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Chapter 37 of 38
NCERT Solutions

दूसरा देवदास (ममता कालिया) — NCERT Solutions

CBSE · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for दूसरा देवदास (ममता कालिया), CBSE Class 12 Hindi: 10 textbook questions solved step by step. Covers प्रश्न-अभ्यास.

44 questions30 flashcards5 concepts

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ममता कालिया के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों, शिक्षा, अध्यापन कार्य, निदेशक पद और लेखन करियर को दर्शाने वाली एक समयरेखा।
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10 Questions Solved · 1 Section

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प्रश्न-अभ्यास

1पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगा जी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।Show solution

हर की पौड़ी पर गंगा जी की आरती का दृश्य अत्यंत भव्य, दिव्य और भावपूर्ण है। साँझ होते ही घाटों पर रौनक बढ़ जाती है। पुजारी पंचमंजिली नीलांजलि लेकर आरती शुरू करते हैं, घंटे-घड़ियाल बजते हैं और “जय गंगे माता” का समवेत स्वर वातावरण में गूँज उठता है। सहस्र दीप जलते हैं, गंगाजल पर उनकी झिलमिलाती प्रतिच्छवियाँ दिखाई देती हैं और चारों ओर अगर-चंदन की सुगंध फैल जाती है। भक्त फूलों की टोकनियाँ और मनौतियों के दीप गंगा में प्रवाहित करते हैं। आरती के साथ लता मंगेशकर के भजन मिलकर एक स्निग्ध सौंदर्य रचते हैं। इस समय पूरा घाट श्रद्धा, शांति, आस्था और उल्लास से भर जाता है।

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2‘गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है’—इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।Show solution

कहानी में गंगा पुत्रों का जीवन गंगा मैया पर आश्रित दिखाया गया है। गंगापुत्र गोताखोरी करके फूलों के दोनों से पैसे निकालता है और वही उसकी आजीविका है। उसकी बीवी और बहन भी रेजगारी बेचकर कमाई करती हैं। यानी उनके घर-परिवार का गुज़ारा घाट, श्रद्धालुओं और आरती से जुड़े छोटे-मोटे कामों पर चलता है। उनका जीवन संघर्षपूर्ण, साधारण और अस्थिर है, फिर भी गंगा के साथ उनका रिश्ता सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि रोज़ी-रोटी और अस्तित्व का भी है। गंगा उनके लिए पूज्य देवी भी हैं और जीवन-धन भी।

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3पुजारी ने लड़की के ‘हम’ को युगल अर्थ में लेकर क्या आशीर्वाद दिया और पुजारी द्वारा आशीर्वाद देने के बाद लड़के और लड़की के व्यवहार में अटपटापन क्यों आया?Show solution

पुजारी ने लड़की के ‘हम’ को युगल अर्थ में समझकर आशीर्वाद दिया—“सुखी रहो, फूलो-फलो, जब भी आओ साथ ही आना, गंगा मैया मनोरथ पूरे करें।” यह सुनकर लड़की और संभव दोनों अकबका गए। लड़की इसलिए झेंप गई कि वह अकेली आई थी, पर बात को दो लोगों से जोड़ दिया गया; संभव इसलिए असहज हुआ कि उसे लगा कहीं उसकी और लड़की की एकसाथ उपस्थिति को प्रेम-संबंध मान लिया गया है। इसलिए दोनों एक-दूसरे से छिटककर अलग हो गए, नजरें बचाने लगे और जल्दी से चप्पल पहनकर वहाँ से चल पड़े।

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4उस छोटी सी मुलाकात ने संभव के मन में क्या हलचल उत्पन्न कर दी, इसका सूक्ष्म विवेचन कीजिए।Show solution

उस छोटी-सी मुलाकात ने संभव के मन में पहली बार प्रेम की अस्थिर, मीठी और बेचैन करने वाली अनुभूति जगा दी। लड़की का भीगे वस्त्रों में, शांत-सौम्य रूप में सामने आना उसे अद्भुत लगा। पुजारी की भूल से जो अटपटा प्रसंग बना, उसने दोनों को एक-दूसरे से अलग तो कर दिया, लेकिन संभव के भीतर उसकी छवि गहराई से अंकित हो गई। उसे लड़की की दुबली-पतली काया, गुलाबी साड़ी, भीगी आँखें, काले गीले बाल याद रह गए। वह उसे भीड़ में पहचान लेने का विश्वास करने लगा। साथ ही उसमें उत्सुकता, उत्साह, बेचैनी, अफ़सोस और प्रतीक्षा पैदा हो गई। उसने तय किया कि अगले दिन फिर उसी समय घाट पर आएगा। इस प्रकार वह पहली मुलाकात उसके लिए साधारण घटना न रहकर एक नवीन भाव-जगत का आरंभ बन गई।

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5मंसा देवी जाने के लिए केबिलकार में बैठे हुए संभव के मन में जो कल्पनाएँ उठ रही थीं, उनका वर्णन कीजिए।Show solution

केबिलकार में बैठे संभव के मन में कल्पनाओं की लंबी शृंखला चल रही थी। वह सोच रहा था कि कल वह लड़की को देखकर पुजारी की भूल पर स्पष्टीकरण देगा और कहेगा कि वह भी उतना ही अनजान है जितना वह। वह उसके साथ बातचीत शुरू करने की योजना बनाता है—उससे पूछेगा कि वह दिल्ली से आई है या नहीं, उसका नाम क्या है, वह बी.ए. में है या एम.ए. में। उसे यह भी लगता है कि यदि वह उसे फिर देख ले तो हजारों की भीड़ में भी पहचान लेगा। उसके मन में प्रेम-भरी उत्सुकता के साथ एक तरह का रोमांच और आत्मविश्वास है। पहाड़ी, मंदिर, बिंदी, गुलाबी रंग—सब कुछ उसे लड़की की छवि से जोड़कर दिखाई देता है।

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6“पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है... उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिठान का मधुर स्मरण हो आया।” कथन के आधार पर कहानी के संकेतपूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।

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7‘मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।’ कथन के आधार पर पारो की मनोदशा का वर्णन कीजिए।

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8निम्नलिखित वाक्यों का आशय स्पष्ट कीजिए—
  1. (क) ‘तुझे तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।’
  2. (ख) ‘उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया

ममता कालिया/127

Reprint 2025-26


है, उसके अंदर स्व से जनित कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।’

(ग) ‘एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धारिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।’

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1‘दूसरा देवदास’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

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2‘हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा—आशय स्पष्ट कीजिए।’

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in दूसरा देवदास (ममता कालिया) for CBSE Class 12 Hindi?
Key topics in दूसरा देवदास (ममता कालिया) include कथा का केंद्रीय भाव, लेखिका ममता कालिया का परिचय, हर की पौड़ी का चित्रण, संभव का चरित्र-चित्रण. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for दूसरा देवदास (ममता कालिया) free?
The first 5 of the 10 solutions on this page are open to read. The other 5 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise दूसरा देवदास (ममता कालिया) for the CBSE Class 12 board exam?
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Sources & Official References

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