अन्योक्तय
CBSE · Class 10 · Sanskrit
NCERT Solutions for अन्योक्तय — CBSE Class 10 Sanskrit.
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अभ्यास: — अन्योक्तय: (Chapter Exercises)
1(क)कस्य शोभा एकेन राजहंसेन भवति?Show solution
(सरोवर की शोभा एक राजहंस से होती है।)
1(ख)सरसः तीरे के वसन्ति?Show solution
(सरोवर के तीर पर बगुले रहते हैं।)
1(ग)कः पिपासितः प्रियते?Show solution
(चातक प्यासा मरता है।)
1(घ)के रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते?Show solution
(भूमि पर रहने वाले भ्रमर आम की मंजरियों का आश्रय लेते हैं।)
1(ङ)अम्भोदा: कुत्र सन्ति?Show solution
(बादल आकाश में हैं।)
2(क)सरसः शोभा केन भवति?Show solution
(सरोवर की शोभा एक राजहंस से होती है, हजारों बगुलों से नहीं।)
2(ख)चातकः किमर्थ मानी कथ्यते?Show solution
(चातक को स्वाभिमानी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह प्यासा होने पर भी केवल इन्द्र से ही माँगता है, किसी अन्य से नहीं।)
2(ग)मीनः कदा दीनां गतिं प्राप्नोति?Show solution
(जब सरोवर सिकुड़ने लगता है तब मछली दीन गति को प्राप्त होती है।)
2(घ)कानि पूर्यित्वा जलदः रिक्तः भवति?Show solution
(मेघ सूर्य की गर्मी से तपे पर्वतों को शीतल करके, दावाग्नि से पीड़ित वनों को शान्त करके तथा सैकड़ों नदी-नालों को भरकर रिक्त हो जाता है।)
2(ङ)वृष्टिभिः वसुधां के आर्द्र्यन्ति?Show solution
(कुछ बादल वर्षा से पृथ्वी को भिगोते हैं।)
3(क)अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — मालाकार: तोयैः तरोः पुष्टिं करोति।Show solution
(रेखाङ्कितपदम् 'तोयैः' — करणकारकस्य प्रश्नः 'कैः' इति भवति।)
3(ख)अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — भूज्ञाः रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते।Show solution
(रेखाङ्कितपदम् 'भूज्ञाः' — कर्तृकारकस्य प्रश्नः 'के' इति भवति।)
3(ग)अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — पतज्ञाः अम्बरपथम् आपेदिरे।Show solution
(रेखाङ्कितपदम् 'अम्बरपथम्' — कर्मकारकस्य प्रश्नः 'कम्' इति भवति।)
3(घ)अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — जलदः नानानदीनदशतानि पूर्यित्वा रिक्तोऽस्ति।Show solution
(रेखाङ्कितपदम् 'नानानदीनदशतानि' — कर्मकारकस्य प्रश्नः 'कानि' इति भवति।)
3(ङ)अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत — चातकः वने वसति।Show solution
(रेखाङ्कितपदम् 'वने' — अधिकरणकारकस्य प्रश्नः 'कुत्र' इति भवति।)
4(अ)अधोलिखितयोः श्लोकयोः भावार्थं स्वीकृतभाषया लिखत — तोयैरल्पैरपि ... वारिदेन।Show solution
भावार्थः (हिन्दी में):
इस श्लोक में कवि माली (मालाकार) के माध्यम से एक सच्चे हितैषी की प्रशंसा करता है। कवि कहता है — हे माली! भयंकर गर्मी (ग्रीष्म ऋतु) में जब सूर्य अत्यन्त तीव्र था, तब तुमने थोड़े से जल से भी करुणापूर्वक इस वृक्ष की जो पुष्टि (पोषण) की, वह पुष्टि वर्षा ऋतु के उस मेघ से भी सम्भव नहीं जो चारों ओर जलधाराओं की वर्षा करता है।
भाव यह है कि संकट के समय थोड़ी सी सहायता भी बहुत मूल्यवान होती है। सुख के समय की गई बड़ी सहायता भी उतनी महत्त्वपूर्ण नहीं होती जितनी कठिन समय में की गई छोटी सहायता।
4(आ)अधोलिखितयोः श्लोकयोः भावार्थं स्वीकृतभाषया लिखत — रे रे चातक ... दीनं वचः।Show solution
भावार्थः (हिन्दी में):
इस श्लोक में कवि चातक पक्षी के माध्यम से मनुष्य को सावधान करता है। कवि कहता है — हे मित्र चातक! सावधान मन से एक क्षण सुनो। आकाश में बहुत से बादल हैं, परन्तु सभी एक जैसे नहीं होते। कुछ बादल वर्षा से धरती को भिगोते हैं और कुछ केवल व्यर्थ गरजते हैं। इसलिए जो भी बादल दिखे, उसके सामने दीन (याचना भरे) वचन मत बोलो।
भाव यह है कि संसार में सभी लोग एक जैसे नहीं होते। कुछ लोग वास्तव में सहायता करते हैं और कुछ केवल दिखावा करते हैं। अतः हर किसी के सामने अपनी दीनता प्रकट नहीं करनी चाहिए। केवल सच्चे और परखे हुए व्यक्ति से ही सहायता माँगनी चाहिए।
5(अ)अधोलिखितयोः श्लोकयोः अन्वयं लिखत — आपेदिरे ... कतमां गतिमभ्युपैति।Show solution
अन्वयः:
त्वयि (सरसि) सङ्कोचम् अञ्चति (सति), पतज्ञाः परितः अम्बरपथम् आपेदिरे, भूज्ञाः रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते। हन्त! दीनदीनः मीनः नु कतमां गतिम् अभ्युपैतु?
भावार्थ-संकेत: जब तुम (सरोवर) सिकुड़ने लगते हो, तब पक्षी आकाश में उड़ जाते हैं, भ्रमर आम की मंजरियों का आश्रय लेते हैं, किन्तु बेचारी मछली कहाँ जाए?
5(आ)अधोलिखितयोः श्लोकयोः अन्वयं लिखत — आश्वास्य ... सैव तवोत्तमा श्रीः।Show solution
अन्वयः:
हे जलद! तपनोष्णतप्तं पर्वतकुलम् आश्वास्य, उद्दामदावविधुराणि काननानि च आश्वास्य, नानानदीनदशतानि पूर्यित्वा च यत् (त्वम्) रिक्तः असि, तव सा एव उत्तमा श्रीः।
भावार्थ-संकेत: हे मेघ! सूर्य की गर्मी से तपे पर्वतों को, दावाग्नि से पीड़ित वनों को शान्त करके और सैकड़ों नदी-नालों को भरकर जो तुम रिक्त (खाली) हो गए हो — यही तुम्हारी सबसे बड़ी शोभा है। परोपकार में सर्वस्व न्योछावर कर देना ही सच्ची महानता है।
6(i)(क)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — ... + ... = निपीतान्यम्बूनिShow solution
नियमः: इ/ई + अ/आ/इ/ई/उ/ऊ आदि स्वर — यण् सन्धि। इ → य्
(अन्तिम 'इ' + 'अ' → 'य' + 'अ' = 'या' → 'न्यम्')
6(i)(ख)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — ... + उपकारः = कृतोपकारःShow solution
नियमः: गुण सन्धि — अ + उ = ओ
6(i)(ग)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — तपन + ... = तपनोष्णतप्तम्Show solution
नियमः: गुण सन्धि — अ + उ = ओ
6(i)(घ)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — तव + उत्तमा = ...Show solution
नियमः: गुण सन्धि — अ + उ = ओ
6(i)(ङ)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — न + एतादृशाः = ...Show solution
नियमः: वृद्धि सन्धि — अ + ए = ऐ
6(ii)(क)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — ... + ... = कोऽपिShow solution
नियमः: विसर्ग सन्धि (पूर्वरूप) — कः + अपि → को + ऽपि
(विसर्ग के पूर्व अ हो और बाद में भी अ हो तो विसर्ग → ओ, और अ का लोप होकर ऽ)
6(ii)(ख)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — ... + ... = रिक्तोऽसिShow solution
नियमः: विसर्ग सन्धि — रिक्तः + असि → रिक्तो + ऽसि
6(ii)(ग)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — मीनः + अयम् = ...Show solution
नियमः: विसर्ग सन्धि — मीनः + अयम् → मीनो + ऽयम्
6(ii)(घ)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — सर्वे + अपि = ...Show solution
नियमः: पूर्वरूप सन्धि — ए + अ → ए + ऽ (अ का लोप)
6(iii)(क)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — खगः + मानी = ...Show solution
नियमः: विसर्ग सन्धि — खगः (अकारान्त) + म → खगो मानी
(विसर्ग से पूर्व अ हो और बाद में अघोष व्यञ्जन न हो तो विसर्ग → ओ)
6(iii)(ख)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — ... + नु = मीनो नुShow solution
नियमः: विसर्ग सन्धि — मीनः + न → मीनो नु
6(iii)(ग)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — पिपासितः + वा = ...Show solution
नियमः: विसर्ग सन्धि — पिपासितः + व → पिपासितो वा
6(iii)(घ)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — ... + ... = पुरतो माShow solution
नियमः: विसर्ग सन्धि — पुरतः + म → पुरतो मा
6(iv)(क)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — तोयैः + अल्पैः = ...Show solution
नियमः: विसर्ग सन्धि (रुत्व) — विसर्ग से पूर्व इ/उ/ए/ओ/ऐ/औ हो और बाद में स्वर या घोष व्यञ्जन हो तो विसर्ग → र्
6(iv)(ख)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — ... + अपि = अल्पैरपिShow solution
नियमः: विसर्ग सन्धि (रुत्व) — ऐः + अ → ऐर् + अ
6(iv)(ग)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — तरोः + अपि = ...Show solution
नियमः: विसर्ग सन्धि (रुत्व) — ओः + अ → ओर् + अ
6(iv)(घ)सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत — ... + आर्द्रयन्ति = वृष्टिभिरार्द्यन्तिShow solution
नियमः: विसर्ग सन्धि (रुत्व) — इः + आ → इर् + आ
7(क)विग्रहपदैः समस्तपदानि रचयत — राजा च असौ हंसः = ...Show solution
समासः: कर्मधारय समासः (विशेषण-विशेष्य)
7(ख)विग्रहपदैः समस्तपदानि रचयत — भीमः च असौ भानुः = ...Show solution
समासः: कर्मधारय समासः
7(ग)विग्रहपदैः समस्तपदानि रचयत — अम्बरम् एव पन्थाः = ...Show solution
समासः: कर्मधारय समासः (मध्यमपदलोपी)
7(घ)विग्रहपदैः समस्तपदानि रचयत — उत्तमा च इयम् श्रीः = ...Show solution
समासः: कर्मधारय समासः
7(ङ)विग्रहपदैः समस्तपदानि रचयत — सावधानं च तत् मनः, तेन = ...Show solution
समासः: कर्मधारय समासः (तृतीयान्त)
(सावधान + मनस् → सावधानमनसा — तृतीया विभक्ति में)
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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