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Chapter 25 of 36
NCERT Solutions

अव्ययानि

CBSE · Class 10 · Sanskrit

NCERT Solutions for अव्ययानि — CBSE Class 10 Sanskrit.

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7 Questions Solved · 1 Section

अभ्यास: — अव्ययानि (दशमकक्षा)

1अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा अव्ययपदानि चित्वा लिखत —
(i) एकदा तस्य भार्या पितृगृहं प्रति चलिता।
(ii) भवान् कुत: भयात् पलायित:।
(iii) तत्र गम्यताम्।
(iv) त्वं सत्वरं चल।
(v) तेन सदृशं न अस्ति।
(vi) गीता सुगीता च वदत:।
(vii) यदा स: पठित तदा एव शोभते।
(viii) तापसौ लवकुशौ तत: प्रविशत:।
(ix) अलम् अतिदाक्षिण्येन।
(x) अहम् अपि श्रावयामि।
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दिया गया: दस वाक्य जिनमें से अव्ययपद चुनने हैं।

अव्यय की परिभाषा: जो शब्द लिङ्ग, वचन, विभक्ति आदि से अपरिवर्तित रहते हैं, वे अव्यय कहलाते हैं।

उत्तर:

| वाक्य | अव्ययपद |
|---|---|
| (i) एकदा तस्य भार्या पितृगृहं प्रति चलिता। | एकदा, प्रति |
| (ii) भवान् कुत: भयात् पलायित:। | कुत: |
| (iii) तत्र गम्यताम्। | तत्र |
| (iv) त्वं सत्वरं चल। | सत्वरम् |
| (v) तेन सदृशं अस्ति। | |
| (vi) गीता सुगीता वदत:। | |
| (vii) यदा स: पठित तदा एव शोभते। | यदा, तदा, एव |
| (viii) तापसौ लवकुशौ तत: प्रविशत:। | तत: |
| (ix) अलम् अतिदाक्षिण्येन। | अलम् |
| (x) अहम् अपि श्रावयामि। | अपि |
2उचिताव्ययपदै: रिक्तस्थानानि पूर्यत —
मञ्जूषा: सर्वेष् एव, इति, ननु, लवम्, तत्र, उच्चै:, तथापि, बहुधा, मा
(i) मम गुरु: ______________ भगवान् वाल्मीकि:।
(ii) क: ______________ भणति?
(iii) कुपिता सा ______________ वदति।
(iv) त्वं ______________ गच्छ।
(v) यूयं चापलं ______________ कुरुत।
(vi) कृषीवल: बहुवारं प्रयत्नमकरोत् ______________ वृष: नोत्थित:।
(vii) कृषक: बलीवर्द ______________ पीडयति।
(viii) बहूनि अपत्यानि मे सन्ति ______________ सत्यम्।
(ix) सर्वेषु अपत्येषु जननी तुल्यवत्सला ______________।
(x) ______________ जलोपप्लव: सञ्जात:।
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दिया गया: मञ्जूषा में अव्ययपद — सर्वेष् एव, इति, ननु, लवम्, तत्र, उच्चै:, तथापि, बहुधा, मा

अव्ययों का उचित प्रयोग करते हुए रिक्तस्थान पूर्ति:

(i) मम गुरु: इति भगवान् वाल्मीकि:।

(ii) क: ननु भणति?

(iii) कुपिता सा उच्चै: वदति।

(iv) त्वं तत्र गच्छ।

(v) यूयं चापलं मा कुरुत।

(vi) कृषीवल: बहुवारं प्रयत्नमकरोत् तथापि वृष: नोत्थित:।

(vii) कृषक: बलीवर्द बहुधा पीडयति।

(viii) बहूनि अपत्यानि मे सन्ति लवम् सत्यम्।

(ix) सर्वेषु अपत्येषु जननी तुल्यवत्सला सर्वेष् एव

(x) तत्र जलोपप्लव: सञ्जात:।

नोट: कुछ रिक्तस्थानों में मञ्जूषा के अव्यय संदर्भानुसार प्रयुक्त किए गए हैं।
3विपर्ययाव्ययपदै: सह योजयत — (चित्र पर आधारित प्रश्न; सामान्य विपरीतार्थक अव्ययों का मिलान करें)Show solution
दिया गया: विपरीतार्थक (विपर्यय) अव्ययपदों का मिलान करना है।

नोट: प्रश्न में दिए गए चित्र (images) उपलब्ध नहीं हैं, अतः सामान्य विपरीतार्थक अव्ययों के आधार पर उत्तर दिया जा रहा है।

सामान्य विपर्ययाव्ययपद:

| अव्यय | विपर्यय (विपरीत) अव्यय |
|---|---|
| अद्य (आज) | श्वः (कल) |
| इह (यहाँ) | तत्र (वहाँ) |
| सदा (हमेशा) | कदापि न (कभी नहीं) |
| उच्चै: (ज़ोर से) | मन्दम् (धीरे) |
| अधुना (अभी) | पुरा (पहले) |
| यदा (जब) | तदा (तब) |
| यत्र (जहाँ) | तत्र (वहाँ) |
| अपि (भी) | न (नहीं) |

*(विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक में दिए गए चित्र के अनुसार मिलान करें।)*
4उचितार्थ: सह मेलनं कुरुत —
(i) पुरा — नहीं/मत
(ii) उच्चै: — हमेशा
(iii) नूनम् — परंतु
(iv) इत्थम् — ही
(v) सर्वथा — इस प्रकार
(vi) एवम् — सब प्रकार से
(vii) एव — इस प्रकार से
(viii) परम् — निश्चय
(ix) सदा — ज़ोर से
(x) मा — प्राचीनकाल में
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दिया गया: अव्ययपद और उनके हिन्दी अर्थ — इनका सही मिलान करना है।

अव्यय का अर्थ-ज्ञान के आधार पर सही मिलान:

| अव्यय | सही अर्थ |
|---|---|
| (i) पुरा | प्राचीनकाल में |
| (ii) उच्चै: | ज़ोर से |
| (iii) नूनम् | निश्चय |
| (iv) इत्थम् | इस प्रकार |
| (v) सर्वथा | सब प्रकार से |
| (vi) एवम् | इस प्रकार से |
| (vii) एव | ही |
| (viii) परम् | परंतु |
| (ix) सदा | हमेशा |
| (x) मा | नहीं/मत |

स्मरणीय बिन्दु:
- पुरापुरा = प्राचीनकाल में (कालवाचक अव्यय)
- उच्चै:उच्चै: = ज़ोर से / ऊँचे स्वर से
- नूनम्नूनम् = निश्चय ही
- मामा = निषेधवाचक अव्यय (मत/नहीं)
- एवएव = ही (निश्चयवाचक)
- परम्परम् = परंतु/किन्तु
5उचिताव्ययपदै: सह रिक्तस्थानानि पूर्यत —
मञ्जूषा: यथा-तथा, यदि-तर्हि, यथैव-तथैव, यावत्-तावत्, यत्र-तत्र
(i) ______ लवः ______ कुशः।
(ii) ______ अहं कृष्णवर्णः ______ त्वं किं गौरः।
(iii) ______ गुरुः वदति ______ शिष्यः करोति।
(iv) ______ वृक्षः ______ खगाः।
(v) ______ लता आगच्छति ______ त्वं तिष्ठ।
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दिया गया: युगल अव्ययपद (correlative indeclinables) — यथा-तथा, यदि-तर्हि, यथैव-तथैव, यावत्-तावत्, यत्र-तत्र

नियम: ये अव्यय सदा जोड़े में प्रयुक्त होते हैं —
- यथा...तथायथा...तथा = जैसा...वैसा
- यदि...तर्हियदि...तर्हि = यदि...तो
- यथैव...तथैवयथैव...तथैव = जैसे ही...वैसे ही
- यावत्...तावत्यावत्...तावत् = जब तक...तब तक
- यत्र...तत्रयत्र...तत्र = जहाँ...वहाँ

उत्तर:

(i) यथा लवः तथा कुशः।
*(जैसा लव है, वैसा ही कुश है।)*

(ii) यदि अहं कृष्णवर्णः तर्हि त्वं किं गौरः।
*(यदि मैं काले रंग का हूँ, तो क्या तुम गोरे हो?)*

(iii) यथैव गुरुः वदति तथैव शिष्यः करोति।
*(जैसे ही गुरु कहते हैं, वैसे ही शिष्य करता है।)*

(iv) यत्र वृक्षः तत्र खगाः।
*(जहाँ वृक्ष है, वहाँ पक्षी हैं।)*

(v) यावत् लता आगच्छति तावत् त्वं तिष्ठ।
*(जब तक लता आती है, तब तक तुम रुको।)*
6उदाहरणानुसारं लिखत —
(i) श्वः सोमवासरः
(ii) से (v) — (चित्र पर आधारित)
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दिया गया: उदाहरण के अनुसार अव्ययों का प्रयोग करते हुए वाक्य लिखने हैं।

उदाहरण: श्वः सोमवासरः। (कल सोमवार है।)

नोट: प्रश्न (ii) से (v) चित्र (image) पर आधारित हैं जो उपलब्ध नहीं हैं। अतः उदाहरण के आधार पर कालवाचक अव्ययों का प्रयोग करते हुए सामान्य उत्तर दिए जा रहे हैं:

(i) श्वः सोमवासरः। *(कल सोमवार है।)*

(ii) ह्यः रविवासरः आसीत्। *(कल रविवार था।)*

(iii) अद्य मङ्गलवासरः अस्ति। *(आज मंगलवार है।)*

(iv) परश्वः बुधवासरः भविष्यति। *(परसों बुधवार होगा।)*

(v) सदा सत्यं वदेत्। *(सदा सत्य बोलना चाहिए।)*

*(विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक में दिए गए चित्र के अनुसार उत्तर लिखें।)*
7पर्यायाव्ययपदानि लिखत — (चित्र पर आधारित प्रश्न)Show solution
दिया गया: पर्यायवाची (समानार्थक) अव्ययपद लिखने हैं।

नोट: प्रश्न चित्र (images) पर आधारित है जो उपलब्ध नहीं हैं। अतः सामान्य पर्यायाव्ययपदों की सूची दी जा रही है:

| अव्यय | पर्याय (समानार्थक) अव्यय |
|---|---|
| (और) | तथा, अपि |
| (नहीं) | नहि, नैव |
| एव (ही) | खलु, तु |
| अपि (भी) | च, तु |
| इति (ऐसा) | एवम्, इत्थम् |
| सदा (हमेशा) | सर्वदा, नित्यम् |
| शीघ्रम् (जल्दी) | सत्वरम्, द्रुतम् |
| पुनः (फिर) | भूयः, अपुनः |
| अत्र (यहाँ) | इह |
| तत्र (वहाँ) | अमुत्र |

*(विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक में दिए गए चित्र के अनुसार उत्तर लिखें।)*

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