवि ने भ्रातृशोक में राम को केवल ईश्वर के रूप में नहीं, बल्कि एक सच्चे मनुष्य के रूप में रचा है। वे लक्ष्मण के लिए बिलखते हैं, उन्हें गोद में उठाते हैं, बार-बार भाई को जगाने की कोशिश करते हैं, और उनके बिना जीवन को पंखहीन पक्षी की तरह असहाय बताते हैं।

यह व्यवहार किसी औपचारिक देव-चरित्र का नहीं, बल्कि अत्यंत मानवीय प्रेम, मोह, दुःख और विछोह का चित्र है। राम की स्थिति प्रलाप तक पहुँच जाती है, जिससे शोक की तीव्रता और भी गहरी हो जाती है। तुलसी ने यहाँ ईश्वरीय राम का मानवीकरण किया है ताकि पाठक उनके दुःख से सीधे जुड़ सके। इसलिए यह प्रसंग नर-लीला से अधिक जीवंत मानवीय अनुभूति के रूप में प्रभावी होता है।

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7शोकग्रस्त माहौल में हनुमान के अवतरण को करुण रस के बीच वीर रस का आविर्भाव क्यों कहा गया है?

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8जेहँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।
भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप-वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?

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पाठ के आसपास

1कालिदास के रघुवंश महाकाव्य में पत्नी (इंदुमती) के मृत्यु-शोक पर अज तथा निराला की सरोज-स्मृति में पुत्री (सरोज) के मृत्यु-शोक पर पिता के करुण उद्गार निकले हैं। उनसे भ्रातृशोक में डूबे राम के इस विलाप की तुलना करें।

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2पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्महत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे देश में घटती रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों और तुलसी के युग की तुलना करें।

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4राम कौशल्या के पुत्र थे और लक्ष्मण सुमित्रा के। इस प्रकार वे परस्पर सहोदर (एक ही माँ के पेट से जन्मे) नहीं थे। फिर, राम ने उन्हें लक्ष्य कर ऐसा क्यों कहा—“मिलइ न जगत सहोदर भ्राता?” इस पर विचार करें।

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5यहाँ कवि तुलसी के दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त, सवैया—ये पाँच छंद प्रयुक्त हैं। इसी प्रकार तुलसी साहित्य में और छंद तथा काव्य-रूप आए हैं। ऐसे छंदों व काव्य-रूपों की सूची बनाएँ।

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6 more solved questions in कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूरच्छा और राम का विलाप-(तुलसीदास)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूरच्छा और राम का विलाप-(तुलसीदास) for CBSE Class 12 Hindi?
Key topics in कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूरच्छा और राम का विलाप-(तुलसीदास) include लेखक परिचय और काव्य-प्रवृत्ति, कवित्त: पेट की आग और दरिद्रता का चित्रण, सवैया: भक्त-स्वाभिमान और सामाजिक अस्वीकार, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 12 board exam.
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Sources & Official References

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