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Chapter 21 of 36
NCERT Solutions

अव्यय

CBSE · Class 10 · Sanskrit

NCERT Solutions for अव्यय — CBSE Class 10 Sanskrit.

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3 Questions Solved · 3 Sections

अभ्यासकार्यम् — अव्यय (Chapter: अव्यय, Class 10 Sanskrit)

प्र. 1समुचितै: अव्ययै: (मंजूषात: गृहीत्वा) रिक्तस्थानानि पूर्यत—
i) स: ... वनं गतवान्।
ii) स: ... गच्छति ?
iii) गज: ... चलति।
iv) स: ... स्वपिति।
v) सिंह: ... गर्जति।
vi) स: ... विजेष्यते।
vii) परिश्रमं कुरु, ... अनुत्तीर्ण: भविष्यसि।
viii) गृहात् ... मा गच्छ।
ix) स: ... माम् उद्भेजयति।
x) कोलाहलं ... कुरु।

मञ्जूषा: मा, बहिः, मुहुर्मुहुः, अन्यथा, एकदा, शनैः शनैः, चिरम्, नूनम्, उच्चैः, कुत्र
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दिया गया है: मञ्जूषा में अव्यय-पद: मा, बहिः, मुहुर्मुहुः, अन्यथा, एकदा, शनैः शनैः, चिरम्, नूनम्, उच्चैः, कुत्र

प्रयुक्त नियम: अव्यय वे शब्द होते हैं जिनमें लिंग, वचन, विभक्ति के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता। वाक्य के अर्थ के अनुसार उचित अव्यय का चयन किया जाता है।

उत्तर:

i) स: एकदा वनं गतवान्। *(एकदा = एक बार)*

ii) स: कुत्र गच्छति ? *(कुत्र = कहाँ)*

iii) गज: शनैः शनैः चलति। *(शनैः शनैः = धीरे-धीरे)*

iv) स: चिरम् स्वपिति। *(चिरम् = बहुत देर तक)*

v) सिंह: उच्चैः गर्जति। *(उच्चैः = जोर से)*

vi) स: नूनम् विजेष्यते। *(नूनम् = निश्चय ही)*

vii) परिश्रमं कुरु, अन्यथा अनुत्तीर्ण: भविष्यसि। *(अन्यथा = नहीं तो)*

viii) गृहात् बहिः मा गच्छ। *(बहिः = बाहर)*

ix) स: मुहुर्मुहुः माम् उद्भेजयति। *(मुहुर्मुहुः = बार-बार)*

x) कोलाहलं मा कुरु। *(मा = मत/निषेध)*

प्र. 2 — अव्ययपद-चयन

प्र. 2अधोलिखितेषु वाक्येषु अव्ययपदं चित्वा लिखत—
i) यावत् परीक्षाकाल: नायाति तावत् परिश्रमं कुरु।
ii) अस्माभिः सर्वदा सत्यं वक्तव्यम्।
iii) काल: वृथा न यापनीय:।
iv) अहं सम्प्रति गृहं गन्तुम् इच्छामि।
v) त्वं कुत: समायात: ?
vi) अहं श्व: ग्रामं गमिष्यामि।
vii) तौ परस्परम् आलपत:।
viii) अद्यप्रभृति अहं धूमपानं न करिष्यामि।
ix) धनं विना जीवनं वृथा भवति।
x) अथ रामायणकथा आरभ्यते।
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दिया गया है: विभिन्न वाक्य जिनमें से अव्यय-पद पहचानना है।

प्रयुक्त नियम: अव्यय वे अविकारी शब्द हैं जो किसी भी परिस्थिति में अपरिवर्तित रहते हैं। वाक्य में ऐसे शब्द को खोजना है जो लिंग/वचन/विभक्ति से प्रभावित न हो।

उत्तर:

i) यावत् परीक्षाकाल: नायाति तावत् परिश्रमं कुरु। → अव्यय: यावत्, तावत्

ii) अस्माभिः सर्वदा सत्यं वक्तव्यम्। → अव्यय: सर्वदा

iii) काल: वृथा न यापनीय:। → अव्यय: वृथा

iv) अहं सम्प्रति गृहं गन्तुम् इच्छामि। → अव्यय: सम्प्रति

v) त्वं कुत: समायात: ? → अव्यय: कुत:

vi) अहं श्व: ग्रामं गमिष्यामि। → अव्यय: श्व:

vii) तौ परस्परम् आलपत:। → अव्यय: परस्परम्

viii) अद्यप्रभृति अहं धूमपानं न करिष्यामि। → अव्यय: अद्यप्रभृति

ix) धनं विना जीवनं वृथा भवति। → अव्यय: विना

x) अथ रामायणकथा आरभ्यते। → अव्यय: अथ

प्र. 3 — शुद्ध अव्ययपद-चयन (कोष्ठक से)

प्र. 3कोष्ठकेभ्य: शुद्धम् अव्ययपदं चित्वा रिक्तस्थानं पूर्यत्—
i) अहम् ... भ्रमणाय गमिष्यामि। (श्व:/ह्व:)
ii) त्वम् कस्य ... गच्छसि ? (परित:/पुरत:)
iii) विद्यालयम् ... उद्यानम् अस्ति। (परित:/एव)
iv) स: यदा आगमिष्यति ... अहं गमिष्यामि। (तदैव/तथैव)
v) परिश्रमं कुरु ... अनुतीर्ण: भविष्यसि। (सर्वदा/अन्यथा)
vi) त्वं ... कुत्र गच्छसि ? (जातु/साम्प्रतम्)
vii) यूयम् ... ध्यानेन पठत। (बाहम्/नूनम्)
viii) श्याम: ... पठति श्यामा न। (एव/विना)
ix) छात्रा: पुस्तकम् ... न शोभन्ते। (यदि/विना)
x) यथा वप्स्यसि ... फलं प्राप्स्यसि। (तदा/तथा)
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दिया गया है: प्रत्येक वाक्य में कोष्ठक में दो अव्यय-पद दिए गए हैं, उनमें से उचित का चयन करना है।

प्रयुक्त नियम: वाक्य के अर्थ एवं संदर्भ के अनुसार उचित अव्यय का चयन किया जाता है।

उत्तर:

i) अहम् श्व: भ्रमणाय गमिष्यामि।
*(श्व: = कल; ह्व: = परसों — भविष्य के निकट दिन के लिए 'श्व:' उचित है)*

ii) त्वम् कस्य पुरत: गच्छसि ?
*(पुरत: = सामने/आगे; परित: = चारों ओर — 'किसके आगे जाते हो' के लिए 'पुरत:' उचित है)*

iii) विद्यालयम् परित: उद्यानम् अस्ति।
*(परित: = चारों ओर — 'विद्यालय के चारों ओर उद्यान है' के लिए 'परित:' उचित है)*

iv) स: यदा आगमिष्यति तदैव अहं गमिष्यामि।
*(तदैव = तभी; यदा...तदैव = जब...तभी — यह सहसम्बन्धी अव्यय-युगल है)*

v) परिश्रमं कुरु अन्यथा अनुतीर्ण: भविष्यसि।
*(अन्यथा = नहीं तो; 'परिश्रम करो नहीं तो अनुत्तीर्ण होगे' — 'अन्यथा' उचित है)*

vi) त्वं साम्प्रतम् कुत्र गच्छसि ?
*(साम्प्रतम् = अभी/इस समय; जातु = कभी — 'अभी कहाँ जा रहे हो' के लिए 'साम्प्रतम्' उचित है)*

vii) यूयम् नूनम् ध्यानेन पठत।
*(नूनम् = निश्चय ही; बाहम् अशुद्ध है — 'नूनम्' उचित है)*

viii) श्याम: एव पठति श्यामा न।
*(एव = ही; 'श्याम ही पढ़ता है, श्यामा नहीं' — 'एव' उचित है)*

ix) छात्रा: पुस्तकम् विना न शोभन्ते।
*(विना = बिना; 'छात्र पुस्तक के बिना शोभा नहीं पाते' — 'विना' उचित है)*

x) यथा वप्स्यसि तथा फलं प्राप्स्यसि।
*(यथा...तथा = जैसा...वैसा — यह सहसम्बन्धी अव्यय-युगल है; 'तथा' उचित है)*

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