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Chapter 16 of 38
NCERT Solutions

उषा - (शमशेर बहादुर सिंह) (Part 2) — NCERT Solutions

CBSE · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for उषा - (शमशेर बहादुर सिंह) (Part 2), CBSE Class 12 Hindi: 3 textbook questions solved step by step. Covers अभ्यास.

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यह इन्फोग्राफिक 'उषा' कविता में भोर के आकाश का वर्णन करने के लिए उपयोग किए गए विभिन्न उपमानों (metaphors) को दर्शाता है। इसमें 'नीला शंख', 'राख से लीपा हुआ चौका', 'काली सिल पर लाल केसर', 'स्लेट पर लाल
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3 Questions Solved · 1 Section

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अभ्यास

1कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उषा कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र है?Show solution

कविता में गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र जिन उपमानों से बनता है, वे हैं—

  • राख से लीपा हुआ चौका — इससे गाँव के घर-आँगन की छवि उभरती है।
  • बहुत काली सिल जरा से लाल केसर से धुल गई हो — इसमें घर-गृहस्थी का ग्रामीण दृश्य है।
  • स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने — यह गाँव के बच्चों की स्लेट और चाक से जुड़ा उपमान है।
  • नील जल में या किसी की गौर झिलमिल देह — इसमें प्रकृति की झिलमिलाती, बदलती हुई छवि आती है।

इन सब उपमानों से भोर के आकाश को सिर्फ रंगों के रूप में नहीं, बल्कि गाँव के रोज़मर्रा जीवन और लगातार बदलती प्रकृति के रूप में देखा जा सकता है। इसलिए यह कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र बन जाती है।

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2भोर का नभ

राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)

नयी कविता में कोष्ठक, विराम चिह्नों और पंक्तियों के बीच का स्थान भी कविता को अर्थ देता है। उपर्युक्त पंक्तियों में कोष्ठक से कविता में क्या विशेष अर्थ पैदा हुआ है? समझाइए।
Show solution

यहाँ कोष्ठक में लिखा वाक्य — (अभी गीला पड़ा है) — कविता में एक खास अर्थ जोड़ता है।

  • इससे पता चलता है कि भोर का दृश्य ताज़ा, नया और अभी-अभी बना हुआ है।
  • “राख से लीपा हुआ चौका” केवल रंग-रूप की तुलना नहीं रह जाता, बल्कि उसमें गीलापन, ताज़गी और अभी-अभी घटित होने का अनुभव भी शामिल हो जाता है।
  • कोष्ठक यह भी दिखाता है कि कवि जैसे एक अतिरिक्त टिप्पणी कर रहा हो, जिससे दृश्य और अधिक जीवंत, सूक्ष्म और वास्तविक बन जाता है।

इस प्रकार कोष्ठक कविता के अर्थ को गहराई देता है और सुबह की छवि को स्थिर नहीं, बल्कि बनती हुई स्थिति के रूप में प्रस्तुत करता है।

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4सूर्योदय का वर्णन लगभग सभी बड़े कवियों ने किया है। प्रसाद की कविता 'बीती विभावरी जाग री' और अज्ञेय की 'बावरा अहेरी' की पंक्तियाँ आगे बॉक्स में दी जा रही हैं। 'उषा' कविता के समानांतर इन कविताओं को पढ़ते हुए नीचे दिए गए बिंदुओं पर तीनों कविताओं का विश्लेषण कीजिए और यह भी बताइए कि कौन-सी कविता आपको ज्यादा अच्छी लगी और क्यों?
  • उपमान
  • शब्दचयन
  • परिवेश

बीती विभावरी जाग री!

अंबर पनघट में डुबो रही—
तारा-घट ऊषा नागरी।

खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा,
किसलय का अंचल डोल रहा,

लो यह लतिका भी भर लाई—
मधु मुकुल नवल रस गागरी।

अधरों में राग अमंद पिए,
अलकों में मलयज बंद किए—

तू अब तक सोई है आली
आँखों में भरे विहाग री।

— जयशंकर प्रसाद

Reprint 2026-27


उषा

31

भोर का बावरा अहेरी
पहले बिछाता है आलोक की
लाल-लाल कनियाँ
पर जब खींचता है जाल को
बाँध लेता है सभी को साथ:
छोटी-छोटी चिड़ियाँ, मँझोले परवे, बड़े-बड़े पंखी
डैनों वाले डील वाले डील के बेड़ील
उड़ने जहाज,
कलस-तिसूल वाले मंदिर-शिखर से ले
तारघर की नाटी मोटी चिपटी गोल धुस्सों वाली उपयोग-सुंदरी
बेपनाह काया को:
गोधूली की धूल को, मोटरों के धुएँ को भी
पार्क के किनारे पुष्पिताग कर्णिकार की आलोक-खची तन्वि रूप-रेखा को
और दूर कचरा जलानेवाली कल की उड़द चिमनियों को, जो
धुआँ यों उगलती हैं मानो उसी मात्र से अहेरी को हरा देंगी।

— सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'

Reprint 2026-27

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in उषा - (शमशेर बहादुर सिंह) for CBSE Class 12 Hindi?
Key topics in उषा - (शमशेर बहादुर सिंह) include कवि परिचय और काव्य-दृष्टि, कविता का केंद्रीय भाव, मुख्य बिंब और उपमान, काव्य-शिल्प और भाषा. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for उषा - (शमशेर बहादुर सिंह) free?
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How should I revise उषा - (शमशेर बहादुर सिंह) for the CBSE Class 12 board exam?
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Sources & Official References

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