देवसेना का गीत / कार्नेलिया का गीत (जयशंकर प्रसाद) — NCERT Solutions
CBSE · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for देवसेना का गीत / कार्नेलिया का गीत (जयशंकर प्रसाद), CBSE Class 12 Hindi: 11 textbook questions solved step by step.
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प्रश्न-अभ्यास
1“मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई”—पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।Show solution
देवसेना कहती है कि उसने भ्रमवश अपने जीवन की पूँजी को व्यर्थ ही खर्च कर दिया। उसने जो कुछ संचित किया था, वह मधुकरियों की भीख की तरह तुच्छ और निरर्थक कामों में लुटा दिया। भाव यह है कि यौवन और जीवन-शक्ति को उसने गलत समझ, गलत आशाओं और भूलों में नष्ट कर दिया, इसलिए अब उसे पछतावा हो रहा है।
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2कवि ने आशा को बावली क्यों कहा है?Show solution
कवि ने आशा को बावली इसलिए कहा है क्योंकि वह अंधी तरह देवसेना को बार-बार आगे बढ़ने, पाने और बचाने के लिए प्रेरित करती रही, जबकि वास्तविकता में उसके हाथ कुछ भी नहीं था। यानी आशा ने उसे बार-बार भ्रम में रखा और उसकी कमाई भी डुबो दी, इसलिए वह उन्मत्त, अविवेकी-सी लगती है।
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3“मैंने निज दुर्बल ... होड़ लगाई” इन पंक्तियों में ‘दुर्बल पद बल’ और ‘हारी होड़’ में निहित व्यंजना स्पष्ट कीजिए।Show solution
दुर्बल पद-बल से देवसेना की अपनी सीमित शक्ति और असहायता का भाव व्यक्त होता है। उसके पास प्रलय जैसे शक्तिशाली संकट से लड़ने की सामर्थ्य नहीं है, फिर भी वह अपने कमजोर बल के सहारे संघर्ष करती है। हारी होड़ में यह व्यंजना है कि वह जानती थी कि अंततः हार निश्चित है, फिर भी उसने हार मानकर बैठने के बजाय संघर्ष किया।
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4काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए—(क) श्रमित स्वप्न की मधुमाया ... तान उठाई।
(ख) लौटा लो ... लाज गँवाई।
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(क) श्रमित स्वप्न की मधुमाया ... तान उठाई।
(ख) लौटा लो ... लाज गँवाई।
(क) श्रमित स्वप्न, मधुमाया, गहन-विपिन और तरु-छाया जैसे पदों से थके हुए यात्री के स्वप्निल, शांत वन-परिवेश का चित्र उभरता है। उनींदी श्रवण-शक्ति में अचानक सुनाई देती विहाग की तान वातावरण को मधुर और रहस्यमय बना देती है। ‘किसने’ में प्रश्नात्मकता है; यह अनजाने गायक के प्रति कौतूहल जगाती है। पंक्तियों में प्रकृति-चित्रण, संगीतात्मकता और भावपूर्ण कल्पना का सुंदर मेल है।
(ख) इन पंक्तियों में देवसेना अपनी करुणा को ऐसी थाती मानती है जिसे अब वह सँभाल नहीं पा रही। ‘विश्व!’ कहकर संसार को संबोधित करने से मानवीकरण और भावात्मकता आती है। करुणा से हृदय का लगातार व्याकुल होना और उसके कारण मन की लाज खो देना उसकी गहरी पीड़ा तथा निराशा व्यक्त करता है। ‘थाती’ का रूपक और ‘हा-हा खाती’ की अभिव्यक्ति करुण रस को प्रभावशाली बनाती है।
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5देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?Show solution
देवसेना की हार या निराशा के कारण ये हैं—
- उसने अपने जीवन में बहुत-सी भ्रमपूर्ण आशाएँ संचित कीं।
- उसने अपनी यौवन-शक्ति और जीवन की पूँजी को व्यर्थ में गँवा दिया।
- उसे अपनी चाहत और प्रेम में विफलता मिली।
- चारों ओर संकट, वेदना और निराशा का वातावरण है।
- वह प्रलय जैसे शक्तिशाली समय से लड़ते हुए भी अंततः अपने को असहाय पाती है।
इसलिए वह स्वयं को पराजित और उदास अनुभव करती है।
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1कार्नेलिया का गीत कविता में प्रसाद ने भारत की किन विशेषताओं की ओर संकेत किया है?Show solution
कविता में प्रसाद ने भारत की अनेक विशेषताओं की ओर संकेत किया है—
- प्राकृतिक सौंदर्य: अरुणिमा, हरियाली, सरस तामरस, शीतल समीर, लहरें, उषा, रजनी, तारे आदि।
- मधुरता और समृद्धि: देश को मधुमय कहा गया है।
- सहयोग और आश्रय: यहाँ अनजान क्षितिज को भी सहारा मिलता है।
- करुणा और उदारता: बरसाती आँखों के बादल करुणा-जल से भरे हुए हैं।
- एकता और सुरक्षा: पक्षी अपने घोंसले की ओर लौटते हैं, जैसे भारत सबका अपना आश्रय हो।
- रमणीयता और जीवन्तता: यह देश सुंदर, शांत और मनोहर बताया गया है।
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हेम कुंभ ले उषा सवेरे—भरती दुलकाती सुख मेरे
मंदिर ऊँघते रहते जब—जगकर रजनी भर तारा।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in देवसेना का गीत / कार्नेलिया का गीत (जयशंकर प्रसाद) for CBSE Class 12 Hindi?
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How should I revise देवसेना का गीत / कार्नेलिया का गीत (जयशंकर प्रसाद) for the CBSE Class 12 board exam?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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