सूक्तय
CBSE · Class 10 · Sanskrit
NCERT Solutions for सूक्तय — CBSE Class 10 Sanskrit.
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अभ्यासः — सूक्तयः (Chapter: सूक्तयः, Sanskrit Class 10)
1(क)पिता पुत्राय बाल्ये किं यच्छति?Show solution
उत्तर: पिता पुत्राय बाल्ये विद्याधनम् यच्छति।
(पिता पुत्र को बाल्यकाल में विद्यारूपी धन देता है।)
1(ख)विमूढधीः कीदृशीं वाचं परित्यजति?Show solution
(मूर्ख व्यक्ति धर्म देने वाली — सत्य और मधुर — वाणी को छोड़ देता है।)
1(ग)अस्मिन् लोके के एव चक्षुष्मन्तः प्रकीर्तिताः?Show solution
(इस संसार में विद्वान् लोग ही नेत्रवान् (चक्षुष्मान्) कहे गए हैं।)
1(घ)प्राणेभ्योऽपि कः रक्षणीयः?Show solution
(प्राणों से भी बढ़कर सदाचार की रक्षा करनी चाहिए।)
1(ङ)आत्मनः श्रेयः इच्छन् नरः कीदृशं कर्म न कुर्यात्?Show solution
(अपना कल्याण चाहने वाला मनुष्य दूसरों का अहित करने वाला कर्म न करे।)
1(च)वाचि का भवेत्?Show solution
(वाणी में चतुरता / कुशलता होनी चाहिए।)
2(क)संसारे विद्वांसः ज्ञानचक्षुभिः नेत्रवन्तः कथ्यन्ते। (स्थूलपद के आधार पर प्रश्न बनाइए)Show solution
निर्मित प्रश्न: संसारे के ज्ञानचक्षुभिः नेत्रवन्तः कथ्यन्ते?
2(ख)जनकेन सुताय शैशवे विद्याधनं दीयते। (स्थूलपद के आधार पर प्रश्न बनाइए)Show solution
निर्मित प्रश्न: जनकेन कस्मै शैशवे विद्याधनं दीयते?
2(ग)तत्त्वार्थस्य निर्णयः विवेकेन कर्तुं शक्यः। (स्थूलपद के आधार पर प्रश्न बनाइए)Show solution
निर्मित प्रश्न: तत्त्वार्थस्य निर्णयः केन कर्तुं शक्यः?
2(घ)धैर्यवान् लोके परिभवं न प्राप्नोति। (स्थूलपद के आधार पर प्रश्न बनाइए)Show solution
निर्मित प्रश्न: कः लोके परिभवं न प्राप्नोति?
2(ङ)आत्मकल्याणम् इच्छन् नरः परेषाम् अनिष्टं न कुर्यात्। (स्थूलपद के आधार पर प्रश्न बनाइए)Show solution
निर्मित प्रश्न: आत्मकल्याणम् इच्छन् नरः किम् न कुर्यात्?
3(क)पाठात् चित्वा अधोलिखित श्लोक का अन्वय उचित पदक्रम से पूर्ण कीजिए — पिता --- बाल्ये महत् विद्याधनं यच्छति, अस्य पिता किं तप: तेपे इत्युक्ति: ---Show solution
पिता पुत्राय बाल्ये महत् विद्याधनं यच्छति, अस्य पिता किं तपः तेपे इत्युक्तिः श्लाघ्या।
भावार्थ: पिता पुत्र को बाल्यकाल में महान् विद्यारूपी धन देता है। (ऐसे पुत्र को देखकर लोग कहते हैं कि) 'इसके पिता ने क्या तप किया होगा!' — यह प्रशंसनीय उक्ति है।
3(ख)येन --- यत् प्रोक्तं तस्य तत्त्वार्थनिर्णयः येन कर्तु --- भवेत्, सः --- इति ---।Show solution
येन केनापि यत् प्रोक्तं तस्य तत्त्वार्थनिर्णयः येन कर्तुं शक्यं भवेत्, सः विवेकी इति उच्यते।
भावार्थ: किसी के द्वारा जो भी कहा गया हो, उसके तत्त्व और अर्थ का निर्णय करने में जो समर्थ हो, वह विवेकी कहलाता है।
3(ग)य आत्मनः श्रेयः --- सुखानि च इच्छति, परेभ्यः अहितं --- कदापि च न ---।Show solution
यः आत्मनः श्रेयः प्रभूतानि सुखानि च इच्छति, परेभ्यः अहितं कर्म कदापि च न कुर्यात्।
भावार्थ: जो मनुष्य अपना कल्याण और अनेक सुख चाहता है, वह दूसरों का अहित करने वाला कार्य कभी न करे।
4-क(क)श्लोक संख्या 3 के आधार पर — धर्मप्रदां वाचं कः त्यजति?Show solution
(धर्म देने वाली वाणी को मूर्ख व्यक्ति छोड़ देता है।)
4-क(ख)श्लोक संख्या 3 के आधार पर — मूढः पुरुषः कां वाणीं वदति?Show solution
(मूर्ख पुरुष कठोर / अप्रिय वाणी बोलता है।)
4-क(ग)श्लोक संख्या 3 के आधार पर — मन्दमतिः कीदृशं फलं खादति?Show solution
(मन्दबुद्धि व्यक्ति कच्चा फल खाता है — अर्थात् पके (सत्य-मधुर) वचन को छोड़कर कच्चे (कठोर) वचन का सेवन करता है।)
4-ख(क)श्लोक संख्या 7 के आधार पर — कियन्ति सुखानि इच्छति?Show solution
(वह अत्यधिक सुखों की इच्छा करता है।)
4-ख(ख)श्लोक संख्या 7 के आधार पर — सः कदापि किं न कुर्यात्?Show solution
(वह कभी भी दूसरों का अहित करने वाला कार्य न करे।)
4-ख(ग)श्लोक संख्या 7 के आधार पर — सः केभ्यः अहितं न कुर्यात्?Show solution
(वह दूसरे लोगों का अहित न करे।)
5(क)'विद्याधनं महत्' — इस कथन के समक्ष मञ्जूषा से तद्भावात्मक सूक्ति लिखिए।Show solution
तद्भावात्मक सूक्ति: विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्।
अथवा: विद्याधनं धनं श्रेष्ठं तन्मूलमितरद्धनम्।
भावार्थ: विद्यारूपी धन सभी धनों में प्रधान है; अन्य सभी धनों का मूल विद्याधन ही है।
5(ख)'आचारः प्रथमो धर्मः' — इस कथन के समक्ष मञ्जूषा से तद्भावात्मक सूक्ति लिखिए।Show solution
तद्भावात्मक सूक्ति: आचारप्रभवो धर्मः सन्तश्चाचारलक्षणाः।
अथवा: आचारेण तु संयुक्तः सम्पूर्णफलभाग् भवेत्।
भावार्थ: धर्म का उद्गम आचरण से होता है; सज्जन पुरुष आचरण से ही पहचाने जाते हैं।
5(ग)'चित्ते वाचि च अवक्रता एव समत्वम्' — इस कथन के समक्ष मञ्जूषा से तद्भावात्मक सूक्ति लिखिए।Show solution
तद्भावात्मक सूक्ति: मनसि एकं वचसि एकं कर्मणि एकं महात्मनाम्।
भावार्थ: महात्माओं के मन में एक, वचन में एक और कर्म में एक (समानता) होती है — यही सच्चा समत्व है।
6(अ)(क)'पक्वः' का विलोम शब्द चुनिए — (परिपक्वः, अपक्वः, क्वथितः)Show solution
(पक्व = पका हुआ; अपक्व = कच्चा — ये परस्पर विलोम हैं।)
6(अ)(ख)'विमूढधीः' का विलोम शब्द चुनिए — (सुधीः, निधिः, मन्दधीः)Show solution
(विमूढधीः = मन्दबुद्धि; सुधीः = सुबुद्धि / विद्वान् — ये परस्पर विलोम हैं।)
6(अ)(ग)'कातरः' का विलोम शब्द चुनिए — (अकरुणः, अधीरः, अकातरः)Show solution
(कातर = कायर / भयभीत; अकातर = निर्भय / धैर्यवान् — ये परस्पर विलोम हैं।)
6(अ)(घ)'कृतज्ञता' का विलोम शब्द चुनिए — (कृपणता, कृतघ्नता, कातरता)Show solution
(कृतज्ञता = उपकार मानना; कृतघ्नता = उपकार न मानना — ये परस्पर विलोम हैं।)
6(अ)(ङ)'आलस्यम्' का विलोम शब्द चुनिए — (उद्विग्नता, विलासिता, उद्योगः)Show solution
(आलस्य = सुस्ती; उद्योग = परिश्रम / उद्यम — ये परस्पर विलोम हैं।)
6(अ)(च)'परुषा' का विलोम शब्द चुनिए — (पौरुषी, कोमला, कठोरा)Show solution
(परुषा = कठोर / कर्कश; कोमला = मृदु / मधुर — ये परस्पर विलोम हैं।)
6(आ)(क)'प्रभूतम्' के तीन समानार्थक शब्द शब्द-मञ्जूषा से लिखिए।Show solution
तीन समानार्थक शब्द (मञ्जूषा से):
(तीनों का अर्थ है — अत्यधिक / बहुत।)
6(आ)(ख)'श्रेयः' के तीन समानार्थक शब्द शब्द-मञ्जूषा से लिखिए।Show solution
तीन समानार्थक शब्द (मञ्जूषा से):
(तीनों का अर्थ है — कल्याण / मंगल / शुभ।)
7(क)विग्रह: 'तत्त्वार्थस्य निर्णयः' — समस्तपद और समास का नाम लिखिए।Show solution
समस्तपद:
समास: षष्ठी तत्पुरुषः
(षष्ठी विभक्ति 'स्य' का लोप होकर समास बना।)
7(ख)विग्रह: 'वाचि पटुः' — समस्तपद और समास का नाम लिखिए।Show solution
समस्तपद:
समास: सप्तमी तत्पुरुषः
(सप्तमी विभक्ति 'वाचि' का लोप होकर समास बना।)
7(ग)विग्रह: 'धर्मं प्रददाति इति (ताम्)' — समस्तपद और समास का नाम लिखिए।Show solution
समस्तपद:
समास: उपपद तत्पुरुषः
(क्रिया 'प्रददाति' उपपद है; 'धर्म' उसका कर्म है।)
7(घ)विग्रह: 'न कातरः' — समस्तपद और समास का नाम लिखिए।Show solution
समस्तपद:
समास: नञ् तत्पुरुषः
('न' के स्थान पर 'अ' आकर समास बना।)
7(ङ)विग्रह: 'न हितम्' — समस्तपद और समास का नाम लिखिए।Show solution
समस्तपद:
समास: नञ् तत्पुरुषः
('न' के स्थान पर 'अ' आकर समास बना।)
7(च)विग्रह: 'महान् आत्मा येषाम्' — समस्तपद और समास का नाम लिखिए।Show solution
समस्तपद:
समास: बहुव्रीहिः
(यहाँ 'महान् आत्मा' किसी अन्य (येषाम्) का विशेषण है, अतः बहुव्रीहि समास है।)
7(छ)विग्रह: 'विमूढा धीः यस्य सः' — समस्तपद और समास का नाम लिखिए।Show solution
समस्तपद:
समास: बहुव्रीहिः
(यहाँ 'विमूढा धीः' किसी अन्य (यस्य) का विशेषण है, अतः बहुव्रीहि समास है।)
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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