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Chapter 27 of 36
NCERT Solutions

समास परिचय

CBSE · Class 10 · Sanskrit

NCERT Solutions for समास परिचय — CBSE Class 10 Sanskrit.

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4 Questions Solved · 1 Section

अभ्यासकार्यम् — समास परिचय

1उदाहरणमनुसृत्य रिक्तस्थानानां पूर्तिः कोष्ठकात् समुचितैः समस्तपदैः कुरुत—

उदाहरण— तौ लवकुशौ वाल्मीके: आश्रमे पठत: । (लवकुशे/ लवकुशौ)

i) ... जन: नित्यकर्म कृत्वा प्रातराशं करोति। (विशालवृक्ष:/ सुप्तोत्थित:)
ii) त्रयाणां लोकानां समाहार: ... इति कथ्यते। (त्रिलोकी/ त्रिलोकम्)
iii) कृषे: आश्रम: ... अस्ति। (प्रतिगृहम्/ उपगड्गम्)
iv) तव ... मलिनम् अस्ति। (पाणिपादा:/ पाणिपादम्)
v) ... सैनिक: ब्रणयुक्त: जात:। (स्वर्गपतित:/ अश्वपतित:)
vi) ... जीवनस्य उद्देश्या: सन्ति। (धर्मार्थकाममोक्षं/ धर्मार्थकाममोक्षाः:)
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दिया गया है: कोष्ठक में दो विकल्प हैं। वाक्य के अर्थ एवं व्याकरण (लिंग, वचन, विभक्ति) के अनुसार उचित समस्तपद चुनना है।

हल:

i) सुप्तोत्थित: जन: नित्यकर्म कृत्वा प्रातराशं करोति।
*(सुप्तात् उत्थित: = सुप्तोत्थित: — जो सोकर उठा हो, वह व्यक्ति नित्यकर्म करके नाश्ता करता है। यहाँ एकवचन पुल्लिंग प्रथमा विभक्ति चाहिए।)*

ii) त्रयाणां लोकानां समाहार: त्रिलोकम् इति कथ्यते।
*(समाहार द्वन्द्व में नपुंसकलिंग एकवचन होता है, अतः 'त्रिलोकम्' उचित है।)*

iii) कृषे: आश्रम: उपगड्गम् अस्ति।
*(गङ्गायाः समीपम् = उपगड्गम् — अव्ययीभाव समास। 'प्रतिगृहम्' का अर्थ 'प्रत्येक घर' होगा जो यहाँ उचित नहीं।)*

iv) तव पाणिपादम् मलिनम् अस्ति।
*(पाणी च पादौ च तेषां समाहार: = पाणिपादम् — समाहार द्वन्द्व, नपुंसकलिंग एकवचन। 'मलिनम्' नपुंसकलिंग है, अतः 'पाणिपादम्' उचित है।)*

v) अश्वपतित: सैनिक: व्रणयुक्त: जात:।
*(अश्वात् पतित: = अश्वपतित: — जो घोड़े से गिरा हो। यहाँ सन्दर्भ युद्ध का है।)*

vi) धर्मार्थकाममोक्षाः जीवनस्य उद्देश्या: सन्ति।
*(धर्म: च अर्थ: च काम: च मोक्ष: च = धर्मार्थकाममोक्षाः — इतरेतर द्वन्द्व, बहुवचन। 'उद्देश्या:' बहुवचन है, अतः बहुवचन रूप उचित है।)*
2अधोलिखितवाक्येषु स्थूलपदानि आश्रित्य समस्तपदं विग्रहं वा लिखत—

यथा— भिक्षुक: प्रत्येकं गृहं गच्छति। — एकम् एकम् इति

i) शरणम् आगत: तु सदैव रक्षणीय:।
ii) विद्या हीन: छात्र: न शोभते।
iii) असत्यं तु त्याज्यं भवति।
iv) राम: महाराज: आसीत्।
v) सीता च राम: च वनम् अगच्छताम्।
vi) तडाग: नीलोत्पलै: सुशोभते।
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दिया गया है: स्थूल (bold) पदों के आधार पर समस्तपद अथवा विग्रह लिखना है।

प्रयुक्त नियम: यदि स्थूलपद विग्रह के रूप में है तो समस्तपद लिखेंगे, और यदि समस्तपद है तो विग्रह लिखेंगे।

हल:

i) शरणम् आगत: → समस्तपद: शरणागत:
*(शरणम् आगत: = शरणागत: — द्वितीया तत्पुरुष समास)*

ii) विद्या हीन: → समस्तपद: विद्याहीन:
*(विद्यया हीन: = विद्याहीन: — तृतीया तत्पुरुष समास)*

iii) असत्यम् → विग्रह: न सत्यम्
*(न सत्यम् = असत्यम् — नञ् तत्पुरुष समास)*

iv) राम: महाराज: → विग्रह: महान् राज: राम:
*(महान् राजा = महाराज: — कर्मधारय समास; यहाँ 'राम: महाराज:' में 'महाराज:' समस्तपद है जिसका विग्रह 'महान् राजा' है।)*

v) सीता च राम: च → समस्तपद: सीतारामौ
*(सीता च राम: च = सीतारामौ — इतरेतर द्वन्द्व समास, द्विवचन)*

vi) नीलोत्पलै: → विग्रह: नीलानि उत्पलानि तैः
*(नीलम् उत्पलम् = नीलोत्पलम् — कर्मधारय समास; तृतीया बहुवचन रूप 'नीलोत्पलैः')*
3उदाहरणानि पठित्वा तदनुसारं विग्रहं समासनामानि च लिखत।

उदाहरण—
पाणी च पादौ च तेषां समाहार:— पाणिपादम् (समाहार द्वन्द्व)
माता च पिता च इति — मातापितरौ (इतरेतर द्वन्द्व)
माता च पिता च इति — पितरौ (एकशेष)

i) ब्राह्मणौ
ii) सुखदु:खम्
iii) शिरोग्रीवम्
iv) रामलक्ष्मणभरता:
v) अजौ
vi) बालका:
vii) शास्त्रप्रवीण:
viii) नरसिंह:
ix) प्रत्यक्षम्
x) दशानन:
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दिया गया है: समस्तपद दिए गए हैं। उनका विग्रह एवं समास का नाम लिखना है।

प्रयुक्त नियम:
- इतरेतर द्वन्द्व — दोनों पद प्रधान, द्विवचन/बहुवचन
- समाहार द्वन्द्व — समूह अर्थ, नपुंसकलिंग एकवचन
- एकशेष — एक पद शेष रहता है
- तत्पुरुष — उत्तरपद प्रधान
- कर्मधारय — विशेषण-विशेष्य
- अव्ययीभाव — पूर्वपद अव्यय
- बहुव्रीहि — अन्यपद प्रधान

हल:

| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
|---|---|---|
| i) ब्राह्मणौ | ब्राह्मण: च ब्राह्मण: च | एकशेष समास |
| ii) सुखदु:खम् | सुखं च दु:खं च तयोः समाहारः | समाहार द्वन्द्व |
| iii) शिरोग्रीवम् | शिरश्च ग्रीवा च तयोः समाहारः | समाहार द्वन्द्व |
| iv) रामलक्ष्मणभरताः | राम: च लक्ष्मण: च भरत: च | इतरेतर द्वन्द्व |
| v) अजौ | अज: च अज: च (अजा च अज: च) | एकशेष समास |
| vi) बालकाः | बालक: च बालक: च बालक: च (अनेके) | एकशेष समास |
| vii) शास्त्रप्रवीणः | शास्त्रे प्रवीणः | सप्तमी तत्पुरुष समास |
| viii) नरसिंहः | नर: एव सिंहः (नरः च सिंहः च) | कर्मधारय समास |
| ix) प्रत्यक्षम् | अक्षम् अक्षम् प्रति (अक्षस्य समीपम्) | अव्ययीभाव समास |
| x) दशाननः | दश आननानि यस्य सः | बहुव्रीहि समास |

विशेष टिप्पणी:
- 'नरसिंहः' में 'नर: एव सिंहः' — उपमान कर्मधारय (नर के समान सिंह) अथवा 'नर: च सिंह: च' इतरेतर द्वन्द्व भी हो सकता है, किन्तु प्रचलित अर्थ में कर्मधारय है।
- 'प्रत्यक्षम्' = प्रति + अक्षम् — अव्ययीभाव समास।
4अधोलिखितवाक्येषु समस्तपदं चित्वा तस्य विग्रहं लिखत—

i) विष्णु: पीताम्बरं धारयति।
ii) भवत: कार्यं निर्विघ्नं समापयेत्।
iii) दुर्गासप्तशती पठितव्या।
iv) शरविद्ध: हंस: भूमौ पतित:।
v) वृद्ध: पुत्रपौत्रम् दृष्ट्वा प्रसीदति।
vi) विष्णु: चक्रपाणि: कथ्यते।
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दिया गया है: वाक्यों में से समस्तपद चुनकर उनका विग्रह लिखना है।

प्रयुक्त नियम: समस्तपद वह पद होता है जो दो या अधिक पदों के मेल से बना हो। विग्रह में उन पदों को पृथक् करके विभक्ति सहित लिखते हैं।

हल:

| समस्तपदम् | विग्रहम् | समासनाम |
|---|---|---|
| i) पीताम्बरम् | पीतम् अम्बरम् यस्य सः (पीतम् च तत् अम्बरम् च) | बहुव्रीहि समास (अथवा कर्मधारय) |
| ii) निर्विघ्नम् | विघ्नं विना / निर्गतं विघ्नं यस्मात् तत् | अव्ययीभाव / बहुव्रीहि समास |
| iii) दुर्गासप्तशती | दुर्गायाः सप्तशती | षष्ठी तत्पुरुष समास |
| iv) शरविद्धः | शरेण विद्धः | तृतीया तत्पुरुष समास |
| v) पुत्रपौत्रम् | पुत्र: च पौत्र: च तयोः समाहारः | समाहार द्वन्द्व |
| vi) चक्रपाणिः | चक्रं पाणौ यस्य सः | बहुव्रीहि समास |

विस्तृत विवरण:

i) पीताम्बरम्:
- समस्तपद: पीताम्बरम्
- विग्रह: पीतम् अम्बरम् यस्य सः = पीताम्बरः (विष्णुः)
- समास: बहुव्रीहि (अन्यपद = विष्णु प्रधान)

ii) निर्विघ्नम्:
- समस्तपद: निर्विघ्नम्
- विग्रह: विघ्नं विना = निर्विघ्नम्
- समास: अव्ययीभाव समास

iii) दुर्गासप्तशती:
- समस्तपद: दुर्गासप्तशती
- विग्रह: दुर्गायाः सप्तशती
- समास: षष्ठी तत्पुरुष समास

iv) शरविद्धः:
- समस्तपद: शरविद्धः
- विग्रह: शरेण विद्धः
- समास: तृतीया तत्पुरुष समास

v) पुत्रपौत्रम्:
- समस्तपद: पुत्रपौत्रम्
- विग्रह: पुत्र: च पौत्र: च तयोः समाहारः
- समास: समाहार द्वन्द्व (नपुंसकलिंग एकवचन)

vi) चक्रपाणिः:
- समस्तपद: चक्रपाणिः
- विग्रह: चक्रं पाणौ यस्य सः
- समास: बहुव्रीहि समास (विष्णु का विशेषण)

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