उपसर्ग (Part 3) — NCERT Solutions
CBSE · Class 10 · Sanskrit
NCERT Solutions for उपसर्ग (Part 3), CBSE Class 10 Sanskrit: 3 textbook questions solved step by step. Part of the CBSE Class 10 Sanskrit syllabus.
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अभ्यासकार्यम् — उपसर्ग (Chapter: उपसर्ग, Sanskrit Class 10)
1अधोलिखितेषु पदेषु उपसर्गान् धातून् च पृथक् कृत्वा लिखत—Show solution
नीचे प्रत्येक क्रियापद का उपसर्ग एवं धातु पृथक् करके लिखा गया है:
| क्रम | क्रियापद | उपसर्ग | धातु |
|---|---|---|---|
| i) | उत्तिष्ठतु | उत् | स्था |
| ii) | निरगच्छन् | निर् (नि:) | गम् |
| iii) | निस्सरतु | निस् (नि:) | सृ |
| iv) | संवदन्ति | सम् | वद् |
| v) | प्रत्यवदत् | प्रति | वद् |
| vi) | सुशोभते | सु | शुभ् |
| vii) | विशिष्यते | वि | शिष् (शिष्) |
| viii) | अन्वकरोत् | अनु | कृ |
| ix) | प्रसीदामि | प्र | सद् |
| x) | अवागच्छत् | अव + आ | गम् |
| xi) | उपविशामः | उप | विश् |
| xii) | उत्थास्यामः | उत् | स्था |
| xiii) | उन्नयनम् | उत् (उन्) | नी |
| xiv) | अपाकुर्वन् | अप + आ | कृ |
| xv) | विजयते | वि | जि |
| xvi) | परितुष्यति | परि | तुष् |
स्पष्टीकरण:
- उपसर्ग वे अव्यय-शब्द हैं जो धातु के पूर्व लगकर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं।
- संस्कृत में कुल 22 उपसर्ग माने जाते हैं: प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, आ, नि/नि:, दुर्/दुस्, वि, सु, उत्/उद्, अभि, प्रति, परि, उप, अधि, अपि, अति, आदि।
2कोष्ठकात् शुद्धपदं चित्वा रिक्तस्थाने लिखत—Show solution
प्रत्येक रिक्तस्थान के लिए शुद्ध पद का चयन एवं कारण:
i) हे प्रभो ! मयि प्रसीदतु ।
(प्रासीदतु/प्रसीदतु)
कारण: 'प्र + सद्' = प्रसीदतु (प्रसन्न होइए)। 'प्रासीदतु' अशुद्ध है क्योंकि 'प्रा' कोई उपसर्ग नहीं है।
ii) गुरु: शिष्यस्य अज्ञानम् अपहरति ।
(उपहरति/अपहरति)
कारण: 'अप + हृ' = अपहरति (दूर करना/हरण करना)। यहाँ अज्ञान को दूर करने का भाव है।
iii) वानरा: जनान् अनुकुर्वन्ति ।
(अनुकुर्वन्ति/अन्वकुर्वन्ति)
कारण: 'अनु + कृ' = अनुकुर्वन्ति (अनुकरण करना, वर्तमान काल)। 'अन्वकुर्वन्' भूतकाल का रूप है।
iv) अहं संस्कृतम् अवजानामि ।
(अवजानामि/अवाजानामि)
कारण: 'अव + ज्ञा' = अवजानामि (तुच्छ समझना)। 'अवाजानामि' अशुद्ध संधि-रूप है।
v) आजीवनम् सत्यम् एव वदनीयम्।
(आजीवनम्/आजीवन:)
कारण: 'आजीवनम्' अव्यय-रूप में प्रयुक्त होता है (जीवन-पर्यन्त)। 'आजीवन:' पुल्लिंग संज्ञा-रूप है जो यहाँ उचित नहीं।
vi) अध्यापक: प्रश्नान् पृच्छति। छात्रा: प्रतिवदन्ति ।
(प्रतिवदन्ति/संवदन्ति)
कारण: 'प्रति + वद्' = प्रतिवदन्ति (उत्तर देना)। प्रश्न के उत्तर में 'प्रति' उपसर्ग उचित है। 'संवदन्ति' का अर्थ है 'आपस में बात करना'।
vii) कामात् क्रोध: उद्भवति ।
(पराभवति/उद्भवति)
कारण: 'उत् + भू' = उद्भवति (उत्पन्न होना)। काम से क्रोध उत्पन्न होता है — यह गीता का प्रसिद्ध वचन है।
viii) सभायाम् विद्वांस: एव सुशोभन्ते ।
(सुशोभन्ते/सुशोभन्ति)
कारण: 'शुभ्' धातु आत्मनेपदी है, अतः 'सुशोभन्ते' शुद्ध है।
ix) चौर: रात्रौ धनम् अहरत् ।
(व्यहरत्/अहरत्)
कारण: 'अप + हृ' → यहाँ सामान्य चोरी के अर्थ में 'अहरत्' (हृ धातु, लङ् लकार) उचित है। 'व्यहरत्' का अर्थ 'व्यवहार करना' है।
x) माता पुत्र: च परस्परम् संवदत: ।
(प्रतिवदत:/संवदत:)
कारण: 'सम् + वद्' = संवदत: (आपस में बात करना)। 'परस्परम्' के साथ 'सम्' उपसर्ग उचित है।
xi) गुरु: आश्रमात् निर्गच्छति ।
(प्रविशति/निर्गच्छति)
कारण: 'आश्रमात्' (पञ्चमी विभक्ति = से/बाहर) के साथ 'निर् + गम्' = निर्गच्छति (बाहर जाना) उचित है।
xii) नागरिकाः एव स्वदेशम् उन्नयन्ति ।
(उद्द्यन्ति/उन्नयन्ति)
कारण: 'उत् + नी' = उन्नयन्ति (उन्नत करना)। देश को ऊपर उठाने के अर्थ में यह उचित है।
xiii) वयं चलचित्रं द्रष्टुम् अत्र आगच्छाम ।
(अवागच्छाम/आगच्छाम)
कारण: 'आ + गम्' = आगच्छाम (यहाँ आना)। 'अव + आ + गम्' = अवागच्छाम का अर्थ 'नीचे आना' होगा जो यहाँ उचित नहीं।
xiv) माता पुत्रम् संस्करोति ।
(संस्करोति/समकरोति)
कारण: 'सम् + स् + कृ' = संस्करोति (संस्कार करना)। 'समकरोति' अशुद्ध रूप है।
xv) नदी पर्वतात् प्रवहति ।
(प्रवहति/उद्द्वत)
कारण: 'प्र + वह्' = प्रवहति (प्रवाहित होना)। नदी पर्वत से प्रवाहित होती है। 'उद्द्वत' अशुद्ध रूप है।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in उपसर्ग for CBSE Class 10 Sanskrit?
Are these NCERT Solutions for उपसर्ग free?
How should I revise उपसर्ग for the CBSE Class 10 board exam?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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