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Chapter 33 of 36
NCERT Solutions

अशुद्धिसंशोधनम्

CBSE · Class 10 · Sanskrit

NCERT Solutions for अशुद्धिसंशोधनम् — CBSE Class 10 Sanskrit.

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20 Questions Solved · 1 Section

अशुद्धिसंशोधनम् — अभ्यास:

1(i)वयं चित्रं पश्यन्ति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'वयं' उत्तमपुरुष बहुवचन है, अतः क्रिया भी उत्तमपुरुष बहुवचन होनी चाहिए। 'पश्यन्ति' प्रथमपुरुष बहुवचन है।

नियम: कर्ता और क्रिया में पुरुष तथा वचन की एकता होनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
वयं चित्रं पश्यामः ।\text{वयं चित्रं पश्यामः ।}
1(ii)भवान् भोजनं खाद ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'भवान्' (आप) के लिए आदरसूचक क्रिया प्रयुक्त होती है। 'खाद' मध्यमपुरुष एकवचन का लोट्लकार रूप है जो 'त्वम्' के लिए उचित है, 'भवान्' के लिए नहीं।

नियम: 'भवान्' के साथ प्रथमपुरुष एकवचन की क्रिया प्रयुक्त होती है।

शुद्ध वाक्य:
भवान् भोजनं खादतु ।\text{भवान् भोजनं खादतु ।}
1(iii)त्वं पाठं स्मरतु ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'त्वं' मध्यमपुरुष एकवचन है। 'स्मरतु' प्रथमपुरुष एकवचन लोट्लकार का रूप है।

नियम: 'त्वं' के साथ मध्यमपुरुष एकवचन की क्रिया आनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
त्वं पाठं स्मर ।\text{त्वं पाठं स्मर ।}
1(iv)स: पीत: वस्त्रं धारयति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'वस्त्रं' नपुंसकलिंग है, अतः विशेषण भी नपुंसकलिंग होना चाहिए। 'पीत:' पुल्लिंग प्रथमा एकवचन है।

नियम: विशेषण और विशेष्य में लिंग, वचन तथा विभक्ति की एकता होनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
स: पीतं वस्त्रं धारयति ।\text{स: पीतं वस्त्रं धारयति ।}
1(v)त्रीणि वृक्षा: तत्र शोभन्ते ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'वृक्ष:' पुल्लिंग शब्द है। 'त्रीणि' नपुंसकलिंग बहुवचन की संख्या है। पुल्लिंग के साथ 'त्रयः' आना चाहिए।

नियम: संख्यावाचक विशेषण और विशेष्य में लिंग की एकता होनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
त्रयः वृक्षाः तत्र शोभन्ते ।\text{त्रयः वृक्षाः तत्र शोभन्ते ।}
1(vi)ता: महिला: न गमिष्यति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'ता: महिला:' प्रथमपुरुष बहुवचन (स्त्रीलिंग) है। 'गमिष्यति' प्रथमपुरुष एकवचन है।

नियम: कर्ता बहुवचन है तो क्रिया भी बहुवचन होनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
ताः महिलाः न गमिष्यन्ति ।\text{ताः महिलाः न गमिष्यन्ति ।}
1(vii)त्वम् किं क्रियते ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'त्वम्' कर्तृवाच्य का कर्ता है। 'क्रियते' कर्मवाच्य/भाववाच्य का रूप है। कर्तृवाच्य में 'करोषि' आना चाहिए।

नियम: 'त्वम्' के साथ कर्तृवाच्य में मध्यमपुरुष एकवचन की क्रिया आती है।

शुद्ध वाक्य:
त्वं किं करोषि ।\text{त्वं किं करोषि ।}
1(viii)पिता श्व: आगच्छति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'श्व:' (कल/भविष्य में) के साथ भविष्यत्काल (लृट्लकार) की क्रिया आनी चाहिए। 'आगच्छति' वर्तमानकाल (लट्लकार) है।

नियम: 'श्व:' के साथ लृट्लकार का प्रयोग होता है।

शुद्ध वाक्य:
पिता श्वः आगमिष्यति ।\text{पिता श्वः आगमिष्यति ।}
1(ix)युष्माभिः किं पठन्ति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'युष्माभिः' कर्मवाच्य/भाववाच्य में कर्ता है (तृतीया विभक्ति), अतः क्रिया भाववाच्य में प्रथमपुरुष एकवचन होनी चाहिए। अथवा कर्तृवाच्य में 'यूयं पठथ' होना चाहिए।

नियम: 'युष्माभिः' के साथ भाववाच्य में 'पठ्यते' आता है।

शुद्ध वाक्य:
युष्माभिः किं पठ्यते ।\text{युष्माभिः किं पठ्यते ।}
1(x)स: तत्र न सन्ति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'स:' प्रथमपुरुष एकवचन है। 'सन्ति' प्रथमपुरुष बहुवचन है।

नियम: कर्ता एकवचन है तो क्रिया भी एकवचन होनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
सः तत्र न अस्ति ।\text{सः तत्र न अस्ति ।}
1(xi)अमितेन एतत् कार्यं करोति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'अमितेन' तृतीया विभक्ति है जो कर्मवाच्य/भाववाच्य में प्रयुक्त होती है। अतः क्रिया भी कर्मवाच्य में होनी चाहिए — 'क्रियते'।

नियम: तृतीया विभक्ति के कर्ता के साथ कर्मवाच्य की क्रिया आती है।

शुद्ध वाक्य:
अमितेन एतत् कार्यं क्रियते ।\text{अमितेन एतत् कार्यं क्रियते ।}
1(xii)युयं तत्र न गन्तव्यम् ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'यूयं' (युष्मद् प्रथमा बहुवचन) के साथ विधिवाचक प्रयोग में 'युष्माभिः' (तृतीया) आना चाहिए तथा 'गन्तव्यम्' के साथ तृतीया विभक्ति का कर्ता प्रयुक्त होता है।

नियम: तव्यत् प्रत्ययान्त (गन्तव्यम्) के साथ कर्ता तृतीया विभक्ति में होता है।

शुद्ध वाक्य:
युष्माभिः तत्र न गन्तव्यम् ।\text{युष्माभिः तत्र न गन्तव्यम् ।}
1(xiii)मया एतानि फलानि खादितव्यम् ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'एतानि फलानि' नपुंसकलिंग बहुवचन है। तव्यत् प्रत्ययान्त विशेषण कर्म के लिंग-वचन के अनुसार होता है। 'खादितव्यम्' एकवचन है।

नियम: तव्यत् प्रत्ययान्त पद कर्म के लिंग और वचन के अनुसार बदलता है।

शुद्ध वाक्य:
मया एतानि फलानि खादितव्यानि ।\text{मया एतानि फलानि खादितव्यानि ।}
1(xiv)कन्या: पाठं पठति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'कन्या:' प्रथमा बहुवचन है। 'पठति' प्रथमपुरुष एकवचन है।

नियम: कर्ता बहुवचन है तो क्रिया भी बहुवचन होनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
कन्याः पाठं पठन्ति ।\text{कन्याः पाठं पठन्ति ।}
1(xv)अम्बा भोजनं पचन्ति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'अम्बा' प्रथमपुरुष एकवचन (स्त्रीलिंग) है। 'पचन्ति' प्रथमपुरुष बहुवचन है।

नियम: कर्ता एकवचन है तो क्रिया भी एकवचन होनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
अम्बा भोजनं पचति ।\text{अम्बा भोजनं पचति ।}
1(xvi)तेन भोजनं खादनीयानि ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'भोजनं' नपुंसकलिंग एकवचन है। 'खादनीयानि' नपुंसकलिंग बहुवचन है। विधेय-विशेषण कर्म के वचन के अनुसार होना चाहिए।

नियम: अनीयर् प्रत्ययान्त पद कर्म के लिंग-वचन के अनुसार होता है।

शुद्ध वाक्य:
तेन भोजनं खादनीयम् ।\text{तेन भोजनं खादनीयम् ।}
1(xvii)अम्बा तत्र सन्ति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'अम्बा' एकवचन है। 'सन्ति' बहुवचन है।

नियम: कर्ता और क्रिया में वचन की एकता होनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
अम्बा तत्र अस्ति ।\text{अम्बा तत्र अस्ति ।}
1(xviii)त्वम् जलं पानीयम् ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'त्वम्' कर्तृवाच्य का कर्ता है। 'पानीयम्' अनीयर् प्रत्ययान्त विशेषण है, क्रिया नहीं। कर्तृवाच्य में क्रिया 'पिब' (लोट्) या 'पिबसि' (लट्) होनी चाहिए। अथवा भाववाच्य में 'त्वया जलं पातव्यम्' होगा।

नियम: वाक्य में क्रिया का होना आवश्यक है; 'त्वम्' के साथ मध्यमपुरुष एकवचन की क्रिया आती है।

शुद्ध वाक्य:
त्वं जलं पिब ।\text{त्वं जलं पिब ।}
1(xix)ते लेखान् लिखति ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'ते' प्रथमपुरुष बहुवचन है। 'लिखति' प्रथमपुरुष एकवचन है।

नियम: कर्ता बहुवचन है तो क्रिया भी बहुवचन होनी चाहिए।

शुद्ध वाक्य:
ते लेखान् लिखन्ति ।\text{ते लेखान् लिखन्ति ।}
1(xx)अस्माभिः फलानि खाद्यते ।Show solution
अशुद्धि की पहचान: 'फलानि' नपुंसकलिंग बहुवचन कर्म है। कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के वचन के अनुसार होती है। 'खाद्यते' एकवचन है।

नियम: कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के पुरुष और वचन के अनुसार होती है।

शुद्ध वाक्य:
अस्माभिः फलानि खाद्यन्ते ।\text{अस्माभिः फलानि खाद्यन्ते ।}

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