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Chapter 34 of 36
NCERT Solutions

रचना प्रयोग

CBSE · Class 10 · Sanskrit

NCERT Solutions for रचना प्रयोग — CBSE Class 10 Sanskrit.

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58 Questions Solved · 9 Sections

29 worked solutions below. Unlock all 58 free in Super Tutor

1. पत्रम् (Letters)

iरुग्णताया: कारणात् अवकाशप्राप्तये प्रधानाचार्यं प्रति पत्रम् लिखत।Show solution
सेवायाम्

प्रधानाचार्य-महोदया:
केन्द्रीय-विद्यालय:
आर. के. पुरम्, सैक्टर:- द्वितीय:
नवदेहली - 110022

विषय:— अवकाशप्राप्तये निवेदनम्

मान्यवरा: / महोदया:,

सविनयं निवेदनमस्ति यत् अहं शिरोवेदनया पीडित: अस्मि। एतस्मात्कारणात् अद्य विद्यालयम् आगन्तुमसमर्थ: अस्मि। अत: प्रार्थये यत् दिनद्वयस्य अवकाशं प्रदाय अनुग्रहं कुर्वन्तु भवन्त:।

धन्यवाद:

भवतां विनीत: शिष्य:
नरेन्द्र:
कक्षा 10
वर्ग: 'ब'

दिनाङ्क: ...

व्याख्या: यह पत्र रुग्णता (बीमारी) के कारण अवकाश (छुट्टी) प्राप्त करने हेतु प्रधानाचार्य को लिखा गया औपचारिक पत्र है। पत्र में — सेवायाम् (प्रेषिती का पता), विषय, विनम्र निवेदन, कारण, प्रार्थना और प्रेषक का परिचय — ये सभी अंग होने चाहिए।

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iiशुल्कक्षमापनार्थं प्रधानाचार्यं प्रति पत्रम् लिखत।Show solution
सेवायाम्

प्रधानाचार्य-महोदया:
केन्द्रीय-विद्यालय:
आर. के. पुरम्, सैक्टर: चतुर्थ:
नवदेहली - 110022

विषय:— शुल्कक्षमापनार्थं निवेदनम्

मान्यवरा: / महोदया:,

सविनयं निवेदनमस्ति यत् अहं भवत: विद्यालये दशमकक्षाया: 'स' वर्गस्य छात्र: अस्मि। मम पिता एकस्मिन् विद्यालये द्वारपाल: अस्ति। तस्य मासिकवेतनम् द्विसहस्ररूप्यकमात्रम् अस्ति। अस्माकं कुटुम्बे पञ्च सदस्या: सन्ति। अनेन वेतनेन कुटुम्बस्य निर्वाह: काठिन्येन भवति। अत: शुल्कक्षमापनार्थं प्रार्थये।

आशासे यत् मदीयाम् इमां प्रार्थनां स्वीकृत्य शुल्कक्षमापनद्वारा माम् उपकरिष्यन्ति श्रीमन्त:।

धन्यवादा:।

भवतां विनीत: शिष्य:
सुरेन्द्र:
कक्षा 10
वर्ग: 'ब'

दिनाङ्क: ...

व्याख्या: यह पत्र शुल्कमाफी (fee concession) हेतु लिखा गया है। इसमें आर्थिक स्थिति का वर्णन, परिवार की कठिनाई और विनम्र प्रार्थना — ये तीनों तत्त्व आवश्यक हैं।

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iiiपुस्तकानि प्रेषयितुं प्रकाशकं प्रति पत्रम् लिखत।Show solution
सेवायाम्
व्यवस्थापक-महोदया:
आर्य बुक डिपो
करोलबाग
नवदेहली

महोदय: / महोदया:,

सेवायाम् निवेदनमस्ति यत् अहम् अधोलिखितानि पुस्तकानि क्रेतुम् इच्छामि। अत: यत् समुचितम् उन्मोकं (कमीशनं) निष्कास्य एतानि पुस्तकानि वी.पी. माध्यमेन प्रेषयन्तु भवन्त:। शीघ्रता प्रशंसनीया स्यात्।

पुस्तकानां नामानिलेखकानां नामानिप्रति1. सरल संस्कृत व्याकरणम्डॉ. परमानंदगुप्त:12. निबन्धसौरभम्डॉ. अरुणेशकुमार:13. कथासागर:डॉ. वागीश:1\begin{array}{|l|l|c|}\hline \text{पुस्तकानां नामानि} & \text{लेखकानां नामानि} & \text{प्रति} \\ \hline \text{1. सरल संस्कृत व्याकरणम्} & \text{डॉ. परमानंदगुप्त:} & 1 \\ \text{2. निबन्धसौरभम्} & \text{डॉ. अरुणेशकुमार:} & 1 \\ \text{3. कथासागर:} & \text{डॉ. वागीश:} & 1 \\ \hline \end{array}

धन्यवाद:

भवत्क:
अशोक:
61/जवाहरनगरम्
मण्डी
हिमाचल प्रदेश

दिनाङ्क: ...

व्याख्या: यह व्यावसायिक पत्र (business letter) है जिसमें पुस्तकों की सूची देकर उन्हें V.P.P. द्वारा भेजने का अनुरोध किया गया है।

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ivस्वभगिन्या: विवाहे आमन्त्रितुं स्वमित्रं प्रति पत्रम् लिखत।Show solution
आर 688
न्यू राजेन्द्र नगरम्
दिल्लीत:
20.11.2012

प्रिय मित्र,
नमस्ते।

इदं ज्ञात्वा प्रसन्नो भविष्यसि यत् भगवत्कृपया मम भगिन्या: लताया: विवाहसंस्कार: अधोलिखितकार्यक्रमानुसारं सम्पत्स्यते। एतदर्थं सानुरोधं निमन्त्रयामि। आशासे यत् यथासमयं आगत्य अस्मान् प्रीणयिष्यसि।

कार्यक्रम:

मंगलवासरे 26.11.2012 — प्रात: सप्तवादने यज्ञ:, सायम् अष्टवादने वरयात्रीणां स्वागतम् प्रीतिभोजनम् च।

बुधवासरे 27.11.2012 — प्रात: पञ्चवादने लताया: पतिगृहगमनम्।

स्वगृहे सर्वेभ्य: मम वन्दनं निवेदय।

दर्शनाभिलाषी
देवेन्द्र:

दिनाङ्क: ...

व्याख्या: यह अनौपचारिक (informal) मित्र-पत्र है। इसमें विवाह का कार्यक्रम, आमन्त्रण और स्नेहपूर्ण भाषा — ये तत्त्व आवश्यक हैं।

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अनुच्छेद 2 — नदी, संन्यासी और नौका-दुर्घटना

I-iसंन्यासी कुत्र वसति स्म? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: आश्रमे।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में लिखा है — "नदीतीरे कश्चन संन्यासी स्वशिष्यै: सह आश्रमं निर्माय वसति स्म।" अत: संन्यासी आश्रमे (नदीतीरे) वसति स्म।

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I-iiअपरा नौका कस्या: घट्टनेन नद्यां निमग्ना अभवत्? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: शिलाया:।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में लिखा है — "एका अपरा नौका शिलाया: घट्टनेन निमग्ना अभवत्।" अत: शिलाया: (पत्थर से टकराने के कारण) नौका डूबी।

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II-iसंन्यासी नौकादुर्घटनाया: किं कारणं कथितवान्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: संन्यासी अकथयत् — "तस्यां नौकायां स्थितेषु कश्चित् दुष्ट: आसीत् इति मन्ये। अत: ते सर्वे मरणं प्राप्तवन्त:।"

स्पष्टीकरण: संन्यासी के अनुसार नौका में कोई दुष्ट व्यक्ति था, इसीलिए सभी की मृत्यु हुई। यह उनका (अंधविश्वासपूर्ण) मत था।

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III-i'सज्जन:' इति पदस्य विपरीतार्थकपदम् अनुच्छेदात् चित्वा लिखत।Show solution
उत्तरम्: दुष्ट:।

स्पष्टीकरण: 'सज्जन:' का विपरीतार्थक (antonym) 'दुष्ट:' है। अनुच्छेद में — "कश्चित् दुष्ट: आसीत्" — यह पद प्रयुक्त है।

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III-ii'आरूढवान्' इति क्रियाया: कर्तृपदम् अनुच्छेदात् चित्वा लिखत।Show solution
उत्तरम्: संन्यासी।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में — "संन्यासी शिष्यै: सह नद्या: अपरं तीरं गन्तुम् एकां नौकाम् आरूढवान्" — यहाँ 'आरूढवान्' क्रिया का कर्ता संन्यासी है।

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अनुच्छेद 3 — आत्मावलोकन और दृढ़संकल्प

I-iकिं समीचीनम् किं वा असमीचीनम् इति विषये कदा आलोचनीयम्? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: शयनकाले।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में लिखा है — "किं समीचीनं किं वा असमीचीनम् इति विषये शयनकाले अवश्यं चिन्तनीयम्।" अत: शयनकाले (सोते समय) इस विषय पर विचार करना चाहिए।

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I-iiयदि अपचार: द्रोह: वा निष्पन्न: तदा क: अवश्यम् आलोचनीय:? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: परिमार्जनोपाय:।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में लिखा है — "अपचार: द्रोहो वा निष्पन्न: तर्हि तेषां परिमार्जनोपाय: अवश्यम् आलोचनीय:।" अर्थात् उनके सुधार का उपाय अवश्य सोचना चाहिए।

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II-iक: दृढसङ्कल्प: करणीय:? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: 'श्व: प्रभृति एतादृशं प्रमादं न करिष्यामि' इति दृढसङ्कल्प: करणीय:।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद के अनुसार यह दृढ़ संकल्प करना चाहिए कि 'कल से ऐसी भूल नहीं करूँगा।'

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III-iअनुच्छेदे के पदे परस्परं विपरीतार्थं प्रयुक्ते? (यथानिर्देशम् उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: 'समीचीनम्' और 'असमीचीनम्' — ये दोनों पद परस्पर विपरीतार्थक हैं।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में — "किं समीचीनं किं वा असमीचीनम्" — यहाँ 'समीचीनम्' (उचित) और 'असमीचीनम्' (अनुचित) परस्पर विपरीत अर्थ वाले पद हैं।

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अनुच्छेद 4 — अनुताप और आत्मानुशीलन

I-iजीवने कस्य महत्वम् अनुभूयते? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: आत्मानुशीलनस्य।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में लिखा है — "इत्थम् आत्मानुशीलनस्य महत्वं जीवने अनुभूयते।" अत: जीवन में आत्मानुशीलन (self-introspection) का महत्त्व अनुभव होता है।

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I-iiकृतदोष: जन: केन महान् भवितुं शक्नोति? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: सत्कर्मसम्पादनेन।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में लिखा है — "कृतदोषोऽपि जन: अनुतप्य सत्कर्मसम्पादनेन जीवने महान् भवितुम् अर्हति।" अत: सत्कर्म करने से दोषी व्यक्ति भी महान् बन सकता है।

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II-iअनुतापानलेन किं किं भवति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: अनुतापानलेन पापानि भस्मीभवन्ति, ग्लानि: नश्यति, चित्तं निर्मलं प्रसन्नं च भवति, सद्विचार: समुदेति।

स्पष्टीकरण: पश्चाताप की अग्नि से — पाप भस्म होते हैं, ग्लानि नष्ट होती है, मन निर्मल और प्रसन्न होता है, तथा सद्विचार उत्पन्न होते हैं।

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III-i'एवम्' इति अर्थे किं पदम् अनुच्छेदे प्रयुक्तम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: इत्थम्।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में — "इत्थम् आत्मानुशीलनस्य महत्वं जीवने अनुभूयते" — यहाँ 'इत्थम्' का अर्थ 'एवम्' (इस प्रकार) है।

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III-ii'अनुभूयते' इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: महत्वम्।

स्पष्टीकरण: वाक्य है — "आत्मानुशीलनस्य महत्वं जीवने अनुभूयते।" यहाँ 'अनुभूयते' क्रिया का कर्ता महत्वम् है।

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अनुच्छेद 5 — सिंह, शृंगाल और उष्ट्र की कथा

I-iचिकित्सकेन किम् उक्तमासीत्? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: चिकित्साक्रमम्।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में लिखा है — "चिकित्सकेन औषधं तु न दत्तं परं कृपापरो भूत्वा चिकित्साक्रमम् उक्तम्।" अत: चिकित्सक ने चिकित्साक्रम (उपचार-विधि) बताया।

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I-iiशृंगाल: शीघ्रमेव कस्य समीपे प्राप्त:? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: सिंहस्य।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में — "शृंगाल: शीघ्रमेव सिंहस्य समीपे प्राप्त:" — यह स्पष्ट है।

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I-iiiउष्ट्रेण कस्या: दुष्फलम् प्राप्तम्? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: स्वपिशुनताया:।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद के अन्त में लिखा है — "एवं स्वपिशुनताया: दुष्फलम् उष्ट्रेण स्वयमेव प्राप्तम्।" अर्थात् अपनी चुगलखोरी का दुष्परिणाम उष्ट्र को स्वयं भोगना पड़ा।

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I-ivअनेके पशव: कुत्र वसन्ति स्म? (एकपदेन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: अरण्ये।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद का प्रारम्भ है — "कस्मिंशित् अरण्ये अनेके पशव: वसन्ति स्म।"

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II-iक्रोधितेन सिंहेन किं पृष्टम्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: क्रोधितेन सिंहेन शृंगालात् विलम्बेन आगमनकारणं पृष्टम्।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में — "क्रोधितेन सिंहेन विलम्बेन आगमनकारणं पृष्ट:" — यह वाक्य स्पष्ट करता है कि सिंह ने देर से आने का कारण पूछा।

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II-iiचिकित्सकेन कीदृशं चिकित्साक्रमम् उक्तम्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: चिकित्सकेन उक्तम् यत् उष्ट्रस्य रक्तपानेनैव रोगस्य शान्ति: भविष्यति।

स्पष्टीकरण: शृंगाल ने सिंह को बताया कि चिकित्सक ने कहा — ऊँट का रक्त पीने से ही रोग शान्त होगा।

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II-iiiकं विहाय सर्वे सिंहं द्रष्टुमागच्छन्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: एकं शृंगालं विहाय सर्वे पशव: रोगपीडितं सिंहं द्रष्टुमागच्छन्।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में — "एकं शृंगालं विहाय सर्वे पशव: रोगपीडितं नृपं द्रष्टुमागता:" — यह स्पष्ट है।

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II-ivसिंह: उष्ट्रमाहूय किं कृतवान्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: सिंह: उष्ट्रमाहूतवान्, भक्त्या आगतं च तं मारयित्वा तस्य रक्तं पीतवान्।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में — "सिंह: उष्ट्रमाहूतवान्। भक्त्या आगतं च तं मारयित्वा तस्य रक्तं पीतवान्" — यह वर्णित है।

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III-i'प्रसन्न: सिंह:' इति अत्र विशेष्यपदं किम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: सिंह:।

स्पष्टीकरण: 'प्रसन्न:' विशेषण है और सिंह: विशेष्य (noun) है। विशेषण सदा विशेष्य की विशेषता बताता है।

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III-ii'त्यक्त्वा' इत्यर्थे किं पदम् अनुच्छेदे प्रयुक्तम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)Show solution
उत्तरम्: विहाय।

स्पष्टीकरण: अनुच्छेद में — "एकं शृंगालं विहाय सर्वे पशव:" — यहाँ 'विहाय' का अर्थ 'त्यक्त्वा' (छोड़कर) है।

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III-iiiअस्य अनुच्छेदस्य कृते समुचितं शीर्षकं लिखत।Show solution
उत्तरम्: शीर्षकम् — 'पिशुनताया: दुष्फलम्' अथवा 'शृंगालस्य चातुर्यम्' अथवा 'उष्ट्रस्य दुर्भाग्यम्'

स्पष्टीकरण: इस कथा का मुख्य सन्देश है कि चुगलखोरी (पिशुनता) का दुष्परिणाम स्वयं को ही भोगना पड़ता है। अत: 'पिशुनताया: दुष्फलम्' सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक है।

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अनुच्छेद 6 — अमर्त्यसेन

I-iअमर्त्यसेनस्य मातामहस्य नाम किम् आसीत्? (एकपदेन उत्तरत)
I-iiकुत्र वसन् अमर्त्यसेन: संस्कृताभ्यासं कृतवान् आसीत्? (एकपदेन उत्तरत)
I-iiiअमर्त्यसेनस्य नाम केन चितम्? (एकपदेन उत्तरत)
I-ivकिं भवितुम् अमर्त्यसेनस्य तीव्र: अभिलाष: आसीत्? (एकपदेन उत्तरत)
II-iअमर्त्यसेनस्य नामविषये निर्दिशान् रवीन्द्रनाथवर्य: किमुक्तवान्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
III-i'अस्य नाम' इत्यत्र 'अस्य' इति पदं कस्मै प्रयुक्तम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)
III-ii'स्यात्' इत्यर्थे किं क्रियापदम् अनुच्छेदे प्रयुक्तम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)
III-iiiअस्य अनुच्छेदस्य कृते समुचितं शीर्षकं लिखत।

अनुच्छेद 7 — देवेन्द्र और विग्रह-विक्रेता

I-iदेवराज: कुत्र आगतवान्? (एकपदेन उत्तरत)
I-iiकस्य स्थिति: शोचनीया आसीत्? (एकपदेन उत्तरत)
II-iविक्रेता तत्र केषां देवानां विग्रहान् स्थापितवान्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
II-iiदेवेन्द्रविग्रहं कस्मै नि:शुल्कं दीयते? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
III-i'स्थिति: शोचनीया' अत्र विशेष्यपदं किम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)
III-ii'अपश्यत्' इत्यर्थं किं क्रियापदम् अनुच्छेदे प्रयुक्तम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)
III-iiiअस्य अनुच्छेदस्य कृते समुचितं शीर्षकं लिखत।

अनुच्छेद 8 — संस्कृत परिवार और अभिमन्यु

I-iसंस्कृतपरिवार: कुत्र अस्ति? (एकपदेन उत्तरत)
I-iiप्राध्यापक: कस्मै शतं रूप्यकाणि दत्तवान्? (एकपदेन उत्तरत)
II-iप्राध्यापक: अभिमन्यवे शतं रूप्यकाणि किमर्थं दत्तवान्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
II-iiयुवक: कथं गीताया: श्लोकान् अस्मरत्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
III-i'अयच्छत्' इत्यर्थं किं क्रियापदम् अनुच्छेदे प्रयुक्तम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)
III-ii'कृतवान्' इति क्रियापदस्य कर्तृपदम् चित्वा लिखत।
III-iiiअस्य अनुच्छेदस्य कृते समुचितं शीर्षकं लिखत।

अनुच्छेद 9 — सुकरात और उनकी पत्नी

I-iके महात्म-सुकरातस्य गृहम् आगच्छन्? (एकपदेन उत्तरत)
I-iiसुकरातस्य पत्नी आगन्तुकेषु किं पातयन्ती प्रतिनिवृत्ता? (एकपदेन उत्तरत)
II-iसुकरातस्य पत्नी किं चिकीर्षिति स्म? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
II-iiसुकरातस्य मते प्रकृत्यां क: विपर्यास: परिलक्षित:? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
III-i'कोपविहितचेतना सा' इति पदे अनुच्छेदे कस्यै प्रयुक्ते? (यथानिर्देशम् उत्तरत)
III-ii'अनेके' इत्यर्थं किं पदम् अनुच्छेदे प्रयुक्तम्? (यथानिर्देशम् उत्तरत)
III-iiiअस्य गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।

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